- Hindi News
- Local
- Jharkhand
- Ranchi
- In 10 Years, Needs Have Changed, But The Master Plan Remains The Same. Illegal Construction Has Increased Due To The Land Use Not Changing.
रांची23 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के एक मामले में कहा है कि लैंड यूज बदलना सिस्टम से धोखा, सभी राज्यों को अवैध निर्माण पर की गई कार्रवाई का हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। शीर्ष कोर्ट के फैसले के बाद दैनिक भास्कर ने रांची में अवैध निर्माण की पड़ताल की तो चौंकाने वाली बात सामने आई। रांची में करीब 2.50 लाख भवन बने हुए हैं। इनमें करीब 1.75 लाख भवन अवैध हैं। ऐसे भवनों का नक्शा स्वीकृत नहीं है।
रांची के विकास के लिए दिसंबर 2015 में ही मास्टर प्लान लागू किया गया। 550 वर्ग किमी. क्षेत्र के विकास के लिए बनाए गए इस प्लान के आधार पर ही रांची का जोनल प्लान बनाकर शहर का विकास होना था। लेकिन आज तक मास्टर प्लान के अनुसार जोनल प्लान नहीं बना। मास्टर प्लान को भी हरेक पांच वर्ष के अंतराल पर रिवाइज्ड किया जाना था, ताकि शहर की वर्तमान स्थिति को देखते हुए लैंड यूज में संशोधन किया जा सके।
लेकिन नगर निगम और नगर विकास विभाग के अधिकारियों ने दस वर्ष गुजरने के बाद भी मास्टर प्लान को रिवाइज्ड नहीं किया। इस वजह से लैंड यूज भी नहीं बदला। इसका नतीजा हुआ कि शहर में धड़ल्ले से अवैध निर्माण किए गए। मास्टर प्लान में जिस क्षेत्र में 48 किमी. लंबा इनर सर्कुलर रिंग रोड प्रस्तावित किया गया है, उस क्षेत्र में नगर निगम घर बनाने की परमिशन नहीं दे रहा है। ऐसे में उक्त क्षेत्र में धड़ल्ले से अवैध निर्माण हो रहा है।
इधर, आवास बोर्ड ने हरमू, अरगोड़ा और बरियातू हाउसिंग कॉलोनी में करीब 600 ऐसे भवनों को चिह्नित किया था, जिनका व्यवसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है। इनमें भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी का नाम भी शामिल है। धोनी को राज्य सरकार ने हरमू में घर बनाने के लिए जमीन दी थी। उस पर आवासीय भवन का नक्शा पास हुआ, लेकिन अब वहां पैथोलॉजी लैब का संचालन हो रहा है। हाउसिंग कॉलोनी में दर्जनों नेता व नौकरशाहों की जमीन हैं, जिनका व्यवसायिक इस्तेमाल हो रहा हैं। लेकिन आवास बोर्ड इन मामलों में कार्रवाई करने के बजाय नोटिस- नोटिस खेल रहा है।
आवासीय कॉलोनी में व्यवसाय पर निगम की सख्ती सिर्फ दिखावा
रांची नगर निगम ने 6 अप्रैल को हाउसिंग कॉलोनियों में आवास बोर्ड की जमीन पर स्थित भवनों में व्यवसाय करने वालों को आम नोटिस जारी किया था। कहा गया था कि आवास बोर्ड की ओर से 15 नवंबर 2025 को पत्र लिखकर आग्रह किया गया है कि आवासीय कॉलोनी में एक भी व्यवसाय के लिए ट्रेड लाइसेंस नहीं जारी किया जाए। पहले से जिन्हें ट्रेड लाइसेंस जारी किया गया है, उसे रद्द किया जाए। इसके बाद निगम प्रशासक सुशांत गौरव ने हरमू हाउसिंग कॉलोनी, अरगोड़ा हाउसिंग कॉलोनी और अशोक नगर आवासीय कॉलोनी में करीब 250 प्रतिष्ठानों को जारी किए गए ट्रेड लाइसेंस को रद्द कर दिया। हालांकि जिनका ट्रेड लाइसेंस रद्द किया गया, वहां आज भी व्यवसाय चल रहा है।
मास्टर प्लान में जल्द होगा संशोधन, व्यवसायिक गतिविधियां रोकने के लिए बोर्ड स्वतंत्र
हरमू : आवासीय भवन में रेस्टोरेंट चल रहा है।
लैंड यूज बदलने के लिए मास्टर प्लान में संशोधन जरूरी
हरिहर सिंह रोड : दर्जनों अपार्टमेंट बने हुए हैं, पर यह क्षेत्र शैक्षणिक है।
सुजीत भगत
रांची की 70% जमीन सीएनटी प्रभावित है। इसके बावजूद मास्टर प्लान में संपूर्ण विकास का सपना दिखाया गया। उसे धरातल पर उतारने के लिए जमीन कहां से आएगी, इसका जिक्र नहीं हुआ। 10 सालों में मास्टर प्लान की समीक्षा नहीं हुई। इससे लैंड यूज नहीं बदला, अवैध निर्माण बढ़े।
मास्टर प्लान में करमटोली से जेल रोड, एमजी रोड से कडरू जाने वाली सड़क के दोनों ओर के क्षेत्र का लैंड यूज आवासीय है। जबकि, ये पूरी तरह व्यवसायिक जोन हैं।
बोड़ेया रोड में साइंस सेंटर के पास के क्षेत्र को रिसर्च सेंटर चिह्नित किया गया है। लैंड यूज नहीं बदला गया। आवासीय या कमर्शियल भवनों का नक्शा पास नहीं हो रहा।
इरबा में रोड के दोनों साइड मेडिकल जोन घोषित है। यहां आवासीय- कमर्शियल नक्शा पास नहीं हो रहा है।
हरिहर सिंह रोड, बरियातू रोड जंक्शन, गौतम बुद्ध मार्ग में दर्जनों अपार्टमेंट बने हुए हैं। फिर भी सरकारी बालिका हाईस्कूल को बड़ा क्षेत्र बताते हुए पूरे क्षेत्र को शैक्षणिक क्षेत्र घोषित कर दिया।
शैक्षणिक क्षेत्र में बन गए फ्लैट्स, आवासीय प्लॉट पर चल रहा व्यवसाय
