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story how cashkaro app is launched in market

Last Updated:March 15, 2024, 15:21 IST लंदन की नौकरी छोड़ इस कपल भारत में बिजनेस शुरू किया.शुरुआत में 3 लाख की लागत से इस बिजनेस का आगाज किया. बिजनेस आइडिया इतना शानदार था कि देश के जाने माने उद्योगपति रतन टाटा ने इनके बिजनेस में इन्वेस्टमेंट किया आज कंपनी का सलाना टर्नओवर 250 करोड़ है. गौहर/दिल्ली: कभी किसी शायर ने कहा था कि प्यार में आदमी कुछ भी कर गुजरता है. ऐसा ही कुछ करके दिखाया है, स्वाति भार्गव और रोहन भार्गव नाम के एक कपल ने पहली बार लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स में मिले थे और फिर वहीं से 2008 में उनके प्यार की शुरुआत हो गई थी. जिसके बाद 2009 में उन्होंने शादी कर ली और फिर अपनी अच्छी खासी नौकरियों को छोड़कर भारत में आकर उन्होंने अपना बिजनेस शुरू कर लिया. इनके बिजनेस को आज लोग कैशकरो (CashKaro) के नाम से जानते हैं. जिसकी शुरूआत इन्होंने 2013 में की थी. इनके इस बिजनेस में हमारे देश के जाना पहचाना नाम रतन टाटा भी निवेश कर चुके हैं. इनके इस बिजनेस ने FY23 में 250 करोड़ रुपये से अधिक का रेवेन्यू बनाया है. इन्होंने इस बिजनेस की शुरुआत महज कुछ लाख रुपए से की थी, जोकि इन्होंने अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से जुटाए थे. दोनों को कैसे हुआ प्यारस्वाति ने बताया कि वह दोनों लंदन स्कूल आफ इकोनॉमिक्स में पढ़ते थे और एक दिन उन्हें मालूम चला कि उनके दोस्तों को कोई अपने घर बुलाकर इंडियन खाना बनाकर खिला रहा है. तभी उन्होंने भी यह तय कर लिया कि वह भी जाकर इंडियन के हाथ से बना हुआ खाना खाएंगी और वह इंडियन रोहन ही थे. जिसके बाद उनकी अच्छी दोस्ती हुई और काफी देर तक वह एक फ्लैट में भी रहे. जिसके बाद वह रिलेशनशिप में आए और उसके बाद उन्होंने शादी कर ली. आसान बिजनेस मॉडलआपको बता दे कि कैशकरो के माध्यम से दूसरी साइट्स (एमजॉन, स्नैपडील, जबॉन्ग, पेटीएम आदि) से शॉपिंग करते हैं, तो यह साइट आपको कैशबैक देती है. साथ ही, जिस वेबसाइट से आइटम खरीद रहे हैं, वह भी आपको डिस्काउंट देती है. इस तरह से आपको डबल फायदा होता है. लेकिन सवाल है कि कैशकरो की कमाई कहां से होती है? दरअसल, कस्टमर मिलने पर ई-कॉमर्स साइट्स कैशकरो को कमीशन देती है. इस कमीशन का बड़ा हिस्सा कस्टमर्स को दे देते हैं. इसे आप यूं भी समझ सकते हैं कि कैशकरो को अपने रिटेल पार्टनर से 5-10 फीसदी कमीशन प्राप्त होता है. वह इस लाभ को अपने उपभोक्ताओं तक पहुंचाते हैं. इसका फायदा सभी पार्टियों को होता है. कैशकरो नाम की वजहस्वाति ने बताया कि कैशकरो नाम रोहन ने ही रखा है और उसके बाद रोहन का यह कहना था, कि उन्होंने यह नाम इंडियन टच की वजह से रखा है. क्योंकि इसमें आधा नाम इंग्लिश और आधा हिंदी है और यही उनकी सोच भी थी कि मेट्रो सिटीज के साथ-साथ वह रूरल एरियाज को भी टच करें. आईपीओ की बात पर रोहन का कहना था कि उन्हें अगले करीबन 2 से 3 साल लगेंगे आईपीओ तक पहुंचने में. इसके लिए उनकी टीम काम कर रही है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : March 15, 2024, 15:21 IST Source link

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चॉकलेट बेचकर किया चमत्कार, 50 तरह की वैरायटी, आमदनी इतनी कि लोग...

स्टॉल संचालक लाढ़ी सिंह ने कहा कि करनाल रेलवे स्टेशन के पास एक स्टाल लगाते हैं. यह काम कुछ ही समय पहले शुरू किया है, जिसमें उन्हें काफी प्रॉफिट हो रहा है. चॉकलेट खरीदने के लिए लोग काफी दूर-दूर से आते हैं. Source link

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know-which-traders-will-be-included-in-the-new-msme-law – News18 हिंदी

होमताजा खबरमनी क्या है MSME का नया कानून? इसके दायरे में कौन-कौन से आते हैं व्यापारी… Last Updated:March 28, 2024, 23:26 IST अगर आपने किसी व्यापारी का पेमेंट समय से नहीं किया है. तो इस हालात में MSME के तहत कानून के मुताबिक वह व्यापारी राशि पर ब्याज की मांग भी कर सकता है और आपको ब्याज की राशि देना पड़ेगी. रामकुमार नायक/रायपुरः व्यापार किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का पहिया होता है. लघु उद्योग या व्यापार शुरू कर इंसान अपने बेहतर भविष्य की तलाश में लग जाता है. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम यानी MSME के अनुसार पेमेंट करने की टाइम लिमिट 45 दिन की कर दी गई है. किसी भी कंडीशन में 45 दिन के बाद उधार माल नहीं खरीद सकते हैं. अगर आपका एग्रीमेंट नहीं है, तो 15 दिन के भीतर पेमेंट करना होगा अगर कोई एग्रीमेंट या अनुबंध किया है तो उसे 45 दिन का टाइम मिल जाएगा. अगर जिस व्यापारी का पेमेंट समय से नहीं किया है तब MSME के तहत कानून के मुताबिक वह व्यापारी ब्याज की राशि की मांग भी कर सकता है और आपको ब्याज की राशि देना पड़ेगी. इस नए कानून व्यवस्था पर चार्टर्ड अकाउंटेंट और चैंबर ऑफ कॉमर्स ने अलग-अलग बात बताई है. इन व्यापारियों का MSME से कोई संबंध नहींचैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश अग्रवाल ने बताया कि MSME लघु उद्योग से संबंधित है, जो व्यापारी MSME से पंजीकृत हैं. उसका फायदा छोटे व्यापारियों को मिलेगा. उसका क्रेडिट लिमिट 45 दिन की रहती है. यदि 45 दिन से ज्यादा का समय होता है तो तब ब्याज का प्रावधान है. यह नियम MSME में रजिस्टर्ड व्यापारियों पर ही लागू होगा. जिसका व्यापार 2 करोड़ से अधिक और 50 करोड़ से कम हो ऐसे व्यापारी MSME में आते हैं. 50 करोड़ से अधिक व्यापार करने वालों का MSME से कोई संबंध नहीं है. MSME का नया कानून बहुत अच्छा है किसी को घबराने की आवश्यकता नहीं है. नया नियम आने से थोड़ा समय लगता है. कुछ समस्याएं होने पर संशोधन किया जाता है. नए कानून व्यवस्था से व्यापारियों को नुकसानचार्टर्ड अकाउंटेंट हार्दिक जैन ने कहा कि MEMS के नए कानून व्यवस्था से उन व्यापारियों को नुकसान होगा, जिन लोगों ने MSME वालों से माल खरीदा है. ज्यादातर स्टोर आइटम के मार्केट में एक दो महीने का उधार चलता है. नगदी का व्यापार कम चलता है. वे व्यापारी जो धारा 44D में आते हैं उन सबको इसका सामना नहीं करना पड़ेगा. इनका 6 से 8% प्रॉफिट डिक्लेयर रहता है. लेकिन जितने व्यापारियों का खाता बही ऑडिट होता है उनका पेमेंट करना होगा. About the Author Mohd Majid with more than 4 years of experience in journalism. It has been 1 year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am covering hyperlocal news f…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Raipur,Raipur,Chhattisgarh First Published : March 28, 2024, 11:04 IST Source link

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साइबर फ्रॉड के लिए क्रिमिनल लाए नया जुगाड़, लड़की पूछेगी सवाल, एक...

होमताजा खबरDelhi मार्केट में अब आया नया साइबर फ्रॉड, लड़की पूछेगी सवाल, एक बटन दबाते ही लुट… Last Updated:April 16, 2024, 14:11 IST cyber crime: साइबर अपराधी आपके खातों को खाली करने के लिए ऐसे-ऐसे जुगाड़ भिड़ा रहे हैं कि आप जानकर हैरान रह जाएंगे. आजकल साइबर मार्केट में ऐसा ही एक हथकंडा साइबर अपराधी अपना रहे हैं और लोगों के खातों को साफ कर रहे हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में… जालसाज हमेशा लालच देकर ही ठगी को अंजाम देते हैं. Cyber Crime news: साइबर क्राइम के क्षेत्र में लोगों की जेब पर डाका डालने के लिए एक से एक आका बैठे हैं. साइबर फ्रॉड के लिए वे रोजाना नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं और एक से एक तकनीक लेकर आ रहे हैं. इस बार भी मार्केट में फ्रॉड का नया तरीका आ गया है. यह इतना खतरनाक और चालाकी भरा है कि आपको जब तक इस फ्रॉड का पता चलेगा, तक तक आपका बैंक अकाउंट खाली हो चुका होगा. दिल्‍ली में ऐसे कई मामले साइबर सेलों में पहुंच चुके हैं. ऑनलाइन पेमेंट से लेकर क्रेडिट, डेबिट कार्ड से पेमेंट, ऑनलाइन किसी सुविधा का लाभ लेने के बाद कंपनी और बैंक वाले अक्‍सर आपको फोन करते हैं और फीडबैक लेते हैं. आजकल कई बैंकों ने भी साइबर सिक्‍योरिटी की वजह से किसी पेमेंट को ओके करने से पहले रजिस्‍टर्ड मोबाइल फोन पर फोन कर ग्राहक से फीडबैक लेना भी अनिवार्य कर दिया है, ताकि कोई और व्‍यक्ति ग्राहक के पैसे की ठगी न कर सके. ये भी पढ़ें हालांकि कई बार ऐसी सुविधाओं के चक्‍कर में साइबर अपराधी भी अपनी रोटी सेंक ले रहे हैं. आपको याद होगा कि कोरोना आने के बाद जब वैक्‍सीनेशन किया गया तो आपके पास अक्‍सर फोन आता था कि आपने वैक्‍सीनेशन कराया है या नहीं? कृपया जवाब दें और वैक्‍सीनेशन जरूर कराएं. ऐसा फीडबैक आपने भी दिया होगा. हालांकि अब आपका दबाया हुआ एक बटन आपको भारी नुकसान पहुंचा सकता है. दिल्‍ली पुलिस के साथ जुड़े साइबर एक्‍सपर्ट किसलय चौधरी बताते हैं कि इस बार मार्केट में एक और साइबर फ्रॉड आया है. इसमें किसी नंबर से सामान्‍य कॉल आती है. उधर से लड़की की आवाज आती है और आपसे पूछती है कि आपने कोरोना की वैक्‍सीन ली है या नहीं? अगर हां तो एक दबाएं, नहीं तो दो दबाएं. आमतौर पर लोगों ने वैक्‍सीन लगवाई है तो वे फीडबैक के लिए तुरंत बटन दबा देते हैं, और बस वहीं खेल शुरू हो जाता है. किसलय कहते हैं कि आपके एक या दो बटन प्रेस करते ही आपका फोन हैंग हो जाएगा. जब तक आपकी समझ में कुछ आएगा, आपका फोन साइबर हैकरों की गिरफ्त में पहुंच चुका होगा और आपके खाते से पैसे उड़ जाएंगे. कोरोना वैक्‍सीन के नाम पर फ्रॉड के कई मामले पुलिस के पास पहुंचे हैं. लिहाजा पुलिस भी इसे लेकर लोगों को सतर्क कर रही है और बिना वजह किसी फोन का जवाब देने को अवॉइड करने के लिए कह रही है. किसलय कहते हैं कि साइबर क्रिमिनल इतने होशियार हैं कि वे जानते हैं कि व्‍यक्ति को कैसे फंसाया जा सकता है. वे ऐसी चीजें लेकर आ रहे हैं कि व्‍यक्ति को लगेगा ही नहीं कि यह भी फ्रॉड का तरीका हो सकता है. इसलिए बेहद सजग रहें. कोई भी जंक कॉल न उठाएं. अगर उठाया है तो किसी भी तरह का रेस्‍पॉन्‍स न दें. ये भी पढ़ें  About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ और रियल एस…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Noida,Gautam Buddha Nagar,Uttar Pradesh First Published : April 16, 2024, 14:11 IST Source link

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इस बिजनेस आइडिया ने बदली खुशबू की किस्मत, महज 6 सालों में...

होमफोटोमनी इस बिजनेस आइडिया ने बदली खुशबू की किस्मत, महज 6 सालों में ही हो रहा करोड़ों का Last Updated:June 19, 2024, 10:28 IST Jewellery Entrepreneur: बीते 9 मई को अमेरिकन यूनिवर्सिटी ने खुशबू को अमेरिकन विश्वविद्यालय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार उद्यमिता और वैश्वीकरण में मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया. खुशबू ने इस बारे में बात करते हुए बताया कि उन्हें बेहद खुशी है कि अमेरिकन यूनिवर्सिटी ने उन्हें इस उपाधि से नवाजा है किसी ने कहा है- पंख ही काफी नहीं आसमानों के लिए, हौसले भी चाहिए ऊंची उड़ानों के लिये. ऐसी ही एक ऊंची उड़ान भरने वाली नोएडा निवासी खुशबू सिंह ने आज से करीब 6 साल पहले हैंडीक्राफ्ट ज्वेलरी बनाने का काम शुरू किया. आज उनकी कंपनी के प्रोडक्ट देश ही नही विदेशों में भी धूम मचा रहे हैं. खुशबू सिंह को अमेरिकन यूनिवर्सिटी ने डॉक्टरेट की उपाधि देकर सम्मानित किया है. खुशबू सिंह ने करीब पांच लाख रुपए से कंपनी की शुरुआत की थी और आज उनकी कंपनी में प्रत्यक्ष और अप्रत्क्षय तौर पर सैकड़ों महिलाएं काम कर रही हैं. उनकी कंपनी का टर्नओवर 12 से 15 करोड़ रुपए है. आपको बता दें कि खुशबू सिंह हैंडीक्राफ्ट ज्वेलरी की एक कंपनी ग्रेटर नोएडा में चलाती हैं और उनकी दूसरी यूनिट नोएडा में है. खुशबू ने लोकल 18 को बताया कि वो एक मध्यम वर्ग फैमिली से ताल्लुक रखती हैं. अपनी पढ़ाई पूरी कर उन्होंने 2006 में मात्र साढ़े चार हजार से जॉब शुरू की थी. एक्सपीरियंस बढ़ने पर 2017 में उन्होंने अपनी बेटी के नाम से एक आर्या फैशन ग्रेनो कंपनी शुरु की. Add News18 as Preferred Source on Google खुशबू की कंपनी के जरिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीके से दर्जनों युवाओं और सैकड़ों महिलाओं को रोजगार मिला हुआ है. उनका कहना है कि उनके यहां बन रही आर्टिफिशिकल ज्वेलरी और बैग्स में किसी एक जगह के कंपोनेट्स नहीं हैं. वो अपने प्रोडक्ट्स के लिए अलग अलग वेंडर्स से सामान लेते हैं और फिर ज्वैलरी डिजाइन करती हैं. बीते 9 मई को अमेरिकन यूनिवर्सिटी ने खुशबू को अमेरिकन विश्वविद्यालय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार उद्यमिता और वैश्वीकरण में मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया. खुशबू ने इस बारे में बात करते हुए बताया कि उन्हें बेहद खुशी है कि अमेरिकन यूनिवर्सिटी ने उन्हें इस उपाधि से नवाजा है. उन्होंने कभी सपने में भी नही सोचा था कि वो एक दिन ये उपलब्धि हासिल करेंगी. महिलाओं के लिए संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं को मालिक ने खास हुनर दिया है. उसे पहचानने की जरूरत है. खुशबू ने यह भी कहा कि काम छोटा हो या बड़ा लगन से करें और कभी अपने आपको कमजोर न समझें. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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दूध का करना है व्यापार तो पशु की नस्ल का रखें ध्यान,...

होमफोटोमनी दूध का करना है व्यापार तो पशु की नस्ल का रखें ध्यान, बढ़िया उत्पादन से मिलेगी Last Updated:June 27, 2024, 21:13 IST Animal Husbandry: खेती के साथ-साथ पशुओं को पालकर अच्छी कमाई की जा सकती है. कम लागत और समय में किसान अच्छा मुनाफा कमा पाएंगे. इससे उन्हें आर्थिक रूप में मजबूत बनने में मदद होगी. पशुपालन कर कई लोग अपने घर का गुजारा चला रहे हैं. बड़े स्तर पर लोग इस काम को कर रहे हैं. यह काम किसानों के लिए किसी जमा पूंजी से कम नहीं है. यही वजह है कि पशुपालक किसानों के मन में भी पशुओं की खरीद बिक्री करते समय यह चिंता बनी रहती है कि आखिर किस प्रकार के पशु को खरीदा जाए . हर कोई ऐसा पशु लेना चाहता है, जो स्वस्थ भी रहे और दूध का उत्पादन भी अच्छा दे. इसी बारे में पशु विशेषज्ञ ने बात की लोकल 18 से. आइए जानते हैं उन्होंने क्या राय दी. रायबरेली के राजकीय पशु चिकित्सालय शिवगढ़ के प्रभारी अधिकारी डॉ इंद्रजीत वर्मा (एमवीएससी वेटनरी) बताते हैं कि पशुपालन का काम करके किसान अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं. लेकिन इसके लिए उन्हें कुछ बातों का ध्यान देना जरूरी है. उन्होंने कहा कि पशुपालन करने वाले किसान दुधारी पशुओं की खरीदारी करने से पहले नस्ल का खास ध्यान रखें. Add News18 as Preferred Source on Google अधिकारी बताते हैं कि पशुपालन करने वाले किसान पशुओं की शारीरिक बनावट, चमड़ी और थन का ख्याल रखें. थन की जांच करें. हमेशा एक सेहतमंद पशु लें और बीमारी पशु को खरीदने से बचें. खेती के साथ-साथ पशुओं को पालकर अच्छी कमाई की जा सकती है. कम लागत और समय में किसान अच्छा मुनाफा कमा पाएंगे. इससे उन्हें आर्थिक रूप में मजबूत बनने में मदद होगी. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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बकरियों ने उपेंद्र को बना दिया लखपति, पहले बीमारी में भी करनी...

होमफोटोमनी बकरियों ने उपेंद्र को बना दिया लखपति, पहले बीमारी में भी करनी पड़ती थी मजदूरी Last Updated:July 16, 2024, 17:57 IST उपेंद्र राय एक मजदूर परिवार से हैं. एक दिन उनकी तबीयत खराब हो गई. डॉक्टर ने उन्हें बकरी का दूध पीने के लिए बोला. आसपास के गांव में बकरी के दूध के लिए काफी भटके, लेकिन उन्हें बकरी का दूध नहीं मिला. छपरा जिले के अमनौर प्रखंड अंतर्गत सराय बॉक्स गांव निवासी उपेंद्र राय की कहानी काफी संघर्ष भरी और रोचक है. जिनकी कहानी पढ़कर और देखकर आपको विकट परिस्थिति में भी कुछ करने का हौसला बढ़ जाएगा. उपेंद्र राय एक मजदूर परिवार से हैं. एक दिन उनकी तबीयत खराब हो गई. डॉक्टर ने उन्हें बकरी का दूध पीने के लिए बोला. आसपास के गांव में बकरी के दूध के लिए काफी भटके, लेकिन उन्हें बकरी का दूध नहीं मिला. उसके बाद उन्होंने मजदूरी से बचाए गए एक-एक रुपए से एक बकरी खरीदने का फैसला किया और बहुत जल्दी एक बकरी भी खरीद ली. भगवान की कृपा से बकरी के दूध और दवा खाकर वह स्वस्थ हो गए. उसके बाद बकरियों की संख्या उनके यहां बढ़ती गई, जिस पर वह ध्यान देने लगे और बकरियों को चारा न देकर खेत में चराने लगे, जिससे उनके चारे का भी पैसा बच जाता था. फिलहाल इस समय उनके पास दो दर्जन बकरियां हैं. जिससे आज उनकी कमाई का भी जरिया अच्छा हो गया है. Add News18 as Preferred Source on Google उपेंद्र राय ने बताया कि मैंने मजदूरी कर एक-एक पैसा बचाकर दूध पीने के लिए बकरी खरीदी. अब उस बकरी के बच्चे को बचा के रखते हैं. एक बकरी से अब मेरा एक फॉर्म हो गया है. उन्होंने यह भी बताया कि बकरी को पर्याप्त मात्रा में मैं चारा नहीं दे पाता हूं. उपेंद्र राय ने बताया कि मैं बकरियों को खेत में चरने के लिए खोल देता हूं. जिससे चारे का भी पैसा बच जाता है और जब समय मिलता है तो मजदूरी भी करने जाता हूं. लेकिन पहले की अपेक्षा बहुत कम ही मजदूरी करने का समय मिलता है. उन्होंने बताया कि बकरी के देखरेख में समय बीत जाता है. साल में दो से ढाई लाख रुपए इस फार्म से कामा लेता हूं. अब मुझे पहले की जैसा चिंता भी नहीं रहती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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ये है 5वीं पास अजय की सक्सेस का राज, मधुमक्खियों के रिस्क...

होमफोटोमनी ये है 5वीं पास अजय की सक्सेस का राज, मधुमक्खियों के रिस्क ने बना दिया लखपति Last Updated:July 17, 2024, 07:43 IST कभी 20 बॉक्स के साथ शुरू किया गया मधुमक्खी पालन आज 100 बॉक्स तक जा पहुंचा है. पढ़िए मुजफ्फरपुर के अजय कुमार की सक्सेस स्टोरी, जो बेगूसराय में रहकर शहद उत्पादन कर हर सीजन 3 लाख तक की कमाई कर रहे हैं. परंपरागत खेती से किसानों को कम मुनाफा मिलती है. कृषि के क्षेत्र में रोज नए नए आविष्कार हो रहे हैं. लेकिन बात वैज्ञानिकों के प्रयोगशाला तक ही सीमित होते हैं. नए नए अविष्कारों का फायदा किसान नहीं उठा पाते हैं. आज हम एक ऐसे लड़का की कहानी बता रहे हैं जिसकी शैक्षणिक योग्यता तो महज पांचवी पास है. लेकिन किसानी पशुपालन में अपने मेहनत की बदौलत एक अलग ही पहचान स्थापित कर चुके हैं. बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले अजय पिछले 10 साल से बेगूसराय इलाके में मधुमक्खी पालन कर खुद की क़िस्मत लिख रहे हैं. अजय कुमार ने लोकल 18 बिहार से बताया आज से दस साल पहले पढ़ाई छोड़ने के बाद भाई के द्वारा मधु का उत्पादन काम किया जा रहा था , इसी से सीखकर 20 बॉक्स जिसकी कीमत 40 हज़ार के आसपास होगी. इसे लेकर मधु उत्पादन का कार्य शुरु किया था. धीरे धीरे मधुमक्खी पालन के दौरान मधुमक्खी की संख्या बढ़ते गई और आज 10 साल बाद 100 बॉक्स पर पहुंच गया. ऐसे में मेरे पास 3 लाख से ज्यादा का मधुमक्खी पालन कार्य हो गया है. अब अगर रिस्क की बात हो तो काफ़ी ज्यादा होती है. रोज मधुमक्खी के काटने से शरीर का कोई न कोई अंग फूला ही रहता है. Add News18 as Preferred Source on Google मधुमक्खी को एक शहर से दूसरे शहर ले जानें के क्रम में अगर गाड़ी दो दिनों तक जाम में फस गई तो सीधे 1 लाख से ज्यादा का नुकसान हो जाता है. इसे पालने के लिए रोज चीनी देना होता है नहीं भोजन देने पर मधुमक्खी मर जाती है. इतना रिस्क रहता है. अजय ने आगे बताया एक बॉक्स में एक रानी मधुमक्खी होती है. जो शहद को तैयार बॉक्स में करने में अपनी भूमिका निभाई है. एक बॉक्स से रोजाना 0.5 से 1 किलो तक शहद निकल आता है. ऐसे में एक बॉक्स से 200 रूपए तक आमदनी होती है. बिक्री की बात करें तो बड़े कंपनी वाले ले जाते हैं. इसका टेंशन नहीं रहता है. लेकिन हम लोग हिसाब एक सीजन का देखें तो तीन महीने के एक सीजन में 100 बॉक्स से 2 से 3 लाख तक का उत्पादन हो जाती है. लेकिन मुझे आजतक शहद उत्पादन को लेकर संचालित सरकारी सहायता नहीं मिल पाई. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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हमारे वोट से विधायक-मंत्री बने, और हमारी ही जेब के पैसों से...

होमताजा खबरदेश हमारे वोट से विधायक-मंत्री बने, और हमारी ही जेब के पैसों से टैक्स भरेंगे? Last Updated:July 18, 2024, 20:11 IST देश के कई राज्‍यों में मंत्रियों-विधायकों का इनकम टैक्‍स जनता भरती है. सरकारी खजाने से उनका इनकम टैक्‍स भरा जाता है. अब तेलंगाना में इसके ख‍िलाफ आवाज उठी है. जानें यूपी, मध्‍य प्रदेश और ह‍िमाचल में क्‍या कानून है. देश के कई राज्‍यों में मंत्रियों-विधायकों का इनकम टैक्‍स जनता भरती है. सरकारी खजाने से उनका इनकम टैक्‍स भरा जाता है. अब तेलंगाना में इसके ख‍िलाफ आवाज उठी है. जानें यूपी, मध्‍य प्रदेश और ह‍िमाचल में क्‍या कानून है. मंत्री और विधायक जनता की सेवा के ल‍िए होते हैं. लेकिन देश के कई राज्‍यों में आज भी मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों और अन्‍य माननीयों के इनकम टैक्‍स का भुगतान सरकारी खजाने से होता है. वर्षों से यह ‘प्रथा’ चली आ रही है, जिसे अब तेलंगाना में चुनौती दी गई है. हाईकोर्ट में दायर एक जनह‍ित याच‍िका में मांग की गई है क‍ि जो लोग हमारे ही वोट से विधायक बनकर सत्‍ता में पहुंचते हैं, उनका इनकम टैक्‍स हमारे ही पैसों से क्‍यों भरा जाए? इस पर तेलंगाना हाईकोर्ट ने राज्‍य सरकार को नोटिस जारी क‍िया है और पूछा है क‍ि क्‍यों न इस प्रथा को बंद कर दिया जाए. कुछ महीनों पहले मध्‍य प्रदेश सरकार ने अपने यहां लागू इसी तरह की प्रथा पर पूरी तरह रोक लगा दी थी. यूपी और ह‍िमाचल प्रदेश सरकार ने भी ऐसी छूट समाप्‍त कर दी है. इन लोगों का इनकम टैक्‍स भरती सरकारदरअसल, तेलंगाना में मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों के अलावा व‍िधानसभा के स्‍पीकर, डिप्‍टी स्‍पीकर, विधान पर‍िषद के चेयरमैन, डिप्‍टी चेयरमैन और कैबिनेट रैंक वाले सभी सरकारी सलाहकारों का इनकम टैक्‍स सरकारी खजाने से चुकाया जाता है. इसे जनता की कमाई का मनमाना खर्च बताते हुए फोरम फॉर गुड गवर्नेंस एनजीओ ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है. इनकी मांग है क‍ि आंध प्रदेश वेतन और पेंशन भुगतान और अयोग्यता अधिनियम, 1953 की धारा 3 (4) के इन प्रावधानों को समाप्‍त क‍िया जाए. मुख्‍यमंत्री, मंत्री और अन्‍य सभी लोग अपना इनकम टैक्‍स खुद भरें. जब उन्‍हें भी मिलता सबकी तरह वेतन तो…तेलंगाना हाईकोर्ट के चीफ जस्‍ट‍िस आलोक अराधे और न्यायमूर्ति जुकांति अनिल कुमार की खंडपीठ ने इसे गंभीर विषय माना. कोर्ट ने मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव (GAD) को जल्‍द जवाब दाख‍िल करने को कहा. याचिकाकर्ता की दलील है कि मुख्यमंत्री, मंत्री और अन्य लोग लोक सेवक हैं. उन्हें राज्य सरकार से वेतन मिलता है. जब उन्हें वेतन दिया जाता है, तो वे अन्य सभी नागरिकों की तरह आयकर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होते हैं. जब राज्‍य का बंटवारा हुआ तो तेलंगाना सरकार ने कानून में बदलाव कर अपने ह‍िसाब से कानून बना ल‍िया. तब से सबका इनकम टैक्‍स सरकार भर रही है. इस कानून को रद्द क‍िया जाना चाह‍िए. यूपी-एमपी-ह‍िमााचल पहले ही कर चुके हैं खत्‍म हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल ने 2022 में कानून में बदलाव क‍िया था. साफ कहा गया था क‍ि सभी मंत्री और विधायक अपना इनकम टैक्‍स अपनी जेब से भरेंगे. सरकार इसके ल‍िए एक भी पैसा नहीं देने वाली है. उत्‍तर प्रदेश सरकार ने 2019 में मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों को अपना आयकर चुकाने से छूट देने वाले कानून में संशोधन क‍िया था. अब यहां के सभी मंत्री और व‍िधायक अपना इनकम टैक्‍स खुद चुकाते हैं. मध्य प्रदेश सरकार ने कुछ महीनों पहले ही निर्णय लिया कि राज्य के मंत्री अपने वेतन और भत्ते का भुगतान स्वयं करेंगे. इससे 1972 में बना वह कानून समाप्‍त हो गया, जिसके तहत राज्‍य सरकार इमरजेंसी फंड से इनका इनकम टैक्‍स चुकाती थी. About the Author Gyanendra Mishra Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,New Delhi,Delhi Source link

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गौ सेवा के साथ ही शुरू कर दिया स्वरोजगार, तीन गाय से...

होमफोटोमनी गौ सेवा के साथ ही शुरू कर दिया स्वरोजगार, तीन गाय से बढ़कर हो गईं 40 गाय, कमाई Last Updated:July 19, 2024, 21:06 IST महीने में दूध बेचकर 60000 रुपए करते हैं कमाई। बताते हैं कि गोपालन 11 साल से कर रहे हैं तीन गाय से शुरू किया था गोपालन आज 40 गाय के हैं मालिक बांका के रहने वाले प्रवीण कुमार की माली स्थिति किसी समय में ठीक नहीं थी. फिर उन्होंने गौ पालन का बिजनेस शुरू किया. आज वो 40 गायों के पालक और दूध के बिजनेस से अच्छी कमाई कर रहे है. प्रवीण ने बताया कि घर की माली हालत ठीक नहीं थी तभी एक गाय खरीद ली वो 3 लीटर दूध देती थी, उसी में से कुछ दूध बेच लिया करते थे. इसी दौरान दूध के कारोबार का आईडिया मिला और वह आज 40 से ज्यादा गाय के मालिक है, महीने में दूध बेचकर 60000 रुपए की कमाई करते हैं. बताते हैं कि गोपालन 11 साल से कर रहे हैं तीन गाय से शुरू किया था गोपालन आज 40 गाय के मालिक हैं. संचालक प्रवीण कुमार बताते हैं कि हमारे गौशाला में साहीवाल गिर प्रिजियन जर्सी और देसी गाय है. जिसका पालन 11 साल से कर रहे हैं. बताते हैं कि गाय पालने की आईडिया तब आई जब घर के बच्चों को खिलाने के लिए शुद्ध दूध नहीं मिल पा रहा था तो मैंने सोचा कि क्यों ना एक गाय पाला जाए जिससे बच्चों को शुद्ध दूध दे सकेंगे. इसके बाद आसपास के लोगों के द्वारा दूध की डिमांड से लगा कि क्यों ना गोपालन ही कर लोगों को शुद्ध दूध दिया जाए. इसके बाद एक-एक कर आज 40 गए है हमारे पास. Add News18 as Preferred Source on Google प्रवीण कुमार बांका जिला के समुखिया गांव के निवासी है, यही उनकी डेयरी भी है उनके पास इस वक्त करीबन 40 गाय हैं जो रोजाना 100 – 150 लीटर दूध होता है, उनकी महीने के औसतन कमाई 60 हजार रूपए हैं.जो मौसम और दूध उत्पादन के अनुरूप घटती बढ़ती रहती है. वो बताते है की मौजूदा समय में 40 गए से 100 – 120 लीटर दूध होता है जो प्रति लीटर 50 से 60 लीटर दूध बेचते है साथ ही बताते है की गर्मियों के मौसम में दूध का उत्पादन घटता है वही ठंडियों में अपेक्षाकृत ज्यादा होता है. प्रवीण ने बताया कि गाय को समय-समय पर चारा पानी दिया जाता है और दुधारी गाय को चारा के साथ दाना चोकर दिया जाता है. जिससे दूध उत्पादन में वृद्धि होती है. वहीं 4 दिन में एक दिन गाय की सफाई की जाती है. जिससे गायों में होने वाले बीमारियों पर नियंत्रण रहता है समय-समय पर टीकाकरण की जाती है और बरसात के मौसम गौशाला को डिटोल पानी से साफ किया जाता है, जिससे इंफेक्शन होने से बचा जा सके. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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