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Property Knowledge : नोएडा में जितनी भी सोसाइटी बनी हुई है, लगभग सभी किसानों की जमीन पर ही बनाई गई हैं. लेकिन, क्या एक किसान अपनी जमीन किसी बिल्डर को देने से इनकार कर सकता है. इस बारे में किसान के पास क्या अधिकार हैं और कानून कितना हक देता है. सुप्रीम कोर्ट ने भी किसानों की जमीन विकास के लिए अधिग्रहण करने को लेकर कई फैसले दिए हैं.
किसान के पास बिल्डर को जमीन न बेचने का पूरा अधिकार होता है.
नई दिल्ली. कुछ दशक पहले तक नोएडा पूरी तरह एक गांव था, जो आज विकसित होकर महानगर का रूप ले चुका है. ग्रेटर नोएडा में तो आज भी कई इलाके पूरी तरह ग्रामीण क्षेत्र जैसे लगते हैं और वहां भी जमीनों का अधिग्रहण करके बड़ी-बड़ी सोसाइटियां बनाई जा रही हैं. नोएडा में भी सभी सोसाइटियां किसानों से जमीन लेकर विकसित की गई हैं. अब सवाल ये उठता है कि क्या कोई किसान इन सोसाइटियों को अपनी जमीन देने से इनकार कर सकता है. इस बारे में किसानों के पास क्या अधिकार हैं और कानून क्या कहता है.
बात सिर्फ नोएडा या एनसीआर की नहीं, अगर देश के किसी भी कोने में कोई बिल्डर अपना प्रोजेक्ट बनाना चाहता है तो उसे किसानों से सहमित लेकर उनकी जमीन का अधिग्रहण करना होगा. इसका मतलब है कि जमीन सोसाइटी के लिए देनी है या नहीं, इसका फैसला पूरी तरह किसान का होगा. किसान के पास यह अधिकार है कि वह अपनी जमीन किसी सोसाइटी बेचने से इनकार कर सकता है. नोएडा में अगर कोई बिल्डर हाउसिंग सोसाइटी बनाना चाहता है तो उसे किसान से 2 तरीके से जमीन का अधिग्रहण करना होगा. सीधे किसान के साथ आपसी सहमति से जमीन खरीद सकते हैं. दूसरा रास्ता ये है कि सरकार या नोएडा प्राधिकरण के जरिये कानूनी प्रक्रिया से जमीन का अिधग्रहण किया जा सकता है. संविधान का अनुच्छेद 300ए साफ कहता है कि किसी व्यक्ति की मंजूरी के बिना उसकी संपत्ति से बेदखल नहीं किया जा सकता है.
किसान के अधिकार भी अलग
अगर बिल्डर ने सीधे किसान से संपर्क किया और उससे जमीन खरीदने का सौदा किया तो किसान के पास अपनी जमीन का फैसला करने का पूरा अधिकार है. अगर किसान चाहे तो प्रोजेक्ट के लिए जमीन बेच सकता है और अगर न चाहे तो इनकार कर सकता है. इसका मतलब है कि बिल्डर के साथ सीधे सौदे में तो किसान ही राजा होगा और वही अपनी जमीन का पूरा अिधकार रखता है. लेकिन, अगर बिल्डर प्राधिकरण या सरकार के जरिये जमीन का अधिग्रहण करने जाता है तो किसान के अधिकार भी सीमित हो जाते हैं.
सरकार शामिल तो इनकार नहीं कर सकता किसान
अगर बिल्डर ने नोएडा प्राधिकरण का रुख किया या सरकार के जरिये किसान की जमीन खरीदनी चाही तो किसान के अधिकार सीमित हो जाते हैं. भूमि अधिग्रहण कानून 2013 की धारा 2(2) में निजी कंपनियों जैसे बिल्डर आदि और पीपीपी परियोजनाओं के लिए सहमति का प्रावधान किया गया है. हालांकि, किसी निजी कंपनी के लिए जमीन का अधिग्रण तभी मंजूर होता है जब उस अधिग्रहण से प्रभावित होने वाले कम से कम 80 फीसदी परिवारों की सहमति हो. पीपीपी परियोजनाओं के लिए भी कम से कम 70 फीसदी परिवारों की सहमति जरूरी है.
नोएडा प्रधिकरण के पास कितने अधिकार
यूपी औद्योगिक विकास अधिनियम, 1976 में नोएडा प्राधिकरण को विकास और सार्वजनिक योजनाओं के लिए जमीन खरीदने, अधिग्रहण करने और कानून बनाने का अधिकार दिया गया है. इस लिहाज से अगर बिल्डर अपने लिए जमीन अथॉरिटी के जरिये लेना चाहते हैं तो किसान कुछ मामलों में इनकार नहीं कर सकता है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि विकास की जल्दबाजी में अधिग्रहण का फैसला नहीं करना चाहिए. इसके लिए सभी तय कानून का पालन करना जरूरी है. किसान से जमीन लेने के लिए भी प्राधिकरण को सभी कानून का पालन करना जरूरी होगा.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…