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14 अगस्त 2021 में हुआ था शिक्षक का निधन, 2024 से शुरू हुई निकासी बोकारो में पुलिस विभाग की तर्ज पर अब शिक्षा विभाग में भी बड़ा घोटाला सामने आया है। यहां बिलिंग असिस्टेंट ने मृत शिक्षक के नाम पर तीन बार में 14.65 लाख रुपए की राशि अपने खाते में ट्रांसफर कर ली। मामला उजागर होने के बाद अब शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। मामला उत्क्रमित मध्य विद्यालय सदमाकला, पेटरवार का है। यहां पदस्थापित शिक्षक संतोष कुमार शर्मा का 14 अगस्त 2021 को निधन हो गया था। उनकी मौत के बाद उनके ग्रेड प्रमोशन के वेतन वृद्धि का लाभ उनकी पत्नी किरण शर्मा को मिलने वाला था। लेकिन पेटरवार के बिलिंग इंचार्ज (प्राथमिक विद्यालय उबरा, पेटरवार के शिक्षक) मुकेश कुमार ने बिल संख्या 63/2024-25 में 5,16,607 रुपए, बिल संख्या 77/2024-25 में 4,31,852 रुपए और बिल संख्या 22/2025-26 में 5,17,281 रुपए अपने बैंक खाते में ट्रांसफर कर लिया। इस तरह बिलिंग इंचार्ज मुकेश कुमार ने स्व. संतोष शर्मा के 14 लाख 65 हजार 740 रुपए तीन बार में अपने खाते में ट्रांसफर कर लिया। अब इस मामले की जांच चल रही है। जांच में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है। अंतर वेतन वृद्धि का दावा एक, फिर भी तीन बार में की गई राशि की निकासी सूत्र बताते हैं कि स्व. संतोष शर्मा के एक ही अंतर वेतन वृद्धि दावे से तीन बिल बनाकर राशि की निकासी की गई। जबकि दावे की वैध राशि की निकासी एक बार में ही होनी थी। लेकिन बिलिंग इंचार्ज मुकेश कुमार ने तीन पार्ट में राशि की निकासी की ताकि किसी को भनक नहीं लगे। इसमें अहम बात यह है कि बिलिंग इंचार्ज द्वारा पेश किए गए बिल के दावे को प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी सह डीडीओ प्रतिमा दास ने सही तरीके से जांच नहीं की और कोषागार में भेज दिया। घोटाले का गणित
बिल संख्या राशि
63/2024-25 ₹5,16,607
77/2024-25 4,31,852
बिल संख्या राशि
22/2025-26 5,17,281
कुल 14,65,740 जांच के आदेश के बाद बीईईओ ने सही भुगतान का प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया
मामला पकड़ में आने के बाद डीडीसी के निर्देश पर जांच कमेटी बनी। बोकारो डीसी ने इस संबंध में 7 अप्रैल 2026 को जांच के लिए एक आदेश जारी किया था। इस मामले में प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी सह डीडीओ प्रतिमा दास ने 25 अप्रैल को जिला शिक्षा अधीक्षक, सचिव वित्त विभाग और डीसी को प्रमाण पत्र उपलब्ध कराते हुए निकासी को सही बताया। उन्होंने पत्र में कहा है कि वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 की सभी निकासियों की जांच कर ली गई है। प्राप्त आवंटन के आलोक में झारखंड कोषागार संहिता के नियम 167 के अंतर्गत परिशिष्ट-20 के निर्देशों का पालन किया गया है। इस पत्र के बाद बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि जब एक बार में ही निकासी का नियम है तो तीन बार में निकासी कैसे की गई। फिर अगर नियम विरुद्ध निकासी की गई तो बीईईओ ने सही भुगतान का प्रमाण पत्र कैसे जारी कर दिया। अब यह पूरा मामला जांच के घेरे में है। मामले की जांच चल रही है : डीएसई
इस मामले की अभी जांच चल रही है। जांच होने के बाद जो भी दोषी पाए जाएंगे उनपर कार्रवाई होगी। -अतुल कुमार चौबे, जिला शिक्षा अधीक्षक
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