नई दिल्ली. भारत की जेलों में बंद रहकर भी सात समंदर पार तक अपना खौफनाक नेटवर्क चलाने वाले गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया और उनके अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट्स पर अब दुनिया की सबसे बड़ी जांच एजेंसी FBI (फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) ने ऐसा शिकंजा कसा है कि पूरे ग्लोबल अंडरवर्ल्ड में हड़कंप मच गया है. अमेरिका, कनाडा और यूरोप की सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर एक महा-अभियान शुरू किया है जिसे ऑपरेशन हार्ड बॉल नाम दिया गया है. अमेरिकी न्याय मंत्रालय (DoJ) द्वारा कोर्ट में दाखिल किए गए तीन बड़े संघीय अभियोगों ने यह साफ कर दिया है कि इन गैंग्स का नेटवर्क सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है बल्कि वे विदेशों में रहने वाले संपन्न भारतीय मूल के लोगों (NRIs) को डराकर करोड़ों की रंगदारी वसूल रहे थे और बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग्स व हथियारों का काला कारोबार चला रहे थे. इस मेगा ऑपरेशन के तहत अब तक कुल 37 लोगों के खिलाफ नामजद मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 24 खूंखार गुर्गों को सलाखों के पीछे धकेला जा चुका है.
किन-किन देशों में फैला है इन 3 बड़े सिंडिकेट्स का जाल?
अमेरिकी जांचकर्ताओं और खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत से जुड़े तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठनों ने दुनिया भर में अपने पैर पसार रखे हैं जिनपर ऑपरेशन हार्ड बॉल के तहत सबसे बड़ी चोट की गई है:
| आपराधिक संगठन (Syndicate) | मुख्य सरगना (Kingpin) | वैश्विक नेटवर्क और प्रमुख देश | मुख्य सहयोगी और उनका रोल |
|---|---|---|---|
| 1. लॉरेंस बिश्नोई गैंग | लॉरेंस बिश्नोई (भारतीय जेल में बंद होने के बावजूद स्मगल्ड मोबाइल के जरिए नेटवर्क सक्रिय) | अमेरिका, कनाडा, यूरोप और भारत | गोल्डी बराड़ (उत्तरी अमेरिका प्रमुख), रोहित गोदारा (यूरोप प्रमुख), सुखराज सिंह कंग (भारत/ग्लोबल को-ऑर्डिनेटर). |
| 2. जग्गू भगवानपुरिया गैंग | जग्गू भगवानपुरिया (बिश्नोई का पूर्व साथी और अब धुर विरोधी, जेल से ही सिंडिकेट एक्टिव) | अमेरिका (विशेषकर लॉस एंजिल्स और कैलिफोर्निया) और भारत | गुरलाल सिंह (अमेरिका में मुखबिर), गुरदेव सिंह (हिरासत से धमकी देने वाला), [गुरिंदरजीत सिंह नागरा] (पंजाब पुलिस के पूर्व SHO/भ्रष्ट मददगार). |
| 3. रविंदर सिंह ढांडा ड्रग नेटवर्क | रविंदर सिंह ढांडा (उर्फ ‘रैंडी’, ‘रोलेक्स’, ‘जॉन विक’ – कनाडा से ऑपरेटेड) | कनाडा (वैंकूवर) और अमेरिका (ग्रेटर लॉस एंजिल्स क्षेत्र) | जसकरन बागरी उर्फ बाबा, गुरतेज सिंह स्माघ उर्फ सिम्बा (यूएस-कनाडा बॉर्डर पार ड्रग्स भेजने वाले). |
50 ठिकानों पर रेड, भारी बरामदगी
अमेरिकी और अन्य देशों की संयुक्त जांच एजेंसियों ने इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए अभूतपूर्व स्तर पर घेराबंदी की:
• ग्लोबल एजेंसियां आईं साथ: इस अभियान में FBI के साथ लॉस एंजिल्स पुलिस विभाग (LAPD), ड्रग एन्फोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA), होमलैंड सिक्योरिटी (HSI), कनाडाई एजेंसी RCMP और स्पेन की पुलिस शामिल रही.
• कहां-कहां पड़े छापे: अमेरिका, कनाडा और यूरोप में 50 से अधिक रणनीतिक स्थानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की गई. अकेले कैलिफोर्निया के सैक्रूमेंटो में 23 और लॉस एंजिल्स में 11 ठिकानों को खंगाला गया.
• काले साम्राज्य की बरामदगी: जांच एजेंसियों ने इस रेड के दौरान अंतरराष्ट्रीय मार्केट की लगभग 1,000 किलोग्राम (1 टन) कोकीन, 1 किलोग्राम हेरोइन, $40,000 की नकदी और एक दर्जन से ज्यादा अवैध घातक हथियार बरामद किए हैं.
• गिरफ्तारियों का आंकड़ा: कुल 37 आरोपियों में से 24 दबोचे जा चुके हैं. इनमें से 13 को अमेरिका (11 कैलिफोर्निया, 1 इंडियाना, 1 जॉर्जिया) से उठाया गया है. कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया से 3 आरोपी पकड़े गए हैं जिनका अमेरिका प्रत्यर्पण होगा, 1 स्पेन से दबोचा गया है जबकि 7 पहले से ही अन्य मामलों में कस्टडी में थे. वहीं 10 आरोपी अभी भी फरार हैं जिनकी लोकेशन अमेरिका, भारत और यूरोप में होने की आशंका है.
तीनों सिंडिकेट्स के जुर्म की पूरी क्राइम कुंडली
1. लॉरेंस बिश्नोई गैंग: देशभक्ति का मुखौटा और आतंक का क्रूर चेहरा
अमेरिकी कोर्ट में दायर अभियोग पत्र के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई सोशल मीडिया पर खुद को एक देशभक्त, राष्ट्रवादी और धार्मिक व्यक्ति के रूप में प्रोजेक्ट करता है ताकि देश के भोले-भाले युवाओं को बरगलाकर अपने दलदल में खींच सके. लेकिन इस मुखौटे के पीछे वह जबरन वसूली, अपहरण और हत्याओं का एक बेहद क्रूर अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट चला रहा है.
• हाई-प्रोफाइल वारदातों से खौफ का प्रचार: इस गैंग ने नवंबर 2023 में वैंकूवर (कनाडा) में एक नामचीन भारतीय अभिनेता व सिंगर के घर पर गोलीबारी करवाई और फेसबुक पर पंजाबी में लिखा, “तुम्हें हमसे कोई नहीं बचा सकता.” अमेरिकी अभियोग में अप्रैल 2024 में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के मुंबई स्थित घर के बाहर फायरिंग और अक्टूबर 2024 में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की सनसनीखेज हत्या का भी विशेष जिक्र है. अमेरिकी एजेंसियों के मुताबिक, इन बड़ी वारदातों को यह गैंग विदेशों में बैठे पीड़ितों को डराने के लिए एक ‘प्रूफ’ (सबूत) के तौर पर इस्तेमाल करता था ताकि लोग बिना विरोध किए करोड़ों की रंगदारी दे दें.
• ड्रग्स की चोरी और स्मगलिंग: अपनी हिंसक गतिविधियों की फंडिंग के लिए यह गैंग कोकीन और मेथामफेटामाइन की बड़े पैमाने पर तस्करी करता था. नवंबर 2024 में अमेरिका से कनाडा भेजी जा रही 49 किलो कोकीन कैलिफोर्निया के रेडलैंड्स में पकड़ी गई थी, जो बिश्नोई और बराड़ के सीधे नियंत्रण में थी. इसके अलावा, इस गैंग पर मार्च 2024 से जुलाई 2025 के बीच लॉस एंजिल्स में प्रतिद्वंद्वी तस्करों की ही 520 किलोग्राम कोकीन चुरा लेने का भी संघीय आरोप है.
2. जग्गू भगवानपुरिया गैंग: जेल और कस्टडी से भी बेखौफ धमकियां
जग्गू भगवानपुरिया का यह सिंडिकेट पूरी दुनिया में 1,000 से अधिक सदस्यों के साथ सक्रिय है, जिनमें से 100 से ज्यादा अकेले अमेरिका के भीतर एक्टिव थे.
• जेल से वसूली साम्राज्य: इस गिरोह ने भारत में सरकारी व पुलिस महकमे के भ्रष्ट तंत्र से हाथ मिलाया ताकि विदेश में बैठे लोगों के भारतीय रिश्तेदारों को डराया जा सके.
• हिरासत से भी नहीं थमा खौफ: इस गैंग का दुस्साहस इतना था कि इसका एक मेंबर गुरदेव सिंह जब अमेरिका के आव्रजन विभाग (ICE) की कस्टडी में बंद था, तब भी उसने वहां से मध्य-पश्चिम अमेरिका के एक परिवार को रंगदारी के लिए फोन किया और पैसे न देने पर उनके मासूम बच्चों को गोलियों से भून देने की खौफनाक धमकी दी. इसके अलावा यह गैंग अवैध मशीन गन रखने, हथियारों की तस्करी और सुपारी लेकर हत्या (कॉन्ट्रैक्ट किलिंग) में भी लिप्त पाया गया है.
3. रविंदर सिंह ढांडा गैंग: ट्रकों के जरिए सफेद जहर की सप्लाई
कनाडा के वैंकूवर में रहने वाले 57 वर्षीय रविंदर सिंह ढांडा (उर्फ रैंडी / जॉन विक) का पूरा नेटवर्क मुख्य रूप से लॉजिस्टिक्स और ड्रग्स की तस्करी पर आधारित था.
• ट्रकों में छिपाकर ड्रग्स की हेराफेरी: यह गिरोह हर हफ्ते अमेरिका के ग्रेटर लॉस एंजिल्स क्षेत्र से सैकड़ों किलोग्राम कोकीन और मेथमफेटामाइन की खेप खरीदता था. इस सफेद जहर को बॉर्डर पार कनाडा भेजने के लिए वे बड़े-बड़े कमर्शियल ट्रकों (सेमी-ट्रकों) और खेतों में चलने वाले फार्म ट्रकों का इस्तेमाल करते थे ताकि सुरक्षा एजेंसियों और कस्टम की आंखों में धूल झोंकी जा सके.