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Farming Tips: एक छोटी सी गलती घटा सकती है उत्पादन! बुवाई का...


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ग्वार-तिल की बुवाई का सही समय क्या है? प्रति हेक्टेयर कितना बीज डालें

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Guar Til Sowing: खरीफ सीजन में ग्वार और तिल की खेती किसानों के लिए बेहतर आय का महत्वपूर्ण विकल्प मानी जाती है. अच्छी पैदावार के लिए सही समय पर बुवाई और प्रति हेक्टेयर बीज की उचित मात्रा का चयन बेहद जरूरी है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर बुवाई करने से अंकुरण बेहतर होता है और फसल रोगों व प्रतिकूल मौसम के प्रभाव से भी काफी हद तक बची रहती है. खेत की अच्छी तैयारी, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, उचित दूरी पर बुवाई और समय-समय पर खरपतवार नियंत्रण से उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की जा सकती है. ग्वार और तिल दोनों ही कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलें हैं, इसलिए शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के किसानों के लिए ये लाभदायक मानी जाती हैं. यदि किसान कृषि विभाग की अनुशंसित बीज दर और वैज्ञानिक खेती की सलाह का पालन करें.

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Agriculture News: खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही ग्वार और तिल की बुवाई का अनुकूल समय चल रहा है। एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग चौधरी ने बताया कि यदि किसान इस समय उन्नत किस्मों के बीजों का चयन कर वैज्ञानिक तरीके से बुवाई करें तो अच्छी पैदावार के साथ बेहतर गुणवत्ता की फसल प्राप्त की जा सकती है. बीज उपचार, सही बीज दर और उचित दूरी का पालन करने से रोगों का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है.

उन्होंने बताया कि ग्वार की खेती के लिए किसानों को ग्वार-1, आरजीसी-1033, आरजीसी-1066, आरजीसी-1038, आरजीसी-1031, आरजीसी-1017, आरजीसी-936 और आरजीसी-1055 जैसी उन्नत किस्मों का चयन करना चाहिए. वहीं, प्रति हेक्टेयर 15 से 20 किलोग्राम बीज पर्याप्त रहता है. बुवाई के दौरान पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 सेंटीमीटर तथा पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखने से पौधों का बेहतर विकास होता है और उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है.

झुलसा रोग से बचाव के लिए ये करे 
एग्रीकल्चर एक्सपर्ट ने बताया कि ग्वार की फसल में झुलसा रोग से बचाव के लिए बीज उपचार बेहद जरूरी माना गया है. ऐसे में बुवाई से पहले बीजों को 250 पीपीएम एप्रोमाइसिन की अनुशंसित मात्रा से उपचारित करें. इससे शुरुआती अवस्था में रोगों का प्रकोप कम होता है और पौधों की बढ़वार बेहतर रहती है. बीज उपचार पर किया गया छोटा निवेश आगे चलकर फसल को बड़े नुकसान से बचा सकता है.

तिल की खेती के लिए ये किस्म उगाए 
तिल की खेती करने वाले किसानों को भी उन्नत किस्मों का चयन करना चाहिए. इसके लिए आरटी-46, आरटी-125, आरटी-346 और आरटी-351 बेहतर किस्में मानी जाती हैं. गुच्छेदार किस्मों के लिए प्रति हेक्टेयर 2 से 2.5 किलोग्राम बीज पर्याप्त है, जबकि शाखा रहित किस्मों के लिए 4 से 5 किलोग्राम बीज का उपयोग करना चाहिए. बुवाई से पहले बीजों को प्रति किलोग्राम 3 ग्राम थीरम या कैप्टान कवकनाशी से उपचारित करना चाहिए, जिससे बीजजनित रोगों का खतरा कम हो जाता है.

रासायनिक उर्वरकों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहे 
किसानों को मानसून के दौरान जल संरक्षण पर भी विशेष ध्यान रखना चाहिए. खेत के किसी एक हिस्से में वर्षा जल संग्रहण की व्यवस्था करने से जरूरत पड़ने पर उसी पानी का उपयोग फसल की सिंचाई में किया जा सकता है. अनियमित बारिश की स्थिति में यह व्यवस्था फसलों के लिए काफी उपयोगी साबित होती है और सूखे जैसी परिस्थितियों में भी राहत देती है. रासायनिक उर्वरकों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय सड़ी-गली गोबर की खाद, कम्पोस्ट और अन्य देसी जैविक खादों का अधिक उपयोग करना चाहिए. इससे मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है, पोषक तत्वों की उपलब्धता बेहतर होती है और भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है.

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Jagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें



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