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Inflation Data : खुदरा महंगाई के बाद अब थोक महंगाई ने भी परेशान करना शुरू कर दिया है. जून में थोक मूल्य आधारित सूचकांक 10 फीसदी के आसपास पहुंच गया है. वाणिज्य मंत्रालय ने अपने आंकड़ों में बताया है कि खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से महंगाई विकराल रूप ले चुकी है.
जून में थोक महंगाई का आंकड़ा बढ़कर 10 फीसदी के करीब पहुंच गया है.
नई दिल्ली. महंगाई ने अपना मुंह फैलाना शुरू कर दिया है. पहले खुदरा महंगाई ने लोगों की जेब पर डाका डाला और अब थोक महंगाई भी अपना विकराल रूप दिखा रही है.जून में खुदरा महंगाई का आंकड़ा 18 महीने में सबसे ज्यादा रहा है तो अब थोक मूल्य आधारित महंगाई का सूचकांक (WPI) भी बढ़कर 10 फीसदी के आसपास पहुंच गया है. इसका मतलब है कि महंगाई डायन का मुंह अब फैलकर सुरसा की तरह हो चुका है, जो खाने-पीने की चीजों में लंका जैसी आग लगा रही है.
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने अपने हालिया आंकड़े में बताया है कि थोक मूल्य की महंगाई जून में 9.68% से बढ़कर 9.87% हो गई है. यह खाने-पीने की चीजों और फैक्ट्री उत्पाद की कीमतों में तेज वृद्धि के कारण हुआ है. WPI की महंगाई में तेज वृद्धि पश्चिम एशिया संकट, होर्मुज जलडमरूमध्य की प्रभावी नाकेबंदी की वजह से दिख रही है. होर्मुज के जिरये ही अधिकांश कच्चा तेल भारत में आयात किया जाता है और इसमें परेशान आने का सीधा असर खाद्य उत्पादों की कीमतों पर दिख रहा है.
किन चीजों ने बढ़ाई सबसे ज्यादा महंगाई
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो खनिज तेल (पेट्रोलियम उत्पादों सहित), खाद्य पदार्थ, बुनियादी धातुओं का निर्माण और रसायन व रासायनिक उत्पादों का निर्माण जून 2026 में WPI महंगाई के प्रमुख चालक रहे हैं. WPI की गणना के लिए आधार वर्ष 2022-23 रखा गया है, जिसे पहले के 2011 के आधार वर्ष से अपडेट किया गया है. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, जून में ईंधन और बिजली में थोक महंगाई दर 27.41% रही, जबकि मई में यह 30.33% थी.
खाद्य महंगाई का सबसे ज्यादा असर
मंत्रालय के आंकड़ों में देखें तो जून में खाद्य पदार्थों की महंगाई 5.49% पहुंच गई जो मई में 3.60% थी. गैर-खाद्य वस्तुओं में WPI की महंगाई दर जून में 11.07% रही, जबकि खनिजों में यह 9.45% रही है. मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की महंगाई दर जून में भी मई के समान 7.48% पर अपरिवर्तित रही. यही वजह रही है कि जून में खाद्य उत्पाद और गैर-खाद्य उत्पादों दोनों ही कैटेगरी पर थोक महंगाई का खास असर दिख रहा है.
खुदरा महंगाई ने तोड़ दिया बैरियर
इससे पहले राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय यानी एनएसओ की ओर से जारी आंकड़ों में बताया गया था कि खुदरा या उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर जून में 4.38% के साथ 17 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई थी. पिछले महीने मई में यह 3.93% थी. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी नीतिगत ब्याज दरों को निर्धारित करने के लिए खुदरा महंगाई को ही आधार बनाया है, जो न्यूनतम 2 फीसदी और अधिकतम 4 फीसदी रखा गया है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें