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New GST Rule : जीएसटी परिषद ने 1 नवंबर से देश के करोड़ों कारोबारियों के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं. परिषद ने पिछली बैठक में तय किया था कि ऑनलाइन कारोबार करने वाले और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के छोटे विक्रेताओं को बड़ी राहत दी जाएगी. उनके लिए रिटर्न प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ रिफंड को भी काफी आसान कर दिया है. सभी नियम 1 नवंबर से लागू हो जाएंगे.
जीएसटी परिषद ने 1 नवंबर से कई नियमों में बदलाव किया है.
नई दिल्ली. देश के करोड़ों कारोबारियों के लिए 1 नवंबर से जीएसटी में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. इस व्यवस्था के तहत छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया आसान बनाने, रिफंड में तेजी लाने और सप्लाई के बाद दी जाने वाली छूट के नियमों को सरल करने सहित कई सुधार एक नवंबर से लागू होंगे. जीएसटी परिषद की 8 अक्टूबर को हुई 57वीं बैठक में जीएसटी प्रक्रियाओं में कई सुधारों को मंजूरी दी गई थी. इनमें मुख्य रूप से पंजीकरण, रिटर्न और रिफंड से जुड़े बदलाव शामिल हैं.
नए नियमों के तहत कई राज्यों में सामान बेचने वाले छोटे ई-कॉमर्स विक्रेता संबंधित राज्य में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के गोदाम को ही अपना मुख्य कारोबारी स्थल घोषित कर सकेंगे. इसके लिए विक्रेता को कम-से-कम एक राज्य में वास्तविक उपस्थिति रखनी होगी. वहां भौतिक सत्यापन और आधार प्रमाणीकरण पूरा होने के बाद अन्य राज्यों में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की सहमति से पंजीकरण कराया जा सकेगा. इस व्यवस्था से करीब 9.5 लाख छोटे विक्रेताओं को फायदा होने की संभावना है.
टैक्स क्रेडिट की लिमिट भी तय
जीएसटी परिषद ने ऐसे कारोबारियों के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट की सीमा 2.5 लाख रुपये तक प्रति माह तय कर दी है. जीएसटी विभाग ने एक नवंबर से पंजीकरण के लिए जरूरी दस्तावेजों और सूचनाओं को भी स्पष्ट किया है. जीएसटी पोर्टल पर आवेदन के लिए आसान प्रक्रिया उपलब्ध कराई जाएगी. नई व्यवस्था से फायदा यह होगा कि छोटे ई-कॉमर्स कारोबारियों के लिए अब हर शहर में अपना ऑफिस बनाने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि अपने गोदाम को ही ऑफिस के पते के रूप में इस्तेमाल कर सकेंगे.
5 करोड़ तक टर्नओवर वालों को फायदा
जीएसटी परिषद ने ऑनलाइन कारोबार करने वालों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के छोटे विक्रेताओं के लिए जीएसटी पंजीकरण आसान बनाने के साथ ही 5 करोड़ से कम टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए भी रजिस्ट्रेशन और रिटर्न की प्रक्रिया को सरल बना दिया है. अब कारोबारियों को जीएसटी रिफंड ऑटोमेटिक जारी हो जाएगा और इसके लिए डॉक्यूमेंट की जरूरत नहीं होगी. सारी प्रक्रिया ऑनलाइन ही पूरी होकर 2 दिन के भीतर रिफंड आ जाएगा.
गड़बड़ी पर गिरफ्तारी नहीं
जीएसटी परिषद ने अधिकारियों के भी हाथ बांध दिए हैं और टैक्स में किसी तरह की गड़बड़ होने पर अब गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, बल्कि इसे पेनाल्टी के जरिये सुलझाया जाएगा. जीएसटी परिषद ने टैक्स नोटिस और जमा की जाने वाली राशि के साथ रिफंड को भी ज्यादा पारदर्शी बना दिया है. 1 नवंबर से कारोबारियों को इस बदलाव का फायदा मिलेगा और उनके लिए जीएसटी के नियमों का पालन करना और भी आसान हो जाएगा.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…