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पाकिस्तान जितने में पूरा रोशन होता है, भारत ने उसका 9 गुना...

सूरज आसमान से आग की लपटें बरसा रहा है, पारा 45 डिग्री के पार है और देश का कोना-कोना भीषण लू की चपेट में है. एसी, कूलर और पंखों की अंतहीन मांग के बीच मंगलवार दोपहर ठीक 3 बजकर 40 मिनट पर भारतीय पावर ग्रिड पर एक ऐसा ऐतिहासिक दबाव आया, जिसने दुनिया के बड़े-बड़े विकसित देशों के पसीने छुड़ा दिए. लेकिन भारतीय ग्रिड ने बिना पलक झपकाए इतिहास रच दिया. इस महा-संकट के बीच भारत ने रिकॉर्ड 260.45 गीगावाट (GW) बिजली की मांग को न सिर्फ छुआ, बल्कि उसे सफलतापूर्वक पूरा करके दिखा दिया. भारत की इस ताकत का अंदाजा आप इस आंकड़े से लगाइए कि जितने में हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान पूरा का पूरा रोशन हो जाता है (28.3 GW), भारत ने एक झटके में उसका पूरे 9 गुना से भी ज्यादा का लोड उठा लिया. यह सिर्फ बिजली की सप्लाई नहीं, बल्कि नए भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर की ताकत है. एक ही दिन में टूटा पिछला रिकॉर्डऊर्जा मंत्रालयने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि मंगलवार दोपहर 3:40 बजे देश में कुल 260.45 गीगावाट (GW) की रिकॉर्ड बिजली मांग दर्ज की गई, जिसे बिना किसी रुकावट के पूरा किया गया. यह आंकड़ा सोमवार को दर्ज की गई 257.37 गीगावाट की मांग से भी कहीं अधिक है. दिल्ली में भी इस सीजन की सबसे अधिक बिजली मांग दोपहर 3:30 बजे 7,776 मेगावाट (MW) दर्ज की गई. पड़ोसी देशों के मुकाबले 5 गुना मजबूत है भारतभारत के पावर ग्रिड की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह हमारे सभी दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों की कुल मिलाकर होने वाली बिजली मांग से भी पांच गुना से अधिक है. यदि हम पाकिस्तान (28.3 GW), बांग्लादेश (16.5 GW), श्रीलंका (3 GW), नेपाल (2.2 GW), भूटान (1.2 GW), और अफगानिस्तान (0.8 GW) की अधिकतम बिजली मांग को जोड़ दें, तो यह लगभग 52 गीगावाट बैठती है. भारत अकेले 260.45 गीगावाट की मांग को संभाल रहा है, जो दिखाता है कि भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर कितना विशाल और मजबूत हो चुका है. कैसे मुमकिन हुई निर्बाध बिजली सप्लाई?इस अभूतपूर्व मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने एडवांस रिसोर्स प्लानिंग (Resource Adequacy Planning) और रियल-टाइम कोऑर्डिनेशन का सहारा लिया. नेशनल, रीजनल और स्टेट लोड डिस्पैच सेंटरों (NLDC, RLDC, SLDC) ने बिजली उत्पादन कंपनियों के साथ मिलकर काम किया. देश की बिजली सप्लाई को चालू रखने में थर्मल पावर (कोयला आधारित) ने रीढ़ की हड्डी की भूमिका निभाई, जिसका कुल हिस्सेदारी में लगभग 67% योगदान रहा. इसके साथ ही रिन्यूएबल एनर्जी (सौर और पवन ऊर्जा) ने भी बड़ा सहारा दिया, जिसमें अकेले सोलर पावर ने पीक आवर्स के दौरान 21% से अधिक (56,204 MW) बिजली ग्रिड को दी. हाइड्रो, न्यूक्लियर, गैस और आधुनिक बैटरी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के मिले-जुले उपयोग ने ग्रिड को फेल होने से बचाया और देश को अंधेरे में डूबने से रोक लिया. सवाल-जवाबमंगलवार को भारत में कितनी पीक पावर डिमांड दर्ज की गई? मंगलवार को दोपहर 3:40 बजे देश के इतिहास की सबसे अधिक 260.45 गीगावाट (GW) की पीक पावर डिमांड दर्ज की गई और इसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया. पड़ोसी देशों के मुकाबले भारतीय पावर ग्रिड की क्षमता कितनी बड़ी है? पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान और अफगानिस्तान की कुल मिलाकर बिजली की मांग करीब 52 GW है. भारत का पावर ग्रिड अकेले इन सभी देशों की कुल मांग से 5 गुना से भी ज्यादा (260.45 GW) लोड संभाल रहा है. इस भारी मांग को पूरा करने में किस ऊर्जा स्रोत का सबसे बड़ा योगदान रहा? इस मांग को पूरा करने में थर्मल पावर (कोयला) सबसे बड़ा जरिया रहा, जिसने कुल बिजली उत्पादन में करीब 67% का योगदान दिया. इसके अलावा सोलर पावर ने 21% से अधिक का योगदान दिया. Source link

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12 साल विश्वास के… देश भर में BJP का मेगा प्लान तैयार,...

होमताजा खबरदेश 12 साल विश्वास के… BJP का मेगा प्लान तैयार, मैदान में मिलेंगे प्रतिनिधि Last Updated:May 19, 2026, 23:36 IST मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर बीजेपी देशभर में बड़ा जनसंपर्क अभियान शुरू करने जा रही है। ‘12 साल विश्वास के, विकास के, जन कल्याण के’ नाम से चलने वाला यह अभियान 5 जून से 21 जून तक चलेगा. इसमें केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक और पार्टी कार्यकर्ता सीधे जनता के बीच पहुंचेंगे. बीजेपी सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को हर घर तक पहुंचाने की तैयारी में है. 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत हर मंडल में पौधारोपण कार्यक्रम होंगे. Modi Government 12 Years: केंद्र में मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी अब देशभर में बड़ा जनसंपर्क अभियान शुरू करने जा रही है. इस अभियान का नाम ‘12 साल विश्वास के, विकास के, जन कल्याण के’ रखा गया है. बीजेपी की तैयारी है कि सरकार की योजनाओं और पिछले 12 साल की उपलब्धियों को सीधे जनता तक पहुंचाया जाए. इसके लिए 5 जून से 21 जून तक देशभर में बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. सूत्रों के मुताबिक, इस अभियान में बीजेपी के बड़े नेता, केंद्रीय मंत्री, सांसद और विधायक सीधे मैदान में उतरेंगे. पार्टी गांव से लेकर शहर और मंडल स्तर तक लोगों के बीच पहुंचने की तैयारी कर रही है. बीजेपी चाहती है कि सरकार के काम और योजनाओं की जानकारी हर घर तक पहुंचे. पार्टी की तरफ से जारी निर्देशों में कहा गया है कि सभी जनप्रतिनिधि जनता के बीच जाकर संवाद करेंगे. सांसदों को अपने क्षेत्र की हर विधानसभा में एक दिन बिताने को कहा गया है, जबकि विधायकों को हर मंडल में जाकर लोगों से मिलने के निर्देश दिए गए हैं. इस अभियान के दौरान कई बड़े कार्यक्रम भी होंगे. 8 और 9 जून को दिल्ली में मीडिया संवाद कार्यक्रम रखा गया है. इसके बाद 11 और 12 जून को एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, डिप्टी सीएम और केंद्रीय मंत्री मीडिया से बातचीत करेंगे. इन कार्यक्रमों में मोदी सरकार के 12 साल के कामकाज और उपलब्धियों को सामने रखा जाएगा. बीजेपी इस अभियान को सिर्फ राजनीतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखना चाहती. पार्टी की तरफ से वृक्षारोपण अभियान, स्वच्छता अभियान, प्रगति पथ यात्रा और विकसित भारत संकल्प सम्मेलन जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे. नेताओं और कार्यकर्ताओं को लोगों के बीच जाकर इन कार्यक्रमों को सफल बनाने की जिम्मेदारी दी गई है. इसके अलावा तीन दिन के जनकल्याण शिविर भी लगाए जाएंगे. इनमें केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों का पंजीकरण किया जाएगा. खास तौर पर गरीबों, किसानों, महिलाओं और युवाओं को सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर जोर रहेगा. बीजेपी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी अलग अभियान चलाएगी. इसके तहत कई जगहों पर प्राकृतिक खेती से जुड़ी कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी. वहीं 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत हर मंडल में पौधारोपण कार्यक्रम होंगे. 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस भी बड़े स्तर पर मनाने की तैयारी है. पार्टी ने हर मंडल में योग कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इससे जोड़ा जा सके. सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी इस पूरे अभियान को पर्यावरण और स्वदेशी सोच से जोड़कर भी पेश करना चाहती है. कार्यकर्ताओं को काफिले से बचने की सलाह बीजेपी ने पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को बड़े काफिलों से बचने, कार पूलिंग करने, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की सलाह दी गई है. बीजेपी का मानना है कि यह अभियान सिर्फ सरकार की उपलब्धियां बताने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जनता से सीधा जुड़ाव बढ़ाने और संगठन को मजबूत करने का भी बड़ा जरिया बनेगा. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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DRDO ULPGM-V3 missile Test। हवा में हेलीकॉप्टर या जमीन पर टैंक, पल...

होमताजा खबरदेश हेलीकॉप्टर हो या टैंक, पल भर में सब स्वाहा; स्वदेशी ULPGM-V3 ने रचा इतिहास Last Updated:May 19, 2026, 22:40 IST DRDO ULPGM-V3 missile Test: भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाते हुए मानवरहित लड़ाकू विमान (UAV/ड्रोन) से लॉन्च होने वाली स्वदेशी प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल ULPGM-V3 का आंध्र प्रदेश के कुरनूल में सफल परीक्षण किया है. इस मिसाइल ने हवा से जमीन और हवा से हवा दोनों मोड में अचूक निशाना साधा. यह तकनीक दुश्मन के टैंकों, बख्तरबंद गाड़ियों, ड्रोन और हेलीकॉप्टरों को नष्ट करने में पूरी तरह सक्षम है. ख़बरें फटाफट डीआरडीओ ने कमाल कर दिया. नई दिल्‍ली. भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक और ऐतिहासिक छलांग लगाई है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने मानवरहित लड़ाकू विमान (UAV) यानी ड्रोन से लॉन्च होने वाली पूरी तरह स्वदेशी प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल ‘ULPGM-V3’ (UAV Launched Precision Guided Missile) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है. आंध्र प्रदेश के कुरनूल में हुए इस परीक्षण ने भारतीय सेना की मारक क्षमता को एक नई और बेहद घातक धार दे दी है. इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह आसमान से न सिर्फ जमीन पर मौजूद दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद कर सकती है बल्कि हवा में उड़ रहे खतरों को भी मार गिराने में पूरी तरह सक्षम है. हवा से हवा और जमीन दोनों पर अचूक निशानाकुरनूल की परीक्षण रेंज में इस मिसाइल ने अपनी बेजोड़ युद्धक क्षमता का लोहा मनवाया. परीक्षण के दौरान ULPGM-V3 ने एयर-टू-ग्राउंड और एयर-टू-एयर दोनों मोड में अपनी सटीकता को साबित किया. अत्याधुनिक सेंसर और सीकर तकनीक से लैस यह मिसाइल दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों, अभेद्य टैंकों और बंकरों को तो नष्ट करेगी ही, साथ ही कम ऊंचाई पर उड़ रहे दुश्मन के ड्रोन, टोही विमानों और लड़ाकू हेलीकॉप्टरों को भी पलक झपकते ही हवा में ही ढेर कर देगी. स्वदेशी तकनीक से तैयारइस मिसाइल का विकास पूरी तरह से भारतीय वैज्ञानिकों और घरेलू डिफेंस इंडस्ट्री के संयुक्त सहयोग से किया गया है. वर्तमान दौर में जब युद्धों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और ड्रोन टेक्नोलॉजी युद्ध का सबसे बड़ा हथियार बनकर उभरी है, ऐसे समय में ड्रोन-लॉन्च मिसाइल तकनीक का भारत में ही विकसित होना एक गेम-चेंजर साबित होगा. अब भारतीय सेनाओं को विदेशी कंपनियों और महंगे आयात पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस शानदार कामयाबी पर DRDO के वैज्ञानिकों और देश की डिफेंस इंडस्ट्री को बधाई दी है. उन्होंने इसे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी मील का पत्थर बताया है. भविष्य के युद्धों में भारतीय सेना की बढ़ेगी ताकतULPGM-V3 मिसाइल को आने वाले समय में भारतीय वायुसेना और सेना के बेड़े में शामिल स्वदेशी और विदेशी लड़ाकू ड्रोनों से आसानी से इंटीग्रेट किया जा सकेगा. इससे एलएसी (LAC) और एलओसी (LoC) जैसे दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में बिना किसी मानवीय जोखिम के, दुश्मन की हर हरकत का मुंहतोड़ जवाब देने में बड़ी मदद मिलेगी. सवाल-जवाबULPGM-V3 मिसाइल का पूरा नाम क्या है और इसका परीक्षण कहां हुआ? इसका पूरा नाम ‘UAV Launched Precision Guided Missile’ (UAV से लॉन्च होने वाली प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल) है. इसका सफल परीक्षण आंध्र प्रदेश के कुरनूल में किया गया है. यह मिसाइल किन-किन लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है? यह एक मल्टी-मोड मिसाइल है, जो जमीन पर मौजूद दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद गाड़ियों को नष्ट करने के साथ-साथ हवा में उड़ रहे ड्रोन और हेलीकॉप्टरों को भी मार गिरा सकती है. भारतीय सेनाओं के लिए इस मिसाइल का क्या महत्व है? यह मिसाइल भारत की ड्रोन-वारफेयर क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी. पूरी तरह स्वदेशी होने के कारण यह विदेशी निर्भरता को खत्म करेगी और भविष्य के युद्धों में सेना को बिना मानवीय नुकसान के सटीक स्ट्राइक करने की ताकत देगी. About the Author Sandeep GuptaChief Sub Editor डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में इन्होंने अपनी कलम से जटिल विषयों को …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link

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India UAE Deal: यूएई ने भारत को दिया बड़ा तोहफा, पश्चिम एशिया...

होमताजा खबरदेश UAE ने भारत के लिए खोला तेल-गैस का खजाना! PM मोदी का दौरा गेमचेंजर: रिपोर्ट Last Updated:May 19, 2026, 21:41 IST पीएम नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा ने पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और तेल बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है. दोनों देशों के बीच कच्चे तेल और एलपीजी की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए बड़े समझौते हुए हैं. यूएई भारत को 30 मिलियन बैरल कच्चा तेल देगा और 5 अरब डॉलर का नया निवेश भी करेगा. यह साझेदारी भारत को वैश्विक संकट से बचाएगी. पीएम मोदी की यूएई यात्रा कैसे बनी भारत के लिए गेमचेंजर? (Photo made with AI) नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) यात्रा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रही है. इस समय पूरे मिडिल ईस्ट में भारी अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है. तेल बाजार में लगातार अस्थिरता की स्थिति देखी जा रही है. ऐसे नाजुक समय में भारत और यूएई के बीच ऊर्जा क्षेत्र में कई ऐतिहासिक और बड़े समझौते हुए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी का यह दौरा भारत की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है जो देश की ऊर्जा सुरक्षा को हमेशा के लिए पक्का कर देगी. यह यात्रा प्रधानमंत्री मोदी के पांच देशों के बड़े दौरे का पहला चरण थी. इसके बाद वे नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा पर रवाना हो गए. इस दौरे ने वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूत स्थिति को एक बार फिर से रेखांकित किया है. ओपेक से बाहर निकला यूएई भारत की मदद कैसे करेगा? यूएई ने हाल ही में पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) से बाहर निकलने का बड़ा फैसला किया था. इस फैसले के बाद अब यूएई अपनी तय उत्पादन सीमा से बाहर जाकर अधिक तेल का उत्पादन कर सकता है. भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग दसवां हिस्सा अकेले यूएई से आयात करता है. इसके साथ ही भारत यूएई की एलएनजी का सबसे बड़ा ग्राहक भी है. ऐसे में यूएई का बढ़ा हुआ तेल उत्पादन सीधे तौर पर भारत के लिए बड़ा फायदेमंद साबित होने वाला है. 30 मिलियन बैरल तेल की महाडील से देश को क्या फायदा होगा? सरकार की तरफ से मिली जानकारी के अनुसार दोनों देशों के बीच एक बड़ा रणनीतिक समझौता संपन्न हुआ है. यह डील इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) के बीच हुई है. इसके तहत यूएई भारत के रणनीतिक तेल भंडार के लिए 30 मिलियन बैरल कच्चा तेल उपलब्ध कराने पर सहमत हुआ है. संकट के समय में यह तेल भंडार भारत की लाइफलाइन साबित होगा. एलपीजी सप्लाई और गैस के रणनीतिक भंडार को लेकर क्या है तैयारी? कच्चे तेल के साथ ही इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और एडीएनओसी के बीच एलपीजी की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए भी समझौता हुआ है. दोनों देशों ने भारत में गैस के रणनीतिक भंडार स्थापित करने की संभावना पर भी सहमति जताई है. इस कदम का मुख्य उद्देश्य भविष्य में भारत की डोमेस्टिक गैस सप्लाई और ऊर्जा सुरक्षा को और ज्यादा मजबूत करना है. इससे भारतीय उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर राहत मिलेगी. ड्रोन हमलों के खतरे के बीच 5 अरब डॉलर के निवेश के क्या मायने हैं? यह ऐतिहासिक समझौते ऐसे समय में हुए हैं जब खाड़ी क्षेत्र में भारी अस्थिरता जारी है. हाल ही में यूएई और सऊदी अरब में ड्रोन हमलों की खबरों ने वहां की ऊर्जा संरचना की संवेदनशीलता को फिर से उजागर किया है. इसके बावजूद यूएई ने भारत में 5 अरब डॉलर के नए निवेश की बड़ी प्रतिबद्धता जताई है. वर्तमान में दोनों देशों के बीच सालाना लगभग 85 अरब डॉलर का व्यापार होता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भारत को वैश्विक ऊर्जा संकट और कीमतों के उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रखेगी. About the Author दीपक वर्माDeputy News Editor दीपक वर्मा News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपक मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति और भारत के आंतरिक घ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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जस्टिस स्‍वर्णकांता की अवमानना हुई… केजरीवाल-सिसोदिया के खिलाफ HC में नई याचिका,...

होमताजा खबरदेश जज स्‍वर्णकांता की अवमानना की… केजरीवाल-सिसोदिया के खिलाफ HC में नई याचिका, क्‍या है मांग? Last Updated:May 19, 2026, 20:37 IST दिल्ली आबकारी नीति मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के शीर्ष नेतृत्व की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है. सतीश कुमार अग्रवाल द्वारा दायर इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन नेताओं ने अदालत की अवमानना की है और न्यायाधीश स्वर्णकांत शर्मा को जानबूझकर सोशल मीडिया के जरिए विवादों में घसीटा है. इसके साथ ही, याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग (ECI) से आम आदमी पार्टी का पंजीकरण रद्द करने के लिए निर्देश देने की भी गुहार लगाई है. दिल्ली हाई कोर्ट इस बेहद संवेदनशील मामले पर कल यानी 20 मई को सुनवाई करने के लिए तैयार है. यह ख़बर बिल्कुल अभी आई है और इसे सबसे पहले आप News18Hindi पर पढ़ रहे हैं. जैसे-जैसे जानकारी मिल रही है, हम इसे अपडेट कर रहे हैं. ज्यादा बेहतर एक्सपीरिएंस के लिए आप इस खबर को रीफ्रेश करते रहें, ताकि सभी अपडेट आपको तुरंत मिल सकें. आप हमारे साथ बने रहिए और पाइए हर सही ख़बर, सबसे पहले सिर्फ Hindi.News18.com पर… यह ख़बर बिल्कुल अभी आई है और इसे सबसे पहले आप News18Hindi पर पढ़ रहे हैं. जैसे-जैसे जानकारी मिल रही है, हम इसे अपडेट कर रहे हैं. ज्यादा बेहतर एक्सपीरिएंस के लिए आप इस खबर को रीफ्रेश करते रहें, ताकि सभी अपडेट आपको तुरंत मिल सकें. आप हमारे साथ बने रहिए और पाइए हर सही ख़बर, सबसे पहले सिर्फ Hindi.News18.com पर… News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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और 30 द‍िनों के ल‍िए ठहर गए जज साहब… गहरी माथा पच्‍ची...

नई द‍िल्‍ली. गुजरात के गांधीनगर की एक सिविल कोर्ट ने पहली बार ऐसा बड़ा फैसला दिया है जिसमें कहा गया कि किसी व्यक्ति के Apple iCloud अकाउंट में रखा गया डिजिटल डेटा भी उसकी संपत्ति माना जाएगा. यानी अगर किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो उसके फोन और iCloud में मौजूद फोटो, वीडियो, डॉक्यूमेंट, कॉन्टैक्ट्स और दूसरे डिजिटल रिकॉर्ड भी उसकी विरासत का हिस्सा होंगे. कोर्ट ने यह फैसला देने से पहले अखबरों में एक व‍िज्ञापन द‍िया और 30 द‍िनों के इंतजार के बाद द‍िया ऐत‍िहास‍िक फैसला मामला क्या था?लाइव लॉ की र‍िपोर्ट के अनुसार, गांधीनगर के रहने वाले शैशव शाह की 24 अप्रैल 2025 को बिना वसीयत के मौत हो गई. उनके पास Apple iPhone 13 Pro Max और उससे जुड़ा iCloud अकाउंट था. उनकी पत्नी और बेटी ने कोर्ट में याचिका दायर की. उनका कहना था कि फोन और iCloud में परिवार की कई महत्वपूर्ण चीजें थीं— – निजी फोटो और वीडियो– जरूरी डॉक्यूमेंट्स– वॉयस नोट्स– कॉन्टैक्ट लिस्ट– भावनात्मक यादें उन्होंने कोर्ट से मांग की कि उन्हें मृतक की डिजिटल संपत्ति का कानूनी अधिकार दिया जाए ताकि वे एपलसे डेटा एक्सेस कर सकें. एपल ने क्या कहा?परिवार ने एपलसे संपर्क किया तो कंपनी ने कहा:- – iCloud डेटा तक पहुंच देने के लिए कोर्ट का आदेश जरूरी होगा.– केवल कानूनी प्रतिनिधि ही डेटा मांग सकता है.– कोर्ट यह घोषित करे कि मृतक अकाउंट का असली यूजर था.– मांग करने वाला व्यक्ति उसका वैध प्रतिनिधि है.– एपल को डेटा एक्सेस देने में मदद करनी होगी.यानी बिना कोर्ट आदेश के एपल डेटा नहीं दे सकता था. कोर्ट ने क्या फैसला दिया? तीसरे एडिशनल सीनियर सिविल जज हिमांशु चौधरी ने कहा कि iCloud में मौजूद डिजिटल डेटा एक ‘कीमती डिजिटल एसेट’ है और यह मृतक की संपत्ति का हिस्सा माना जाएगा. कोर्ट ने माना कि भारतीय कानूनों में ‘प्रॉपर्टी’ की परिभाषा इतनी व्यापक है कि उसमें डिजिटल डेटा भी शामिल किया जा सकता है. कोर्ट ने किन कानूनों का सहारा लिया?कोर्ट ने कई कानूनों और सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला दिया: 1. Indian Succession Act : इस कानून के तहत किसी मृत व्यक्ति की संपत्ति का प्रशासन किया जाता है. 2. General Clauses Act 1897: इसमें ‘चल संपत्ति’ की परिभाषा काफी व्यापक है. 3. Prevention of Money Laundering Act (PMLA) : इसमें ‘प्रॉपर्टी’ शब्द का दायरा बहुत बड़ा माना गया है. 4. Income Tax Act : इस कानून में Virtual Digital Assets को मान्यता दी गई है. 5. सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले – कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी ‘प्रॉपर्टी’ शब्द की उदार व्याख्या कर चुका है. कोर्ट ने आगे क्या किया? कोर्ट ने अखबार में पब्लिक नोटिस छपवाया ताकि अगर किसी और को संपत्ति पर दावा करना हो तो वह आपत्ति दर्ज करा सके. 30 दिन तक कोई आपत्ति नहीं आई. इसके बाद कोर्ट ने बेटी को मृतक की संपत्ति का एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त करने का रास्ता साफ किया. यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?यह फैसला इसलिए ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि पहली बार किसी भारतीय कोर्ट ने साफ तौर पर डिजिटल डेटा को संपत्ति माना. भविष्य में सोशल मीडिया अकाउंट, क्लाउड डेटा, क्रिप्टो, NFTs जैसी चीजों पर भी असर पड़ सकता है.– अब परिवार मृत व्यक्ति के डिजिटल डेटा पर कानूनी अधिकार मांग सकेंगे– डिजिटल विरासत (Digital Inheritance) को लेकर नया कानूनी रास्ता खुला है Source link

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1971 का युद्ध, तेल कंपनियों ने सेना को ईंधन देने से किया...

1971 की बांग्लादेश युद्ध की रात. भारतीय नौसेना और वायुसेना को तेल चाहिए था. भारत में तेल का सारा कारोबार तब अमेरिकी और ब्रिटिश कंपनियों के हाथों में था. इन विदेशी तेल कंपनियों ने ईंधन देने से इनकार कर दिया. क्योंकि ये कंपनियां अमेरिका के हाथों में खेल रही थीं. वही कर रही थीं जो अमेरिका चाहता था. पाकिस्तान उसका मित्र देश था. तब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ऐसा कदम उठाया कि युद्ध में तेल की कोई कमी नहीं रहे. बाद में विदेशी तेल कंपनियों की कमर भी तोड़ी. ये देश की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा बहुत ही संवेदनशील वाकया था. ये घटना भारत के ईंधन संकट और विदेशी तेल कंपनियों की मनमानी से भी जुड़ी है, जिसने भारत सरकार को बहुत बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर किया. 1971 के समय भारत में पेट्रोलियम सेक्टर पर मुख्य रूप से विदेशी कंपनियों का कब्ज़ा था. इनमें अमेरिका की बर्मा शैल, एस्सो और काल्टैक्स जैसी बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां शामिल थीं. ओएनजीसी शुरुआती दौर में थी. लिहाजा सेना और देश की ज़रूरत के ईंधन के लिए भारत काफी हद तक इन्हीं विदेशी रिफाइनरियों पर निर्भर था. आजादी के बाद भारत के तेल सेक्टर पर विदेशी तेल कंपनियों बर्मा शैल, एस्सो और काल्टैक्स का कब्जा था. (News18 AI Image) जब दिसंबर 1971 में युद्ध छिड़ा तो भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों और नौसेना के युद्धपोतों के लिए ईंधन की मांग अचानक बहुत बढ़ गई. चूंकि अमेरिका उस युद्ध में खुलकर पाकिस्तान का समर्थन कर रहा था. अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और हेनरी किसिंजर भारत के खिलाफ थे. इसलिए अमेरिकी दबाव में इन विदेशी तेल कंपनियों ने भारतीय सेना को अतिरिक्त तेल की सप्लाई करने से मना कर दिया. आनाकानी शुरू कर दी. उनका तर्क था कि वे युद्ध जैसे हालातों में अपनी सामान्य क्षमता से अधिक तेल रिफाइन या सप्लाई नहीं कर सकते. तब इंदिरा सरकार और इंडियन ऑयल ने मोर्चा संभाला विदेशी कंपनियों के इस असहयोग ने भारतीय सेनाओं के सामने एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया. आपातकालीन स्थिति में भारत की अपनी सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने मोर्चा संभाला. इंडियन ऑयल ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी. युद्धस्तर पर काम करते हुए वायुसेना और नौसेना के ठिकानों तक ईंधन की लगातार सप्लाई सुनिश्चित की. तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने युद्ध खत्म होने के बाद विदेशी तेल कंपनियों को टेकओवर करने का कानून बनाया. 1974 से 1976 के बीच वो इनके नेशनलाइजेशन के लिए संसद में बिल लेकर आईं. (News18 AI Image) युद्ध के बाद उठाया ये कदम भारतीय अधिकारियों और इंजीनियर्स ने दिन-रात काम करके लॉजिस्टिक्स को संभाला ताकि युद्ध के मोर्चे पर एक भी विमान या जहाज ईंधन की कमी से रुकने न पाए. इस घटना ने भारत सरकार की आंखें खोल दीं. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके रणनीतिकारों को समझ आ गया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए विदेशी तेल कंपनियों पर निर्भर रहना बेहद खतरनाक है. युद्ध खत्म होने के बाद सरकार ने इन कंपनियों पर नकेल कसने का फैसला किया. बाद में एक कानून बनाकर इंदिरा सरकार ने विदेशी तेल कंपनियों का अधिग्रहण कर लिया.– एस्सो का अधिग्रहण करके उसे हिंदुस्तान पेट्रोलियम में बदला गया– बर्मा शैल का राष्ट्रीयकरण कर भारत पेट्रोलियम (BPCL) बनायी गई– काल्टैक्स को हिंदुस्तान पेट्रोलियम में मिला दिया गया विदेशी तेल कंपनियों का टेकओवर 1971 का यह वाकया भारत के इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट माना जाता है, जिसने देश को पेट्रोलियम क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने और ऊर्जा सुरक्षा को अपने हाथों में लेने के लिए प्रेरित किया. इस ऐतिहासिक घटना का ज़िक्र भारत सरकार के आधिकारिक दस्तावेज़ों, संसदीय बहसों, नीतिगत रिपोर्टों और कई महत्वपूर्ण किताबों में मिलता है. भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स में स्पष्ट दर्ज़ है कि 1971 के युद्ध के समय विदेशी कंपनियों का रवैया राष्ट्रीय हित के अनुकूल नहीं था. जब 1974 से 1976 के बीच इंदिरा गांधी सरकार इन विदेशी कंपनियों के टेकओवर के लिए संसद में बिल लेकर आई थी, तब बकायदा इसके कारणों में ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ और ‘युद्ध के समय विदेशी कंपनियों के असहयोग’ को मुख्य आधार बनाया गया. ब्रिटेन ने विरोध दर्ज कराया जब इंदिरा गांधी ने ब्रिटिश और अमेरिकी तेल कंपनियों का राष्ट्रीयकरण किया तो क्या हुआ. क्या ब्रिटेन और अमेरिका से धमकियां मिलीं. ये एक बड़ा और दिलचस्प सवाल है. ब्रिटिश सरकार ने कूटनीतिक विरोध दर्ज किया. लेकिन खुली धमकी देने की हिम्मत नहीं थी. 70 के दशक की शुरुआत में पूरी दुनिया में राष्ट्रीयकरण की लहर चल रही थी. अल्जीरिया, लीबिया, इराक, सऊदी अरब सभी अपनी-अपनी तेल कंपनियां वापस ले रहे थे. भारत अकेला नहीं था. खुली धमकियां नहीं दे सकने के बाद पश्चिमी कंपनियों ने मुआवज़े की लड़ाई लड़ी. ये सालों तक खिंची. भारत ने उनकी शर्तों पर नहीं, अपनी शर्तों पर मुआवज़ा दिया. संसद में तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री के. डी. मालवीय द्वारा दिए भाषणों में ब्योरा है कि युद्ध और संकट के समय ये कंपनियां देश की संप्रभुता के सामने अड़चन बन रही थीं. कई प्रसिद्ध लेखकों, पत्रकारों और इतिहासकारों ने अपनी किताबों में इस घटनाक्रम को विस्तार से लिखा है. भारत के ‘पेट्रोलियम क्रांति के जनक’ कहे जाने वाले पूर्व मंत्री के. डी. मालवीय के कार्यकाल और उनके निर्णयों पर लिखी गई किताबों में ब्योरा है कि कैसे 1971 में अमेरिकी दबाव के कारण एस्सो ने भारतीय रिफाइनरियों के लिए क्रूड ऑयल लाने और सेना को स्पेशल एविएशन फ्यूल देने में हाथ खड़े कर दिए थे. पूर्व रॉ अधिकारी बी. रमन की किताब “द काव ब्वाएज ऑफ रॉ” (The Kaoboys of R&AW) ने अपनी किताब में इस बारे में लिखा. देश तो आजाद हुआ लेकिन तेल गोरों के पास था वैसे इसकी भी कहानी है कि कैसे 1947 में देश तो आजाद हुआ लेकिन तेल पर कंट्रोल विदेशी कंपनियों के पास ही था. आज़ादी के बाद नेहरू सरकार ने देखा कि देश का पूरा तेल उद्योग विदेशी कंपनियों के एकाधिकार में है. ब्रिटिश कंपनियाॉं बर्मा शैल और अमेरिकी कंपनियां स्टैंडर्ड वैकुम और कॉलटैक्स तेल बेचती थीं. कोई स्वदेशी तेल उद्योग लगभग था ही नहीं. नेहरू ने इन्हीं कंपनियों से भारत में रिफाइनरी बनाने को कहा. पहले तो इन्होंने मना कर दिया. उनका तर्क

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क्या मनमोहन सिंह के रास्ते पर चलेंगे PM मोदी? – News18 हिंदी

X Rubika Liyaquat Show: क्या मनमोहन सिंह के रास्ते पर चलेंगे PM मोदी?   Rubika Liyaquat Show: आज पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने एक बार फिर आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाला है. ताजा अपडेट के मुताबिक पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा हो गया है और ये सिर्फ एक दिन की बात नहीं है, पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. पिछले 5 दिनों में ही पेट्रोल करीब ₹3.87 और डीजल ₹3.51 तक महंगा हो चुका है. ऐसे में साफ है कि ट्रांसपोर्ट से लेकर रसोई तक हर चीज़ की लागत बढ़ने वाली है. क्योंकि पेट्रोल-डीजल सिर्फ गाड़ी में नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन की रीढ़ हैं. सरकारी और आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाला हर उतार-चढ़ाव सीधे भारत पर असर डालता है. अभी ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें लगभग 105 से 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं. यही नहीं, हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय तनाव और सप्लाई में अनिश्चितता की वजह से कीमतों पर और दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. अगर हालात बिगड़ते हैं तो तेल के दाम और ऊपर जा सकते हैं, जिसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा. अब सवाल ये उठता है कि इसका असर कहां-कहां दिखेगा? पेट्रोल-डीजल महंगे होने का मतलब है कि ट्रक का किराया बढ़ेगा, ट्रांसपोर्ट महंगा होगा और फिर सब्ज़ी, दूध, अनाज, गैस सिलेंडर और रोजमर्रा की चीज़ों की कीमतें भी ऊपर जाएंगी. इसी बीच प्रधानमंत्री के हालिया बयान को लेकर भी चर्चा तेज है, जिसमें उन्होंने वैश्विक संकट और बदलते हालातों की ओर इशारा किया था. हालांकि सरकार की तरफ से साफ किया गया है कि यह स्थिति वैश्विक कारणों से जुड़ी हुई है और इसमें भारत अकेला नहीं है, कई देश इसी दबाव का सामना कर रहे हैं. अब एक बड़ा सवाल यह भी है कि सरकार राहत कैसे दे सकती है? विशेषज्ञ मानते हैं कि वैट में कटौती, टैक्स स्ट्रक्चर में बदलाव, और वैकल्पिक ईंधन जैसे एथनॉल ब्लेंडिंग या इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा देकर कुछ हद तक राहत दी जा सकती है. लेकिन चूंकि भारत तेल आयातक देश है, इसलिए पूरी तरह नियंत्रण आसान नहीं माना जाता. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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PM Modi Norway Visit Live: पीएम मोदी ने फिनलैंड के प्रधानमंत्री संग...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉर्वे दौरे का मंगलवार को दूसरा और अहम दिन है. पीएम मोदी ओस्लो में आयोजित तीसरे इंडिया-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जहां नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के प्रधानमंत्रियों के साथ भारत के संबंधों को नई दिशा देने पर चर्चा होगी. यह प्रधानमंत्री मोदी की नॉर्वे की पहली यात्रा है और इसे भारत-नॉर्डिक रिश्तों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब भारत और नॉर्डिक देशों के बीच व्यापार, हरित ऊर्जा, तकनीक और निवेश के क्षेत्र में तेजी से सहयोग बढ़ रहा है. मई 2022 में कोपेनहेगन में हुए दूसरे इंडिया-नॉर्डिक समिट के बाद यह पहला बड़ा मंच है, जहां दोनों पक्ष पिछले समझौतों और साझेदारी की प्रगति की समीक्षा करेंगे. नॉर्डिक देश दुनिया में तकनीक, इनोवेशन, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ विकास के मॉडल माने जाते हैं. भारत इन देशों के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर लगातार जोर दे रहा है. दोनों पक्षों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार करीब 19 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. करीब 700 नॉर्डिक कंपनियां भारत में सक्रिय हैं, जबकि लगभग 150 भारतीय कंपनियां नॉर्डिक देशों में कारोबार कर रही हैं. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, शिखर सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, ग्रीन ट्रांजिशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लू इकॉनमी, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सप्लाई चेन और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी. भारत नॉर्डिक देशों की तकनीकी विशेषज्ञता और निवेश क्षमता को अपने विकास कार्यक्रमों से जोड़ना चाहता है. PM Modi Norway Visit Live: ओसलो में भारतीयों के बीच PM मोदी, आइसलैंड में ब्‍लू इकनॉमी और क्‍लीन एनर्जी पर हुई बातचीत PM Modi Norway Visit Live: नॉर्वे की राजधानी ओसलो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की. इस दौरान लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. वहीं, PM मोदी ने क्रिस्ट्रून फ्रॉस्टाडोटिर के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की. दोनों नेताओं ने क्‍लीन एनर्जी, फिशरीज और स्‍टोरेज जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत, आइसलैंड के साथ दोस्ती को बेहद महत्व देता है. उन्होंने ब्‍लू इकनॉमी में आइसलैंड की विशेषज्ञता की सराहना की. साथ ही India-EFTA TEPA समझौते से व्यापार और निवेश संबंध मजबूत होने की उम्मीद जताई. PM Modi Norway Visit Live: पीएम मोदी और आइसलैंड की पीएम क्रिस्ट्रून फ्रॉस्टाडोटिर की मुलाकात, क्लीन एनर्जी और ब्लू इकोनॉमी पर हुई चर्चा PM Modi Norway Visit Live: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रून फ्रॉस्टाडोटिर के साथ एक बेहद सफल द्विपक्षीय बैठक की. इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने भारत और आइसलैंड के बीच मजबूत मैत्रीपूर्ण संबंधों को रेखांकित करते हुए क्लीन एनर्जी, जियोथर्मल एनर्जी, फिशरीज, सस्टेनेबिलिटी और कार्बन कैप्चर जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की. पीएम मोदी ने ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्र में आइसलैंड की विशेषज्ञता की सराहना की. इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐतिहासिक भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA) दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक संबंधों को एक नई गति प्रदान करेगा.   PM Modi Norway Visit Live: डेनमार्क की पीएम मेटे फ्रेडरिक्सन से मिले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ओस्लो में ग्रीन ट्रांजिशन और द्विपक्षीय व्यापार पर हुई चर्चा PM Modi Norway Visit Live: तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की. इस उच्च स्तरीय वार्ता में दोनों नेताओं ने भारत और डेनमार्क के बीच व्यापार, निवेश, हरित परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर गहन चर्चा की. यह बैठक दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम देने की दिशा में एक अहम कदम है. PM Modi Norway Visit Live: पीएम मोदी ने फिनलैंड के प्रधानमंत्री संग की बैठक, आपसी रिश्तों को मजबूती पर हुई बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेट्टेरी ऑर्पो के साथ द्विपक्षीय बैठक की. यह बैठक तीसरे इंडिया-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के इतर हुई, जिसमें भारत और नॉर्डिक देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिए जाने की उम्मीद है. प्रधानमंत्री मोदी और पीएम ऑर्पो ने भारत-फिनलैंड संबंधों को नई दिशा देने और तकनीक व नवाचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई. PM Modi Norway Visit Live: प्रधानमंत्री मोदी काफी लोकप्रिय, वैश्विक मंच पर भारत को दिलाया अहम स्थान- नॉर्वे के विदेश मंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्त आईडे ने भारत का लोकप्रिय और प्रभावशाली राजनेता बताया है. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने भारत को वैश्विक मंच पर एक मजबूत और महत्वपूर्ण स्थान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के ओस्लो दौरे को सफल और बेहद उपयोगी बताया. इस दौरान भारत और नॉर्वे के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई और नवाचार से लेकर ग्रीन ग्रोथ तक कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी. मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच बनी यह साझेदारी भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत करेगी तथा सतत विकास और पर्यावरण अनुकूल विकास की दिशा में मिलकर काम करने में मदद करेगी. PM Modi Norway Visit Live: बेहद फलदायी रही नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ बैठक- पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री योनस गार स्टोरे के साथ ओस्लो में हुई बैठक को बेहद फलदायी बताया है. पीएम मोदी ने कहा कि इस मुलाकात की सबसे अहम उपलब्धि भारत और नॉर्वे के रिश्तों को ‘ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ तक अपग्रेड करना रहा. इससे स्वच्छ ऊर्जा, टिकाऊ विकास, ब्लू इकोनॉमी और ग्रीन शिपिंग जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को नई मजबूती मिलेगी. प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि भारत और नॉर्वे ने नवाचार, रिसर्च, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) में नॉर्वे का शामिल होना खुशी की बात है और इससे समुद्री सहयोग को नई दिशा मिलेगी. PM Modi Norway Visit Live: पीएम मोदी ने इंडिया-नॉर्वे के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग पर दिया जोर इंडिया-नॉर्डिक समिट से पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को ओस्लो में इंडिया-नॉर्वे

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चारों तरफ धधकती आग, बीच में संत की साधना… जालोर में इस...

Last Updated:May 19, 2026, 15:30 IST Jalore Saint Tapasya : राजस्थान के जालौर में भीषण गर्मी और जलती अग्नि के बीच संत शक्ति नाथ की कठोर तपस्या इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. 42 डिग्री तापमान में उपलों की आग के बीच साधना कर रहे संत के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. शिव शक्ति धूणा पर भजन-कीर्तन और भक्तिमय माहौल के बीच यह तपस्या धर्म रक्षा, एकता और क्षेत्र की खुशहाली का संदेश दे रही है. ख़बरें फटाफट जालौर : राजस्थान की भीषण गर्मी… 42 डिग्री का पारा… और चारों ओर जलती अग्नि के बीच संत शक्ति नाथ की कठोर तपस्या इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. नारणावास-जागनाथ रोड स्थित शिव शक्ति धूणा पर संत शक्ति नाथ उपलों की जलती अग्नि के बीच लगातार साधना में लीन हैं. तेज धूप, तपती हवाएं और आग की लपटें भी उनकी एकाग्रता और आस्था को जरा भी विचलित नहीं कर पा रही हैं. इस अद्भुत तपस्या को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं. महिलाएं, बुजुर्ग और युवा रोजाना शिव शक्ति धूणा पर आकर दर्शन कर रहे हैं और अपने परिवार व क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं. पूरा परिसर इन दिनों भक्तिमय माहौल में डूबा हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि इतनी भीषण गर्मी और अग्नि के बीच लगातार बैठकर साधना करना किसी सामान्य व्यक्ति के लिए संभव नहीं है. लोग इसे संत शक्ति नाथ की आध्यात्मिक शक्ति, तप और अटूट श्रद्धा का प्रतीक मान रहे हैं. अग्नि तप में संत शक्ति नाथ, धर्म रक्षा का संकल्पवहीं, तपस्या स्थल पर भजन-कीर्तन का दौर भी लगातार जारी है. दिनभर श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आते हैं और स्थानीय लोग व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहे हैं, जिससे यहां आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी न हो. अग्नि के बीच संत शक्ति नाथ की तपस्या, उद्देश्य – धर्म की रक्षा और क्षेत्र की खुशहाली….एक स्थानीय निवासी ने लोकल 18 को बताया कि, संत शक्तिनाथ महाराज ये तपस्या इसलिए कर रहे हैं कि हमारा हिंदू धर्म हमेशा संगठित रहे और हमारे जालोर क्षेत्र में सुख-समृद्धि बनी रहे. वो चाहते हैं कि समाज में एकता बनी रहे और सभी लोग धर्म के रास्ते पर चलें. शक्ति नाथ की तपस्या बनी आस्था और एकता का संदेशसंत शक्ति नाथ की यह तपस्या केवल एक साधना नहीं, बल्कि समाज को एकजुट रहने और आस्था के प्रति समर्पित रहने का संदेश भी दे रही है. यही कारण है कि दिन-ब-दिन यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है और हर कोई इस अनोखी तपस्या का साक्षी बनना चाहता है. About the Author Rupesh Kumar Jaiswal A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at News18 India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jalor,Rajasthan Source link

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