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Liquor Price Hike: तमिलनाडु सरकार ने शराब और बीयर कंपनियों पर नया अतिरिक्त शुल्क लगा दिया है. अब शराब की हर पेटी पर कंपनियों को TASMAC को ज्यादा रकम चुकानी होगी. स्पिरिट पर 90 रुपए, बीयर पर 40 रुपए और वाइन पर 20 रुपए अतिरिक्त लिए जाएंगे. सरकार का दावा है कि इससे हर साल करीब 1000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा. हालांकि ग्राहकों के लिए राहत की बात यह है कि शराब की दुकानों पर कीमतें नहीं बढ़ेंगी और आम लोगों को अतिरिक्त पैसा नहीं देना होगा.
तमिलनाडु सरकार ने शराब कारोबार को लेकर ऐसा दांव चला है जिसने शराब कंपनियों की टेंशन बढ़ा दी है, लेकिन आम ग्राहकों को फिलहाल राहत मिली हुई है. राज्य सरकार ने बीयर और शराब बनाने वाली कंपनियों पर नया अतिरिक्त शुल्क लगा दिया है. अब TASMAC यानी तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन को सप्लाई की जाने वाली हर शराब की पेटी पर कंपनियों को ज्यादा पैसे चुकाने होंगे. खास बात यह है कि सरकार ने साफ कर दिया है कि दुकानों पर शराब खरीदने वाले लोगों को इसके लिए एक भी रुपया अतिरिक्त नहीं देना पड़ेगा. यानी झटका कंपनियों को लगेगा, ग्राहक को नहीं.
तमिलनाडु देश के उन राज्यों में शामिल है जहां शराब की बिक्री पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में होती है. TASMAC राज्यभर में 4 हजार से ज्यादा शराब की दुकानों का संचालन करता है. अब नई नीति के तहत स्पिरिट यानी हार्ड शराब की हर पेटी पर कंपनियों को अतिरिक्त 90 रुपए देने होंगे. बीयर कंपनियों पर प्रति केस 40 रुपए और वाइन कंपनियों पर 20 रुपए अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है. यह रकम सीधे सरकार के खाते में जाएगी. सरकार का मानना है कि शराब बिक्री से जुड़ा पूरा आर्थिक फायदा अब तक राज्य खजाने तक पूरी तरह नहीं पहुंच रहा था.
तमिलनाडु सरकार का दावा है कि इस नए मॉडल से हर साल करीब 1000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा. दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने टैक्स बढ़ाने या MRP में बदलाव करने के बजाय पूरा बोझ कंपनियों पर डाल दिया है. इससे आम ग्राहकों के बीच नाराजगी का खतरा भी कम रहेगा. राजनीतिक जानकार इसे ‘राजस्व बढ़ाओ लेकिन जनता को नाराज मत करो’ वाली रणनीति बता रहे हैं.
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राज्य सरकार ने साफ किया है कि TASMAC दुकानों पर शराब और बीयर की कीमतें फिलहाल नहीं बढ़ेंगी. यानी अगर कोई ग्राहक पहले जितने पैसे देकर बीयर या शराब खरीद रहा था, उसे आगे भी उतने ही पैसे देने होंगे. हालांकि बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय में कंपनियां इस अतिरिक्त बोझ की भरपाई दूसरे तरीकों से करने की कोशिश कर सकती हैं. फिलहाल सरकार और कंपनियों के बीच इस फैसले को लेकर अंदरखाने चर्चाएं तेज हो गई हैं.
तमिलनाडु में शराब कारोबार हमेशा से बड़ा राजनीतिक और आर्थिक मुद्दा रहा है. TASMAC के जरिए हर साल हजारों करोड़ रुपए की कमाई होती है. राज्य की करीब 4048 सरकारी दुकानों में सिर्फ लाइसेंस प्राप्त कंपनियों की शराब बिकती है. सरकार का कहना है कि नया शुल्क मॉडल शराब वितरण व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी और राजस्व केंद्रित बनाएगा. इससे राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी.
देशभर में कई राज्य नए राजस्व स्रोत तलाश रहे हैं. ऐसे समय में तमिलनाडु का यह मॉडल दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है. खासकर वे राज्य जहां शराब बिक्री सरकारी नियंत्रण में है, वहां इस तरह के अतिरिक्त शुल्क मॉडल पर चर्चा शुरू हो सकती है. सरकारें चाहती हैं कि टैक्स सीधे जनता पर डाले बिना खजाना मजबूत किया जाए और यही वजह है कि कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा रहा है.
फिलहाल शराब कंपनियों के लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है. एक तरफ बिक्री पहले से सरकारी नियंत्रण में है और दूसरी तरफ अब अतिरिक्त शुल्क का बोझ भी बढ़ गया है. लेकिन सरकार को उम्मीद है कि इससे राज्य की कमाई बढ़ेगी और आम लोगों पर सीधा असर नहीं पड़ेगा. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनियां इस फैसले को कैसे संभालती हैं और क्या भविष्य में इसका असर शराब बाजार की रणनीतियों पर भी दिखाई देगा.