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NCP Political Crisis: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ नेता सच्चिदानंद सिंह ने सुनेत्रा पवार को पार्टी अध्यक्ष चुने जाने की प्रक्रिया को अवैध बताते हुए नया कानूनी नोटिस भेजा है. उनका दावा है कि 26 फरवरी का संगठनात्मक चुनाव पार्टी संविधान के खिलाफ था और इसमें केंद्रीय निर्वाचन प्राधिकरण ही गठित नहीं किया गया था. उन्होंने 15 दिनों में नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की है, अन्यथा कानूनी कदम उठाने की चेतावनी दी है. सुप्रिया सुले का भी इस घटनाक्रम पर रिएक्शन आया है.
एनसीपी में बगावत तेज हो गई है.
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में अंदरूनी कलह एक बार फिर गहरा गई है. वरिष्ठ नेता सच्चिदानंद सिंह ने सुनेत्रा पवार को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए एक नया कानूनी नोटिस भेजा है. उन्होंने दावा किया है कि इस साल 26 फरवरी को हुआ संगठनात्मक चुनाव पूरी तरह से अमान्य और गैर-कानूनी था. सच्चिदानंद सिंह के वकील की ओर से सुनेत्रा पवार, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और पार्टी महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव को 17 अगस्त को यह नया नोटिस जारी किया गया है. नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि 9 जुलाई को भेजे गए पिछले नोटिस की मांगों को पूरा करने के लिए 15 दिनों का अंतिम मौका दिया जा रहा है. यदि निर्धारित समय में मांगें नहीं मानी गईं तो वे चुनाव को रद्द कराने के लिए चुनाव आयोग या अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे.
विवाद में सुप्रिया सुले भी कूदी
एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने विरोधी गुट के साथ जारी कानूनी जंग को नैतिक और संवैधानिक लड़ाई करार दिया. मुंबई में मीडिया को संबोधित करते हुए सुले ने कहा कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान और देश के स्थापित नियमों की रक्षा के लिए है. सुनेत्रा पवार गुट को पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न सौंपने के चुनाव आयोग के फैसले पर सुले ने भरोसा जताया कि यह निर्णय अदालत में रद्द हो जाएगा. उन्होंने कहा कि शरद पवार के साथ अन्याय हुआ है और असली राकांपा के अध्यक्ष केवल शरद पवार हैं.
नोटिस में उठाए गए प्रमुख प्वाइंट्स
• संविधान का उल्लंघन: आरोप लगाया गया है कि 26 फरवरी के चुनाव के लिए कोई आधिकारिक केंद्रीय निर्वाचन प्राधिकरण या निर्वाचन अधिकारी नियुक्त नहीं किया गया था.
• मौका न देने का आरोप: राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को चुनाव लड़ने, नामांकन दाखिल करने या मतदान करने का अवसर नहीं दिया गया.
• दस्तावेज वापस लेने की मांग: चुनाव के संबंध में निर्वाचन आयोग को 28 फरवरी, 10 मार्च और 29 अप्रैल को भेजे गए सभी पत्रों व दस्तावेजों को वापस लेने की मांग की गई है.
• नए सिरे से चुनाव: पदाधिकारियों की ‘संशोधित अंतिम सूची’ को खारिज कर पार्टी के संविधान के अनुसार फिर से चुनाव कराने की बात कही गई है.
राकांपा का पलटवार: पार्टी से कोई लेना-देना नहीं
इस पूरे घटनाक्रम पर राकांपा प्रवक्ता उमेश पाटिल ने सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि (सच्चिदानंद सिंह) अब पार्टी के पदाधिकारी नहीं हैं. उन्होंने स्पष्ट किया, “हमें जो भी कानूनी या प्रशासनिक जवाब देना होगा, वह हम सीधे निर्वाचन आयोग के सामने रखेंगे.” इससे पहले प्रफुल्ल पटेल ने भी बयान दिया था कि पार्टी में कोई मतभेद नहीं है और इस तरह के नोटिस का कोई संवैधानिक या कानूनी महत्व नहीं है.
अजित पवार के निधन के बाद से जारी है खींचतान
उल्लेखनीय है कि इस वर्ष जनवरी में एक दर्दनाक विमान हादसे में राकांपा प्रमुख और महाराष्ट्र के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन हो गया था. उनके असामयिक निधन के बाद से ही पार्टी के भीतर नए नेतृत्व और कमान संभालने को लेकर खींचतान और गुटबाजी जारी है.
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पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
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