JPSC JSSC CGL Exam Cancelled: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JSSC-CGL परीक्षा और उससे जुड़ी चयन प्रक्रिया को रद्द करने का फैसला किया. साथ ही TDPL एजेंसी के माध्यम से आयोजित दूसरी परीक्षाओं और कुछ विवादित JPSC परीक्षाओं को भी रद्द करने की घोषणा की गई. यह फैसला लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच के बीच आया है.इनमें सबसे बड़ा असर JSSC-CGL के जरिए चयनित 1,975 अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है. दूसरी ओर JPSC की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, सिविल सेवा बैकलॉग-2023 और बैकलॉग-2025 जैसी परीक्षाएं भी फैसले के दायरे में हैं लेकिन इन JPSC परीक्षाओं में कितने लोगों की मौजूदा सरकारी नौकरी समाप्त होगी.
ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए क्या रास्ता निकालती है. इस सवाल का एक अहम संदर्भ पश्चिम बंगाल का 25,753 शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियों वाला मामला है जहां सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नई भर्ती कराई गई और कुछ अभ्यर्थियों को खास परिस्थितियों में अंतरिम राहत भी मिली.
JSSC-CGL में कितने लोगों की नौकरी प्रभावित हो रही है?
JSSC-CGL के जरिए अलग-अलग विभागों में कई पदों पर नियुक्तियां हुई थीं. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक चयनित अभ्यर्थियों में खंड विकास पदाधिकारी, कनीय सचिवालय सहायक, कम प्रकार पदाधिकारी, पुलिस सब-इंस्पेक्टर, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी और अवर निरीक्षक सह खानपान जैसे पद शामिल थे.JSSC-CGL के जरिए खंड विकास पदाधिकारी के 977, कनीय सचिवालय सहायक के 245, कम प्रकार पदाधिकारी के 180, पुलिस सब-इंस्पेक्टर के 1, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी के 172, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के 173 और अवर निरीक्षक सह खानपान के 165 पदों पर भर्ती हुई थी.सरकार के मौजूदा फैसले से JSSC-CGL के जरिए चयनित 1,975 लोगों की नियुक्ति प्रभावित होने की बात सामने आई है.
लेकिन JPSC के मामले में कितनी नौकरियां जाएंगी?
यहीं एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है. JSSC-CGL में 1,975 चयनित लोगों का आंकड़ा उपलब्ध है.JPSC की जिन परीक्षाओं को फैसले के दायरे में बताया गया है उनमें 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, संयुक्त सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा-2023 और संयुक्त सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा-2025 शामिल हैं.इनमें कई अभ्यर्थी अभी चयन प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में थे.उदाहरण के लिए 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में 2,204 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए सफल हुए थे और मुख्य परीक्षा भी 25 जुलाई 2026 को हो चुकी थी. बैकलॉग-2023 में 125 अभ्यर्थी सफल हुए थे, जबकि बैकलॉग-2025 में 7,599 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया था.इसलिए इन परीक्षाओं के रद्द होने का बड़ा असर चयन प्रक्रिया में आगे बढ़ चुके अभ्यर्थियों पर पड़ेगा.
क्या सरकार नई परीक्षा करा सकती है?
यह सबसे स्वाभाविक विकल्प हो सकता है.अगर किसी परीक्षा की पूरी चयन प्रक्रिया ही अविश्वसनीय या जांच के दायरे में आती है तो सरकार के पास नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का रास्ता हो सकता है लेकिन प्रभावित अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग यह हो सकती है कि उन्हें पहले से किए गए प्रयास, उम्र और परीक्षा में हासिल योग्यता का कोई लाभ मिले.यहीं दूसरे राज्यों में हुए भर्ती विवादों से कुछ संकेत मिल सकते हैं.
पश्चिम बंगाल में 25,753 लोगों की नियुक्तियां रद्द हुई थीं
पश्चिम बंगाल में 2016 की School Service Commission यानी SSC भर्ती में 25,753 शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट के फैसले से रद्द हुई थीं.3 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने पूरी चयन प्रक्रिया को गंभीर अनियमितताओं से प्रभावित मानते हुए नियुक्तियों को अमान्य कर दिया और खाली पदों को भरने के लिए नई चयन प्रक्रिया कराने का निर्देश दिया.यह मामला इसलिए झारखंड के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वहां भी एक ऐसी स्थिति बनी जहां पहले की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद नियुक्तियों और चयन प्रक्रिया को लेकर नया रास्ता बनाना पड़ा.
सभी उम्मीदवारों को एक जैसा फायदा नहीं मिला
पश्चिम बंगाल मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने बाद में untainted यानी जिन शिक्षकों के खिलाफ भर्ती में गड़बड़ी में शामिल होने का मामला नहीं पाया गया था उन्हें कुछ समय तक नौकरी जारी रखने की अनुमति दी.17 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने क्लास 9 से 12 तक के ऐसे सहायक शिक्षकों को नई भर्ती पूरी होने तक काम जारी रखने की अनुमति दी. कोर्ट ने कहा कि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए. साथ ही नई भर्ती का विज्ञापन 31 मई 2025 तक जारी करने और पूरी प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 तक पूरी करने का निर्देश दिया गया.यह राहत ग्रुप सी और ग्रुप डी कर्मचारियों के लिए नहीं थी यानी बंगाल मॉडल में एक तरफ पूरी पुरानी चयन प्रक्रिया को बचाया नहीं गया, लेकिन दूसरी तरफ जिन शिक्षकों पर व्यक्तिगत तौर पर गड़बड़ी का आरोप नहीं था, उनके मामले में छात्रों की पढ़ाई को देखते हुए अस्थायी राहत दी गई.
बंगाल में आगे क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद वेस्ट बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन यानी WBSSC ने नई भर्ती शुरू की.30 मई 2025 को आयोग ने 35,726 सहायक शिक्षक पदों के लिए नई भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया. इसमें 23,212 पद कक्षा 9 और 10 के लिए तथा 12,514 पद कक्षा 11 और 12 के लिए थे.आवेदन प्रक्रिया 16 जून 2025 से शुरू हुई और बाद में आवेदन की अंतिम तारीख 21 जुलाई तक बढ़ाई गई. इस भर्ती के लिए 5 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने आवेदन किया था.इस तरह बंगाल में पुरानी भर्ती को सीधे बहाल करने के बजाय नई चयन प्रक्रिया को रास्ता बनाया गया.
उम्र में राहत भी बनी महत्वपूर्ण कड़ी
पश्चिम बंगाल में नौकरी गंवाने वाले शिक्षकों को नई भर्ती में उम्र को लेकर राहत देने की बात भी सामने आई थी. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मई 2025 में कहा था कि नई भर्ती में नौकरी गंवाने वाले शिक्षकों को उम्र में छूट दी जाएगी.यही पहल झारखंड के प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए भी एक संभावित मॉडल बन सकती है हालांकि झारखंड सरकार ने अभी JSSC-CGL के 1,975 चयनित अभ्यर्थियों के लिए ऐसी उम्र छूट या सीधे पुनर्नियुक्ति की घोषणा नहीं की है.
‘दागी’उम्मीदवारों को नई भर्ती से बाहर रखा गया
पश्चिम बंगाल की नई भर्ती में यह भी तय किया गया कि जिन उम्मीदवारों को पहले की भर्ती में गड़बड़ी से जुड़ा माना गया है उन्हें नई प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा.जुलाई 2025 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी ऐसे उम्मीदवारों को नई भर्ती प्रक्रिया से बाहर रखने के निर्देश दिए और बाद में डिवीजन बेंच ने इस दिशा को बरकरार रखा.अगस्त 2025 में ऐसे 100 उम्मीदवारों के आवेदन भी WBSSC ने रद्द कर दिए थे जिन्हें पहले गड़बड़ (tainted)माना गया था.नवंबर 2025 में WBSSC ने 269 और गड़बड़ उम्मीदवारों को चल रही शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से बाहर किया.इससे एक बात यह पता चलती है कि अगर किसी भर्ती में पूरी प्रक्रिया पर सवाल हो तो सरकार या अदालतें व्यक्तिगत रूप से दोषी और निर्दोष उम्मीदवारों के बीच अंतर करने की कोशिश करें लेकिन यह तभी संभव है जब रिकॉर्ड और जांच के आधार पर किया जाए.
यूपी की 69,000 शिक्षक भर्ती से भी समझिए मामला
उत्तर प्रदेश की 69,000 शिक्षक भर्ती भी भर्ती प्रक्रिया में विवाद और चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण है. इस भर्ती में आरक्षण और चयन सूची को लेकर लंबे समय तक विवाद चला. मामला अदालत तक पहुंचा और अलग-अलग चरणों में चयन सूची, आरक्षण व्यवस्था और प्रभावित अभ्यर्थियों के हितों को लेकर सरकार को आगे की प्रक्रिया तय करनी पड़ी.इस उदाहरण से एक अहम बात समझ आती है कि किसी भर्ती प्रक्रिया में विवाद सामने आने के बाद मामला सिर्फ यह नहीं होता कि परीक्षा या चयन सूची सही थी या गलत. यह भी देखना पड़ता है कि पहले से चयनित अभ्यर्थियों के साथ क्या किया जाए,किन अभ्यर्थियों पर विवाद का असर पड़ा है और आगे की चयन प्रक्रिया किस तरह पूरी की जाए हालांकि JSSC-CGL और यूपी की 69,000 शिक्षक भर्ती को एक जैसा मामला नहीं माना जा सकता. यूपी में पूरी भर्ती प्रक्रिया को उसी तरह रद्द करके सभी नियुक्तियों को समाप्त करने की स्थिति नहीं थी जैसी स्थिति JSSC-CGL के मौजूदा मामले में सामने आ रही है इसलिए यूपी का उदाहरण JSSC-CGL के लिए सीधे कानूनी मॉडल के तौर पर नहीं, बल्कि यह समझाने के लिए महत्वपूर्ण है कि भर्ती विवाद में चयन सूची, आरक्षण, प्रभावित उम्मीदवारों और आगे की प्रक्रिया को अलग-अलग स्तर पर देखा जा सकता है.
तो क्या झारखंड में भी दोबारा परीक्षा देनी होगी?
यह एक संभावित विकल्प है लेकिन अभी सरकार ने इसकी घोषणा नहीं की है.झारखंड में सरकार के सामने कई रास्ते हो सकते हैं. पहला रास्ता पूरी तरह से नई JSSC-CGL भर्ती कराने का है.इसमें पुराने अभ्यर्थियों को नए सिरे से आवेदन और परीक्षा देनी पड़ सकती है.दूसरा रास्ता पश्चिम बंगाल की तरह नई परीक्षा तो कराई जाए, लेकिन पुराने चयनित अभ्यर्थियों को उम्र में छूट और आवेदन में कुछ विशेष राहत दी जाए.तीसरा विकल्प यह हो सकता है कि अगर जांच के बाद यह साबित किया जा सके कि कुछ उम्मीदवारों का चयन किसी गड़बड़ी से प्रभावित नहीं था तो उनके मामलों को अलग तरीके से देखा जाए लेकिन यह विकल्प कानूनी और प्रशासनिक जांच पर निर्भर करेगा.चौथा रास्ता यह हो सकता है कि सरकार नई भर्ती के लिए पुराने उम्मीदवारों को एक अतिरिक्त अवसर दे, ताकि उन्होंने जिस परीक्षा प्रक्रिया में पहले सफलता हासिल की थी उसका पूरा नुकसान न हो.पांचवां विकल्प रिक्तियों के आधार पर नई भर्ती के साथ प्रभावित उम्मीदवारों को विशेष आयु छूट,आवेदन में राहत या अतिरिक्त अवसर देना हो सकता है लेकिन इनमें से किसी भी विकल्प को अभी झारखंड सरकार का तय फैसला नहीं माना जा सकता.
JPSC अभ्यर्थियों के लिए क्या विकल्प हो सकता है?
JPSC में स्थिति थोड़ी अलग है क्योंकि कई उम्मीदवार अभी नियुक्त नहीं हुए हैं. ऐसे में सरकार के पास नई परीक्षा कराने का विकल्प अपेक्षाकृत स्पष्ट है.मसलन 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में जिन 2,204 उम्मीदवारों ने मुख्य परीक्षा दी है उनके लिए सरकार चाहे तो नई प्रारंभिक परीक्षा या पूरी चयन प्रक्रिया के लिए नया विज्ञापन जारी कर सकती है. इसी तरह बैकलॉग परीक्षाओं के सफल उम्मीदवारों के लिए भी नई प्रक्रिया तय की जा सकती है.यहां सबसे बड़ा सवाल होगा कि क्या पुराने उम्मीदवारों को बिना फिर से प्रारंभिक परीक्षा दिए मुख्य परीक्षा में शामिल होने दिया जाएगा या सभी को नए सिरे से परीक्षा देनी होगी?इसका जवाब सरकार की नई अधिसूचना और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा.
क्या बंगाल का मॉडल हूबहू लागू हो सकता है?
इसका जवाब है-नहीं.पश्चिम बंगाल और झारखंड के मामले में परिस्थितियां अलग हैं.बंगाल में मामला स्कूल शिक्षक भर्ती का था और सुप्रीम कोर्ट के सामने यह सवाल था कि पूरी चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के बीच कौन से उम्मीदवार व्यक्तिगत रूप से tainted थे और कौन नहीं.झारखंड में JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं का मामला अलग भर्ती आयोग, अलग पदों और अलग परीक्षा प्रणाली से जुड़ा है इसलिए बंगाल का मॉडल कानूनी मिसाल की तरह सीधे लागू नहीं किया जा सकता लेकिन उससे सरकार को प्रभावित उम्मीदवारों के लिए राहत का एक संभावित ढांचा जरूर मिल सकता है.