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Jharkhand Students Protest : झारखंड में प्रतियोगी परीक्षार्थी कई दिन से आंदोलन और भूख हड़ताल कर रहे हैं. स्टूडेंट्स JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक और धांधली से तंग आ चुके हैं. इनकी मांग एक पारदर्शी और जवाबदेही वाले सिस्टम की है.
Students Protest : स्टूडेंट्स ने JPSC के प्रीलिम्स में धांधली का आरोप लगाया है.
Jharkhand Students Protest : दिल्ली के जंतर-मंतर की तरह झारखंड की राजधानी रांची में भी इन दिनों युवाओं का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है. यहां प्रतियोगी परीक्षार्थी कई दिन से धरना दे रहे हैं और कई भूख हड़ताल भी कर रहे हैं. युवाओं की मांग महज एक परीक्षा रद्द कराना नहीं, बल्कि पूरी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की है. दरअसल, झारखंड के युवा झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक से आजिज आ गए हैं.
ऐसे में सवाल है कि यह पूरा मामला क्या है और क्यों हजारों युवा गुस्से में हैं. उनकी मांगें क्या-क्या हैं? सरकार ने अ तक क्या कदम उठाए हैं? आइए जानते हैं विस्तार से.
झारखंड की JPSC को लेकर क्या विवाद है?
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) को लेकर हालिया विवाद 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट के बाद बढ़ा है. नतीजे घोषित होने के बाद अभ्यर्थियों ने मेरिट लिस्ट की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और सोशल मीडिया पर कुछ OMR शीटें भी सामने आई. जिनके आधार पर चयन प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप लगे. इनमें दावा किया गया कि एक अभ्यर्थी ने पेपर-1 में केवल लगभग 48 प्रश्न हल किए थे, फिर भी उसे मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित कर दिया गया. अभ्यर्थयों ने जेपीएससी से कैटेगरी वाइज कटऑफ मार्क्स भी जारी करने की मांग की.
इन आरोपों के बाद राज्य सरकार ने CID के माध्यम से विशेश जांच दल का गठन किया. जिसने कुछ अधिकारियों और परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों की गिरफ्तारियां भी की हैं. हालांकि अभी जांच जारी है. सीआईडी की ओर से जारी जांच के बीच आयोग के अध्यक्ष एल खियांग्ते ने 22 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.
JPSC ने स्थित की नौ परीक्षाएं
विवाद बढ़ने लगा तो जेपीएससी ने 22 जुलाइ को संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2025 समेत नौ भर्ती परीक्षाएं अगली सूचना तक स्थगित कर दी. आयोग ने अपने प्रेस नोट में कहा कि सरकार की ओर से निर्देश और परीक्षा संचालन में गड़बड़ी के चलते यह फैसला लिया गया है.
JSSC का क्या मामला है?
झारखंड में JSSC को लेकर भी कई विवाद हैं. JSSC-CGL परीक्षा में पहले पेपर लीक समेत कई अनियमितताओं के आरोप लगे थे. इसके अलावा साल 2026 की फील्ड वर्कर भर्ती परीक्षा में भी कई अभ्यर्थियों ने बहुत दूर परीक्षा केंद्र देने, एडमिट कार्ड की जानकारी देरी मिलने और पेपर से जुड़ी शिकायतें भी सामने आई थी. आयोग ने कहा कि सभी जानकारियां समय पर दी गई थी. लेकिन अभ्यर्थियों ने व्यवस्था को अपर्याप्त बताया.
छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
- 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द की जाए.
- पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए.
- निष्पक्ष तरीके से दोबारा परीक्षा कराई जाए.
- भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुधार किया जाए.
- दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो.
झारखंड हाईकोर्ट ने क्या कहा?
झारखंड लोक सेवा आयोग की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर हाईकोर्ट में कई याचिका दायर की गई है. याचिकाकर्ताओं के आरोप हैं कि मॉडल आंसर-की में कई उत्तर गलत थे और कटऑफ भी नहीं जारी किया गया. अधिक अंक पाने वाले कई अभ्यर्थियों को असफल घोषित कर दिया गया. उन्होंने अदालत से प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने या वैकल्पिक रूप से मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने की मांग की.
इस पूरे मामले पर अदालत में जेपीएससी ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है. मुख्य परीक्षा पहले ही स्थगित की जा चुकी है. इसलिए इस स्तर पर कोई अंतरिम आदेश देना उचित नहीं होगा. हालांकि, अदालत ने आयोग को कोई अंतरिम राहत नहीं देते हुए चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है. अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को होगी.
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