रांची3 घंटे पहले
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झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 में जेएससीए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में फ्लडलाइट की मरम्मत के दौरान हुई तीन तकनीशियनों की मौत के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने मुआवजा भुगतान की जिम्मेदारी को लेकर लेबर कोर्ट के आदेश में संशोधन कर दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि मृतक कर्मचारियों का प्रधान नियोक्ता वालमोंट स्ट्रक्चर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड था, जबकि गुलाब खान उनका नियोक्ता था। इसलिए कर्मचारियों के मुआवजे की अंतिम जिम्मेदारी इन्हीं पर होगी।
हालांकि जेएससीए पहले ही पीड़ित परिवारों को मुआवजा दे चुका है, इसलिए उसे यह राशि वालमोंट कंपनी और गुलाब खान से वसूलने की स्वतंत्रता होगी। अदालत ने जेएससीए की ओर से दाखिल तीन अपीलों को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया और वालमोंट स्ट्रक्चर्स इंडिया कंपनी की तीन अपीलों को खारिज कर दिया।
फ्लडलाइट की मरम्मत के दौरान 60 फीट ऊपर से गिरे जेएससीए स्टेडियम में 7 सितंबर 2016 को फ्लडलाइट की मरम्मत का काम चल रहा था। फ्लडलाइट के पोल पर करीब 60 मीटर ऊंचाई पर तीनों टेक्नीशियन चढ़े थे। इसमें मो. इफ्तेखार, शाहबाज अंसारी उर्फ शहजादा खान और अलीम अंसारी को ट्रॉली से ऊपर भेजा गया था। आरोप है कि उन्हें सुरक्षा बेल्ट, हेलमेट और अन्य सुरक्षा उपकरण नहीं दिए गए थे। इसी दौरान ट्रॉली टूट गई और तीनों नीचे गिर गए और उनकी मौत हो गई।
ठेका कंपनी का तर्क किया खारिज, ठहराया जिम्मेदार सुनवाई के दौरान वालमोंट कंपनी ने दावा किया कि उसने केवल उपकरण उपलब्ध कराए थे और स्थापना का कार्य उसकी जिम्मेदारी नहीं थी। अदालत ने चार्जशीट, अनुबंध की शर्तों का परीक्षण करने के बाद पाया कि तीनों तकनीशियन वालमोंट कंपनी के अधीन कार्य कर रहे थे तथा गुलाब खान उसका उप-ठेकेदार था। इसलिए कंपनी ही जिम्मेदार है।
मरम्मत व्यवसाय का हिस्सा, इसलिए कंपनी जिम्मेदार हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद पाया कि फ्लडलाइट की स्थापना और मरम्मत का काम वालमोंट कंपनी के व्यवसाय का हिस्सा था, जबकि क्रिकेट का संचालन और प्रबंधन जेएससीए का मुख्य कार्य है। इसलिए इस मामले में कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम की धारा 12 के तहत वालमोंट कंपनी को प्रधान नियोक्ता माना जाएगा। कानून के अनुसार, ठेकेदार व प्रधान नियोक्ता जेएससीए को भुगतान की गई पूरी राशि की प्रतिपूर्ति करेंगे।
