हनुमान जन्मभूमि को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. हालांकि शीर्ष अदालत ने इस मामले में तत्काल दखल देने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीवी नागरत्ना की अगुवाई वाली बेंच ने साफ कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट में ‘बीइंग स्पोकन टू’ की प्रक्रिया मौजूद है और जरूरत पड़ने पर हाईकोर्ट अपने आदेश में स्पष्टीकरण या सुधार कर सकता है.
दरअसल, याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में मौखिक उल्लेख करते हुए कहा गया कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रखने के बाद उसे खुले कोर्ट में सुनाया और आदेश पर हस्ताक्षर भी कर दिए. लेकिन फैसला सुनाए जाने के बाद अचानक मामले को दोबारा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया है. वकील ने दलील दी कि एक बार फैसला सुनाए जाने के बाद अदालत ‘फंक्टस ऑफिशियो’ हो जाती है, यानी वह उसी मामले पर दोबारा सुनवाई नहीं कर सकती.
जस्टिस नागरत्ना ने क्या कहा?
इस पर जस्टिस नागरत्ना ने संक्षिप्त टिप्पणी करते हुए कहा, ‘कर्नाटक हाईकोर्ट में ‘बीइंग स्पोकन टू’ की प्रक्रिया है. हाईकोर्ट को ही इस मुद्दे से निपटने दीजिए.’ इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी तरह की तात्कालिक राहत देने से इनकार कर दिया.
आखिर क्या है हनुमान जन्मभूमि विवाद?
यह विवाद दो धर्मों के बीच नहीं, बल्कि दो हिंदू धार्मिक संस्थाओं के बीच है. एक पक्ष आंध्र प्रदेश का तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) है, जबकि दूसरा पक्ष कर्नाटक का श्री हनुमद जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट है. दोनों ही संस्थाएं अलग-अलग स्थानों को भगवान हनुमान की जन्मस्थली होने का दावा करती हैं.
टीटीडी का दावा है कि आंध्र प्रदेश के तिरुमला पर्वत स्थित अंजनाद्री पर्वत ही हनुमान जी की वास्तविक जन्मभूमि है. राम नवमी के अवसर पर यहां हनुमान जन्मस्थली के रूप में औपचारिक प्रतिष्ठा भी की गई थी. अब TTD यहां तीर्थ और पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित कर रहा है.
वहीं कर्नाटक स्थित श्री हनुमद जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट इस दावे का विरोध कर रहा है. ट्रस्ट के संस्थापक स्वामी गोविंदानंद सरस्वती का कहना है कि वाल्मीकि रामायण के अनुसार हनुमान जी का जन्म किश्किंधा क्षेत्र के अंजनाहल्ली में हुआ था, जिसे वर्तमान में हम्पी और तुंगभद्रा नदी के आसपास का इलाका माना जाता है.
शास्त्रों और पुरातात्विक साक्ष्यों का दावा
वहीं टीटीडी ने अपने दावे के समर्थन में पुराणों, प्राचीन ताम्रपत्रों, साहित्यिक संदर्भों और भौगोलिक साक्ष्यों का हवाला दिया है. इसके लिए 2020 में गठित आठ सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी. इसी रिपोर्ट के आधार पर अप्रैल में टीटीडी ने एक पुस्तिका भी प्रकाशित की, जिसमें अंजनाद्री को हनुमान जन्मभूमि बताया गया.
दूसरी ओर, कर्नाटक के ट्रस्ट ने इस दावे को चुनौती देते हुए टीटीडी को छह पन्नों का जवाब भेजा था. पिछले साल दोनों पक्षों के बीच इस मुद्दे पर बहस भी हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी.
टीटीडी के सीईओ जवाहर रेड्डी का दावा है कि उनके पास ऐसे धार्मिक और ऐतिहासिक प्रमाण हैं जो अंजनाद्री को हनुमान जन्मस्थली साबित करते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि चित्रकूट के एक दृष्टिबाधित संत ने इस संबंध में महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं.
हाईकोर्ट में ही चलेगी लड़ाई
सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद फिलहाल यह मामला कर्नाटक हाईकोर्ट में ही आगे बढ़ेगा. शीर्ष अदालत ने साफ संकेत दिया है कि यदि आदेश को लेकर कोई तकनीकी या कानूनी आपत्ति है तो पहले हाईकोर्ट ही उस पर विचार करेगा. ऐसे में भगवान हनुमान की जन्मस्थली को लेकर चल रही बहस अभी खत्म होती नहीं दिख रही और आने वाले दिनों में यह विवाद फिर चर्चा में रह सकता है.