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AAP नेता दीपक सिंगला को ईडी ने किया गिरफ्तार, बैंक फ्रॉड मामले...

होमताजा खबरदेश AAP नेता दीपक सिंगला को ईडी ने किया गिरफ्तार, आतिशी ने जोड़ा गोवा कनेक्शन Last Updated:May 18, 2026, 23:14 IST ED Raid on AAP Leader: ईडी ने बैंक फ्रॉड मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता दीपक सिंगला के ठिकानों पर सुबह-सुबह छापेमारी है. जांच एजेंसी ने दिल्ली और गोवा में कई जगहों पर तलाशी अभियान चलाया, जिसके बाद सिंगला को गिरफ्तार कर लिया. ख़बरें फटाफट AAP नेता दीपक सिंगला के ठिकानों पर ईडी ने सुबह-सुबह छापेमारी की है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता दीपक सिंगला को गिरफ्तार कर लिया है. ईडी ने सोमवार सुबह सिंगला सहित कुछ अन्य लोगों से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की. यह कार्रवाई कथित बैंक लोन फ्रॉड और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई. राउज एवेन्यू कोर्ट ने दीपक सिंगला की ट्रांज़िट रिमांड ED को सौंप दी है. उन्हें कल दोपहर 2 बजे तक पंचकूला की अदालत में पेश किया जाना है. उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ़्तार किया गया है. सूत्रों के अनुसार, एजेंसी कथित वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध बैंक लोन ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है. हालांकि इस मामले में अभी तक ED की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान कई दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े अहम सबूत खंगाले जा रहे हैं. फिलहाल दीपक सिंगला की ओर से इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. वहीं दीपक सिंगला के ठिकानों पर ED की तलाशी पर AAP नेता और गोवा प्रभारी आतिशी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘गोवा में आप की बढ़ती लोकप्रियता के चलते बीजेपी के गोवा के सह प्रभारी दीपक सिंगला के यहां ED को भेजा है. ये ना सिर्फ वालेंटियर्स को डराने, बल्कि गोवा AAP संगठन के डाटा को हथियाने का प्रयास है.’ With Aam Aadmi Party’s popularity growing in Goa, BJP’s loyal foot-soldier, ED has been sent here as well! From early morning today, there is an ED raid at the residence of AAP Goa co-incharge, Deepak Singla, as well as the home of some volunteers in Goa. Not only is this an… Source link

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Exclusive: अब रणदीप सुरजेवाला के पीछे पड़ी असम पुलिस, पवन खेड़ा केस...

होमताजा खबरदेश अब रणदीप सुरजेवाला के पीछे पड़ी असम पुलिस, पवन खेड़ा केस में गुवाहाटी तलब Last Updated:May 18, 2026, 23:46 IST असम पुलिस ने पवन खेड़ा से 10 घंटे पूछताछ के बाद रणदीप सिंह सुरजेवाला को 23 मई को तलब किया, मामला हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा पर लगे आरोपों से जुड़ा है. रणदीप सुरजेवाला को समन नई दिल्ली/गुवाहाटी. कांग्रेस के दिग्गज नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा से मैराथन पूछताछ के बाद अब असम पुलिस ने अपनी जांच का रुख कांग्रेस के एक और कद्दावर नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला की तरफ मोड़ दिया है. गुवाहाटी पुलिस ने सुरजेवाला को एक आधिकारिक समन जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया है. असम पुलिस की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है. पुख्ता सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, गुवाहाटी पुलिस की क्राइम ब्रांच ने रणदीप सिंह सुरजेवाला को 23 मई को पेश होने का कड़ा निर्देश दिया है. यह समन सीधे तौर पर उस हाई-प्रोफाइल मामले से जुड़ा है, जिसमें कांग्रेस नेता पवन खेड़ा से बुधवार को ही असम पुलिस ने करीब 10 घंटे तक कड़ी पूछताछ की थी. माना जा रहा है कि खेड़ा से हुई लंबी पूछताछ के बाद मिले सुरागों और बयानों के आधार पर ही अब सुरजेवाला को जांच के दायरे में लिया गया है. क्या है पूरा मामला और क्यों मचा है बवाल? यह पूरा सियासी और कानूनी घमासान असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा से जुड़े बेहद गंभीर आरोपों के बाद शुरू हुआ. लगाए थे सनसनीखेज आरोप: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गत 5 अप्रैल को दिल्ली और गुवाहाटी में एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीधे असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर निशाना साधा था. खेड़ा ने आरोप लगाया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास 3 विदेशी पासपोर्ट हैं और अमेरिका में उनकी 50 हजार करोड़ रुपये की एक बेनामी कंपनी मौजूद है. FIR और पुलिसिया एक्शन: इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए रिनिकी भुइयां सरमा ने तुरंत गुवाहाटी में पवन खेड़ा के खिलाफ मानहानि और अन्य धाराओं में FIR दर्ज करा दी. दिल्ली में रेड और पूछताछ: FIR दर्ज होने के बाद असम पुलिस एक्शन मोड में आ गई. बीते 7 अप्रैल को असम पुलिस की एक टीम ने अचानक दिल्ली स्थित पवन खेड़ा के आवास पर छापेमारी (रेड) की थी. इसी सिलसिले में आगे बढ़ते हुए बुधवार को असम पुलिस की क्राइम ब्रांच ने खेड़ा को बैठाकर करीब 10 घंटे तक सघन पूछताछ की. सुरजेवाला पर क्यों कसा शिकंजा? पवन खेड़ा के बाद अब रणदीप सिंह सुरजेवाला को समन भेजे जाने से साफ है कि असम पुलिस इस मामले में कांग्रेस के शीर्ष मीडिया और रणनीतिक सेल की भूमिका की जांच कर रही है. पुलिस यह पता लगाना चाहती है कि 5 अप्रैल को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस और इन आरोपों के पीछे की प्लानिंग व कड़ियों में सुरजेवाला की क्या भूमिका थी. 23 मई को होने वाली इस पूछताछ पर अब पूरे देश की राजनीतिक नजरें टिक गई हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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हूबहू E5 Shinkansen जैसी! भारत में बुलेट ट्रेन की प्रस्‍ताव‍ित ड‍िजाइन देखकर...

भारत में बुलेट ट्रेन को लेकर लंबे समय से जो सपना देखा जा रहा था, उसकी एक झलक दिख गई है. दरअसल, रेल भवन में बुलेट ट्रेन की एक प्रस्‍ताव‍ित ड‍िजाइन वाली तस्‍वीर लगाई गई है. इसमें एक चिकनी, लंबी, तेज और स्‍मार्ट ट्रेन द‍िख रही, जो काफी खूबसूरत नजर आ रही है. लेकिन इसे देखकर लोग कह रहे क‍ि यह तो हूबहू जापान की E5 Shinkansen है… तो हम बता रहे हैं क‍ि जापान की E5 Shinkansen ट्रेन की खूब‍ियां क्‍या हैं? स्‍पीड क‍ितनी है? E5 Shinkansen जापान की सबसे आधुनिक हाई-स्पीड ट्रेनों में से एक है, जिसे आमतौर पर Hayabusa नाम से जाना जाता है. यह ट्रेन जापान के टोक्यो से लेकर उत्तरी हिस्सों तक दौड़ती है और इसकी रफ्तार 320 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच जाती है. लेकिन Shinkansen सिर्फ तेज नहीं है, ये स्मार्ट, सेफ और साइलेंट सिस्टम का पैकेज है. नाक लंबी है, वजह बहुत साइंट‍िफ‍िक अगर आपने इस ट्रेन का फ्रंट देखा होगा, तो वो किसी चोंच या नाक जैसा लगता है. इसे यूं ही डिजाइन नहीं किया गया है. E5 Shinkansen की लंबी नाक टनल में घुसते समय तेज हवा के दबाव को कम करती है. टनल बूम यानी जोरदार धमाके जैसी आवाज को रोकती है. यह हवा का रेजिस्टेंस कम करती है. यानी यह डिजाइन सिर्फ स्टाइल नहीं, बल्कि पूरी साइंस है. स्पीड ही नहीं, स्मूथनेस भी असली खेल E5 Shinkansen 300 क‍िलोमीट प्रत‍िघंटे से ज्‍यादा की रफ्तार से दौड़ती है, लेकिन यात्री को झटका तक महसूस नहीं होता. इसका कारण इसमें लगा एडवांस्ड सस्पेंशन सिस्टम है. जो झटका लगने नहीं देता और तेज झटके पर भी पैसेंजर्स को ब‍िल्‍कुल भी पता नहीं चलता. इसमें लीनियर मोटर टेक्नोलॉजी लगी हुई है जो क‍िसी भी तरह का प्रेशर झेल सकती है. इसकीअल्ट्रा-स्मूद ट्रैक डिजाइन है. जापान में इसे इतना भरोसेमंद माना जाता है कि इसकी समय की देरी को सेकंड में मापा जाता है, मिनटों में नहीं. भूकंप आए तो भी ट्रेन समझ जाती है पहले जापान भूकंप वाला देश है, और यही वजह है कि Shinkansen को दुनिया की सबसे सुरक्षित रेल प्रणालियों में गिना जाता है. इस ट्रेन में सेंसर सिस्टम भूकंप के झटकों को तुरंत पकड़ लेते हैं. ऑटोमैटिक ब्रेकिंग सिस्टम एक्‍ट‍िव हो जाता है. ट्रेन कुछ ही सेकंड में रुक सकती है. यानी प्रकृति से भी पहले रिएक्ट करने वाली ट्रेन. शोर कम, आराम ज्यादा E5 Shinkansen का केबिन इतना शांत होता है कि अंदर बैठकर लगता है जैसे कोई हाई-एंड एयरक्राफ्ट में बैठे हों. इसमें साउंड इंसुलेशन टेक्नोलॉजी लगी है, जिससे कंपन काफी कम होता है. एयर प्रेशर बैलेंसिंग स‍िस्‍टम है. यात्रियों को न सिर्फ स्पीड मिलती है, बल्कि लक्जरी फ्लाइट जैसा अनुभव भी मिलता है. भारत की बुलेट ट्रेन से कनेक्शन क्या है? भारत का जो मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बन रहा है, उसमें जापान की Shinkansen तकनीक का ही इस्तेमाल हो रहा है.  यानी ट्रेन टेक्नोलॉजी जापान की, सुरक्षा सिस्टम जापान का, डिजाइन फिलॉसफी जापान की… इसलिए जो तस्वीर सामने आई है, वह काफी हद तक E5 Shinkansen जैसी लगती है…क्योंकि आधार वही है. ऊर्जा और इकोनॉमी का खेल भी समझिए Shinkansen ट्रेनें इलेक्ट्रिक होती हैं. हाई एफिशिएंसी मोटर्स का इस्तेमाल करती हैं. प्रति यात्री कम ऊर्जा खर्च करती हैं. यानी यह सिर्फ तेज नहीं, बल्कि ग्रीन ट्रांसपोर्ट भी है. तो क्या भारत में यही ट्रेन चलेगी? सीधा जवाब पूरा मॉडल E5 जैसा नहीं होगा, लेकिन उसकी टेक्नोलॉजी और डिजाइन भाषा से काफी मेल खाता सिस्टम होगा.भारत में ट्रैक, मौसम, भीड़ और ऑपरेशन अलग हैं, इसलिए कुछ बदलाव जरूर होंगे. लेकिन मूल DNA जापानी Shinkansen का ही रहेगा. Source link

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आसमान की नई गुरु हैं स्क्वाड्रन लीडर सान्या; पहली महिला ‘कैट-ए’ क्वालिफाइड...

होमताजा खबरदेश स्क्वाड्रन लीडर सान्या बनीं पहली IAF महिला मास्टर इंस्ट्रक्टर, रचा इतिहास Last Updated:May 18, 2026, 21:24 IST भारतीय वायुसेना की जांबाज स्क्वाड्रन लीडर सान्या ने सबसे प्रतिष्ठित Cat-A क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर (QFI) योग्यता हासिल कर नया इतिहास रच दिया है. इस शीर्ष मुकाम पर पहुंचने वाली वह वायुसेना की पहली महिला सैन्य अधिकारी हैं. वायुसेना ने इसे एक ऐतिहासिक मील का पत्थर और गर्व का क्षण बताया है. अब सान्या मास्टर इंस्ट्रक्टर के रूप में देश के भावी और युवा सैन्य पायलटों को आसमान में उड़ान भरने की उन्नत ट्रेनिंग देंगी. ख़बरें फटाफट सान्‍या ने रौशन किया देश का नाम. भारतीय वायुसेना (IAF) की जांबाज स्क्वाड्रन लीडर सान्या ने आसमान की बुलंदियों पर कामयाबी का एक ऐसा परचम लहराया है, जिसने देश के सैन्य इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है. उन्होंने वायुसेना की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन मानी जाने वाली ‘Cat-A’ क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर (QFI) योग्यता हासिल की है. इस अत्यंत प्रतिष्ठित मुकाम पर पहुंचने वाली वह भारतीय वायुसेना के इतिहास की पहली महिला सैन्य अधिकारी बन गई हैं. उनकी यह अभूतपूर्व सफलता न केवल नारी शक्ति के बढ़ते कदमों की गवाही देती है बल्कि देश के मिलिट्री एविएशन क्षेत्र में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर भी है. क्या होती है ‘Cat-A’ QFI?भारतीय वायुसेना में एक फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर (उड़ान शिक्षक) बनना अपने आप में बेहद चुनौतीपूर्ण काम है लेकिन उसमें भी ‘Category-A’ (Cat-A) का दर्जा पाना सर्वोच्च स्तर की महारत को दर्शाता है. एक क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर का काम वायुसेना के युवा और नए पायलटों को लड़ाकू विमान या अन्य सैन्य विमान उड़ाने की बारीकियां सिखाना होता है. इस योग्यता को हासिल करने के लिए पायलटों को कई कड़े इम्तिहानों, बेहद जटिल उड़ान परिस्थितियों, सटीक तकनीकी ज्ञान और बेहतरीन नेतृत्व क्षमता के दौर से गुजरना पड़ता है. फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स की श्रेणियों में ‘Cat-A’ को सबसे शीर्ष और मास्टर इंस्ट्रक्टर का दर्जा दिया जाता है. इसका सीधा मतलब यह है कि स्क्वाड्रन लीडर सान्या अब वायुसेना के भावी जांबाजों को आसमान की जंग जीतने के पैंतरे सिखाएंगी और उनकी उड़ान तकनीकों को परखेंगी. देशभर के एविएटर्स के लिए बनीं प्रेरणास्क्वाड्रन लीडर सान्या की इस शानदार और ऐतिहासिक कामयाबी पर भारतीय वायुसेना ने आधिकारिक तौर पर गर्व और खुशी व्यक्त की है. वायुसेना की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह जांबाज महिला अधिकारी की वर्षों की कड़ी मेहनत, अटूट समर्पण और पेशे के प्रति सर्वोच्च प्रतिबद्धता का परिणाम है. वायुसेना ने इसे बल के लिए एक गौरवशाली क्षण बताते हुए कहा कि सान्या की यह सफलता देशभर के युवा एविएटर्स और विशेष रूप से सशस्त्र बलों में शामिल होने का सपना देखने वाली बेटियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनेगी. यह उपलब्धि साबित करती है कि जब बात देश की रक्षा और आसमान को छूने की हो, तो काबिलियत और जज्बा ही एकमात्र पैमाना होता है, कोई जेंडर नहीं. Excellence takes flight. Sqn Ldr Saanya achieved a historic first by becoming the first woman officer to earn the coveted Cat-A Qualified Flying Instructor (QFI) qualification. Her achievement embodies dedication and relentless pursuit of excellence. A proud milestone for the… pic.twitter.com/K6hWya0iUi Source link

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100 साल पुराना गुरुकुल, मुफ्त शिक्षा के साथ बच्चों को मिलता है...

Last Updated:May 18, 2026, 20:47 IST मध्यप्रदेश के खंडवा शहर में स्थित हिंदू बाल सेवा सदन एक ऐसी संस्था है, जो दशकों से हजारों जरूरतमंद बच्चों के जीवन को नई दिशा दे रही है. यह सिर्फ एक स्कूल या आश्रय स्थल नहीं, बल्कि उन बच्चों के लिए एक पूरा घर है, जिनके पास न तो संसाधन हैं और न ही सहारा. यहां उन्हें निःशुल्क शिक्षा, रहने की सुविधा, भोजन और संस्कार मिलते हैं. करीब 1920 में शुरू हुई. इस संस्था का उद्देश्य था गरीब, अनाथ और जरूरतमंद बच्चों को सहारा देना. मध्यप्रदेश के खंडवा शहर में स्थित हिंदू बाल सेवा सदन एक ऐसी संस्था है, जो दशकों से हजारों जरूरतमंद बच्चों के जीवन को नई दिशा दे रही है. यह सिर्फ एक स्कूल या आश्रय स्थल नहीं, बल्कि उन बच्चों के लिए एक पूरा घर है, जिनके पास न तो संसाधन हैं और न ही सहारा. यहां उन्हें निःशुल्क शिक्षा, रहने की सुविधा, भोजन और संस्कार मिलते हैं. करीब 1920 में शुरू हुई. इस संस्था का उद्देश्य था गरीब, अनाथ और जरूरतमंद बच्चों को सहारा देना. उन्हें शिक्षित बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना. इस नेक काम की नींव रखने में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे भगवत राव मंडलोई की अहम भूमिका रही है. खंडवा के लालचौकी क्षेत्र में करीब 12 एकड़ में फैला यह परिसर आज एक छोटे गुरुकुल की तरह विकसित हो चुका है. यहां रहने वाले बच्चों के लिए हर सुविधा उपलब्ध कराई जाती है. वह शिक्षा हो, अनुशासन हो या फिर शारीरिक और मानसिक विकास है. यहां पढ़ने वाले बच्चों में ज्यादातर वे हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं, आदिवासी क्षेत्रों से आते हैं. जिनके माता-पिता नहीं हैं.संस्था के अध्यक्ष विनय कुमार नेगी बताते हैं कि यहां बच्चों को सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की सही दिशा भी दी जाती है. हर सुबह 5 बजे बच्चों का दिन शुरू होता है. योग, व्यायाम और मेडिटेशन के साथ दिनचर्या की शुरुआत होती है. इसके बाद नियमित पढ़ाई के साथ-साथ अलग से ट्यूशन क्लास भी चलती हैं. तीन वर्षों से यहां का रिजल्ट 100 प्रतिशत रहासंस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां शिक्षा का स्तर लगातार बेहतर होता जा रहा है. पिछले तीन वर्षों से यहां का रिजल्ट 100 प्रतिशत रहा है, जिसमें बच्चों के अंक 88 से 95 प्रतिशत तक आए हैं. यह इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन और माहौल मिलने पर कोई भी बच्चा आगे बढ़ सकता है.सहसचिव वीरेंद्र वर्मा बताते हैं कि यहां पहली से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई कराई जाती है. अब नर्सरी कक्षा की भी शुरुआत हो चुकी है. बच्चों को निःशुल्क शिक्षा के साथ कपड़े, भोजन, किताबें और रहने की पूरी सुविधा दी जाती है.इस संस्था से पढ़कर निकले कई बच्चे आज बड़े पदों पर काम कर रहे हैं. कोई अपर सचिव बन चुका है, तो कोई मंत्रालय और पुलिस विभाग में अपनी सेवाएं दे रहा है. ऐसे कई उदाहरण हैं, जो यह साबित करते हैं कि यह संस्था बच्चों के भविष्य को संवारने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. शिक्षा के साथ बच्चों को मिलता है घर जैसा सहाराखंडवा के लोग दिल खोलकर यहां दान करते हैं.चाहे वह आम नागरिक हो या बड़े उद्योगपति है. कई लोग अपने बच्चों का जन्मदिन या अपने परिजनों की पुण्यतिथि यहां आकर मनाते हैं और बच्चों के साथ समय बिताते हैं. जिससे उन्हें परिवार जैसा माहौल मिलता है.यहां बच्चों के खान-पान का भी खास ध्यान रखा जाता है. उन्हें समय पर पौष्टिक भोजन, दूध, फल और नाश्ता दिया जाता है. इसके साथ ही खेल-कूद, गार्डनिंग और स्विमिंग जैसी गतिविधियां भी कराई जाती हैं, ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके.कड़े नियमों और अनुशासन के साथ चलने वाली इस संस्था में प्रवेश भी सोच-समझकर दिया जाता है. समिति यह सुनिश्चित करती है कि जिन बच्चों को वास्तव में जरूरत है, उन्हें ही यहां जगह मिले. हिंदू बाल सेवा सदन सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि उम्मीद की किरण है, जिसने अब तक हजारों बच्चों का जीवन संवारकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है. यहां से निकले बच्चे आज गर्व से कहते हैं कि उन्होंने इसी गुरुकुल में रहकर अपने सपनों को साकार किया है. यही इस संस्था की सबसे बड़ी सफलता है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Khandwa,Madhya Pradesh Source link

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Talak-e-Hasan Supreme Court Hearing। तीन तलाक के बाद अब तलाक-ए-हसन की बारी?...

नई दिल्ली: मुस्लिम समाज में एकतरफा तलाक की प्रथाओं को लेकर एक बार फिर देश की सर्वोच्च अदालत में बड़ी कानूनी लड़ाई शुरू होने जा रही है. सुप्रीम कोर्ट कल यानी मंगलवार 19 मई से तलाक-ए-हसन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अहम सुनवाई करेगा. इस प्रथा से पीड़ित कई मुस्लिम महिलाओं ने अदालत का दरवाजा खटखटाकर इसे पूरी तरह असंवैधानिक और लैंगिक न्याय के खिलाफ घोषित करने की मांग की है. क्या होता है तलाक-ए-हसन?मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत तलाक-ए-हसन को तलाक का एक प्रामाणिक या न्यायसंगत तरीका माना गया है, लेकिन इसके दुरुपयोग और एकतरफा स्वरूप पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. इस सिस्टम के तहत पति अपनी पत्नी को एक-एक महीने के अंतराल पर यानी कुल तीन महीने की अवधि में तीन बार तलाक बोलकर, लिखकर या डिजिटल माध्यम से संदेश भेजकर शादी को पूरी तरह खत्म कर सकता है. इस प्रक्रिया में हर एक तलाक के बाद एक महीने का समय (इद्दत की अवधि) दिया जाता है ताकि यदि दोनों पक्षों में समझौता हो सके तो शादी बच जाए. इस दौरान अगर दोनों में शारीरिक संबंध बन जाते हैं या वे सुलह कर लेते हैं तो तलाक अपने आप रद्द हो जाता है. लेकिन अगर लगातार तीन महीनों तक हर महीने एक बार तलाक कहा जाता है और कोई सुलह नहीं होती तो तीसरे महीने के बाद निकाह पूरी तरह टूट जाता है. पीड़ित महिलाओं का तर्क है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह एकतरफा है और इसमें महिलाओं की सहमति या उनके अधिकारों का कोई सम्मान नहीं होता. कौन-से मुस्लिम कानून पहले हो चुके हैं रद्द?भारत में मुस्लिम समाज की महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षित करने और सामाजिक बुराइयों को खत्म करने के लिए न्यायपालिका ने पहले भी कई ऐतिहासिक फैसले सुनाए हैं: · तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत): साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने एक ही बार में तीन बार ‘तलाक, तलाक, तलाक’ बोलकर शादी खत्म करने की प्रथा (तलाक-ए-बिद्दत) को असंवैधानिक करार दिया था. इसके बाद सरकार ने 2019 में कानून बनाकर इसे एक दंडनीय अपराध घोषित कर दिया. · शाह बानो मामला (1985): इस ऐतिहासिक फैसले में सर्वोच्च अदालत ने यह साफ किया था कि मुस्लिम महिलाओं को भी तलाक के बाद दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत अपने पति से गुजारा भत्ता पाने का पूरा कानूनी अधिकार है. सवाल-जवाब तलाक-ए-हसन और प्रतिबंधित हो चुके तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) में क्या अंतर है? तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) में पति एक ही बार में एक ही सांस में तीन बार तलाक बोलकर तुरंत शादी खत्म कर देता था, जिसमें सुलह की कोई गुंजाइश नहीं होती थी. वहीं, तलाक-ए-हसन में तीन महीने का समय दिया जाता है और हर महीने एक बार तलाक बोला जाता है, जिसमें समझौते का एक मौका रहता है. हालांकि, यह भी एकतरफा ही होता है. सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांग और दलीलें क्या हैं? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि तलाक-ए-हसन की यह प्रथा मनमानी, एकतरफा और महिलाओं के मौलिक अधिकारों का हनन है. यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 15 (भेदभाव के खिलाफ अधिकार) और अनुच्छेद 21 (सम्मान से जीने का अधिकार) का सीधा उल्लंघन करती है, इसलिए इसे अमान्य घोषित किया जाना चाहिए. 19 मई की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट का मुख्य फोकस किस बात पर रहने की उम्मीद है? सुप्रीम कोर्ट मुख्य रूप से इस बात की समीक्षा करेगा कि क्या यह प्रथा मुस्लिम महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कमजोर स्थिति में लाती है और क्या यह आधुनिक लोकतांत्रिक समाज में लैंगिक समानता के सिद्धांतों के अनुकूल है. कोर्ट इस मामले में विभिन्न मुस्लिम संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों के पक्षों को सुनेगा. Source link

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43 साल बाद PM मोदी का नॉर्वे दौरा, ये कोई संयोग या...

नई द‍िल्‍ली. एक तरफ हॉर्मुज का संकट खत्म होने के बजाय गहराता ही जा रहा है वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 6 दिन में 5 देशों का अहम दौरा. पीएम मोदी का हर विदेश दौरा किसी ना किसी मायने में खास होता है और 5 यूरोपीय देशों का ये दौरा भी बड़ा खास है. संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली के इस दौरे का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा ,व्यापार, ग्रीन ग्रोथ और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है लेकिन नॉर्वे जैसे देश में भारतीय प्रधानमंत्री को दूसरी बार पहुंचने में 43 साल लग गए. हम इस सवाल को जानने की कोशिश करते हैं. जिस देश की कुल आबादी ही 56 लाख हो यानी सिर्फ दिल्ली जैसे शहर में ही 4 नॉर्वे के बराबर की आबादी समा जाए. तो आखिर ऐसा क्या खास है नॉर्वे में जो संकट की घड़ी में पीएम मोदी को यहां खींच लाया? छोटा सा नॉर्वे यूरोप का सबसे बड़ा तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादक और दुनिया के शीर्ष निर्यातकों में से एक है और हर साल ये दुनिया भर के बाजारों में ये फॉसिल फ्यूल बेचकर अरबों डॉलर कमाता है. * नॉर्वे दुनिया का चौथा सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस निर्यातक है* यह यूरोपीय संघ की कुल गैस खपत का लगभग 30% से अधिक हिस्सा पूरा करता है. * यह वैश्विक कच्चे तेल की मांग का करीब 2% उत्पादन करता है और पश्चिमी यूरोप में सबसे बड़ा तेल निर्यातक है.* तेल और गैस नॉर्वे की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है जो इसके जीडीपी में लगभग 20 % का योगदान देता है. लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि नॉर्वे अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरत के लिए तेल और कोयले का काफी कम इस्तेमाल करता है.दरअसल ये देश अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था में इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर जलवायु परिवर्तन से लड़ने में अग्रणी है. देश की लगभग 98% बिजली हाइड्रोपावर से बनती है वहीं दूसरी ओर भारी मात्रा में जीवाश्म ईंधन यानी Fossil fuel का भारी निर्यात करके आर्थिक रूप से भी समृद्ध भी हो रहा है. नॉर्वे की यही खासियतें पीएम मोदी को यहां खींच लाईं और दोनों देशों के बीच 30 से अधिक व्यापारिक और तकनीकी समझौते मील के पत्थर साबित होंगे. इतना ही नहीं नॉर्वे के सरकारी फंड का भारत के शेयर बाजार में 28 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश है और इसमें भी बढ़ोतरी हो सकती है. लेकिन जो सबसे खास डील होगी वो ग्रीन टेक्नोलॉजी और एलपीजी सप्लाई की होगी जिसकी अभी भारत को काफी जरूरत है. नॉर्वे में भारत के राजदूत ग्लोरिया गंगटे ने पहले ही संकेत दे दिया था कि पीएम के यात्रा का उद्देश्य भारत के बड़े बाजार में नॉर्डिक क्षेत्र की भागीदारी को बड़े स्तर पर बढ़ाना है. नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में 19 मई को भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भी पीएम मोदी हिस्सा लेंगे.इस सम्मेलन में वैश्विक समुद्री व्यापार और सुरक्षा को लेकर खास चर्चा होगी. इससे पहले पीएम मोदी दूसरे देशों के साथ बड़े अहम समझौते कर चुके हैं: * संयुक्त अरब अमीरात (UAE)के साथ एलपीजी सप्लाई और रणनीतिक तेल भंडारों को लेकर अहम समझौते किए ताकि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत की तेल और गैस की जरूरतें पूरी होती रहें.* नीदरलैंड्स और स्वीडन के साथ सेमीकंडक्टर,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,ग्रीन एनर्जी और इनोवेशन के क्षेत्र में साझा तकनीकी सहयोग को बढ़ाने पर सहमति बनी. नॉर्वे दौरे के बाद पीएम मोदी इटली जाएंगे जहां व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने के अलावा रक्षा और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा होगी. हॉर्मुज संकट की वजह से भारत ही नहीं पूरी दुनिया में तेल और गैस की आपूर्ति बुरी तरह बाधित हुई है और अब ये बहुत ही गंभीर चुनौती की शक्ल ले चुका है. भारत के लिए भी मौजूदा हालात किसी आने वाले बड़े खतरे का संकेत दे रहा है और इसीलिए पीएम मोदी हर उन विकल्पों पर काम कर रहे हैं जिससे भारत ना सिर्फ आने वाली बड़ी चुनौतियों का सामना कर पाए बल्कि ग्रोथ के रास्ते पर भी बिना रुके आगे बढ़ता रहे. इसलिए उन्होंने जब 5 देशों को चुना को उसमें नॉर्वे को भी प्रमुखता दी जहां जून 1983 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पहली बार आधिकारिक दौरे पर गई थीं लेकिन उसके बाद इस देश पहुंचने में भारतीय प्रधानमंत्री को 43 साल लग गए. Source link

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PM Modi Foreign Visit Live: सच्चे दोस्त ने संकट में दिया साथ…...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच देशों के दौरे के तहत स्वीडन की यात्रा पूरी कर चुके हैं. वहां से वह अब नार्वे पहुंच गए हैं. फिर वह इटली का दौरा करेंगे. भारतीय समय अनुसार सोमवार तड़के उन्होंने स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टेरसन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की. दोनों नेताओं के बीच भारत-स्वीडन संबंधों को मजबूत करने समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर भारत और स्वीडन के मजबूत संबंधों की सराहना की और बैठक की जानकारी साझा की. दोनों नेताओं ने यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री (ERT) को भी संयुक्त रूप से संबोधित किया. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत, स्वीडन और यूरोप के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों पर जोर दिया. बैठक में स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया भी मौजूद रहीं. उन्होंने स्वीडन के राजा कार्ल 16 गुफ्ताफ और रानी क्वीन सिल्विया की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को शुभकामनाएं दीं. PM Modi Norway Visit Live: नॉर्वे में भी पीएम मोदी को मिला सर्वोच्‍चा नागरिक सम्‍मान, ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेन ऑर्डर ऑफ मेरिट दिया गया PM Modi Norway Visit Live: नॉर्वे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया. यह सम्मान भारत और नॉर्वे के बीच मजबूत होते संबंधों और वैश्विक स्तर पर पीएम मोदी की नेतृत्व भूमिका को मान्यता देने के तौर पर देखा जा रहा है. इस सम्मान के बाद भारतीय समुदाय में भी उत्साह का माहौल देखने को मिला. ये पीएम मोदी को मिला 32वां सर्वोच्‍च सम्‍मान है. PM Modi Norway Visit Live: “सैन्य टकराव से नहीं निकलता समाधान…” यूक्रेन युद्ध के बीच पीएम मोदी ने दुनिया को दिया शांति का नया मंत्र PM Modi Norway Visit Live: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे में वैश्विक शांति और कूटनीति पर भारत का रुख साफ किया. पीएम मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्वे दोनों ही नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, संवाद और कूटनीति के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं. हम दोनों इस बात पर सहमत हैं कि कोई भी सैन्य टकराव अपने आप में समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता. प्रधानमंत्री ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) के संकट का जिक्र करते हुए कहा कि चाहे स्थिति कहीं भी हो, भारत और नॉर्वे दुनिया के इन अशांत क्षेत्रों में संघर्षों को तुरंत समाप्त करने और स्थायी शांति स्थापित करने के सभी प्रयासों का लगातार समर्थन करते रहेंगे. PM Modi Norway Visit Live: सच्चे दोस्त ने संकट में दिया साथ…’ पहलगाम हमले का जिक्र कर भावुक हुए पीएम मोदी, नॉर्वे का जताया आभार PM Modi Norway Visit Live: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे पहुंचने पर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मिले सहयोग को याद किया. पीएम मोदी ने कहा, “मैं पिछले वर्ष ही नॉर्वे आने वाला था, लेकिन पहलगाम में हुए आतंकी हमले के कारण मेरी यह यात्रा स्थगित हो गई थी. उस चुनौतीपूर्ण समय में नॉर्वे ने भारत के साथ मजबूती से खड़े रहकर अपनी सच्ची दोस्ती का परिचय दिया था. प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि आतंकवाद के खिलाफ इस लड़ाई में नॉर्वे ने भारत के प्रति जो एकजुटता दिखाई, आज इस ऐतिहासिक धरती पर कदम रखते ही वह उसके लिए पूरे देश की तरफ से आभार व्यक्त करते हैं. PM Modi Norway Visit Live: भारत-नॉर्वे के बीच खुली तरक्की की नई राह, पीएम मोदी ने बताया कैसे यह ऐतिहासिक समझौता बदलेगा दोनों देशों की किस्मत! PM Modi Norway Visit Live: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) के बीच पिछले वर्ष हुए ऐतिहासिक व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) की सराहना की है. पीएम मोदी ने कहा कि यह समझौता भारत और नॉर्वे के बीच साझा प्रगति और समृद्धि सुनिश्चित करने का एक मजबूत ब्लूप्रिंट है. इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के नए द्वार खुले हैं. प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि यह रणनीतिक साझेदारी न केवल भारत और नॉर्वे के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी विकास को रफ्तार देगी. PM Modi Norway Visit Live: भारत-नॉर्वे की स्‍पेस एजेंसी के बीच हुआ करार, बदलते क्‍लाइमेट चेंज पर मिलकर करेंगे काम PM Modi Norway Visit Live: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे के पीएम के साथ ज्‍वाइंट प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के दौरान कहा कि भारत और नॉर्वे के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में हुए ऐतिहासिक सहयोग (MoU) पर खुशी जताई. उन्होंने कहा कि इसरो और नॉर्वे की यह साझेदारी अंतरिक्ष विज्ञान में एक नया आसमान छुएगी. इससे दोनों देशों के वैज्ञानिक क्लाइमेट चेंज (जलवायु परिवर्तन) और वैश्विक इकोसिस्टम को बेहतर ढंग से समझने और सुरक्षित रखने में योगदान देंगे. भारत-नॉर्वे की यह मजबूत साझेदारी पूरी दुनिया के कल्याण के लिए फायदेमंद साबित होगी. PM Modi Norway Visit Live: 40 साल बाद आया हूं, दोस्ती का नया दौर शुरू… ओस्लो उतरते ही पीएम मोदी का एक्स पर बड़ा संदेश PM Modi Norway Visit Live: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे की धरती पर कदम रखते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपनी खुशी जाहिर की. पीएम मोदी ने लिखा, “मैं ओस्लो पहुंच चुका हूं. हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री योनास गहर स्टोर द्वारा किए गए गर्मजोशी से स्वागत के लिए मैं उनका अत्यंत आभारी हूं. 40 से अधिक वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली नॉर्वे यात्रा है.” पीएम ने विश्वास जताया कि इस ऐतिहासिक दौरे से भारत और नॉर्वे के बीच दोस्ती और मजबूत होगी. अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी वहां के राजा हेराल्ड पंचम और रानी सोन्जा से मुलाकात करेंगे. इसके अलावा, वह 19 मई को ओस्लो में आयोजित होने वाले ‘तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन’ में हिस्सा लेंगे और नॉर्डिक देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय चर्चा करेंगे. PM Modi Norway Visit Live: भारत-नॉर्वे बिजनेस समिट में दिखेगी पीएम मोदी की धमक, निवेश और तकनीक को लेकर होने वाला है बड़ा ऐलान PM Modi Norway Visit Live: विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ मिलकर ‘इंडिया-नॉर्वे बिजनेस एंड रिसर्च समिट’ को संबोधित करेंगे. इस बेहद महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक साझेदारी को मजबूत करना, निवेश के नए अवसरों को तलाशना और वैज्ञानिक अनुसंधान (रिसर्च) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है. पीएम मोदी

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Ajmer News | History | नसीराबाद के सुनहरे दौर की याद है...

Last Updated:May 18, 2026, 16:57 IST Famous Lakshmi Talkies Of Ajmer: अजमेर जिले के नसीराबाद का लक्ष्मी टॉकीज कभी शहर की सबसे बड़ी पहचान माना जाता था. 1945 में शुरू हुए इस सिनेमा हॉल में फिल्म देखने के लिए लंबी कतारें लगती थीं और परिवारों के लिए यह खास अनुभव हुआ करता था. समय बदला, मल्टीप्लेक्स आए और 2017 में यहां आखिरी फिल्म दिखाई गई. आज यह इमारत भले शांत हो, लेकिन लोगों की यादों में इसकी रौनक अब भी जिंदा है. अजमेर. अजमेर जिले के नसीराबाद में स्थित लक्ष्मी टॉकीज कभी सिर्फ एक सिनेमा हॉल नहीं था, बल्कि यह शहर की पहचान और लोगों की यादों का अहम हिस्सा हुआ करता था. उस दौर में जब मनोरंजन के साधन बेहद सीमित थे, तब फिल्मों का आकर्षण लोगों को एक साथ जोड़ने का सबसे बड़ा जरिया माना जाता था. लक्ष्मी टॉकीज में फिल्म देखना केवल समय बिताने का साधन नहीं, बल्कि परिवार और दोस्तों के साथ बिताया जाने वाला खास अनुभव हुआ करता था. यहां की हलचल, टिकट खिड़की पर लगने वाली भीड़ और नई फिल्मों को लेकर लोगों का उत्साह शहर की पहचान बन चुका था. स्थानीय निवासी पंकज बताते हैं कि लक्ष्मी टॉकीज की स्थापना वर्ष 1945 में हुई थी. इसे नसीराबाद का पहला और सबसे पुराना सिनेमा हॉल माना जाता है. लंबे समय तक यह शहर का एकमात्र थिएटर रहा, जहां नई फिल्म लगने पर दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ती थी. त्योहारों और छुट्टियों के दौरान टिकट लेने के लिए लंबी कतारें लग जाती थीं. कई बार लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता था, तब जाकर फिल्म देखने का मौका मिलता था. जब सिनेमा देखना एक खास मौका हुआ करता थापंकज बताते हैं कि बचपन में वह अपने माता-पिता के साथ यहां फिल्म देखने आया करते थे. उस समय सिनेमा देखना किसी खास मौके से कम नहीं माना जाता था. परिवार के साथ बिताए गए वे पल आज भी लोगों की यादों में ताजा हैं. लक्ष्मी टॉकीज केवल फिल्मों तक सीमित नहीं था, बल्कि यहां बड़े सर्कस और दूसरे मनोरंजन कार्यक्रम भी आयोजित होते थे, जो शहर के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बने रहते थे. 2017 में चली आखिरी फिल्मसमय के साथ मनोरंजन के तरीके बदलते गए. मल्टीप्लेक्स संस्कृति बढ़ी और लोगों की पसंद भी बदलने लगी. बदलते दौर और देखरेख की कमी के कारण लक्ष्मी टॉकीज की रौनक धीरे-धीरे फीकी पड़ने लगी. आखिरकार वर्ष 2017 में यहां आखिरी फिल्म प्रदर्शित की गई, जिसके बाद यह हमेशा के लिए बंद हो गया. आज भले ही लक्ष्मी टॉकीज का भवन शांत और वीरान नजर आता हो, लेकिन नसीराबाद के लोगों के दिलों में इसकी यादें अब भी जिंदा हैं. यह सिर्फ एक बंद पड़ा सिनेमा हॉल नहीं, बल्कि शहर के सुनहरे दौर और सामूहिक यादों का एक अहम हिस्सा माना जाता है. About the Author Anand Pandey आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ajmer,Ajmer,Rajasthan Source link

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महाभारत : गांधारी ने दो बार ही आंखों से हटाई थी पट्टी,...

कौरवों की मां गांधारी आंखों से देख सकती थीं. जब उनके शादी अंधे धृतराष्ट्र से हुई तो उन्हें पहले तो जबरदस्त झटका लगा लेकिन उसके बाद उन्होंने प्रण लिया कि पति की तरह अब वो भी किसी भी चीज को अपनी आंखों से नहीं देखेंगी, लिहाजा उन्होंने अपनी आंखों पूरे जीवन के लिए पट्टी बांध ली. लेकिन ये पट्टी दो मौकों पर जब उन्होंने खोली तो क्या गजब हो गया. गांधार की राजकुमारी गांधारी की शादी हस्तिनापुर के राजकुमार धृतराष्ट्र से हुई थी. वह जन्म से ही अंधे थे. उन्होंने फैसला लिया कि वह उस दुनिया को नहीं देखेंगी, जिसे उनके पति नहीं देख सकते. उन्होंने इसी प्रण की वजह से अपनी पैदा हुई संतानों को भी कभी नहीं देखा. गांधारी के बारे में कहा जाता था कि वह अंतर्ज्ञान से जानती थीं कि उनके आसपास और लोगों के मन में क्या चल रहा है. भीष्म ने गांधारी के गुणों और कुरु वंश के गौरव को देखते हुए इस विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे गांधारी के पिता सुबल ने स्वीकार कर लिया. आंख पर पट्टी बांधकर गांधारी अपने पति के साथ समान धरातल पर रहना चाहती थीं. हालांकि ये भी कहा जाता है कि गांधारी ने ऐसा करके एक नेत्रहीन व्यक्ति से विवाह करने के लिए बाध्य किए जाने पर इस तरह अपना मौन विरोध जाहिर किया. तब हर कोई अवाक रह गया हालांकि गांधारी का अपनी आंखों पर पट्टी बांधने का फैसला उनके चरित्र की दृढ़ता, त्याग और पतिव्रता धर्म के प्रति उनकी निष्ठा को भी दिखाता है. गांधारी आंखों पर जो पट्टी पहनी हुई थी, उसका जिक्र महाभारत में भी आया है. कम से कम दो बार उनके पट्टी उतारने का जिक्र तो आया है. वो दोनों बहुत खास क्षण थे. और जब उन्होंने आंख से पट्टी हटाई तो वो मौके ऐसे थे कि हर कोई स्तब्ध रह गया था. गांधारी ने महाभारत युद्ध के बाद युद्धक्षेत्र में अपनी आंखों से पट्टी हटाई ताकि अपने मृत पुत्रों को देख सकें. ये दूसरा मौका था जब गांधारी ने आंख से पट्टी हटाई. अपने पुत्रों को रणक्षेत्र में मृत देखकर वह अंदर ही अंदर धधक उठी थीं. (News18 AI) तब गांधारी बहुत गुस्से में थीं महाभारत के स्त्री पर्व में प्रसंग है जहां युद्ध के बाद गांधारी अपने मृत पुत्रों, विशेष रूप से दुर्योधन को देखने के लिए कुरुक्षेत्र जाती है. कुछ व्याख्याओं में कहा जाता है कि उन्होंने तब अपनी आंखों से पट्टी हटाई. उन्होंने युद्ध के मैदान में पड़ी लाशों के बीच अपने पुत्रों को मृत देखा. इस समय वह अंदर से इतने गुस्से में थीं कि उनके सामने जो आ जाता, वो गुस्से से भस्म ही हो जाता. लिहाजा उस समय कृष्ण ने पांडवों को उनके सामने नहीं आने के लिए कहा. कृष्ण ने उन्हें कैसे नियंत्रित किया जब उन्होंने पट्टी बांध ली तब कृष्ण के साथ पांडव उनसे और धृतराष्ट्र से मिलने आए. आंख पर पट्टी बांधने के लिए बावजूद गांधारी अंदर से धधक रही थीं. वह तपस्वी थीं. गांधारी की तपस्या में संयम, धैर्य और त्याग का भी समावेश था. हालांकि उस दिन अपनी तपस्या से प्राप्त दैवीय दृष्टि का उपयोग करके उन्होंने पांडवों को शाप देने की कोशिश की. कहा जाता है कृष्ण ने गांधारी की उस शक्ति को नियंत्रित किया.  पैर का अंगूठा काला पड़ गया तब गांधारी को अपनी पट्टी के निचले पोर से केवल युधिष्ठिर का पैर का अंगूठा नजर आया और वह गांधारी के ताप के कारण काला पड़ गया. तब कृष्ण के कारण ही उनका गुस्सा कृष्ण पर उतरा और पांडव बच गए. कब पहली बार गांधारी ने पट्टी हटाई महाभारत में कहा गया है कि गांधारी ने पहली बार आंख से पट्टी महाभारत युद्ध से पहले हटाई थी. तब उन्होंने पुत्र दुर्योधन को अपने सामने वस्त्रविहीन यानि नग्न आने के लिए कहा था. तब गांधारी ने बेटे दुर्योधन को बगैर वस्त्र के अपने सामने महल में आने को कहा था. लेकिन दुर्योधन निचले वस्त्र पहनकर उनके सामने आए, जिससे वह उनके शरीर के ऊपरी हिस्सों को ही पत्थर की तरह अजेय कर पाईं. (News18 AI) कुरुक्षेत्र युद्ध शुरू होने से पहले गांधारी को अपने पुत्र दुर्योधन और कौरवों के अधर्मपूर्ण रवैये के कारण चिंता थी. वह जानती थीं कि युद्ध में पांडवों की सेना, विशेष रूप से भगवान कृष्ण के मार्गदर्शन में, बहुत शक्तिशाली है. मां की भावनाओं और तपस्या की शक्ति के कारण गांधारी ने दुर्योधन को युद्ध में अजेय बनाने की कोशिश की. गांधारी ने दुर्योधन को अपने पास बुलाया. उसे नग्न अवस्था में उनके सामने आने को कहा. इसका कारण यह था कि गांधारी अपनी तपस्या से प्राप्त दैवीय शक्ति का उपयोग करके दुर्योधन के शरीर को वज्र के समान कठोर करना चाहती थीं. उनकी दृष्टि में इतनी शक्ति थी कि वह जिस अंग को देख लेतीं, वह अजेय हो जाता. दुर्योधन अपनी माता के आदेश का पालन करने के लिए नग्न अवस्था में जाने को तैयार था, लेकिन रास्ते में भगवान कृष्ण ने उसे रोका. कृष्ण ने दुर्योधन को समझाया कि अपनी माता के सामने पूरी तरह नग्न जाना अनुचित और लज्जाजनक है. कृष्ण के कहने पर दुर्योधन ने अपनी जंघाओं को (विशेषकर कमर के नीचे का हिस्सा) कपड़े से ढक लिया. तब दुर्योधन के शरीर को पट्टी खोलकर देखा जब दुर्योधन गांधारी के सामने आया, तब गांधारी ने अपनी आंखों की पट्टी हटाई, जो उन्होंने वर्षों से पहनी थी. उनकी तपस्या की शक्ति ऐसी थी कि उनकी दृष्टि ने दुर्योधन के शरीर के उन हिस्सों को, जिन्हें उन्होंने देखा, वज्र के समान कठोर कर दिया लेकिन चूंकि दुर्योधन ने अपनी जंघाएं ढकी हुई थीं, वह हिस्सा उनकी दृष्टि से अछूता रह गया और कमजोर रहा. यही कमजोरी बाद में युद्ध में दुर्योधन की हार का कारण बनी. भीम ने युद्ध के अंतिम चरण में (18वें दिन) दुर्योधन की जंघाओं पर गदा से प्रहार किया, जिससे वह पराजित हुआ. Source link

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