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JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर झारखंड में छात्रों का आंदोलन जारी है और इसी बीच आयोग के तीन सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया है.इनमें डॉ. जमाल अहमद भी शामिल हैं. CID ने उन्हें पूछताछ के लिए समन किया था. इसके बाद उनका इस्तीफा सामने आया. डॉ. जमाल अहमद 2 सितंबर 2021 को JPSC सदस्य बने थे और उन्होंने सार्वजनिक पद पर पारदर्शिता को अपनी प्राथमिकता बताते हुए पांच साल का वित्तीय व परिसंपत्ति विवरण भी जारी किया था…
JPSC latest news today, JPSC Dr Jamal Ahmed: डॉ जमाल अहमद कौन हैं?
झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC में बड़ा बदलाव हुआ है. आयोग के सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. राज्यपाल ने तीनों के त्यागपत्र स्वीकार कर लिए हैं. तीनों सदस्यों को CID ने JPSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए समन भी जारी किया था.
इन तीनों में डॉ. जमाल अहमद का नाम हाल के दिनों में एक और वजह से चर्चा में आया था. झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जुलाई 2026 में उनकी कथित आय से अधिक संपत्ति की जांच ACB से कराने की मांग की थी. इसके बाद डॉ. जमाल अहमद ने अपनी ओर से पिछले पांच वर्षों का वित्तीय और परिसंपत्ति विवरण सार्वजनिक करने की बात कही और पारदर्शिता को अपनी प्राथमिकता बताया.ऐसे में सवाल है कि आखिर डॉ. जमाल अहमद कौन हैं, JPSC में आने से पहले वह कहां और किस पद पर काम कर रहे थे, उन्हें आयोग का सदस्य कब बनाया गया और उन पर क्या-क्या आरोप लगाए गए हैं? आइए पूरी कहानी समझते हैं..
JPSC में कब नियुक्त हुए थे डॉ. जमाल अहमद?
डॉ. जमाल अहमद को झारखंड लोक सेवा आयोग का सदस्य 2 सितंबर 2021 को नियुक्त किया गया था. उसी दिन डॉ. अजिता भट्टाचार्य और डॉ. अनिमा हांसदा को भी आयोग का सदस्य बनाया गया था. UPSC के आधिकारिक न्यूजलेटर में भी झारखंड के इन तीनों सदस्यों की नियुक्ति की तारीख 2 सितंबर 2021 दर्ज है.इनकी नियुक्ति के समय झारखंड सरकार ने तीनों नामों को मंजूरी दी थी. अगस्त 2021 में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद सरकार की ओर से बताया गया था कि इलाहाबाद के लाला लक्ष्मी नारायण डिग्री कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर अजिता भट्टाचार्य, रांची के गोस्सनर कॉलेज की सहायक प्रोफेसर डॉ. अनिमा हांसदा और हजारीबाग के संत कोलंबा महाविद्यालय के उर्दू विभाग के अध्यक्ष डॉ. जमाल अहमद को JPSC सदस्य के पद पर नियुक्त करने की मंजूरी दी गई है.नियुक्ति के बाद सितंबर 2021 में तीनों नए सदस्यों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी मुलाकात की थी. यह मुलाकात शिष्टाचार भेंट के तौर पर हुई थी.
JPSC में आने से पहले कहां थे डॉ. जमाल अहमद?
JPSC सदस्य बनने से पहले डॉ. जमाल अहमद शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए थे. वह हजारीबाग के संत कोलंबा महाविद्यालय में उर्दू विभाग से जुड़े रहे हैं. 2021 में उनकी नियुक्ति को मंजूरी दिए जाने की जानकारी में उन्हें कॉलेज के उर्दू विभाग का अध्यक्ष बताया गया था.संत कोलंबा कॉलेज की मौजूदा वेबसाइट पर भी डॉ. जमाल अहमद का नाम उर्दू विभाग के शिक्षकों में दर्ज है और उन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में दिखाया गया है. कॉलेज के एक पुराने IQAC रिकॉर्ड में भी उनका नाम उर्दू विभाग के HOD के तौर पर दर्ज है यानी JPSC में आने से पहले उनका मुख्य पेशेवर जुड़ाव उच्च शिक्षा और उर्दू शिक्षण से था हालांकि उपलब्ध आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों में उनके जन्मस्थान, जन्मतिथि और पूरी शैक्षणिक पृष्ठभूमि की विस्तृत जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है इसलिए इन जानकारियों को लेकर अनुमान लगाना ठीक नहीं होगा.
2008 की नियुक्ति को लेकर क्या विवाद है?
डॉ. जमाल अहमद को लेकर जुलाई 2026 में एक और आरोप सामने आया. झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर उनकी कथित आय से अधिक संपत्ति की जांच ACB से कराने की मांग की.मरांडी ने अपने पत्र में दावा किया कि जमाल अहमद पहले प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे और वर्ष 2008 में उनकी लेक्चरर पद पर नियुक्ति हुई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि इस नियुक्ति प्रक्रिया में भी कथित अनियमितताएं थीं और इसकी जांच केंद्रीय जांच एजेंसी कर रही है हालांकि यह आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि को लेकर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध विश्वसनीय रिकॉर्ड सीमित हैं.इसलिए इस मामले को तथ्य के तौर पर नहीं, बल्कि नेता प्रतिपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप के रूप में देखना जरूरी है.
संपत्ति को लेकर बाबूलाल मरांडी ने क्या आरोप लगाए?
24 जुलाई 2026 को बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर डॉ. जमाल अहमद की संपत्तियों की ACB से जांच कराने की मांग की थी. PTI की रिपोर्ट के मुताबिक मरांडी ने आरोप लगाया कि जमाल अहमद ने JPSC सदस्य रहते हुए अपने पद का कथित दुरुपयोग कर आय के मुकाबले अधिक चल और अचल संपत्ति अर्जित की.मरांडी ने अपनी शिकायत में उनकी चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश और आय के ज्ञात तथा अज्ञात स्रोतों की जांच कराने की मांग की थी. उन्होंने यह भी कहा था कि यदि किसी व्यक्ति की नियुक्ति प्रक्रिया ही जांच के दायरे में हो तो उसे संवैधानिक संस्था JPSC का सदस्य बनाए जाने पर सवाल उठते हैं.इन आरोपों को लेकर यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये बाबूलाल मरांडी की ओर से लगाए गए आरोप थे. उपलब्ध रिपोर्टों में इन्हें किसी न्यायिक या जांच एजेंसी के अंतिम निष्कर्ष के रूप में स्थापित नहीं किया गया है.
डॉ. जमाल अहमद ने आरोपों के जवाब में क्या किया?
संपत्ति को लेकर सवाल उठने के बाद डॉ. जमाल अहमद ने अपनी तरफ से पारदर्शिता दिखाने की पहल की. उन्होंने अपने पिछले पांच वर्षों का वित्तीय और परिसंपत्ति विवरण सार्वजनिक करने की बात कही.उनका कहना था कि सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों के लिए वित्तीय पारदर्शिता और नैतिक जवाबदेही बहुत महत्वपूर्ण है. उनके अनुसार अपनी आय, चल-अचल संपत्ति और दूसरी वित्तीय जानकारियां सार्वजनिक करने का उद्देश्य लोगों के बीच भरोसा बढ़ाना और जवाबदेही की संस्कृति को मजबूत करना है.उन्होंने यह भी कहा कि संवैधानिक और सार्वजनिक संस्थाओं से जुड़े पदाधिकारी अगर खुद पारदर्शिता का उदाहरण पेश करें तो इससे संस्थाओं में आम लोगों का भरोसा मजबूत होगा.
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वर्तमान में न्यूज़18 हिंदी (Network18 Digital)में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पिछले 16 वर्षों से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. इस दौरान प्रिंट, डिजिटल और टेलीविजन मीडिया में काम कर…
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