भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

Gold Price Crash : धनतेरस से पहले सोने का भाव धड़ाम, 3200...


नई दिल्ली. त्योहारों से ठीक पहले सोने और चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट आ रही है. राजधानी दिल्ली के सराफा बाजार में शनिवार को भी सोने का भाव तेजी से गिरा और इसकी कीमत 10 महीने में सबसे कम रह गई है. अखिल भारतीय सरापुा संघ ने बताया कि शनिवार 31 अक्टूबर को सोने की कीमत 3,200 रुपये गिरकर 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई. यह 10 महीने में सोने का सबसे सस्ता भाव है.

अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने बताया कि एक दिन पहले शुक्रवार को सोने का भाव 1,45,200 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जबकि 26 दिसंबर, 2025 को यह 1,42,300 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था. इस तरह, देखा जाए तो सोने की कीमत अभी 10 महीने में सबसे कम रह गई है. सोना ही नहीं, चांदी की कीमतों में भी गिरावट जारी है. चांदी का भाव 4,200 रुपये टूटकर 1,86,000 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया, जबकि शुक्रवार को इसका भाव 1,90,200 रुपये प्रति किलोग्राम था. इससे पहले 8 दिसंबर, 2025 को चांदी का भाव इसी लेवल पर था. तब इसका भाव 1,85,000 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया था.

क्यों टूट रहे सोने-चांदी के भाव
निवेश फर्म 360 वन एसेट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और कोष प्रबंधक राहुल खेतावत का कहना है कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से महंगाई की चिंताएं बढ़ने और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति संबंधी टिप्पणियों से सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव पड़ा. उन्होंने कहा कि इन घटनाक्रमों से मौद्रिक नीति में नरमी की उम्मीदें कमजोर हुईं और कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट आई. अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को हाजिर सोना 145.84 डॉलर यानी करीब 4 फीसदी टूटकर 3,875.55 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ. यह एक साल से भी ज्यादा का निचला स्तर है. इससे पहले तीन अक्टूबर, 2025 को सोना 3,887.09 डॉलर प्रति औंस के आसपास था

चरमरा रहा चांदी का भाव
हाजिर चांदी भी 3.04 डॉलर यानी 6 फीसदी गिरकर 49.12 डॉलर प्रति औंस रह गई. इससे पहले छह नवंबर, 2025 को इसका भाव 48.02 डॉलर प्रति औंस दर्ज किया गया था. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के जिंस विश्लेषक मानव मोदी ने कहा कि सोना 3,800 डॉलर प्रति औंस के करीब आ गया, जबकि चांदी 50 डॉलर प्रति औंस से नीचे फिसल गई. शंघाई में वायदा अनुबंधों में भी तेज गिरावट आई. कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और महंगाई के बने रहने से दिसंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की आशंकाएं फिर बढ़ गई हैं. इससे लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बने रहने की संभावना मजबूत हुई है.

एआई से जुड़ी कंपनियों ने भी बनाया दबाव
मानव मोदी ने कहा कि एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट के कारण निवेशकों को मजबूरी में बिकवाली करनी पड़ी और नकदी जुटाने का दबाव बढ़ा. वहीं, औद्योगिक क्षेत्र में चांदी की अधिक उपयोगिता ने इसकी कीमतों में गिरावट को और बढ़ा दिया. चीन में निवेशकों द्वारा नकदी जुटाने के लिए सोना बेचने की खबरें भी एक संभावित कारण हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका के मध्यावधि चुनाव से पहले सट्टेबाजी के तहत बिकवाली की स्थिति भी बन रही है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी को मिलने वाला बहुमत सर्राफा कीमतों की आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है.



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top