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SCO समिट में मोदी-पुतिन-जिनपिंग, क्या बड़ा होने वाला है? मुनीर-शहबाज की क्यों...


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति एक बार फिर धूम मचाने के लिए तैयार है. इस बार तो पीएम मोदी का विदेश दौरा इसलिए भी खास है, क्योंकि कुछ दिन पहले ही राहुल गांधी पीएम नरेंद्र मोदी की विदेश नीति का मजाक उड़ाकर ऐसा फंसे कि अब तक जवाब देते नहीं बन रहा है. उधर नरेंद्र मोदी किसी बात का लोड नहीं ले रहे, क्योंकि विदेश नीति में तो भारत का ऐसा जलवा दिख रहा है कि अमेरिका ने कितना हाथ पांव मार लिए, लेकिन रूस से भारत की दोस्ती नहीं तुड़वा पाया. उधर चीन ने भी समझ लिया कि नरेंद्र मोदी के नए भारत की ताकत से टकराने में कोई भलाई नहीं, बल्कि साथ साथ चलने में ही भलाई है.

नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के जिस दौरे पर गए हैं, उसमें सबसे खास रहने वाला है SCO शिखर सम्मेलन. जहां रुस भी होगा, चीन भी होगा, पाकिस्तान भी होगा. पाकिस्तान की हालत तो पहले से खराब है क्योंकि सेंट्रल एशिया के इस इलाके में भारत अपनी डिप्लोमेसी से लगातार प्रभाव बढ़ा रहा है. पीएम मोदी के उजबेकिस्तान दौरे पर पाकिस्तान की नजर होगी, क्योंकि भारत के जियोपॉलिटिक्स के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है और खासकर अभी पश्चिम एशिया में जो हालात हैं और पाकिस्तान ने जिस तरह से सऊदी अरब और तुर्की के साथ मिलकर मक्का समझौता किया है, उससे इसकी अहमियत और बढ़ जाती है. ऊपर से उज्बेकिस्तान हो या फिर किर्गिस्तान दोनों देशों के साथ भारत के रिश्ते सालों से बहुत मजबूत रहे हैं. नरेंद्र मोदी अब विदेश नीति के क्या नए धमाके करने वाले हैं, जिससे यहां राहुल गांधी का नैरेटिव ध्वस्त हो जाएगा और उधर पाकिस्तान के होश उड़ जाएंगे.

पीएम मोदी की पुतिन-जिनपिंग से मुलाकात के मायने

प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति पर सवाल उठाने वाले राहुल गांधी क्या बताएंगे कि PM मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा क्यों खास है? क्या राहुल गांधी के पास इस बात का जवाब है कि PM मोदी के किर्गिस्तान दौरा से भारत को क्या हासिल होगा? SCO यानी शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में जब पीएम मोदी पुतिन और जिनपिंग से मिलेंगे तो क्या इसके क्या मायने हैं?

राहुल गांधी ये नहीं समझा पाएंगे कि किसी भी देश की विकास यात्रा में सबसे अहम होता है ऊर्जा खपत. चीन और भारत दोनों के लिए सबसे अहम होर्मुज़ स्ट्रेट यानी दुनिया का सबसे व्यस्त तेल गलियारा ईरान-अमेरिका तनाव की वजह से एशिया के देशों के लिए ऊर्जा संकट पैदा कर रहा है. खाड़ी में युद्ध और हॉर्मुज़ में टकराव के बाद भारत के लिए रूस सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बन चुका है. कुछ महीनों में रूसी तेल का हिस्सा 50 फीसदी तक रहा है. और इसके लिए ये बहुत जरूरी है कि दिल्ली और मॉस्को के बीच रिश्ते पहले जैसे ही बने रहे. भारत के लिए ये बहुत जरूरी है कि मॉस्को से भारत के लिए तेल आपूर्ति जारी रहे और राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात इस मायने में काफी अहम मानी जारी रही है.

CIA डायरेक्टर ने रूस को किस बात पर चेताया

और सिर्फ यही वजह नहीं है… रूस और NATO में तनाव के बीच CIA डायरेक्ट जॉन रैटक्लिफ का मॉस्को दौरा भी एक नए संकट की तरफ इशारा कर रहा है. अमेरिकी अखबार में दावा किया गया कि रैटक्लिफ ने रूस के खुफिया अधिकारियों से बात की और रूस को चेतावनी दी है कि वो NATO देशों पर हमला ना करे.

दरअसल अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि यूक्रेन युद्ध में फंसे पुतिन बाल्टिक देशों पर सीमित हमला कर NATO की एकजुटता का टेस्ट कर सकते हैं. लेकिन क्रेमलिन ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है. ऐसे में भारत का किर्गिस्तान दौरा और SCO में पुतिन से मुलाकात कई मायनों में अहम है.

तो चलिए समझते हैं कि पीएम मोदी चार दिन के जिस दौरे पर हैं, उससे भारत को क्या हालिस होने वाला है. पीएम मोदी का ये दौरा सेंट्रल यानी मध्य एशिया में भारत की स्थिति को कैसे मजबूत करेगा.

पीएम मोदी का दौरा क्यों अहम?

पीएम मोदी के दौरे के का पहला पड़ाव उज्बेकिस्तान है. 29 – 30 अगस्त को पीएम मोदी उज्बेकिस्तान के दौरे पर रहेंगे. दूसरा पड़ाव किर्गिस्तान है, 31 अगस्त और 1 सितंबर को पीएम मोदी करिगिस्तान में रहेंगे. दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों की गहराई को आप इस बात से समझ सकते हैं कि पिछले कुछ सालों में व्यापार में 300% और निवेश में 700% की भारी बढ़ोतरी हुई है.

विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज कहते हैं, ‘जैसा कि आप जानते हैं उज़्बेकिस्तान के साथ हमारा रक्षा सहयोग पहले से ही चल रहा है. हमने 2019 में रक्षा के क्षेत्र में एक संयुक्त कार्य समूह का संस्थागत ढांचा तैयार किया था. इस साल की शुरुआत में हुई हालिया बैठक में रक्षा उद्योग के क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर चर्चा हुई. भारत और उज़्बेकिस्तान नियमित रूप से डस्टलिक नाम संयुक्त सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेते हैं, इस अभ्यास का संस्करण इस साल अप्रैल में उज़्बेकिस्तान में आयोजित किया गया था.’

चीन-पाकिस्तान पर नजर

BRI यानी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के जरिए मध्य एशिया में चीन का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है. चीन के इस प्रभाव को संतुलित करने के लिए भारत उज्बेकिस्तान को एक मजबूत साझेदार के रूप में देखता है. आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई में भी उज्बेकिस्तान भारत के लिए काफी अहम है.

उज्बेकिस्तान की सीमा अफगानिस्तान से मिलती है. अफगानिस्तान से पनपने वाले आतंकवाद, चरमपंथ और ड्रग तस्करी को रोकने के लिए दोनों देश खुफिया जानकारी साझा करते हैं और मिलकर काम करते हैं. दोनों देशों की सेनाएं हर साल दस्तलिक (DUSTLIK) नाम से संयुक्त सैन्य अभ्यास भी करती है.

  • भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए उज्बेकिस्तान बेहद जरूरी है, उज्बेकिस्तान भारत को यूरेनियम सप्लाई करने वाले देशों में शामिल है, जिसे इस दौरे में आपूर्ति बढ़ाने की बात हो सकती है.
  • आत्मनिर्भर भारत के लिए उज्बेकिस्तान, भारत के लिए बहुत खास है. आधुनिक तकनीक, इलेक्ट्रिक वाहनों और ग्रीन एनर्जी के लिए जरूरी क्रिटिकल मिनरल्स और दुर्लभ खनिजों के मामले में उज्बेकिस्तान बहुत समृद्ध है, जिसमें भारत निवेश कर रहा है.
  • भारत सीधे तौर पर मध्य एशिया से जमीन से नहीं जुड़ा है, क्योंकि पाकिस्तान रास्ता नहीं देता. ऐसे में भारत, ईरान के चाबहार बंदरगाह के जरिए उज्बेकिस्तान और पूरे मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच बनाने के प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है.
  • दोनों देशों के बीच व्यापार 2 बिलियन डॉलर यानी लगभग 19,000 करोड़ रुपये तक ले जाने का है, जिसे अगले 3 साल में दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है
  • करीब 16 हज़ार से ज्यादा मेडिकल के छात्र उज्बेकिस्तान में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि भारत के कई प्राइवेट यूनिवर्सिटी के कैंपस उज्बेकिस्तान के छात्रों के लिए खोल दिए गए हैं.
  • उज्बेकिस्तान भारतीय फार्मास्युटिकल यानी दवाइयों के लिए एक बहुत बड़ा बाजार है.

उज़्बेकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार अख़मदजोन कासिमोव कहते हैं, ‘आदरणीय मोदी जी की ये यात्रा, राजकीय यात्रा चौथी बार उज्बेकिस्तान आ रहे हैं. मेरी नजर में ये काफी महत्व रखता है. हमारे दोनों देशों के बीच पुरानी दोस्ती को और मजूबत करने में और हमारे दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने में बहुत योगदान होगा.’

इन बातों से समझा जा सकता है कि प्राधनमंत्री मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा भारत के लिए कितना अहम हैं.और पीएम मोदी के उज्बेकिस्तान दौरे को इतना महत्व क्यों दिया जा रहा है. प्रधानमंत्री मोदी की ये चौथा उज्बेकिस्तान दौरा है और दोनों देश के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, डिजिटल संपर्क, ऊर्जा, शिक्षा और सहयोग सहयोग को बढ़ाने और भविष्य की प्राथमिकताएं तय होंगी.

पीएम मोदी शनिवार सुबह ही दिल्ली से उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद के लिए निकले. शाम को ताशकंद पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत हुआ. इसके बाद यांगी उज्बेकिस्तान पार्क में उनके लिए पुष्पांजलि समारोह रखा गया. इसके बाद रात को उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने पीएम मोदी के सम्मान में रात्रिभोज का आयोज किया. इसके अलगे दिन यानी 30 अगस्त को पीएम मोदी

  • सुबह 8:45 से 09:00 बजे के बीच उज़्बेकिस्तान योग फेडरेशन के योग कार्यक्रम में शामिल होंगे.
  • दोपहर 11:30 से 15:20 बजे के बीच कुकसरॉय प्रेसिडेंशियल पैलेस में राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे.
  • शाम 5:15 से 5:25 बजे के बीच शास्त्री मेमोरियल पर पुष्पांजलि कार्यक्रम में शामिल होंगे.
  • इसके बाद 5:30 से 6:05 बजे के बीच ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज़ में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे.
  • इसके बाद शाम 6:40 बजे बजे वो किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक के लिए रवाना हो जाएंगे.

31 अगस्त और 1 सितंबर को पीएम मोदी किर्गिस्तान के दौरे पर रहेंगे, जहां वो बिश्केक में आयोजित होने वाले 26वें SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. 31 अगस्त को SCO शिखर सम्मेलन के इतर पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक बेहद अहम द्विपक्षीय बैठक होने वाली है, जिसकी पुष्टि क्रेमलिन ने भी की है. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी इस सम्मेलन में मौजूद रहेंगे. इस सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी होंगे. लेकिन पीएम का किर्गिस्तान दौरा इसलिए अहम है, क्योंकि यहां होने वाला SCO शिखर सम्मेलन…

  • यूरेशिया मतलब यूरोप और एशिया के एक बहुत बड़े हिस्से को कवर करता है.
  • भारत साल 2017 से SCO का स्थायी और पूर्ण सदस्य है.
  • इस मंच पर पीएम मोदी ‘सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर’ का भारत का विजन रखेंगे.
  • भारत इस मंच का उपयोग आतंकवाद, चरमपंथ और अलगाववाद के खिलाफ क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए करेगा, जो मध्य एशिया और भारत दोनों की सुरक्षा के लिए जरूरी है.
  • इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी मौजूद हैं। रूस के साथ भारत की द्विपक्षीय बैठक रणनीतिक रूप से बेहद अहम है.

पीएम मोदी का किर्गिस्तान दौरा सिर्फ SCO के लिहाज से ही अहम नहीं है. पीएम मोदी की इस यात्रा के जरिये किर्गिस्तान से बड़े निवेश की भी उम्मीद कर रहा है. भारत वहां हाइड्रोपावर, इंफ्रास्ट्रक्चर, रिन्यूएबल एनर्जी , आईटी और एग्रो-इंडस्ट्री में बड़े निवेश कर सकता है. किर्गिस्तान की सरकार ने भारतीय कंपनियों के लिए विशेष प्रोत्साहन और समर्थन देने का भरोसा दिया है.

2025 में भारत और किर्गिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार करबी 86 मिलियन डॉलर यानी 86 मिलियन डॉलर का हुआ था, जिसे बढ़ाने की दिशा में काम हो रहा है. भारत और किर्गिस्तान की सेनाएं हर साल खंजर (KHANJAR) नाम संयुक्त पहाड़ी सैन्य अभ्यास करती हैं, इसके जरिए दोनों देश पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में आतंकवाद से निपटने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.

किर्गिस्तान में भारतीय राजदूत बीरेंद्र सिंह यादव कहते हैं, ‘भारत के प्रधानमंत्री के कर्गिस्तान में 2019 की यात्रा के बाद इस रिश्ते को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया और तब से हमारे रिश्ते हर क्षेत्र में काफी मजबूत हुए हैं, चाहे वो राजनीति हो, आर्थिक और कारोबार हो, डिफेंस और सुरक्षा समझौते हो या लोगों के बीच और हमारे प्रधानमंत्री के दौरे के बाद द्विपक्षीय कारोबा करीब-करीब दोगुना हो गया है.

मतलब जहां उज्बेकिस्तान के साथ भारत के रिश्ते खनिज और ऊर्जा पर केंद्रित हैं, वहीं किर्गिस्तान का ये दौरा भारत को वैश्विक कूटनीति के बड़े मंच SCO, रूस-चीन के साथ रणनीतिक संतुलन और आईटी और हाइड्रोपावर जैसे नए आर्थिक क्षेत्रों में भारत के बढ़ते कदम को विस्तार देगा. यानी मोदी का ये दौरा सिर्फ चार दिनों की कूटनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक पकड़ मजबूत करने की बड़ी कवायद है.



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