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Palamu Paddy Farming: पलामू में कम बारिश और सुपर एल नीनो के असर से धान की खेती प्रभावित हो रही है. कई किसानों ने बिचड़ा तैयार कर लिया है, लेकिन पानी की कमी के कारण रोपाई शुरू नहीं हो सकी है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश शाह ने किसानों को लंबी अवधि वाले धान की बजाय कम अवधि वाली किस्में, जैसे बाकर धान, ब्राउन बोरा और 100–105 दिनों में तैयार होने वाले हाइब्रिड धान लगाने की सलाह दी है.
पलामू: झारखंड में इस साल मानसून सक्रिय है. इसके बावजूद सुपर एल नीनो का असर लगातार देखने को मिल रहा है. इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पलामू जैसे रेन शैडो जोन वाले इलाकों पर पड़ा है. यहां सामान्य वर्षों की तुलना में भी कम बारिश हुई है. बारिश की कमी से किसान धान की खेती को लेकर चिंता में हैं. जिले के कई किसानों ने धान का बिचड़ा तैयार कर लिया है. कई खेत रोपाई के लिए भी तैयार हैं. लेकिन पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण अब तक रोपाई शुरू नहीं हो सकी है. हालांकि, पिछले 24 घंटे में जिले में 40 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है. इसके बाद कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खेती की तैयारी शुरू करने की सलाह दी है.
कम अवधि वाले धान की खेती पर दें जोर
क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, चियांकी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश शाह ने बताया कि यदि आगे भी सामान्य से कम बारिश होती है तो किसानों को लंबी अवधि वाले धान की जगह कम अवधि वाली किस्मों की खेती करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि पहली श्रेणी की भूमि में किसान बाकर धान की खेती कर सकते हैं. यह किस्म पलामू क्षेत्र में पहले से प्रचलित है. इसके अलावा ब्राउन बोरा किस्म भी किसानों के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है. जो किसान हाइब्रिड धान लगाना चाहते हैं, उन्हें 100 से 105 दिनों में तैयार होने वाली किस्मों का चयन करना चाहिए.
देर से रोपाई में बढ़ जाता है नुकसान का खतरा
डॉ. शाह ने कहा कि यदि धान की बुआई या रोपाई देर से होती है तो लंबी अवधि वाली किस्मों की खेती जोखिम भरी साबित हो सकती है. ऐसी स्थिति में धान में फूल आने का समय ठंड के मौसम तक पहुंच जाता है. इससे दानों का भराव प्रभावित होता है. परिणामस्वरूप उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है. उन्होंने कहा कि इस समय कम अवधि वाली किस्में किसानों के लिए ज्यादा सुरक्षित और लाभदायक रहेंगी. बाकर धान और ब्राउन बोरा दोनों किस्मों की खेती पहली और दूसरी श्रेणी की जमीन में आसानी से की जा सकती है.
कम लागत में अच्छा मुनाफा मिलने की उम्मीद
कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि एक एकड़ में सामान्य धान की खेती पर औसतन करीब 12 हजार रुपये की लागत आती है. वहीं हाइब्रिड धान की खेती में लगभग 25 हजार रुपये तक खर्च हो सकता है. यदि मौसम अनुकूल रहा तो किसानों को 15 से 20 हजार रुपये तक का शुद्ध लाभ मिल सकता है. उन्होंने बताया कि PAC-807 जैसी हाइब्रिड किस्म 100 से 105 दिनों में तैयार हो जाती है. इससे प्रति एकड़ 25 से 30 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है. वहीं बाकर धान जैसी कम अवधि वाली किस्में 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती हैं. इनसे प्रति एकड़ लगभग 7 से 8 क्विंटल तक उपज प्राप्त की जा सकती है.
किसानों को क्या सलाह दी गई?
डॉ. अखिलेश शाह ने किसानों से कहा कि मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए जल्दबाजी में पारंपरिक लंबी अवधि वाले धान की खेती न करें. स्थानीय मौसम और जमीन की स्थिति के अनुसार कम अवधि वाली किस्मों का चयन करें. समय पर रोपाई करें. इससे सूखे जैसी स्थिति में नुकसान कम होगा और बेहतर उत्पादन मिलने की संभावना बढ़ जाएगी. किसानों को मौसम के अनुसार खेती की रणनीति अपनानी चाहिए, ताकि इस सीजन में अच्छी उपज और बेहतर आमदनी हासिल की जा सके.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें