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भारत और लिकटेंस्टाइन ने एक साझा बयान जारी कर सीमा पार आतंकवाद सहित इसके सभी रूपों की पुरजोर निंदा की है. लिकटेंस्टाइन के क्राउन प्रिंस अलोइस की भारत यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश और सुरक्षा परिषद में सुधारों पर गहन चर्चा हुई. प्रिंस अलोइस ने वर्ष 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अस्थायी सदस्यता हेतु भारत की उम्मीदवारी का समर्थन किया, जिसके लिए पीएम मोदी ने उनका आभार व्यक्त किया.
यूरोपीय देश ने भारत का खुलकर साथ दिया. (X/PM Modi)
ग्लोबल मंच पर भारत का डंका एक बार फिर पूरी ताकत से बजा. यूरोप के महत्वपूर्ण देश लिकटेंस्टाइन के क्राउन प्रिंस अलोइस की ऐतिहासिक भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच ऐसी जबरदस्त जुगलबंदी दिखी, जिसने दुनिया का ध्यान खींच लिया है. दोनों देशों ने साझा बयान जारी कर सीमा पार आतंकवाद और टेरर फंडिंग की धज्जियां उड़ाते हुए सख्त संदेश दिया है. पर असली धमाकेदार खबर तो सुरक्षा परिषद (UNSC) को लेकर आई है. प्रिंस अलोइस ने साल 2028-29 के कार्यकाल के लिए यूएनएससी की अस्थायी सदस्यता हेतु भारत की दावेदारी का फुल-टू-पब्लिक सपोर्ट कर दिया, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका दिल खोलकर आभार जताया. इतना ही नहीं, 100 बिलियन डॉलर के मेगा इन्वेस्टमेंट और AI से लेकर स्पेस टेक तक में साझेदारी का ऐसा ताना-बाना बुना गया है, जिसने विरोधियों की नींद उड़ा दी है.
लिकटेंस्टाइन के क्राउन प्रिंस अलोइस 25 से 28 अक्टूबर 2026 तक भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं. इस विजिट ने दोनों देशों के रिश्तों में एक नया जोश भर दिया है. साझा बयान जारी करते हुए दोनों देशों ने बिना झिझक के सीमा पार आतंकवाद और कट्टरवाद के हर रूप पर जोरदार हमला बोला और 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले की सख्त लहजे में निंदा की. दोनों देशों ने साफ कर दिया है कि टेरर फंडिंग पर नकेल कसना और आतंकियों को उनके अंजाम तक पहुंचाना अब ग्लोबल प्रायोरिटी है.
इस पूरी मीटिंग का सबसे बड़ा हाइलाइट सुरक्षा परिषद (UNSC) को लेकर रहा. प्रिंस अलोइस ने साल 2028-29 के कार्यकाल के लिए UNSC में भारत की गैर-स्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी को अपना फुल सपोर्ट देने का ऐलान कर दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस जबरदस्त बैकअप के लिए लिकटेंस्टाइन का दिल से धन्यवाद किया और संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की वकालत की. सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि बिजनेस के मामले में भी यह विजिट गेम-चेंजर साबित होने वाली है. भारत-EFTA व्यापार समझौते (TEPA) की पहली सालगिरह के मौके पर दोनों देशों ने अगले 15 सालों में भारत में 100 अरब डॉलर (USD 100 Billion) के निवेश और 10 लाख नई नौकरियों का विजन री-कंफर्म किया है. एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ग्रीन एनर्जी जैसे हाई-टेक सेक्टर्स में लिकटेंस्टाइन की महारत और भारत का बड़ा मार्केट मिलकर नया धमाल मचाने वाले हैं.
इसके अलावा, लीगल और टैक्स सिस्टम को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए ‘डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट’ (DTAA) के ड्राफ्ट पर भी तेजी से काम करने की रजामंदी बनी है. प्रिंस अलोइस ने पीएम मोदी को लिकटेंस्टाइन आने का न्योता भी दिया है. कुल मिलाकर, यह विजिट सिर्फ कागजी बातचीत नहीं, बल्कि भारत के बढ़ते वैश्विक दबदबे का जीता-जागता सबूत है!
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पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…