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hurry up: बम्पर छूट में जमकर लूट, कप से लेकर डिनर सेट...

होमफोटोमनी hurry up: बम्पर छूट में जमकर लूट, कप से लेकर डिनर सेट तक, ऑनलाइन और मॉल से भी Last Updated:July 19, 2024, 21:23 IST गोड्डा के डिजनीलैंड मेला में रसोई के चिमनी के बर्तनों की कई सारी अलग और अनोखी आइटम मिलेंगे. जो की मात्र 60 रुपए की शुरुआती कीमत से शुरू है. इस दुकान में खासकर महिलाओं की अधिक भीड़ लग रही है. जो कि अपने रसोई के लिए आकर्षक चीज़े बाजार से सस्ती कीमत पर ले रही है. गोड्डा के डिजनीलैंड मेला में रसोई के चिमनी के बर्तनों की कई सारी अलग और अनोखी आइटम मिलेंगे. जो की मात्र 60 रुपए की शुरुआती कीमत से शुरू है. इस दुकान में खासकर महिलाओं की अधिक भीड़ लग रही है. जो कि अपने रसोई के लिए आकर्षक चीज़े बाजार से सस्ती कीमत पर ले रही है. इस दुकान में मौजूद हर एक आइटम इतना खूबसूरत है कि जिससे आपके घर आए मेहमानों के सामने आपकी या डिनर सेट काफ़ी खूबसूरत होगी. डिनर सेट के अलावा मेले के इस स्टाल में चिमनी मिट्टी और शीशे के कई अलग-अलग डिजाइन के कप सेट, शीशे का गिलास, टी ट्रे, रसोई के लिए कई प्रकार के बर्तन उपलब्ध हैं. जो कि आपको बाजारों में या ऑनलाइन भी मिलना मुश्किल है .वहीं अगर आप इन बर्तनों को ऑनलाइन की खरीदारी करेंगे तो उसकी कीमत आपको इस स्टाल के मुकाबले दुगनी से तिगुनी पड़ जाएगी. इसके साथ इस स्टॉल में कई खूबसूरत कलेक्शन भी आया हुआ है जो की पूरी तरह से लेटेस्ट है. जिसमें बच्चों को दूध पिलाने का शीशे का ग्लास, फैमिली पैक ट्रे, के साथ कई आकर्षक और अनोखे आइटम आए हुए है. दुकान के संचालक आलोक कुमार ने लोकल 18 को बताया कि इस दुकान में मौजूद हर एक आइटम बंगाल का है. जो कि सीधे अलग-अलग फैक्ट्री से लाई गई है. इसी वजह से इस स्टाल में बिकने वाला हर एक समान ग्राहकों को सस्ती कीमत पर दिया जा रहा है. जहां 6 पीस का डिनर सेट मात्र 350 रुपए में दिया जा रहा है. Add News18 as Preferred Source on Google वहीं अगर इस डिनर सेट को बाजारों में खरीदने जाएंगे या फिर ऑनलाइन खरीदारी करेंगे तो आपको हजार से 1200 रुपए के आसपास पड़ जाएगा. इसके साथ यहां मिलने वाला कप सेट सबसे अधिक कीमत में मात्र 150 रुपए में 6 पीस दिया जा रहा है जो की बाजारों में 600 रूपए के क़रीब में मिलेगा. इस दुकान में डिनर सेट खरीदने आई महिला पार्वती देवी ने बताया कि उनकी बेटी की शादी है. उन्हें घर में मेहमानों के मेहमान नवाजी के लिए डिनर सेट की आवश्यकता थी, जो की उन्हें मात्र 600 रुपए में मिल गया. जिसकी कीमत मॉल में उन्हें 900 रुपए बताई गई थी. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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कहानी एक आत्मनिर्भर युवा की, नौकरी छोड़ शुरू कर दिया कारोबार, इस...

होमफोटोमनी कहानी एक आत्मनिर्भर युवा की, नौकरी छोड़ शुरू कर दिया कारोबार, इस जगह को बना दि Last Updated:July 20, 2024, 21:55 IST उज्जवल कुमार सिंह ने बताया कि मछली का बिजनेस काफी अच्छा है. मछली का कारोबार करने वाले लोग बेचकर मोटी कमाई करते हैं. उन्होंने बताया कि पहले मैं मत्स्य विभाग में अधिकारी के पद पर कार्यरत था. मैंने अपने यहां 50 एकड़ में पोखर खुदवाकर मछली पालन करने की योजना बनाई है. छपरा में बड़े पैमाने पर मछली पालन करने का कार्य एक युवा के द्वारा शुरू किया गया है. सारण के अमनौर प्रखंड अंतर्गत शहरी गांव में 50 एकड़ जमीन पर मछली पालन करने का काम शुरू हो चुका है. फिलहाल 15 पोखर खुदाई कर उसमें मछली छोड़ दी गई है अभी पोखर की खुदाई काम जारी है. बिहार की यह जगह मछली पालने की मामले में आने वाले दिनों में सबसे बड़ा हब होगी. 1 हजार से अधिक युवाओं को यहां रोजगार मिलेगा. यह रोजगार उज्जवल कुमार सिंह के द्वारा शुरू किया गया है. जो पूर्व में मत्स्य विभाग में अधिकारी के पद पर कार्यरत थे. बिहार के युवाओं को रोजगार देने के उद्देश्य से मत्स्य विभाग से रिजाइन देकर मछली पालने का कारोबार उनके द्वारा शुरू किया गया है. उज्जवल कुमार सिंह ने बताया कि मछली का बिजनेस काफी अच्छा है. मछली का कारोबार करने वाले लोग बेचकर मोटे कमाई करते हैं. उन्होंने बताया कि पहले मैं मत्स्य विभाग में अधिकारी के पद पर कार्यरत थे. मैंने अपने यहां 50 एकड़ में पोखर खुदवाकर मछली पालन करने की योजना बनाई है. यह प्रोजेक्ट काफी बड़ा है. जिसके अंतर्गत एक हजार से अधिक युवाओं को रोजगार मिलेगा. जिससे अच्छी कमाई कर सकते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google उन्होंने कहा कि अगर किसी युवा को मछली पालन का शौक है. तो मेरे पास आए उन्हें फ्री प्रशिक्षण दूंगा. उन्होंने यह भी कहा कि बिना जानकारी के मछली पालन न करें, नहीं तो भारी नुकसान हो सकता है. फिलहाल 15 एकड़ में पोखर खुदवाकर मछलियां छोड़ी हैं. आने वाले दिन में 50 एकड़ की जमीन पर पोखर खुदाई कर मछलियां पाली जाएगी. उन्होंने बताया कि नालंदा में 20 एकड़ जमीन पर पोखर की खुदाई कर मछली पालन करने का कार्य चल रहा है. छपरा में 500 एकड़ की जमीन पर आने वाले दिन में मछली पालन करने का कार्य शुरू होगा. मैं सारण को सबसे बड़ा मछली पालन का हब बनाना चाहता हूं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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रशियन मिल्ट्री पहन रही ‘मेड इन बिहार’ शू, माइनस 40 डिग्री के...

होमफोटोमनी रशियन मिल्ट्री पहन रही ‘मेड इन बिहार’ शू, माइनस 40 डिग्री के तापमान में भी सुर Last Updated:July 22, 2024, 22:32 IST यहां का बना जूता दुनिया की सबसे खतरनाक आर्मी में शामिल रशियन मिल्ट्री पहन कर दुश्मनों के दांत खट्टे कर रही है. जी हां हाजीपुर औधोगिक क्षेत्र में इनकंपिटेन्स एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी पिछले 6 साल से लेदर के ऐसे जूते बना रही है. जिसकी सप्लाई रशियन आर्मी को की जा रही है और अब तक हजारों जोड़ी जूते निर्यात किए जा चुके हैं. बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की जा रही है. जिसकी वजह है कि बिहार को एक पिछड़ा प्रदेश माना जाता है. लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बिहार में ऐसे ऐसे काम हो रहे हैं, जिससे यह पिछड़ा प्रदेश भी दुनिया मे अपनी पहचान कायम कर रहा है. कुछ ऐसा ही काम इस बार बिहार के हाजीपुर में भी देखने को मिल रहा है. यहां का बना जूता दुनिया की सबसे खतरनाक आर्मी में शामिल रशियन मिल्ट्री पहन कर दुश्मनों के दांत खट्टे कर रही है. जी हां हाजीपुर औधोगिक क्षेत्र में इनकंपिटेन्स एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी पिछले 6 साल से लेदर के ऐसे जूते बना रही है. जिसकी सप्लाई रशियन आर्मी को की जा रही है और अब तक हजारों जोड़ी जूते निर्यात किए जा चुके हैं. दरअसल, इस कंपनी में 200 से अधिक महिला पुरुष वर्कर दिन रात मेहनत कर लेदर के सेफ्टी जूते बना रहे है. आलम यह है कि यहां के बने जूते पहनकर आप माइनस 40 डिग्री के तापमान में भी सुरक्षित रह सकते है और यह बड़ी वजह है कि रशियन मिल्ट्री को हाजीपुर के जूतों की जरूरत पड़ती है. Add News18 as Preferred Source on Google कारखाने में लेदर के कटिंग से लेकर उसे बनाने तक मे अत्याधुनिक मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है. खास बात यह है कि ठंड से बचाव के लिए जूते के ऊपरी हिस्से में फर लगाया जाता है. इतना ही नहीं यह जूता सुरक्षा के सभी मानकों पर शत प्रतिशत खड़ा उतरता है जिसके कारण ही हाजीपुर का जूता रशियन आर्मी को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. अगले साल 100 करोड़ रुपये के टर्न ओवर है. जिसे बढ़ा कर 50 प्रतिशत अधिक करना है. इस कम्पनी की चर्चा अब देश लेबल पर हो रही है. इस कम्पनी में 70 प्रतिशत महिलाएं काम कर रही हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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इस हैंडमेड के सामने फेल हैं ब्रांडेड प्रोडक्ट, कहीं देखी है कोसी...

होमफोटोमनी इस हैंडमेड के सामने फेल हैं ब्रांडेड प्रोडक्ट, कहीं देखी है कोसी घास और खजूर प Last Updated:July 23, 2024, 20:57 IST सबर समुदाय के लोग घास और पत्ते से घर में रखी जाने वाली सजावटी चीजें और रोजमर्रा के काम में आने वाले उत्पाद बनाते हैं. शत-प्रतिशत ऑर्गेनिक और हाथों से की गई यह शिल्पकारी आपका मन मोह लेगी. झारखंड की लौहनगरी जमशेदपुर से मात्र 60 किलोमीटर दूर स्थित पुरुलिया गांव इन दिनों हैंडमेड प्रोडक्ट की वजह से मशहूर हो रहा है. इन प्रोडक्ट्स को बनाने वाले हैं सबर समुदाय के लोग, जिनके हाथों की कारीगरी देखते ही बनती है. सबर हस्तशिल्प, अब झारखंड से निकलकर पूरे भारत में पहचाना जा रहा है. सबर हस्तशिल्प के जरिये पुरुलिया गांव को इस मुकाम तक लाने का श्रेय जाता है प्रभाकर नाम के शख्स को. वे लोगों को कोसी घास और खजूर के पत्ते से शिल्पकारी सिखाते हैं. फिर इससे घर की सजावट और काम की चीजें बनाई जाती हैं. इन चीजों की खूबसूरती आपका मन मोह लेगी. प्रभाकर के मुताबिक सबर हस्तशिल्प में हाथ से बनाए गए इन प्रोडक्ट्स में राउंड बॉक्स, फ्लावर पॉट, पेंसिल बॉक्स, वॉल मैट, हैंडबैग, लैंप कवर, टेबल ट्रे, टेबल मैट जैसी चीजें शामिल हैं. इसके अलावा फाइल कवर और अन्य काम की चीजें भी खजूर के पत्तों और कोसी घास बनाई जाती हैं. Add News18 as Preferred Source on Google इन प्रोडक्ट्स की कीमत मात्र 90 रुपए से 350 रुपए तक होती है. जो प्रॉफिट होता है, वह समुदाय के विकास में लगाया जाता है. प्रभाकर ने बताया कि इस उद्यम का मकसद सबर समुदाय को न केवल आर्थिक रूप से मजबूत करना है, बल्कि उनके जीवन में सुधार लाना भी है. उन्होंने लोकल18 को बताया कि अगर कोई व्यक्ति सबर हस्तशिल्प के इन प्रोडक्ट्स को खरीदना चाहता है, तो इस फोन नंबर 8116059371 पर संपर्क कर सकता है. इन प्रोडक्ट्स की अवधि 8 से 10 साल होती है. बस पानी से बचाकर रखना होता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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सॉफ्टवेयर डेवलपर की जॉब छोड़ शुरू की डेयरी फार्मिंग, दूध और अंडे...

होमफोटोमनी सॉफ्टवेयर डेवलपर की जॉब छोड़ शुरू की डेयरी फार्मिंग, दूध और अंडे से कमा लेते ह Last Updated:July 24, 2024, 21:31 IST डेरी फार्मिंग में सक्सेस के बाद उन्होंने प्रयोग के तौर पर देशी मुर्गी का बिजनेस शुरू किया जिसमें उन्हें कम लागत और मेहनत में अच्छा मुनाफा हुआ. अब डेयरी फार्मिंग के साथ ही छोटे से स्थान पर देशी मुर्गी का पालन करते है. आज के दौर में युवा खेती-किसानी से दूर ही रहना पसंद करते हैं. लेकिन, आज हम आपको एक ऐसे सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल के बारे में बताने जा रहे हैं, जो डेरी फार्मिंग (दूध उत्पादन) का बिजनेस कर, कामयाबी की एक नई इबारत लिख रहे हैं. यह कहानी छत्तीसगढ़ के कोरबा शहर मे रहने वाले गौरव यादव की है. गौरव 45000 रुपए की नौकरी छोड़ हैदराबाद से कोरबा लौटे और घर में पल रही 4 गायों से अपनी सफलता की नई शुरुआत की. गौरव यादव बताते हैं कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एमसीए की डिग्री लेने के बाद हैदराबाद की कंपनी मे बतौर सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल जॉब किया करते थे जहां उनकी महीने की इनकम 45000 रूपए हुआ करती थी. नौकरी में सीमित आय को देखते हुए उनके मन में बिजनेस का ख्याल पैदा हुआ और लौट आए अपने शहर कोरबा.यहां घर पर 4 गाये हुआ करती थी इन्हीं चार गायों से उन्होंने अपनी डेरी फार्मिंग की शुरुआत की. आज उनके पास देसी और विदेशी नस्ल की कुल 42 गाये है जिनके दूध से वे हर महीने 1 लाख 80 हज़ार रुपए के आसपास कमा लेते है. Add News18 as Preferred Source on Google डेरी फार्मिंग में सक्सेस के बाद उन्होंने प्रयोग के तौर पर देशी मुर्गी का बिजनेस शुरू किया जिसमें उन्हें कम लागत और मेहनत में अच्छा मुनाफा हुआ. अब डेयरी फार्मिंग के साथ ही छोटे से स्थान पर देशी मुर्गी का पालन करते है.उन्होंने बताया की देसी मुर्गी और उसके अंड्डे बेचकर महीने के लगभग 25000 की प्रॉफिट हो जाती है. गौरव यादव का मनना है कि डेरी फार्मिंग का बिजनेस शुरू करने की इच्छा रखने वाले युवाओं को संयम रखना जरूरी है. जब कोई इस बिजनेस को शुरुआत करता है तो कम से कम 2 वर्ष प्रॉफिट के बारे मे लालच ना रखे. पहले गायों की सेवा करें और फिर 2 साल के अंतराल में आपका बिजनेस बैलेंस हो जाएगा. जिससे आपको खर्च और बचत समझ आने लगेंगे. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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युवाओं के लिए मिसाल है ये आईटीआई मुर्गा वाला, कड़कनाथ और सोनाली...

होमफोटोमनी युवाओं के लिए मिसाल है ये आईटीआई मुर्गा वाला, कड़कनाथ और सोनाली से कर रहा लाखो Last Updated:July 24, 2024, 22:27 IST बेगूसराय के आईटीआई गोविंद कुमार ने नौकरी नहीं मिलने पर मुर्गा पालन की शुरुआत की . इन्होंने बताया 3 से 5 हज़ार के एक लोट को 5 महीने तक में तैयार करने के बाद 4 लाख तक का मुर्गा तैयार कर बेच लेते हैं. बिहार में काफी दिनों तक एमबीए चायवाला की चर्चा होती रही. इस नाम से कई जिलों में चाय के स्टाल भी खोले जाते रहे. लेकिन अब ट्रेडिंग में थोड़ा सा बदलाव दिख रहा है. आईटीआई करने के बाद युवा मुर्गा पालन की ओर कदम रख रहे हैं. बिहार के बेगूसराय जिले के गढ़हारा रेल यार्ड इलाके के रहने वाले गोविंद कुमार बेगूसराय के एक निजी आईटीआई कॉलेज से आईटीआई की पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार की तलाश में सिल्लीगुड़ी जाते हैं. लेकिन जब यहां रोजगार नहीं मिलता तो गांव जाकर मुर्गा पालन की शुरुआत छोटे स्तर से कर देते हैं. इससे वह सालाना लाखों की कमाई कर रहे हैं. आप भी मिलिए आईटीआई मुर्गा वाला से… बेगूसराय के आईटीआई मुर्गा वाला के नाम से मशहूर गोविंद कुमार ने लोकल 18 से बताया में पहले क्रिकेट प्रेमी था और इसके लिए तैयारी करने कोलकाता भी गया था. यहां रहकर तैयारी की फिर जिला स्तर तक क्रिकेट खेलने के बाद खेल की दुनिया से नाता तोड़ दिया. इसके बाद आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए बेगूसराय जिले के ही एक निजी आईटीआई कॉलेज से आईटीआई की पढ़ाई पुरी की . फिर नौकरी की तलाश में सिलीगुड़ी गया . Add News18 as Preferred Source on Google यहां पर नौकरी नहीं मिली, लेकिन मुर्गा पालन का आईडिया जरूर मिल गया. इसके बाद गांव आकर 20 कड़कनाथ और 20 सोनाली मुर्गा की प्रजाति 2 हजार रुपए में लाकर साल 2020 में ही अपने घरों के छत पर से शुरूआत की. गोविंद कुमार ने बताया वर्तमान समय में दिन भर अपने मुर्गा फार्म में अपनी मां के साथ समय देते हैं. इस दौरान मकई के मुर्गा दाना और हरा चारा का विशेष प्रयोग करते हैं. इनके मुताबिक हरा चारा देने से मुर्गा की इम्युनिटी मजबूत होती है . जिससे कीमत भी ज्यादा मिलती है. इन्होंने आगे बताया 5 महीने का एक लोट होता है. इस लोट में 3 हजार से 5 हजार सोनाली और कड़कनाथ मुर्गा का पालन कर बाजार के लिए तैयार करते हैं. इस दौरान लागत खर्च डेढ़ लाख तक आती है. लेकिन बाजार मूल्य 4 लाख तक मिल जाता है. ऐसे में जब कभी सहायता राशि की जरूरत पड़ती है तो मां जीविका से लेकर बेटे की समय समय पर मदद भी करते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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ब्रांडेड को टक्कर दे रहीं ये इमिटेशनल ज्वेलरी, शादी और फक्शन के...

होमफोटोमनी ब्रांडेड को टक्कर दे रहीं ये इमिटेशनल ज्वेलरी, रेंट पर लीजिए पूरा सेट Last Updated:July 27, 2024, 21:12 IST इमिटेशनल ज्वैलरी आजकल ट्रेंड में चल रही है. दुकानदार नीतीश बताते हैं कि ये ज्वैलरी कांच, प्लास्टिक, सिलिकॉन और ऐक्रेलिक इत्यादि से मिलकर बनी होती है. लेकिन दिखने में ये सोने,चांदी और हीरे आदि से बनी रियल ज्वैलरी को भी टक्कर देती हैं. बता दें कि इसकी शुरुआत 600 रुपए से होती है. सेलिब्रिटी से प्रेरित ज्वैलरी सेट की मांग बहुत ज़्यादा है. हालांकि, असली ज्वैलरी आम आदमी के बजट में फिट नहीं हो पाती है. इसलिए, आजकल इमिटेशनल ज्वैलरी का ट्रेंड काफी बढ़ गया है. यह ज्वैलरी कांच, प्लास्टिक, सिलिकॉन और ऐक्रेलिक जैसी सामग्रियों से बनाई जाती है. राजेंद्र नगर के ज्वेलकार्ट दुकान के दुकानदार नीतीश के अनुसार, यह ज्वैलरी दिखने में असली सोने, चांदी और हीरे की ज्वैलरी को टक्कर देती है. इसकी खास बात यह है कि इसकी शुरुआत महज 600 रुपये से होती है. बता दें कि आजकल शादियों में ज्यादातर लोग सेलिब्रिटी लुक की ज्वैलरी सेट पहनना पसंद कर रहे हैं. दुकानदार मोना की माने तो ज्यादातर ब्राइड कियारा आडवाणी और सोनाक्षी सिन्हा जैसी इमिटेशनल ज्वैलरी लेना पसंद कर रही है. ज्वेलकार्ट दुकान की दुकानदार मोना बताती हैं कई दुल्हनें कियारा आडवाणी और सोनाक्षी सिन्हा जैसी मशहूर हस्तियों द्वारा पहने जाने वाले नकली गहनों का चयन कर रही हैं. ये सेट न केवल किफ़ायती है, बल्कि इनमें ग्लैमर का भी जबरदस्त तड़का है. यही कारण है कि हाल के दिनों में नकली गहनों के बाज़ार में काफ़ी उछाल आया है. ज़्यादा से ज़्यादा ग्राहक अपने पसंदीदा सेलिब्रिटी लुक के नकली गहने पहनना चाहते हैं. इस चलन के पीछे की वजह है बिना ज़्यादा पैसे खर्च किए स्टार जैसा महसूस करना. Add News18 as Preferred Source on Google बता दें कि नकली गहने असली गहनों का किफ़ायती विकल्प देते हैं. जैसे जो ज्वैलरी सेट 2 लाख की है उसी की इमिटेशनल ज्वैलरी सेट आपको मात्र 5 से 6 हजार में मिल जाएगी. इसके अलावा आप चाहे तो ज्वैलरी को रेंट पर भी ले सकते हैं. इससे ये ज़्यादा से ज़्यादा ग्राहकों के लिए सुलभ हो जाते हैं. स्टोर में सेलिब्रिटी लुक से प्रेरित नकली गहनों के सेट की एक विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध है. कियारा आडवाणी के खूबसूरत नेकलेस से लेकर सोनाक्षी सिन्हा के बोल्ड इयररिंग तक इस स्टोर में सब कुछ है. वहीं, दुकानदार मोना का कहना है कि ग्राहक अलग-अलग स्टाइल और डिज़ाइन के साथ प्रयोग करने के लिए तैयार हैं, जिससे नकली गहने शादियों और पार्टियों जैसे खास मौकों के लिए एक लोकप्रिय विकल्प बन गए हैं. इसके साथ ही मेल ज्वैलरी की भी आकर्षक रेंज यहां उपलब्ध है जिसकी शुरूआत 600 रूपए से होती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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Sawan: महिलाओं की पहली पसंद बनी ये चूड़ियां, बिहार के इस शहर...

होमफोटोमनी महिलाओं की पहली पसंद बनी ये चूड़ियां, बिहार के इस शहर में लगती है लहठी मार्केट Last Updated:July 28, 2024, 18:51 IST Lahthi Market Muzaffarpur: हरे रंग की लहठीया सावन में खूब चलती हैं. इसकी मांग अधिक है. दिन रात कारीगर मिलकर लहठीया बना रहे हैं. हमारे पास 100 से लेकर 1,000 और 2,000 तक के रेंज की लहठी हैं. लोगों की जैसी डिमांड होती है वैसी लहठी बना कर दी जाती है. सावन जोरों पर है. सावन में शिवभक्ति के साथ दो ही चीजों की धूम रहती है. एक कांवड़ यात्रा की और दूसरे महिलाओं के श्रृंगार की. खासतौर से चूड़ियों के मार्केट में बहार रहती है. सावन में हरी भरी चूड़ियां महिलाओं के हाथ में सजती हैं. सावन में महिलाएं चूड़ी जरूर खरीदती हैं. खासतौर से मुजफ्फरपुर की लहठी तो हाथों हाथ बिकती है. इसकी डिमांड विदेश तक रहती है. इसलिए कारीगर रात दिन लहठी बनाने में व्यस्त हैं. अगर लाख के लहठी की बात आए तो मुजफ्फरपुर का नाम सबसे पहले आता है. यहां की लाख की लहठी विदेश तक में मशहूर है. इस साल भीसावन के लिए चूड़ी-लहठी दुकानदारों ने भी तैयारी पूरी कर ली है. यहां की इस्लामपुर मंडी इसी के लिए प्रसिद्ध है. शहर के अलावा बाहर से आने वाले कांवड़िए भी यहां आकर अपने घर की महिलाओं के लिए लहठी जरूर खरीदते हैं. लहठी कारोबारी मेराज गौरी बताते हैं सावन के लिए हमारी तैयारी पूरी है. हर साल की अपेक्षा इस साल डिमांड बढ़ गई है. हरे रंग की लहठीया सावन में खूब चलती हैं. इसकी मांग अधिक है. दिन रात कारीगर मिलकर लहठीया बना रहे हैं. हमारे पास 100 से लेकर 1,000 और 2,000 तक के रेंज की लहठी हैं. लोगों की जैसी डिमांड होती है वैसी लहठी बना कर दी जाती है. Add News18 as Preferred Source on Google सावन के महीने में पूरा लहठी मार्केट गुलजार रहता है. शाम के समय तो यहां तिल रखने की जगह भी नहीं मिलती. इस साल भीड़ ज्यादा है. जो लोग यहां तक पहुंच नहीं पाते वो ऑनलाइन ऑर्डर दे रहे हैं. इस मार्केट की लहठी की डिमांड मुजफ्फरपुर के अलावा कई अन्य जिलों से लेकर नेपाल तक है. पहले सोमवार से लेकर अभी तक अच्छी सेल हो चुकी है और लगातार डिमांड बढ़ती जा रही है. लहठी मार्केट में हर साल सावन में दो- तीन करोड़ से अधिक का कारोबार होता है. इसमें सभी तरह की लहठी शामिल होती हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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मानसी से सीखिए समस्या का कैसे निकालें समाधान, लॉकडाउन में शुरू किया...

होमफोटोमनी मानसी से सीखिए समस्या का कैसे निकालें समाधान, आज पूरा प्रदेश कर रहा गुणगान Last Updated:July 29, 2024, 20:34 IST मानसी ने हैंड मेड प्रोडक्ट कला में माहिर है. जिसमें होम डेकोर, एनवेलप, हेयर एक्सेसरीज, ईयर रिंग्स, फ्रिज मैग्नेट, नेम प्लेट, और मिरर डिजाइन जैसे उत्पाद शामिल हैं. उनके उत्पाद भारत भर में खरीदे जाते हैं. वे अपने ग्राहकों को प्रत्येक ऑर्डर को 2 घंटे में तैयार करके देती हैं. कोरोना महामारी ने पिछले दो सालों में दुनिया भर में लोगों की जिंदगी में बदलाव लाया है, लेकिन इसी समय ने जमशेदपुर की बसी मानसी पारीक के लिए एक नई दिशा का प्रारंभ किया. घर में अकेले रहते हुए उन्हें नया करने का और बाहर जाने का मौका नहीं मिला, लेकिन इसने उन्हें इंटरनेट और यूट्यूब के माध्यम से अपने अनुसार नये काम की तलाश में मदद की. आरंभ में, मानसी ने हैंड मेड प्रोडक्ट बनाने की कला सीखने का फैसला किया. उन्होंने धीरे-धीरे एक विस्तृत रेंज तैयार की, जिसमें होम डेकोर, एनवेलप, हेयर एक्सेसरीज, ईयर रिंग्स, फ्रिज मैग्नेट, नेम प्लेट, और मिरर डिजाइन जैसे उत्पाद शामिल हैं. इन्हें बनाने में मानसी को जोश और संतुष्टि मिली, जो उनके लिए इस नये काम के प्रति प्रेरणा बनी. मानसी का सफलता का राज उनकी मेहनत, समर्पण और संवेग में छुपा है. उन्होंने न केवल उत्पाद तैयार करने का तरीका सीखा, बल्कि उन्होंने इसे व्यापार में भी बदल दिया. आज, उनके उत्पाद भारत भर में खरीदे जाते हैं. वे अपने ग्राहकों को प्रत्येक ऑर्डर को 2 घंटे में तैयार करके देती हैं. Add News18 as Preferred Source on Google मानसी ने बताया कि इस सफलता में उनके परिवार का समर्थन और इंटरनेट पर सही जानकारी का होना बहुत महत्वपूर्ण रहा है. इसके बावजूद, उनका सबसे बड़ा समर्थन उनके अंदर के जज्बे और प्रयत्न का है, जो उन्हें हर मुश्किल से लड़ने की प्रेरणा देता है. मानसी की कहानी एक प्रेरणामय उदाहरण है, जो दिखाता है कि कैसे संकट के समय में भी एक व्यक्ति अपनी क्षमताओं का प्रयोग कर सकता है और अपने जीवन को बदल सकता है. आप घर बैठे भी ऑर्डर कर सकते हैं. बस आप 9594936397 में संपर्क कर सकते है या Instagram में oeuvre_by_mansi में सर्च कर के ऑर्डर कर सकते है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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दिल्ली हाट में गुमला के रागी लड्डुओं की धूम, सैकड़ों महिलाएं भी...

होमफोटोमनी दिल्ली हाट में गुमला के लड्डुओं की धूम, सैकड़ों महिलाएं भी हुईं आत्मनिर्भर Last Updated:July 29, 2024, 22:10 IST इसमें सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं को रोजगार भी मिला है. इसे बढ़ावा देने के लिए किसानों के बीच निःशुल्क रागी के बीज का वितरण किया जाता रहा है, ताकि रागी का अधिक से अधिक उत्पादन किया जा सके. रागी के दिन लौट आए हैं. गुमला में 2022 में निवर्तमान डीसी सुशांत गौरव की पहल से रागी मिशन का शुभारंभ किया गया था. धीरे-धीरे हजारों किसान इस योजना से जुड़ कर रागी के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. इसे बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिले में रागी प्रोसेसिंग यूनिट का अधिष्ठापन किया गया है. इसमें सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं को रोजगार भी मिला है. इसे बढ़ावा देने के लिए किसानों के बीच निःशुल्क रागी के बीज का वितरण किया जाता रहा है, ताकि रागी का अधिक से अधिक उत्पादन किया जा सके. वहीं गुमला के रागी प्रोसेसिंग यूनिट में रागी से आटा, लड्डू, भुजिया, ठेकुआ, बिस्कुट, नमकीन आदि का निर्माण किया जा रहा है. वहीं, 31 जुलाई तक देश की राजधानी नई दिल्ली में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास वित्त निगम के द्वारा हाट लगाई गई है. दिल्ली हाट में गुमला जिला में निर्मित रागी उत्पादों की बिक्री के लिए भी स्टॉल लगाया गया है. दिल्ली हाट में पूरे देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए विभिन्न उत्पादों के स्टॉल हैं, जिसमें गुमला के रागी से निर्मित उत्पादों की धूम है. Add News18 as Preferred Source on Google वर्तमान उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी की पहल पर गुमला के रागी उत्पादों को पैन इंडिया स्तर पर प्रचारित करने और देश में रागी की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए दिल्ली हाट में रागी उत्पादों का स्टॉल लगाया गया है. एमवीएम बाघिमा पालकोट फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड गुमला की अध्यक्ष भगवती देवी ने Local 18 को बताया कि हम सभी लगभग डेढ़ साल से एमवीएम कंपनी में जुड़कर रागी मिशन में काम कर रहे हैं. रागी प्रोसेसिंग यूनिट जिला के जशपुर रोड रामनगर/ करौंदी बाजार समिति परिसर में है, जहां हम महिलाएं रागी से विभिन्न प्रकार का उत्पाद बनाते हैं. इससे लगभग 120 महिलाएं जुड़ी हैं. आगे बताया कि हम लोग रागी से विभिन्न प्रकार के उत्पाद बना रहे हैं, जिसमें मुख्य रूप से लड्डू, निमकी, ठेकुआ, कुकीज, मिक्सचर, चिप्स आदि शामिल है. हमारे डीसी कर्ण सत्यार्थी की पहल से रागी से निर्मित उत्पादों का दिल्ली हाट में स्टॉल लगाया गया है. वहां भी हमारे द्वारा रागी से निर्मित प्रोडक्ट को काफी लोग पसंद कर रहे हैं. रागी से निर्मित उत्पादों का रोजाना लगभग 5 से 6 हजार की बिक्री हो रही है. विशेष रूप से रागी के लड्डू को लोग खूब पसंद कर रहे हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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