JPSC scam: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. पहले परीक्षा परिणाम और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठे, फिर झारखंड हाई कोर्ट में परीक्षा रद्द करने की याचिका दायर हुई. इसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर CID ने जांच शुरू की और अब इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए JPSC की तत्कालीन प्रभारी परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है.CID का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में कई और बड़े नाम जांच के दायरे में आ सकते हैं. आइए जानते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है और अब तक क्या-क्या हुआ है?
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाने शुरू कर दिए. उम्मीदवारों का आरोप था कि कटऑफ जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई.इसके अलावा OMR शीट अपलोड करने, परीक्षा परिणाम पर सक्षम अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं होने और चयन सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर भी शिकायतें सामने आईं. कुछ अभ्यर्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा के 418 उम्मीदवारों के चयन पर गंभीर सवाल हैं.इन शिकायतों के आधार पर परीक्षा रद्द करने की मांग करते हुए झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई.
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद CID की एंट्री
14वीं JPSC परीक्षा और पहले हुई भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं की लगातार शिकायतें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक पहुंचीं.शिकायतों में आरोप लगाया गया कि परीक्षा कराने वाली निजी एजेंसी और आयोग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से पेपर लीक, OMR शीट में हेरफेर, डिजिटल टैंपरिंग, फर्जी तरीके से चयन और पैसों की वसूली जैसे गंभीर खेल हुए.इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने CID को एफआईआर दर्ज कर पूरे मामले की जांच करने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का निर्देश दिया.
JPSC कार्यालय और एजेंसी के ठिकानों पर छापेमारी
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद CID और रांची पुलिस की संयुक्त टीम ने JPSC कार्यालय के साथ-साथ परीक्षा कराने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TSR Data Processing Private Limited,TDPL)से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की.छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने बड़ी संख्या में डिजिटल रिकॉर्ड, दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य अहम साक्ष्य जब्त किए.मौके से JPSC और एजेंसी से जुड़े कुल आठ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई.
FIR दर्ज,पांच लोगों की गिरफ्तारी
पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद CID ने थाना कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया.इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ झारखंड प्रतियोगिता परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम एवं निवारण के उपाय) अधिनियम, 2023 की धाराएं भी लगाई गई हैं.इसके बाद पांच लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.गिरफ्तार आरोपियों में JPSC की तत्कालीन प्रभारी परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता,TDPL के निदेशक रामवीर सिंह,TDPL के मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय तिवारी,एजेंसी कर्मचारी मोहम्मद उस्मान,एजेंसी कर्मचारी एबाद शामिल हैं.सभी को रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा (होटवार जेल) भेजा गया है.
श्वेता गुप्ता पर क्या आरोप हैं?
CID के अनुसार श्वेता गुप्ता पर आरोप है कि उन्होंने परीक्षा कराने वाली निजी एजेंसी TDPL के साथ मिलकर काम किया.उन पर बिना पूरी टेंडर प्रक्रिया अपनाए एजेंसी को काम दिलाने, प्रश्नपत्र और OMR शीट की निगरानी में गंभीर लापरवाही बरतने तथा OMR स्कैनिंग में कथित हेरफेर को नजरअंदाज करने के आरोप हैं.CID अब उनके वित्तीय लेन-देन की भी जांच करेगी.
TDPL के निदेशक रामवीर सिंह पर क्या आरोप हैं?
रामवीर सिंह पर आरोप है कि उनकी कंपनी पहले से विवादों में रही है.CID यह जांच कर रही है कि उत्तर प्रदेश की कई परीक्षाओं में संदिग्ध रिकॉर्ड और JSSC द्वारा ब्लैकलिस्ट किए जाने के बावजूद TDPL को JPSC का ठेका कैसे मिला.साथ ही यह भी जांच होगी कि आयोग के किन अधिकारियों से उनके संबंध थे.मनोज कुमार तिवारी पर सबसे गंभीर आरोप लगे हैं.शिकायत के अनुसार वह TDPL में वरिष्ठ अधिकारी रहते हुए खुद कई प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जी तरीके से शामिल हुआ.आरोप है कि उसने OMR शीट में कथित जालसाजी कर JSSC CGL, JPSC ACF, MRO सहित चार बड़ी भर्ती परीक्षाएं पास कीं.CID यह भी पता लगा रही है कि वह कितने अभ्यर्थियों के संपर्क में था और कथित रूप से कितनी रकम वसूली गई.
मोहम्मद उस्मान और एबाद पर क्या आरोप हैं?
मोहम्मद उस्मान पर OMR स्कैनिंग, डेटा प्रोसेसिंग और ऑनलाइन स्क्रीन मार्किंग के दौरान सर्वर तथा डेटाबेस में कथित छेड़छाड़ करने का आरोप है. बताया जा रहा है कि उसका नाम पहले उत्तर प्रदेश की कुछ परीक्षाओं की जांच में भी सामने आ चुका है.एबाद पर प्रश्नपत्रों की प्रिंटिंग, OMR शीट के रखरखाव और कथित रूप से कुछ उम्मीदवारों की OMR शीट में हेरफेर में सहयोग करने का आरोप लगाया गया है.
TDPL कंपनी क्यों आई जांच के घेरे में?
जांच में सबसे ज्यादा सवाल परीक्षा एजेंसी TSR Data Processing Private Limited (TDPL) पर उठ रहे हैं.शिकायतों के मुताबिक यह कंपनी JSSC की सूचीबद्ध एजेंसी थी, लेकिन उस पर अनियमितताओं और अधिक भुगतान मांगने जैसे आरोप लगे थे.इन्हीं कारणों से JSSC ने 20 मई 2025 को TDPL को ब्लैकलिस्ट कर दिया था.आरोप है कि ब्लैकलिस्ट होने के बावजूद जून 2025 से यह कंपनी JPSC की परीक्षाएं संचालित करती रही.CID अब यह पता लगा रही है कि आखिर ब्लैकलिस्ट होने के बाद भी कंपनी को काम कैसे मिलता रहा.
हाई कोर्ट में क्या हुआ?
JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है.याचिकाकर्ता राजेश प्रसाद ने आरोप लगाया है कि कटऑफ जारी करने में अनियमितता हुई.OMR शीट समय पर और सही तरीके से अपलोड नहीं की गई. परीक्षा परिणाम पर सक्षम अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं थे.उत्तर प्रदेश और हरियाणा के 418 उम्मीदवारों के चयन पर सवाल हैं.परीक्षा प्रक्रिया में कई अन्य गंभीर अनियमितताएं हुईं.गुरुवार को सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और JPSC को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी.
अब CID किन बिंदुओं की जांच करेगी?
CID अब कई अहम पहलुओं की जांच कर रही है जिनमें टेंडर प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ या नहीं.प्रश्नपत्र और OMR शीट की सुरक्षा में कोई चूक हुई या नहीं.OMR स्कैनिंग और डिजिटल डेटा में छेड़छाड़ हुई या नहीं.परीक्षा एजेंसी और आयोग के अधिकारियों के बीच मिलीभगत थी या नहीं.पैसों के लेन-देन और कथित मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप.फर्जी तरीके से चयन कराने वाले पूरे नेटवर्क की पहचान शामिल हैं.
अभी क्या स्थिति है?
फिलहाल पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और सभी न्यायिक हिरासत में हैं.CID जब्त किए गए डिजिटल रिकॉर्ड, सर्वर डेटा, दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और यदि नए सबूत सामने आते हैं तो कई अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है.उधर हाई कोर्ट में परीक्षा रद्द करने की याचिका लंबित है. अब सभी की नजर CID की जांच रिपोर्ट और अदालत के अगले फैसले पर टिकी है क्योंकि इन्हीं के आधार पर तय होगा कि JPSC की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया का भविष्य क्या होगा.