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Meet Chandranath Rath | Who is Chandranath Rath | Who is Suvendu...


Who is Chandranath Rath: राजनीति में अक्सर मंच पर दिखने वाले चेहरे ही चर्चा में रहते हैं लेकिन कई बार असली रणनीतिकार पर्दे के पीछे काम कर रहे होते हैं. पश्चिम बंगाल की राजनीति में चंद्रनाथ रथ ऐसा ही नाम थे. शांत स्वभाव, लो-प्रोफाइल अंदाज और बेहद अनुशासित कार्यशैली के कारण उन्हें सुवेंदु अधिकारी का सबसे भरोसेमंद साथी माना जाता था. एयरफोर्स की नौकरी छोड़कर राजनीति में आना अपने आप में बड़ा फैसला था, लेकिन रथ ने सिर्फ राजनीति में एंट्री नहीं की. उन्होंने खुद को एक ऐसे बैक-रूम ऑपरेटर के रूप में स्थापित किया. जिसने बंगाल की सबसे हाई-प्रोफाइल चुनावी लड़ाई में अहम भूमिका निभाई. भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराने की पटकथा लिखने वालों में उनका नाम सबसे ऊपर गिना जा रहा है. यही वजह है कि उनकी हत्या ने सिर्फ भाजपा ही नहीं, बल्कि पूरे बंगाल की राजनीति को झकझोर दिया है. वह सुवेंदू अधिकारी के निज सहायक यानी पीएम के रूप में काम कर रहे थे.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार 6 मई की रात मध्यामग्राम में हुई गोलीबारी में चंद्रनाथ रथ की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. भाजपा इसे साजिश बता रही है, जबकि टीएमसी ने भी घटना की निंदा करते हुए जांच की मांग की है. लेकिन इस राजनीतिक बहस से अलग अगर चंद्रनाथ रथ की कहानी देखी जाए तो यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिसने वर्दी से लेकर राजनीति तक हर जगह अनुशासन और वफादारी को प्राथमिकता दी. वह सार्वजनिक मंचों पर कम दिखते थे लेकिन सुवेंदु अधिकारी के लिए ट्रस्टेड ट्रबलशूटर माने जाते थे. भाजपा के अंदर भी उन्हें एक मजबूत रणनीतिकार और संकटमोचक के तौर पर देखा जाता था.

चंडीपुर से शुरू हुआ सफर

  • चंद्रनाथ रथ का जन्म पूर्व मेदिनीपुर जिले के चंडीपुर में हुआ था. उनका परिवार लंबे समय से स्थानीय राजनीति से जुड़ा रहा. उनकी मां हासी रथ पंचायत स्तर पर सक्रिय रही थीं. अधिकारी परिवार और रथ परिवार का रिश्ता भी करीब दो दशक पुराना बताया जाता है.
  • रथ की शुरुआती पढ़ाई राहरा रामकृष्ण मिशन में हुई. युवावस्था में उनका झुकाव आध्यात्मिक जीवन की ओर भी रहा. रामकृष्ण मिशन के अनुशासन और विचारों का असर उनकी पूरी जिंदगी में दिखाई देता था.
  • इसके बाद उन्होंने भारतीय वायुसेना जॉइन की. करीब 20 साल तक एयरफोर्स में सेवा देते हुए उन्होंने प्रशासनिक और ऑपरेशनल कामकाज में अनुभव हासिल किया. एयरफोर्स की ट्रेनिंग ने उन्हें कठिन परिस्थितियों में शांत रहना और बड़े स्तर पर टीम मैनेजमेंट करना सिखाया.
चंद्रनाथ रथ सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक और सबसे करीबी सहयोगियों में से एक थे.

एयरफोर्स छोड़ राजनीति में क्यों आए?

  • वॉलंटरी रिटायरमेंट लेने के बाद रथ ने कुछ समय कॉर्पोरेट सेक्टर में काम किया. लेकिन जल्द ही उनका रुझान राजनीति की तरफ बढ़ गया. 2019 के आसपास उन्होंने सुवेंदु अधिकारी के साथ काम करना शुरू किया, जब अधिकारी ममता सरकार में मंत्री थे.
  • 2020 में जब सुवेंदु अधिकारी ने टीएमसी छोड़कर भाजपा जॉइन की, तब चंद्रनाथ रथ भी उनके साथ आ गए. पार्टी बदलने के उस संवेदनशील दौर में भी उन्होंने वफादारी नहीं छोड़ी. भाजपा नेताओं के मुताबिक रथ सिर्फ पीए नहीं थे बल्कि रणनीति से लेकर संगठन तक कई अहम जिम्मेदारियां संभालते थे.

भवानीपुर में ममता को हराने की रणनीति

  • 2026 के विधानसभा चुनाव में भवानीपुर सीट सबसे चर्चित मुकाबला बन गई थी. यहां से खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मैदान में थीं. भाजपा ने सुवेंदु अधिकारी को उतारा और चुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दिया. सूत्रों के मुताबिक इस पूरे अभियान के बैक-एंड मैनेजमेंट की जिम्मेदारी चंद्रनाथ रथ के पास थी. वे चुनावी लॉजिस्टिक्स, कार्यकर्ताओं के समन्वय, बूथ मैनेजमेंट और संवेदनशील रणनीतिक फैसलों पर काम कर रहे थे.
  • भाजपा नेताओं का कहना है कि रथ ने एयरफोर्स से मिले अनुशासन और प्रबंधन कौशल का इस्तेमाल चुनाव अभियान में किया. भवानीपुर जैसे हाई-प्रोफाइल चुनाव में ग्राउंड लेवल पर मजबूत नेटवर्क बनाना आसान नहीं था, लेकिन रथ ने इसे बेहद व्यवस्थित तरीके से संभाला.

सुवेंदु के साए की तरह रहते थे रथ

चंद्रनाथ रथ सार्वजनिक मंचों पर कम दिखाई देते थे. वह कैमरों से दूर रहकर काम करना पसंद करते थे. लेकिन भाजपा के अंदर उन्हें सुवेंदु अधिकारी का सबसे भरोसेमंद व्यक्ति माना जाता था. पार्टी के कई नेताओं का कहना है कि अगर भविष्य में सुवेंदु अधिकारी को बड़ी जिम्मेदारी मिलती, तो रथ भी संगठन या प्रशासन में अहम भूमिका निभा सकते थे.

मध्यामग्राम में हुई सनसनीखेज हत्या

6 मई की रात मध्यामग्राम के दोहरिया इलाके में रथ अपनी ब्लैक स्कॉर्पियो से घर लौट रहे थे. तभी चार बाइकों पर आए हमलावरों ने उनकी गाड़ी रोक ली और ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. रथ को सिर, छाती और पैर में गोलियां लगीं. अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और मामले की जांच जारी है. सुवेंदु अधिकारी ने इसे पूर्व नियोजित हत्या बताया है. वहीं भाजपा ने बंगाल में पोस्ट-पोल हिंसा का मुद्दा फिर से उठाया है.

चंद्रनाथ रथ कौन थे और भाजपा में उनकी क्या भूमिका थी?

चंद्रनाथ रथ सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक और सबसे करीबी सहयोगियों में से एक थे. वह सिर्फ पीए नहीं थे बल्कि चुनावी रणनीति, संगठनात्मक काम और संवेदनशील राजनीतिक जिम्मेदारियां भी संभालते थे. भाजपा के अंदर उन्हें एक भरोसेमंद बैक-रूम रणनीतिकार माना जाता था.

भवानीपुर चुनाव में उनकी भूमिका क्यों अहम मानी जा रही है?

भवानीपुर चुनाव 2026 बंगाल की सबसे हाई-प्रोफाइल लड़ाई थी, जहां ममता बनर्जी मैदान में थीं. चंद्रनाथ रथ ने चुनाव अभियान के लॉजिस्टिक्स, बूथ मैनेजमेंट और ग्राउंड कोऑर्डिनेशन की जिम्मेदारी संभाली थी. भाजपा नेताओं के मुताबिक, उनकी रणनीति ने सुवेंदु अधिकारी की जीत में बड़ी भूमिका निभाई.

उनकी हत्या को लेकर राजनीति क्यों गरमा गई है?

रथ की हत्या भाजपा की बड़ी चुनावी जीत के दो दिन बाद हुई. भाजपा इसे राजनीतिक साजिश बता रही है, जबकि विपक्ष भी जांच की मांग कर रहा है. इस घटना ने बंगाल में पोस्ट-पोल हिंसा और राजनीतिक टकराव की बहस को फिर तेज कर दिया है.



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