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मेरठ के पास छिपा है फैमिली वेकेशन का शानदार स्पॉट, बच्चों से...

Last Updated:May 19, 2026, 12:24 IST अगर आप समर वेकेशन में परिवार और बच्चों के साथ किसी ऐसी जगह घूमने का प्लान बना रहे हैं, जहां इतिहास, अध्यात्म, मनोरंजन और प्रकृति का अनोखा संगम देखने को मिले, तो मेरठ के पास स्थित ऐतिहासिक हस्तिनापुर आपके लिए शानदार विकल्प साबित हो सकता है. महाभारत कालीन विरासत से जुड़ा यह स्थान आज भी पांडव टीला, जंबूद्वीप, ध्यान मंदिर और नेचर ट्रेन जैसी आकर्षक जगहों के कारण पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहा है. ऐतिहासिक हस्तिनापुर, जिसे महाभारत कालीन धरती के रूप में विश्वभर में विशेष पहचान मिली है, आज भी अपने गौरवशाली अतीत की झलक समेटे हुए है. यहां मौजूद प्राचीन मंदिर और टीलें हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता और स्मृतियों को जीवंत कर देते हैं. इसी ऐतिहासिक विरासत का आकर्षक उदाहरण पांडव टीला भी है, जहां पहुंचकर पर्यटक और श्रद्धालु उस युग की अनुभूति कर सकते हैं, जब महाभारत की कथाएं इसी धरती पर आकार ले रही थीं. बताते चलें कि आप सभी अगर हस्तिनापुर घूमने जाते हैं तो एक दिन में आराम से यहां की प्रमुख जगहों को एक्सप्लोर कर वापस लौट सकते हैं. वहीं अगर आप रुकना चाहते हैं तो यहां विभिन्न धर्मशालाओं की भी सुविधा उपलब्ध है, जहां बहुत कम शुल्क में ठहरने की व्यवस्था मिल जाती है. यहां घूमने के बाद प्रकृति के बीच जो सुकून मिलता है, वह किसी हिल स्टेशन से कम नहीं लगता. गंगा के मैदानों में बसा होने के बावजूद यहां की हरियाली और शांत वातावरण गर्मी में भी राहत का एहसास कराता है. वहीं दूसरी ओर हस्तिनापुर में जैन समाज द्वारा विकसित “जंबूद्वीप” एक प्रमुख आकर्षण है, जो धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां का वातावरण और संरचना आगंतुकों को प्राचीन जैन मान्यताओं की झलक कराता है. इसके अलावा यहां “हंसी की लोटपोट हस्तिनापुर जंक्शन” नाम से एक मनोरंजन ट्रेन भी मौजूद है, जिसमें परिवार के साथ सफर करते समय अलग-अलग आकार और मजेदार दृश्य देखने को मिलते हैं, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को खूब मनोरंजन प्रदान करते हैं. इस दौरान लोग तनाव भूलकर हंसी-खुशी के माहौल का आनंद लेते हैं. जंबूद्वीप परिसर में विभिन्न प्रकार के झूले और मनोरंजन साधन भी उपलब्ध हैं, जो इस स्थान को धार्मिक के साथ-साथ एक बेहतरीन फैमिली डेस्टिनेशन भी बनाते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google वहीं दूसरी ओर पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए वन विभाग की ओर से यहां नेचर ट्रेन भी विकसित की जा रही है. इस ट्रेन में सफर करते हुए लोग प्राकृतिक वातावरण और हरियाली के खूबसूरत नजारों का आनंद ले सकेंगे. यहां विभिन्न प्रकार के पशु-पक्षियों की आकृतियों वाले स्टैच्यू भी बनाए जा रहे हैं, ताकि वन क्षेत्र में रहने वाले जीव-जंतुओं के बारे में लोगों को बेहतर जानकारी मिल सके. इसके साथ ही पर्यटकों के लिए झूले और झोपड़ियां भी विकसित की जा रही हैं, जिससे यह स्थान बच्चों और परिवारों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा. यहां आप बच्चों के साथ ट्रेन और झूलों का भरपूर आनंद ले सकते हैं. परिसर में मेले जैसे कई आकर्षक झूले लगाए गए हैं, जिनका लुत्फ उठाने के लिए मात्र ₹30 प्रति व्यक्ति का शुल्क देना होता है. ऐसे में बच्चे यहां खूब मस्ती करते हैं और परिवार के साथ यादगार पल बिताते हैं. इसके अलावा यहां जैन समाज से जुड़े कई भव्य मंदिर भी मौजूद हैं. इनमें सबसे खास ध्यान मंदिर माना जाता है, जहां का शांत और आध्यात्मिक वातावरण लोगों को मानसिक सुकून देता है. यहां बैठकर ध्यान लगाने से मन एकाग्र होता है और तनाव भी काफी हद तक दूर हो जाता है. समर वेकेशन में अगर आप भी बच्चों के साथ घूमने का प्लान बना रहे हैं और ऐसी जगह की तलाश में हैं, जहां सैर के साथ प्रकृति का खूबसूरत नजारा भी देखने को मिले, तो मेरठ से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित ऐतिहासिक हस्तिनापुर आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है. यहां आप गर्मी के बीच भी प्राकृतिक वातावरण और हरियाली के बीच सुकून भरे पल बिताते हुए छुट्टियों का भरपूर आनंद ले सकते हैं. पांडव टीले के नीचे महाभारत कालीन महलों के अवशेष होने की मान्यता है. यही वजह है कि समय-समय पर पुरातत्व विभाग यहां खुदाई कर विभिन्न ऐतिहासिक वस्तुओं को संरक्षित करने का कार्य करता रहता है. वहीं अब इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से भी काफी विकसित किया गया है. ऐसे में अगर आप परिवार के साथ यहां घूमने आते हैं, तो प्राकृतिक वातावरण और हरियाली के बीच सुकून भरे पल बिताने का आनंद ले सकते हैं. इसके साथ ही यहां सेल्फी लेने के लिए भी शानदार स्थान बनाए गए हैं. पेड़ों और आसपास के क्षेत्र का सुंदर तरीके से सौंदर्यीकरण किया गया है, जो पर्यटकों को काफी आकर्षित करता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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एक बूंद की कीमत हजारों… 20 लाख रुपये लीटर वाला इत्र! जयपुर...

Jaipur Famous Perfume: जयपुर के ट्रिपोलिया बाजार की डी आर अरोमा दुकान अपने खास और महंगे इत्रों के लिए चर्चा में है. यहां खस, गुलाब, चंदन और उद जैसी वैरायटी लाखों रुपये प्रति लीटर तक बिकती हैं. कन्नौज के पारंपरिक फार्मूले से तैयार होने वाले ये इत्र दुबई, लंदन और अमेरिका तक पसंद किए जा रहे हैं. Source link

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कौन हैं ब्रिटेन में सबसे कम उम्र में मेयर बना हरियाणा का...

Last Updated:May 19, 2026, 10:15 IST UK Youngest Mayor Tushar Kumar Story: पूर्वी इंग्लैंड की स्थानीय परिषद का प्रतिनिधित्व करने वाले 23 साल के युवक ने ब्रिटेन में सबसे कम उम्र का भारतीय मूल का मेयर बनकर इतिहास रच दिया है. तुषार मूल रूप से हरियाणा के रोहतक के रहने वाले हैं और वह 13 साल पहले विदेश चले गए थे. उनके माता पिता भी वहीं पर रहते हैं. ख़बरें फटाफट तुषार कुमार ने पिछले हफ्ते एक समारोह में एल्स्ट्री और बोरेहमवुड के मेयर का पद संभाला. रोहतक. हरियाणा के रोहतक में जन्में 23 साल के छोरे ने कमाल कर दिया. पूर्वी इंग्लैंड की एक स्थानीय परिषद का प्रतिनिधित्व करने वाले 23 साल के युवक ने ब्रिटेन में सबसे कम उम्र का भारतीय मूल का मेयर बनकर इतिहास रच दिया है. जानकारी के अनुसार, किंग्स कॉलेज लंदन के राजनीति विज्ञान के पूर्व छात्र तुषार कुमार ने पिछले हफ्ते एक समारोह में एल्स्ट्री और बोरेहमवुड के मेयर का पद संभाला. लेबर पार्टी के पार्षद कुमार 2023 में एल्स्ट्री और बोरेहमवुड नगर परिषद में शामिल हुए थे और पहले डिप्टी मेयर के तौर पर सेवा दे चुके हैं. समारोह के बाद जारी बयान में तुषार कुमार ने कहा, ‘कल रात एल्स्ट्री और बोरेहमवुड के महापौर के रूप में आधिकारिक तौर पर पद संभालना मेरे लिए सम्मान की बात है और 23 साल की उम्र में, मैं ब्रिटेन के इतिहास में सबसे कम उम्र का भारतीय मूल का महापौर बना हूं.’ तुषार कुमार का मानना है कि ‘असली बदलाव समुदाय स्तर पर शुरू होता है.’ उन्होंने कहा, ‘मुझे स्वयंसेवा करना, समावेशी सामुदायिक कार्यक्रमों का आयोजन करना और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच की पैरोकारी करना पसंद है.’ तुषार इससे पहले डिप्टी मेयर भी रहे हैं. जानकारी के अनुसार, तुषार जब 10 साल के थे तो हरियाणा के रोहतक से यहां पर आ गए थे. वह 2023 में पार्षद चुने गए थे. तुषार के माता पिता 13 साल पहले रोहतक से यूके शिफ्ट हुए थे और वह शिक्षा के क्षेत्र में काम करते हैं. लेबर पार्टी के काउंसिलर तुषार ने एक वोट से अपने विरोधी को हराया था. इस सीट पर कई साल से कन्जर्वेटिव पार्टी का कब्जा था. तुषार की मां परवीन रानी ने भी हर्टसमेयर बोरो काउंसिल में पार्षद का चुनाव जीता था और वह भी बाद में डिप्टी मेयर बनी थी. तुषार ने अपनी मां को प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि वह मेयर के साथ साथ अपनी हायर स्टडी भी जारी रखेंगे. तुषार के माता पिता 13 साल पहले रोहतक से यूके शिफ्ट हुए थे. (फोटो-तुषार की सोशल मीडिया से) वह कहते हैं कि वह अक्सर अपने देश भारत जाते रहते हैं और वहां पर यूनिवर्सिटी में लेक्चर देते हैं. मैं भारत से हमेशा कनेक्टिड रहता हूं. मेरी मां ने मुझे सिखाया है कि हमेशा अपनी जड़ों यानी संस्कृति और हेरिटेज से जुड़े रहो. वह कहते हैं कि उन्होंने परिषद में पहली बार दिवाली सेलिब्रेशन फंक्शन का आयोजन किया था और अब यह हर साल मनाया जाता है. गौरतलब है कि तुषार के माता पिता और पूर्वजों का हरियाणा में कोई राजनितिक इतिहास नहीं है. वह कहते हैं कि भारत में राजनीति एक मुश्किल बात है और इसमें उतरने के लिए काफी चुनौतियां भी पेश आती है. इसके मुकाबले यूके में राजनीति में चींजे ज्यादा आसान हैं और यहां पर ज्यादा मौके हैं. About the Author Vinod Kumar Katwal Vinod Kumar Katwal, a Season journalist with 14 years of experience across print and digital media. I have worked with some of India’s most respected news organizations, including Dainik Bhaskar, IANS, Punjab K…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Rohtak,Rohtak,Haryana Source link

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Neet news| NEET UG Paper Leak LIVE: नीट पेपर लीक में बड़ा...

Last Updated:May 19, 2026, 09:16 IST NEET UG Paper Leak LIVE: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में जांच अब और तेज हो गई है. महाराष्ट्र के बड़े कोचिंग नेटवर्क रेनूकई (Renukai Career Centre,RCC) के फाउंडर शिवराज मोटेगांवकर को कोर्ट ने 9 दिन की CBI कस्टडी…और पढ़ें NEET UG Paper Leak LIVE, NEET, neet exam, neet ug, Neet news: नीट पेपर लीक मामले में क्‍या है लेटेस्‍ट अपडेट? NEET UG Paper Leak LIVE: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामला लगातार बड़ा होता जा रहा है. CBI अब इस केस में बड़े कोचिंग नेटवर्क, मेडिकल छात्रों और NTA से जुड़े लोगों तक पहुंच चुकी है. महाराष्ट्र के लातूर से गिरफ्तार Renukai Career Centre (RCC) के फाउंडर शिवराज मोटेगांवकर को कोर्ट ने 9 दिन की CBI कस्टडी में भेज दिया है. वहीं पुणे की बॉटनी लेक्चरर मनीषा मंधारे को कॉलेज ने सस्पेंड कर दिया है. इस बीच जयपुर के SMS मेडिकल कॉलेज की छात्रा पलक बिवाल के गायब होने की खबर ने जांच को नया मोड़ दे दिया है. संसद की समिति ने NTA प्रमुख को भी तलब किया है और अब NEET परीक्षा को CBT मोड में कराने की मांग तेज हो गई है. NEET पेपर लीक मामले से जुड़ी हर बड़ी अपडेट हम आपको यहां लगातार बता रहे हैं…. देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 का पेपर लीक मामला अब सिर्फ एक एग्जाम घोटाला नहीं, बल्कि देशभर में फैले बड़े नेटवर्क की जांच बन चुका है. CBI लगातार गिरफ्तारियां कर रही है.नए नाम सामने आ रहे हैं और जांच का दायरा कोचिंग सेंटरों से लेकर मेडिकल कॉलेजों और NTA से जुड़े लोगों तक पहुंच गया है. महाराष्ट्र के बड़े कोचिंग नेटवर्क RCC के फाउंडर शिवराज मोटेगांवकर की गिरफ्तारी, पुणे की लेक्चरर मनीषा मंधारे का सस्पेंशन, राजस्थान में मेडिकल छात्रों के गायब होने की खबर और संसद की समिति द्वारा NTA प्रमुख को तलब किए जाने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है. इसी बीच केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी में दिख रही है और NEET को CBT मोड में कराने की मांग भी तेज हो गई है. NEET-UG 2026 पेपर लीक केस: अब तक क्या-क्या हुआ? देशभर में लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा NEET-UG 2026 पेपर लीक मामला हर दिन नए खुलासे कर रहा है. CBI, राजस्थान SOG और दूसरी एजेंसियां लगातार जांच में जुटी हैं और अब इस केस में कई बड़े नाम सामने आने लगे हैं.इस मामले में सबसे बड़ा ताजा एक्शन महाराष्ट्र के लातूर में देखने को मिला, जहां CBI ने Renukai Career Centre (RCC) के संस्थापक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया.दिल्ली की विशेष CBI अदालत के जज अजय गुप्ता ने मोटेगांवकर को 9 दिन की CBI कस्टडी में भेज दिया. जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि मामला अभी शुरुआती और बेहद अहम चरण में है. CBI का कहना है कि मोटेगांवकर से पूछताछ के जरिए दूसरे आरोपियों की पहचान करनी है और सबूतों से छेड़छाड़ रोकनी है. NEET UG Paper Leak LIVE: पुणे की लेक्चरर मनीषा मंधारे सस्पेंड NEET UG Paper Leak LIVE: NEET पेपर लीक केस में गिरफ्तार पुणे की बॉटनी लेक्चरर मनीषा गुरुनाथ मंधारे पर भी शिकंजा कसता जा रहा है.पुणे के मॉर्डन कॉलेज ऑफ आर्टस साइंस एंड कॉमर्स ने उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. कॉलेज ने बयान जारी कर कहा कि मंधारे 2002 से जूनियर कॉलेज सेक्शन में कार्यरत थीं और पिछले 24 साल से 11वीं-12वीं के छात्रों को बायोलॉजी पढ़ा रही थीं. NEET UG Paper Leak LIVE: जांच में क्‍या सामने आया? NEET UG Paper Leak LIVE: जांच एजेंसियों के मुताबिक पलक के चाचा मांगीलाल बिवाल और चचेरे भाई विकास बिवाल का नाम कथित पेपर लीक नेटवर्क से जुड़ा हुआ है.मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने विकास बिवाल को लेकर भी कई अहम बातें सामने रखी हैं. प्रशासन के मुताबिक उसकी कॉलेज में उपस्थिति काफी कम थी और पढ़ाई में प्रदर्शन भी कमजोर बताया गया. NEET UG Paper Leak LIVE:जयपुर के मेडिकल कॉलेज से छात्रा गायब NEET UG Paper Leak LIVE: इस बीच राजस्थान से भी बड़ा अपडेट सामने आया. जयपुर के प्रतिष्ठित SMS मेडिकल कॉलेज की MBBS फर्स्ट ईयर छात्रा पलक बिवाल के कॉलेज से गायब होने की खबर ने जांच को और गंभीर बना दिया है.इससे पहले उसी परिवार की प्रगति बिवाल भी छुट्टी लेकर कॉलेज से गायब बताई गई थीं. पलक का परिवार पहले से ही CBI जांच के दायरे में है. NEET UG Paper Leak LIVE: कौन हैं शिवराज मोटेगांवकर? NEET UG Paper Leak LIVE: शिवराज मोटेगांवकर महाराष्ट्र के चर्चित कोचिंग कारोबारी माने जाते हैं. उनका Renukai Career Centre यानी RCC NEET और JEE की तैयारी कराने वाले बड़े नेटवर्क में गिना जाता है.बताया जा रहा है कि RCC की कुल 9 शाखाएं हैं और बड़ी संख्या में छात्र यहां मेडिकल एंट्रेंस की तैयारी करते हैं. जांच एजेंसियों को शक है कि पेपर लीक नेटवर्क में कोचिंग सर्किट की बड़ी भूमिका हो सकती है. NEET UG Paper Leak LIVE:सीबीआई कर रही जांच NEET UG Paper Leak LIVE: CBI को शक है कि लीक हुए पेपर की हस्तलिखित कॉपियां किन-किन लोगों तक पहुंचीं, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है. जांच के लिए RCC के संस्थापक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को पुणे समेत महाराष्ट्र के कई इलाकों में ले जाया जा सकता है. Source link

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‘साझेदारी ही समाधान’, पीएम मोदी और स्वीडिश प्रधानमंत्री ने ग्लोबल संकट पर...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने वैश्विक चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक अस्थिरता को लेकर एक संयुक्त लेख लिखा है. इस लेख में दोनों नेताओं ने दुनिया से अपील की है कि मौजूदा दौर में देशों को अलग-थलग होने के बजाय साझेदारी और सहयोग का रास्ता अपनाना चाहिए. दोनों प्रधानमंत्रियों ने कहा कि दुनिया इस समय भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा संकट और आर्थिक अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है. ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षीय व्यवस्था पहले से ज्यादा जरूरी हो गई है. उन्होंने जोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती का समाधान कोई देश अकेले नहीं निकाल सकता. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वीडन के पीएम ने अपने लेख में कहा, ‘ऐसे वक्त में जब संयुक्त राष्ट्र अपनी 80वीं वर्षगांठ मना रहा है, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षवाद का महत्व और भी अधिक स्पष्ट हो गया है. साथ ही, वैश्विक शासन संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता को अब नज़रअंदाज़ करना असंभव हो गया है.’ ‘विकास और पर्यावरण साथ-साथ चल सकते हैं’ दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने संयुक्त लेख में लिखा कि क्लाइमेट एक्शन को विकास से अलग नहीं किया जा सकता. दुनिया के करोड़ों लोग अब भी बेहतर जीवन, रोजगार, ऊर्जा और आधुनिक सुविधाओं की उम्मीद रखते हैं. ऐसे में आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलना ही आज की सबसे बड़ी चुनौती है. पीएम मोदी ने इस लेख में भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और साथ ही बड़े स्तर पर रिन्यूएबल एनर्जी ट्रांजिशन भी कर रहा है. भारत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने और 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य रखा है. भारत ने दुनिया को दिए कई ग्लोबल प्लेटफॉर्म पीएम मोदी ने लिखा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए कई अहम पहल शुरू की हैं. इनमें इंटरनेशनल सोलर अलायंस, ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस और मिशन LiFE जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं. दोनों नेताओं ने कहा कि भारत ग्लोबल साउथ की जिम्मेदार आवाज बनकर उभरा है. वहीं स्वीडन की तारीफ करते हुए कहा गया कि उसने यूरोप में जलवायु कार्रवाई में अग्रणी भूमिका निभाई है. स्वीडन का बिजली ग्रिड करीब 98 प्रतिशत फॉसिल-फ्यूल फ्री हो चुका है और 1990 के बाद से वहां उत्सर्जन में एक-तिहाई से ज्यादा कमी आई है, जबकि अर्थव्यवस्था लगभग दोगुनी हो गई. ‘LeadIT’ को बताया भारत-स्वीडन साझेदारी का बड़ा उदाहरण दोनों प्रधानमंत्रियों ने 2019 में भारत और स्वीडन द्वारा संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से शुरू किए गए ‘लीडरशिप ग्रुप फॉर इंडस्ट्री ट्रांजिशन’ यानी LeadIT का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस पहल ने इंडस्ट्रियल डिकार्बोनाइजेशन और क्लीन इंडस्ट्री को वैश्विक बहस के केंद्र में लाने का काम किया है. उन्होंने कहा कि अब LeadIT को सिर्फ चर्चा तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे बड़े पैमाने पर लागू करने की जरूरत है. इसके जरिए टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप, क्लीन एनर्जी सप्लाई चेन, इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स और सस्टेनेबल फाइनेंस को बढ़ावा दिया जा सकता है. ‘हर देश को तकनीक अपनाने का मौका मिलना चाहिए’ लेख में दोनों नेताओं ने कहा कि हर देश को अपनी जरूरतों के हिसाब से तकनीक अपनाने और उसे बड़े स्तर पर लागू करने का मौका मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि कार्बन उत्सर्जन सीमाओं को नहीं मानता, इसलिए इसके समाधान भी वैश्विक होने चाहिए. उन्होंने 2030 तक इस वैश्विक गठबंधन को और मजबूत करने की अपील की और नॉर्डिक देशों समेत दूसरे देशों को भी इसमें शामिल होने का न्योता दिया. ‘टकराव नहीं, सहयोग से बनेगा भविष्य’ प्रधानमंत्री मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री ने अपने संयुक्त लेख के अंत में साफ संदेश दिया कि दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों का समाधान सहयोग में है, टकराव में नहीं. उन्होंने कहा कि भारत और स्वीडन मिलकर एक ऐसे भविष्य की दिशा में काम कर रहे हैं, जहां आर्थिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक साझेदारी साथ-साथ आगे बढ़ें. Source link

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घंटाघर से लेकर कलेक्ट्रेट तक… मिर्जापुर की पहचान हैं ये ऐतिहासिक स्थल,...

Last Updated:May 19, 2026, 07:11 IST Mirzapur News : मिर्जापुर जिले में कुछ ऐसे स्थल है जो बेहद ही खास है. इनमें कलेक्ट्रेट भवन, रेलवे स्टेशन, बीएलजे इंटरमीडिएट कॉलेज और घंटाघर है. इनका निर्माण अंग्रेजी शासन काल में हुआ था.  मिर्जापुर जिले का कलेक्ट्रेट का निर्माण अंग्रेजों के शासनकाल में हुआ था.  इसाक निर्माण 1835 में हुआ था, यहां आज इसी भवन में कलेक्ट्रेट चलता है.  मिर्जापुर : उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में अंग्रेजों के द्वारा कई ऐसे ऐतिहासिक का निर्माण कराया गया है, जो मिर्जापुर जिले के प्राचीन स्थलों में से एक है. अंग्रेजों के शासनकाल में निर्मित यह भवन आज भी बेहद खास है, जिनकी पहचान भी मिर्जापुर जिले से होती है. खास बात है कि सैकड़ों सालों के बीत जाने के बावजूद भी इनकी चमक कम नहीं हुई है. मिर्जापुर जिले में अंग्रेजों के शासनकाल में घंटाघर का निर्माण हुआ था. घंटाघर शहर के बीच में स्थित है. यह ऐतिहासिक भवन है, यहां पर नक्काशी दर पत्थरों का प्रयोग किया गया है, जो की देखने में बेहद ही आकर्षक नजर आते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google घंटाघर के निर्माण में लाल बलुआ पत्थरों का प्रयोग किया गया है, जो इसकी सुंदरता को कई गुना तक बढ़ा देता है. इसमें एक घंटा और घड़ी लगाया गया है, जिससे टाइम का पता चलता है. पुराने समय में यह घड़ी शहर के लोगों का टाइम जानने का एकमात्र साधन था. अंग्रेजों के शासनकाल में बने कलेक्ट्रेट में डीएम, एडीएम सहित कई विभागों का संचालन होता है. संयुक्त कार्यालय में जिलेभर के अधिकारी बैठते हैं. मिर्जापुर जिले की पहचान भी इन्हीं ऐतिहासिक भवनों से होती है. मिर्जापुर के पुराने स्टेशन को माल गोदाम के तौर पर विकसित किया गया है, जहां पर खाद सहित अन्य खाद्यान्न सामग्री भी स्टोर किए जाते हैं, यहां से ट्रकों के माध्यम से इन्हें दूसरे स्थान तक ले जाया जाता है. मिर्जापुर शहर में स्थित रेलवे स्टेशन का निर्माण भी अंग्रेजों के शासनकाल में कराया गया था. यह स्टेशन दिल्ली-हावड़ा रूट के बीच में बनाया गया था, जो आज भी ऐतिहासिक धरोहर के तौर पर मौजूद है. स्टेशन का विकास तो किया गया, लेकिन कुछ पुराने हिस्से को आज भी ऐसे ही छोड़ गया है. मिर्जापुर जिले की सबसे प्राचीन विद्यालयों में एक बीएलजे को अंग्रेजों के शासनकाल में निर्मित किया गया था. अंग्रेजी शासको के द्वारा लोगों की पढ़ाई के मद्देनजर स्कूल का निर्माण किया गया था. सबसे पहले स्कूल लंदन मिशन के नाम से चला था. समय में परिवर्तन होने के साथ ही स्कूल का नाम भी बदल दिया गया. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। उत्तर प्रदेश की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें| Source link

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ब्रह्मोस, आकाश-NG, प्रलय की धार और होगी तेज, थरथर कांपेंगे चीन-पाकिस्‍तान –...

होमताजा खबरदेश ब्रह्मोस, आकाश-NG, प्रलय की धार और होगी तेज, थरथर कांपेंगे चीन-पाकिस्‍तान Last Updated:May 19, 2026, 06:05 IST Next-Generation Missile Technology: मॉडर्न एज वॉर में चार चीजें काफी अहम हो गई हैं – फाइटर जेट, ड्रोन, मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्‍टम. जिस देश के पास इन चारों का एडवांस वर्जन है, वह दुनिया का सबसे ताकतवर देश है. अमेरिका और रूस जैसी महाशक्तियों को ईरान और यूक्रेन जैसे देशों ने ड्रोन की ताकत से परेशान कर रखा है. वहीं, विश्‍व की दोनों महाशक्तियां आधुनिक मिसाइल के जरिये व्‍यापक पैमाने पर तबाही मचाई है. भारत के रक्षा वैज्ञानिक अब ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं, जिससे स्‍वदेशी मिसाइल्‍स ज्‍यादा घातक बन जाएंगी. DRDO ऐसी टेक्‍नोलॉजी डेवलप की है, जिससे ब्रह्मोस, आकाश-NG, प्रलय जैसी मिसाइलें और ज्‍यादा घातक हो जाएंगी. (फाइल फोटो/Reuters) Next-Generation Missile Technology: भारत मिसाइल टेक्‍नोलॉजी के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है. अग्नि से लेकर ब्रह्मोस, प्रलय आदि इसके उदाहरण हैं. कम लागत वाली ड्रोन प्रणाली के वॉरगेम में आने के बाद अब मिसाइल को और भी अचूक बनाने पर फोकस किया जा रहा है. लंबी दूरी के साथ प्रिसिजन अटैक कैपेबेलिटी को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि दुश्‍मन बच न सके. पिछले दिनों ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने ब्रह्मोस से अटैक कर दुश्‍मन के संवदेनशील ठिकाने को निशाना बनाया था, जिसके बाद पाकिस्‍तान घुटने टेकते हुए शांति की भीख मांगने लगा था. ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल दुनिया की सबसे खतरनाक मिसाइलों में से एक है. अब भारत के रक्षा वैज्ञानिकों ने ऐसी टेक्‍नोलॉजी डेवलप की है, जिससे मिसाइलों की क्षमता काफी बढ़ जाएगी. ये टेक्‍नोलॉजी अभी दुनिया के गिनेचुने देशों के ही पास है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के वैज्ञानिकों की इस सफलता से ब्रह्मोस, प्रलय, आकाश-NG जैसे मिसाइल सिस्‍टम और भी घातक हो जाएंगे, जिससे दुश्‍मन थरथर कांपेंगे. हैदराबाद स्थित Defence Research and Development Organisation की प्रमुख प्रयोगशाला Defence Research and Development Laboratory ने अगली पीढ़ी की नेविगेशन और गाइडेंस इलेक्ट्रॉनिक्स प्रणाली विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है. यह अत्याधुनिक तकनीक भारतीय मिसाइल प्रणालियों की सटीकता, विश्वसनीयता और युद्धक्षमता को नई मजबूती देने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है. इस पहल को भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. ‘इंडियन डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, विकसित किया जा रहा यह इलेक्ट्रॉनिक्स पैकेज भविष्य की मिसाइल सिस्‍टम में बेहतर गाइडेंस और नेविगेशन क्षमता प्रदान करेगा. आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में मिसाइल की सटीकता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इससे लक्ष्य पर प्रभावी प्रहार सुनिश्चित होता है और अनावश्यक क्षति को कम किया जा सकता है. DRDL का उद्देश्य भारतीय मिसाइलों को ऐसे एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से लैस करना है, जो चुनौतीपूर्ण और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर वाले वातावरण में भी प्रभावी प्रदर्शन कर सकें. बढ़ेगी क्षमता इस परियोजना की एक प्रमुख विशेषता स्वदेशी तकनीक पर विशेष जोर है. यह पहल केंद्र सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के अनुरूप है, जिसके तहत रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम करने और घरेलू तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर बल दिया जा रहा है. बताया जा रहा है कि इस नई प्रणाली में उच्च विश्वसनीयता वाले स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक सिस्‍टम का उपयोग किया जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक, इस इलेक्ट्रॉनिक्स पैकेज में गैलियम नाइट्राइड (GaN) आधारित कंपोनेंट्स को शामिल किया जा सकता है. GaN तकनीक पारंपरिक सेमीकंडक्टर सामग्री की तुलना में अधिक ऊर्जा दक्षता, बेहतर थर्मल स्‍टेबिलिटी और अधिक टिकाऊ प्रदर्शन प्रदान करती है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के उपयोग से भारतीय मिसाइल प्रणालियों की कार्यक्षमता और प्रतिक्रिया क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा. DRDO मिसाइल के लिए ऐसा गाइडेंस सिस्‍टम डेवलप करने में जुटा है, जिससे एक्‍यूरेसी काफी बढ़ जाएगी. आकाश जैसी मिसाइलें भी इससे अचूक बन जाएंगी. (फाइल फोटो/Reuters) हाइपरसोनिक मिसाइलें होंगी और घातक परियोजना का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू एडवांस सीकर टेक्‍नोलॉजी का समावेश है. माना जा रहा है कि इसमें अत्याधुनिक रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) सीकर लगाए जाएंगे, जिनका परीक्षण पहले Akash NG जैसी प्रणालियों में सफलतापूर्वक किया जा चुका है. ये सीकर मिसाइलों को लक्ष्य को अधिक सटीकता से पहचानने और ट्रैक करने में सक्षम बनाएंगे, यहां तक कि इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर परिस्थितियों में भी. इससे हाई-वैल्‍यू वाले और गतिशील लक्ष्यों को निष्क्रिय करने की क्षमता मजबूत होगी. यह तकनीक भविष्य में विकसित की जा रही हाइपरसोनिक और लंबी दूरी की मिसाइल सिस्‍टम्‍स में भी उपयोग की जा सकती है. DRDL का मानना है कि नई पीढ़ी की मिसाइलों में गति, दूरी और सटीकता का संतुलन बनाना आने वाले समय की सामरिक आवश्यकता होगी. ऐसे में यह इलेक्ट्रॉनिक्स पैकेज भारतीय सशस्त्र बलों को रणनीतिक और सामरिक दोनों स्तरों पर अधिक प्रभावी क्षमता प्रदान करेगा. चीन-पाकिस्‍तान का काल वैश्विक रक्षा उद्योग में GaN आधारित इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत सीकर तकनीक को तेजी से अपनाया जा रहा है. भारत द्वारा इन तकनीकों का स्वदेशी विकास देश को उन्नत रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स विकसित करने वाले अग्रणी देशों की श्रेणी में ला सकता है. यह पहल Defence Research and Development Organisation की हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल, लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइल और क्वासी-बैलिस्टिक सिस्टम जैसी अन्य परियोजनाओं को भी तकनीकी मजबूती प्रदान करेगी. चीन-पाकिस्‍तान जैसे पड़ोसी देशों को देखते हुए भारत के लिए मॉडर्न डिफेंस टेक्‍नोलॉजी को अपनाना अनिवार्य है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्‍तान ब्रह्मोस की मार से इस कदर भयभीत हो गया था कि शांति वार्ता के लिए गुहार लगाने लगा था. ऐसे देशों को उसकी हद में रखने के लिए कटिंग एज टेक्‍नोलॉजी वाले वेपन सिस्‍टम का होना बहुत जरूरी है. About the Author Manish Kumar बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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Rajasthan 1 000 year old Sahasra Bahu narayan temples or Sasbahu Temples...

होमताजा खबरधर्म 1000 साल पुराना सहस्रबाहु मंदिर कैसे बन गया सास-बहू मंदिर? जानें असली वजह Last Updated:May 18, 2026, 20:36 IST Sahasra Bahu Narayan Temples: भारत में वैसे तो कई मंदिर हैं, जो अपने रहस्य और चमत्कार के लिए प्रसिद्ध हैं लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो सास-बहू की वजह से प्रसिद्ध हैं. भगवान नारायण को समर्पित यह मंदिर राजस्थान के उदयपुर में स्थित हैं. यह मंदिर परिसर ना सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि राजस्थान की प्राचीन वास्तुकला और कला को जीवंत रखने वाला एक जीता-जागता प्रमाण भी है. Sahastra Bahu Temples: देश-दुनिया में नारायण के दशावतार को समर्पित कई भव्य व प्राचीन मंदिर मिल जाएंगी, लेकिन राजस्थान के उदयपुर से मात्र 22 किलोमीटर दूर नागदा गांव में स्थित नारायण के ‘सहस्रबाहु’ अवतार को समर्पित एक ऐसा प्राचीन मंदिर है, जिसका नाम भी मजेदार है और हैरत में डालता है. ‘सास-बहू मंदिर’ ना सिर्फ अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अपने अनोखे नाम के कारण भी लोगों की जिज्ञासा का विषय बना हुआ है. मंदिर की दीवारों पर रामायण के दृश्यों, देवी-देवताओं और दिव्य प्राणियों की सुंदर नक्काशी देखते ही बनती है. एएसआई ने इस पूरे परिसर को संरक्षित स्मारक घोषित किया है और यहां 360 डिग्री वर्चुअल टूर की सुविधा भी उपलब्ध कराई है. 1000 साल पुराना सास-बहू मंदिरयह मंदिर भगवान विष्णु के सहस्रबाहु यानी हजार भुजाओं वाले स्वरूप को समर्पित है, लेकिन समय के साथ इसका नाम ‘सास-बहू’ मंदिर के रूप में प्रचलित हो गया. जानकारी के अनुसार इस भव्य मंदिर का निर्माण 10वीं शताब्दी के अंत में कच्छपघात राजवंश के राजा महिपाल और रत्नपाल द्वारा बनवाया गया था. लगभग 1000 वर्ष पुराना यह मंदिर ‘नागर’ वास्तुकला शैली का उत्कृष्ट नमूना है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित यह स्थल अपनी बारीक नक्काशी, जटिल मूर्तिकला और शानदार वास्तुकला के लिए जाना जाता है. भगवान विष्णु का सहस्रबाहु मंदिरभारत सरकार के अतुल्य भारत पोर्टल पर मंदिर के नाम व निर्माण आदि के बारे में विस्तार से जानकारी मिलती है, जिसके अनुसार, मंदिर का मूल नाम ‘सहस्रबाहु’ था, जिसका अर्थ है ‘हजार भुजाओं वाला’. यह भगवान विष्णु के उस दिव्य स्वरूप को समर्पित है, जिसमें उन्हें हजार भुजाएं प्राप्त थीं. समय के साथ नाम का अपभ्रंश हो गया और उच्चारण में आसानी के कारण सहस्रबाहु नाम सरल भाषा में सास-बहू बन गया. सास और बहू दोनों के अलग अलग मंदिरपरिसर में दो मुख्य मंदिर हैं बड़ा मंदिर ‘सास’ और छोटा मंदिर ‘बहू’ के नाम से जाना जाता है. ‘सास’ मंदिर के चारों ओर दस छोटे मंदिर हैं, जबकि ‘बहू’ मंदिर में पांच छोटे मंदिर स्थित हैं, जो वास्तुकला का अद्भुत नमूना भी कहा जाता है. मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही पूर्व दिशा में बना सुंदर ‘मकर-तोरण’ ध्यान आकर्षित करता है. दोनों मंदिरों का लेआउट लगभग एक समान है. इनमें पंचरथ गर्भगृह, अंतराल, सभा-मंडप और बरामदा शामिल हैं. बाहरी दीवारों पर भगवान ब्रह्मा, शिव, विष्णु, राम, बलराम और परशुराम की मूर्तियां बनी हैं. दीवारों पर रामायण के दृश्यों, देवी-देवताओं और दिव्य प्राणियों की सुंदर नक्काशी देखते ही बनती है. छोटा मंदिर विशेष रूप से आकर्षकइसके अलावा, मंदिर परिसर के उत्तर-पूर्व में स्थित एक छोटा मंदिर विशेष रूप से आकर्षक है, जिस पर पत्थर का सुंदर शिखर बना हुआ है. छोटी-छोटी ताखों में ब्रह्मा, शिव और विष्णु की मूर्तियां स्थापित हैं. यह मंदिर परिसर ना सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि राजस्थान की प्राचीन वास्तुकला और कला को जीवंत रखने वाला एक जीता-जागता प्रमाण भी है. यह पर्यटन के लिहाज से भी आकर्षक है और यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं. 360 डिग्री वर्चुअल टूर की भी सुविधापहाड़ियों और खजूर के पेड़ों से घिरा यह स्थल बेहद शांत और मनमोहक वातावरण प्रदान करता है. खास बात है कि सास-बहू मंदिर एकलिंगजी मंदिर से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. पास ही बघेला झील के किनारे अद्भुतजी शांतिनाथ जैन मंदिर भी है. एएसआई ने इस पूरे परिसर को संरक्षित स्मारक घोषित किया है और यहां 360 डिग्री वर्चुअल टूर की सुविधा भी उपलब्ध कराई है, जिससे दूर बैठे लोग भी इसकी भव्यता का आनंद ले सकते हैं. About the Author Parag SharmaChief Sub Editor पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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मीन राशि वालों के लिए आज का दिन रहेगा खास, करियर में...

Last Updated:May 19, 2026, 03:31 IST Aaj Ka Meen Rashifal 19 May 2026, Pisces Horoscope Today: मीन राशि के जातकों के लिए आज का दिन नई ऊर्जा और जोश से भरपूर रहेगा. आत्मविश्वास में वृद्धि होगी, जिससे आप निर्णय लेने में पहले से अधिक सक्षम रहेंगे और आपकी कार्यक्षमता भी बेहतर बनी रहेगी. आइए जानते है करियर, स्वास्थ और लव लाइफ मे दिन कैसा रहेगा. मीन राशि के जातकों के लिए आज का दिन नई उम्मीदों और सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहने वाला है. कार्यक्षेत्र में प्रगति के नए अवसर सामने आ सकते हैं और लंबे समय से रुके हुए काम भी गति पकड़ सकते हैं. ग्रहों की स्थिति आपके पक्ष में दिखाई दे रही है, जिससे आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी. उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिष आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, व्यापार करने वालों को साझेदारी से अच्छा लाभ मिलने के संकेत हैं. आर्थिक मामलों में भी राहत महसूस हो सकती है. साथ ही आज धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों की ओर आपका झुकाव बढ़ेगा, जिससे मन को शांति और सकारात्मकता मिलेगी. मीन राशि वालों का करियर राशिफल मीन राशि वालों के लिए आज का दिन करियर में तरक्की के नए रास्ते खोल सकता है. कार्यक्षेत्र में आपको कोई सुनहरा अवसर मिलने के संकेत हैं, जो भविष्य में बड़ी सफलता का कारण बन सकता है. किसी भरोसेमंद व्यक्ति की सलाह या सहयोग आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. हालांकि अपनी योजनाओं और लक्ष्यों को हर किसी के सामने जाहिर करने से बचें. धैर्य और समझदारी से लिया गया फैसला आपको उम्मीद से बेहतर परिणाम दिला सकता है. मीन राशि वालों का स्वास्थ राशिफल मीन राशि के जातक का आज सेहत के मोर्चे पर राहत और नई ऊर्जा का अहसास होगा. लंबे समय से चली आ रही शारीरिक परेशानियां धीरे-धीरे कम होती नजर आएंगी, जिससे मन भी प्रसन्न रहेगा. शरीर में स्फूर्ति और सकारात्मकता बनी रहेगी. हालांकि बच्चों की सेहत को लेकर थोड़ी सतर्कता जरूरी है. सही खानपान, पर्याप्त आराम और नियमित दिनचर्या अपनाने से स्वास्थ्य बेहतर रहेगा और दिन सुखद बीतेगा. मीन राशि वालों का व्यापार राशिफल मीन राशि वालों के लिए आज व्यापारिक क्षेत्र में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं. लंबे समय से बनाई गई योजनाएं मित्रों और सहयोगियों के सहयोग से गति पकड़ सकती हैं, जिससे कारोबार में नए अवसर सामने आएंगे. साझेदारी में काम करने वालों को आपसी सामंजस्य बनाए रखने की जरूरत है, क्योंकि छोटी बातों से मतभेद बढ़ सकते हैं. धैर्य और सूझबूझ के साथ लिए गए फैसले आज आपको बेहतर परिणाम दिला सकते हैं. मीन राशि वालों का आर्थिक राशिफलमीन राशि वालों के लिए आज आर्थिक स्थिति उम्मीद से बेहतर रह सकती है. दिनभर कुछ जरूरी खर्च सामने आ सकते हैं, लेकिन चिंता की बात नहीं है क्योंकि पुराने निवेश से लाभ मिलने के संकेत मजबूत हैं. धन आगमन से मन प्रसन्न रहेगा और आत्मविश्वास में भी वृद्धि होगी. भविष्य को मजबूत बनाने के लिए निवेश के नए अवसर मिल सकते हैं. समझदारी और धैर्य से लिया गया फैसला आगे चलकर अच्छा और स्थायी लाभ दिला सकता है. मीन राशि वालों का लव लाइफ राशिफलमीन राशि वालों के लिए आज प्रेम संबंधों के मामले में दिन खुशियों से भरा रहेगा. आप अपने साथी के साथ समय बिताने का मौका पा सकते हैं, संभव है कि कहीं बाहर घूमने भी जाएं. साथ में बिताया गया यह समय आप दोनों के बीच की दूरियों और गलतफहमियों को खत्म करने में मदद करेगा. जो लोग शादीशुदा हैं, उनका दिन घर-परिवार के साथ हंसी-खुशी बीतेगा. परिवार का सहयोग और अपनापन रिश्तों को और मजबूत बनाएगा. आज जरूर करें यह उपायआज आपके लिए लकी नंबर 9 रहेगा. यह अंक आपको सफलता और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करेगा. आज के दिन मीन राशि वाले जो धर्म-कर्म और दान-पुण्य में रुचि रखते हैं, उन्हें चाहिए कि आज के दिन भगवान हनुमान जी के मंदिर जाकर उन्हें सिंदूर अर्पित करे. उसके बाद गरीबों मे लाल रंग की वस्तुओ का दान करें, जिससे आज का दिन बेहतर हो सके. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ujjain,Madhya Pradesh Source link

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CM Vijay Thalapathy | First Official Decision | Free Electricity Order –...

होमताजा खबरदेश व‍िजय थलापत‍ि ने CM बनने के बाद क‍िस फाइल पर क‍िया पहला हस्‍ताक्षर Last Updated:May 18, 2026, 21:04 IST CM Vijay Thalapathy News: तमिलनाडु के नए सीएम सी जोसेफ विजय ने 500 यूनिट तक खपत वाले घरों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली योजना लागू की, TNPDC से निर्बाध आपूर्ति और ग्रीन कॉरिडोर पर जोर दिया है. व‍िजय थलापत‍ि ने सीएम बनने के बाद क‍िस फाइल पर क‍िया पहला हस्‍ताक्षर चेन्‍नई. तम‍िलनाडु के नए मुख्‍यमंत्री सी जोसेफ व‍िजय ने पद संभालते ही अपने पहले आध‍िकार‍िक फैसले के तौर पर राज्‍य के घरेलू खपतकारों को राहत देने वाली योजना पर हस्‍ताक्षर क‍िए है. इस आदेश के तहत 500 यून‍िट या उससे कम कुल खपत वाले सभी घरेलू उपभोक्ताओं को 200 यून‍िट तक ब‍िजली मुफ्त देने के वादे को लागू क‍िया गया है. माना जा रहा है क‍ि यह फैसला लाखों लोगों की ज‍िंदगी पर सीधा असर डालेगा क्‍योंक‍ि कम और म‍ध्‍यम आय वर्ग के घरों का ब‍िजली ब‍िल घटेगा. सोमवार को हुई समीक्षा बैठक में मुख्‍यमंत्री व‍िजय ने राज्‍य संचालित पावर ड‍िस्‍ट्रीब्‍यूशन कॉरपोरेशन (TNPDC) के अध‍िकार‍ियों से इस चुनावी वादे के क्र‍ियान्‍वयन की प्रगति पर व‍िस्तृत जानकारी ली. सचिवालय से जारी व‍िज्ञप्त‍ि के मुताब‍िक बैठक में ब‍िजली उत्पादन क्षमता, मौजूदा मांग, वितरण व्‍यवस्‍था, कॉरपोरेशन की वित्तीय स्‍थ‍िति और चल रहे इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर विकास कार्यों की समग्र समीक्षा की गई. सीएम व‍िजय ने क्‍या कहा?व‍िजय ने कहा क‍ि शहरी क्षेत्रों के तेज विकास, औद्योगिक विस्तार और खेती के ल‍िए बढ़ती ब‍िजली जरूरतों के म‍द्‍देनजर निर्बाध आपूर्ति सुन‍िश्‍च‍ित करना अन‍िवार्य है. उन्‍होंने निर्देश द‍िया क‍ि वित्तीय या तकनीकी चुनौत‍ियों के बावजूद TNPDC अपने इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर विकास कार्यों में तेजी लाए. मुख्‍यमंत्री ने अध‍िकार‍ियों से रोजमर्रा की उपभोक्ता समस्‍याओं, खासकर लो-वोल्‍टेज जैसी दिक्‍कतों के मूल कारणों की पहचान कर तत्‍काल सुधारात्‍मक कदम उठाने को कहा है. बैठक में अध‍िकार‍ियों ने बताया क‍ि र‍िकॉर्ड पीक पावर ड‍िमांड के दौरान भी ब‍िजली आपूर्ति में क‍िसी तरह का रूकावट नहीं आनी चाह‍िए. राज्‍य की ऐतिहासिक ब‍िजली खपत, मौजूदा उत्पादन स्‍थ‍िति और लगातार, निर्बाध आपूर्ति सुन‍िश्‍च‍ित करने के ल‍िए उठाए जा रहे उपायों की भी जानकारी दी गई. साथ ही नए सबस्‍टेशन स्‍थाप‍ित करने, पुरानी हो चुकी पावर इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर को आधुनिक बनाने, नई ट्रांसम‍िशन लाइन्‍स बिछाने और ग्रीन कॉर‍िडोर परियोजना में तेजी लाने पर भी चर्चा हुई. इस ग्रीन कॉर‍िडोर परियोजना के तहत दक्ष‍िणी ज‍िलों में उत्‍पाद‍ित सौर और पवन उर्जा के कुशल उपयोग पर जोर द‍िया जा रहा है. गर्मी के मौसम और आने वाले मानसून को ध्‍यान में रखते हुए TNPDC के वर‍िष्‍ठ अध‍िकार‍ियों ने मुख्‍यमंत्री को यह भी बताया क‍ि ब‍िजली के खंभों, पावर केबल्‍स और ड‍िस्‍ट्रीब्‍यूशन ट्रांसफॉर्मर जैसे आवश्‍यक साजोसामान का पर्याप्‍त स्‍टॉक पहले से ही तैयार रखा गया है, ताकि आपूर्ति और रखरखाव में कोई बाधा न आए. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link

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