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Guava Farming: जलजमाव रहित टांड़ जमीन पर अमरूद की खेती कमाई का बेहतरीन जरिया है. इलाहाबाद सफेदा और ताइवान पिंक जैसी उन्नत किस्में अच्छा फल देती हैं. वैज्ञानिक तकनीक से दूसरे-तीसरे साल से ही लाखों की आमदनी शुरू हो जाती है. यह कम उपजाऊ जमीन को मुनाफे में बदल सकती है.
पलामूः मानसून के सीजन में किसान पारंपरिक खेती करते है. ऐसे में अगर आपके पास टांड़ या उपरवार जमीन है, तो उसमें अमरूद की खेती कमाई का बेहतर जरिया बन सकती है. अमरूद की खेती के लिए जल निकासी वाली जमीन ज्यादा उपयुक्त मानी जाती है. खासकर जहां पानी का जमाव नहीं होता, वहां पौधों का विकास अच्छा होता है और कई तरह के रोगों से बचाव में भी मदद मिलती है.
बता दें कि अमरूद की खेती शुरू करने से पहले खेत की अच्छी तरह तैयारी करें और निर्धारित दूरी पर गड्ढे तैयार करें. गड्ढे में करीब 10 से 20 किलो अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या जैविक खाद डालकर पौधे लगाए जा सकते हैं. जहां सामान्य बागवानी में करीब 5 मीटर × 5 मीटर की दूरी रखी जा सकती है, जबकि सघन बागवानी में तकनीक और किस्म के अनुसार पौधों की संख्या बढ़ाई जा सकती है.
क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक?
कृषि वैज्ञानिक दिलीप पांडे ने बताया कि अमरूद की खेती में सही किस्म का चुनाव भी बेहद महत्वपूर्ण है. किसान बनारसी, एल-49, इलाहाबाद सफेदा, ललित और ताइवान पिंक जैसी किस्मों का चुनाव कर सकते हैं. जहां आधुनिक किस्मों और सघन बागवानी तकनीक से प्रति एकड़ उत्पादन और आमदनी बढ़ाने का अवसर मिलता है.
एक एकड़ में कितनी लागत?
उन्होंने कहा कि एक एकड़ में शुरुआती लागत की बात करें तो पौधों की खरीद पर करीब 35 से 40 हजार रुपये, खेत की तैयारी और गड्ढे बनाने में 13 से 16 हजार रुपये, खाद और उर्वरक में 10 से 15 हजार रुपये तथा ड्रिप या सिंचाई व्यवस्था में करीब 35 से 65 हजार रुपये तक खर्च आ सकता है. इसके अलावा मजदूरी, निराई-गुड़ाई, पौधों की रोपाई और फेंसिंग समेत अन्य खर्च भी शामिल होते हैं. कुल मिलाकर पहले साल करीब 2 से 3 लाख रुपये तक का निवेश हो सकता है.
आगे कहा कि दूसरे-तीसरे साल से फल देना शुरू कर देते हैं. इसके बाद मुख्य खर्च बाग के रखरखाव, खाद, सिंचाई, मजदूरी और पौधों की देखभाल पर होता है, अच्छी देखभाल, बेहतर किस्म और बाजार की उचित कीमत मिलने पर किसान सालाना लाखों रुपये की आमदनी हासिल कर सकते हैं. यानी सही जमीन, उन्नत किस्म, वैज्ञानिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के साथ अमरूद की खेती किसान के लिए बंजर या कम उपयोग वाली जमीन को कमाई के मजबूत साधन में बदल सकती है.
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प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.
इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…
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