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Delhi schoolgirl Death After Teacher Punishment: दिल्ली के ईस्ट विनोद नगर स्थित सरकारी स्कूल में 10 वर्षीय छात्रा की मौत के बाद परिजनों ने सजा देने और लापरवाही का आरोप लगाकर प्रदर्शन किया. वहीं, डॉक्टरों के मुताबिक बच्ची SSPE नामक दुर्लभ दिमागी बीमारी से पीड़ित थी. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शिक्षा मंत्री ने शिक्षिका का ट्रांसफर कर निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं. साथ ही, सरकार 100 स्कूलों में मेडिकल रूम बनाएगी.
मामले की जांच की जा रही है.
दिल्ली के ईस्ट विनोद नगर स्थित सरकारी स्कूल से एक बेहद दिलदहला देने वाला मामला सामने आया है. यहां 10 साल की एक मासूम छात्रा की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. बच्ची की मौत के बाद परिवार का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने सोमवार सुबह स्कूल के बाहर जमकर प्रदर्शन किया. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली सरकार ने तुरंत निष्पक्ष जांच के आदेश जारी कर दिए हैं. बच्ची के परिजनों का दावा है कि यह पूरी घटना 22 जुलाई की है. परिजनों के अनुसार, बच्ची कल्याणपुरी स्थित अपने घर से सुबह सही-सलामत स्कूल गई थी. आरोप है कि क्लास में किताब न लाने पर टीचर ने उसे डांटा और हाथ उठाकर क्लास के पीछे खड़े रहने की सजा दी. डर के मारे बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी. परिजनों का आरोप यह भी है कि जब बाकी बच्चे और टीचर क्लास से बाहर चले गए तो बच्ची अंदर ही लॉक रह गई. बाद में जब उसके दादा-दादी स्कूल पहुंचे तो बच्ची खुले इलाके में अचेत हालत में मिली. होश में आने पर उसने पूरी आपबीती बताई और फिर से बेहोश हो गई, जिसके बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया.
अस्पताल और डॉक्टरों का क्या है कहना?
बच्ची को पहले लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल और फिर इहबास (IHBAS) में भर्ती कराया गया, जहां 27 अगस्त को उसकी सांसें थम गईं. हालांकि, इहबास अस्पताल के डॉक्टरों ने मामले में एक अलग मेडिकल पहलू सामने रखा है. डॉक्टरों के मुताबिक, बच्ची पिछले छह महीनों से SSPE (सबएक्यूट स्क्लेरोसिंग पैनएनसेफलाइटिस) नाम की बेहद गंभीर और दुर्लभ दिमागी बीमारी से पीड़ित थी. यह बीमारी खसरे के वायरस के संक्रमण से होती है और इसमें मौत का जोखिम 95% तक होता है. डॉक्टरों का कहना है कि बीमारी के बढ़ने के कारण ही बच्ची का निधन हुआ.
शिक्षिका का ट्रांसफर और जांच शुरू
मामले के तूल पकड़ते ही दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशिष सूद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि घटना की निष्पक्ष जांच के आदेश दे दिए गए हैं. निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए संबंधित शिक्षिका का तुरंत ट्रांसफर कर दिया गया है. सरकार ने साफ किया है कि जांच में यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी.
मासूमों की सुरक्षा के लिए 100 स्कूलों में बनेंगे मेडिकल रूम
इस दुखद घटना से सबक लेते हुए दिल्ली सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली के 100 सरकारी स्कूलों में समर्पित मेडिकल रूम बनाए जाएंगे, जहां बच्चों को फर्स्ट-एड, बुनियादी स्वास्थ्य सहायता और काउंसलिंग की सुविधा मिलेगी. इस योजना के लिए 5 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जिसे आगे चलकर 1,086 स्कूलों में लागू किया जाएगा.
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पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
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