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Ethanol Saving : सरकार ने एथनॉल मिलाने का बचाव ऐसे ही नहीं किया है. बीते 10 साल से आंकड़े बताते हैं कि इस प्रोग्राम से सरकार को करीब 2 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है और कच्चे तेल के आयात में भी 31 करोड़ टन की कमी आई है. सरकार ने यह भी दावा किया है कि एथनॉल मिलाने के फैसले को जल्दबाजी में नहीं लागू किया गया है.
एथनॉल मिलाने से सरकार को 2 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है.
नई दिल्ली. सरकार ने पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण यानी ईबीपी कार्यक्रम का बचाव करते हुए शुक्रवार को कहा कि इस योजना से न केवल चीनी उद्योग को मजबूती मिली है, बल्कि किसानों की कमाई बढ़ी है और वित्तवर्ष 2014-15 से अब तक देश को 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है.
खाद्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव अश्विनी श्रीवास्तव ने बताया कि एथनॉल अब कृषि अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुका है. इससे अतिरिक्त फसलों के लिए नए बाजार बने हैं और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई है. उन्होंने बताया कि वित्तवर्ष 2014-15 से 2026 के बीच एथनॉल आपूर्ति के जरिए 31 करोड़ टन से अधिक कच्चे तेल की जरूरत कम हुई है, जिससे 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई. इस दौरान लगभग 93 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी भी आई है.
गन्ना किसानों को मिल रहा समय पर भुगतान
श्रीवास्तव ने कहा कि गन्ना आधारित एथनॉल से शुरू हुए ईबीपी कार्यक्रम ने गन्ना किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया है और चीनी उद्योग को वित्तीय रूप से अधिक सक्षम बनाया है. उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों का बकाया अब ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर है. उन्होंने बताया कि 2014-15 से 2020-21 के बीच केंद्र ने चीनी मिलों को करीब 14,600 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी थी, लेकिन 2021-22 के बाद से अतिरिक्त चीनी को एथनॉल उत्पादन में उपयोग किए जाने के कारण निर्यात सब्सिडी की जरूरत ही नहीं पड़ी.
मक्का उत्पादक भी कर रहे कमाई
सचिव ने कहा कि एथनॉल उत्पादन में मक्का प्रमुख कच्चा माल बनकर उभरा है, जो 2024-25 में तेल मार्केटिंग कंपनियों को आपूर्ति का 47 फीसदी रहा और मौजूदा आपूर्ति वर्ष में अब तक 36 फीसदी योगदान दे रहा है. इससे मक्का किसानों को बेहतर मूल्य मिल रहा है. उन्होंने बताया कि देश में एथनॉल उत्पादन क्षमता 2013-14 के लगभग 21 करोड़ लीटर से बढ़कर अब करीब 2,000 करोड़ लीटर हो गई है. ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ के तहत चावल में टूटे दानों की सीमा 25 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी करने के हालिया फैसले से बेहतर गुणवत्ता का चावल मिलेगा और अतिरिक्त टूटे चावल का उपयोग एथनॉल उत्पादन जैसे औद्योगिक कार्यों में किया जा सकेगा.
जल्दबाजी में नहीं लिया है फैसला
जीईएमए के अध्यक्ष सीके जैन ने कहा कि एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम व्यापक शोध के बाद लागू किया गया है और यह जल्दबाजी में लिया गया निर्णय नहीं है. उन्होंने कहा कि ई20 मिश्रण पर 2014 से 2018 के बीच चार वर्षों तक अध्ययन किया गया, जिसमें वाहनों को लंबी दूरी तक चलाकर परीक्षण किया गया है. ई20 पेट्रोल को सभी इंजनों के लिए सुरक्षित पाया गया और इसे तकनीकी अध्ययन, पायलट परियोजनाओं एवं नीतिगत चर्चाओं के बाद लागू किया गया. उन्होंने एथनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों के खराब होने के संबंध में आ रही शिकायतों पर कहा कि इस विषय पर चर्चा तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, न कि भ्रांतियों पर.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें