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अरुण था सिंडिकेट का अदृश्य मास्टरमाइंड, प्रश्न पत्र प्रिंटिंग से लेकर डेटा...




झारखंड डिप्लोमा स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (जेई भर्ती)-2021 के चर्चित पेपर लीक कांड में देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर का एक पूर्व छात्र व बिंसिस टेक्नोलॉजी का पूर्व निदेशक अरुण कुमार घोटाले का सूत्रधार निकला है। परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने का जिम्मा जिस निजी एजेंसी को मिला था, उसी एजेंसी का पूर्व निदेशक व ‘सलाहकार’ पर्दे के पीछे से प्रश्नपत्रों की खरीद-फरोख्त का काला खेल चला रहा था। रांची पुलिस ने यह खुलासा अपर न्याययुक्त-प्रथम योगेश कुमार की विशेष अदालत में मुख्य सूत्रधार अरुण कुमार के विरुद्ध किया है। अरुण को नामकुम थाना कांड संख्या 227/2022 में 7 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया गया था। उसे सीआईडी की एसआईटी ने भी जेपीएससी द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं में हुई अनियमितता मामले में पूछताछ के लिए 13 अगस्त से 17 अगस्त 2026 तक रिमांड पर लिया था। सीआईडी ने भी अरुण कुमार को जेपीएससी कांड संख्या 16/2026 में दाखिल चार्जशीट में आरोपी बनाया है। उस पर यह भी आरोप है कि उसने बिंसिस टेक्नोलॉजी के निदेशक के रूप में जेपीएससी की परीक्षाओं के संचालन का कार्य भी अवैध तरीके से हासिल किया और गड़बड़ी की। जेपीएससी परीक्षा गड़बड़ी मामले में सीआईडी ने भी पूछताछ की थी 2019 में छोड़ा निदेशक पद, पर जेएसएससी के हर सीक्रेट तक थी पहुंच
नामकुम थाना केस में पुलिस की केस डायरी के अनुसार, 26 अगस्त 2019 को अरुण कुमार ने बिंसिस के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन कंपनी के भीतर अरुण कुमार ‘सलाहकार’ की हैसियत से सर्वेसर्वा बने हुए थे। जेएसएससी के तत्कालीन सचिव अशोक कुमार खेतान और परीक्षा नियंत्रक मधुमिता कुमारी ने अपने आधिकारिक बयानों में पुष्टि की है कि बिंसिस को जब जूनियर इंजीनियर परीक्षा के संचालन का जिम्मा सौंपा गया, तो आयोग की हर उच्चस्तरीय गोपनीय बैठक में अरुण कुमार कंपनी के वर्तमान निदेशक अजीत कुमार के साथ खुद बैठते थे। प्रश्नपत्र प्रिंटिंग से लेकर ओएमआर व रिजल्ट तक सब कुछ था एजेंसी के हवाले पुलिस के अनुसार, जेएसएससी ने परीक्षा के गोपनीय काम बिंसिस टेक्नोलॉजी को सौंपे थे। इनमें प्रश्नपत्र छपाई, ओएमआर स्कैनिंग, डेटा प्रोसेसिंग और रिजल्ट तैयार करना शामिल था। आयोग के अधिकारियों से साठ-गांठ के चलते अरुण कुमार की इन सामग्रियों तक बेरोकटोक पहुंच थी। इसी का दुरुपयोग कर सीलबंद प्रश्नपत्र व्हाट्सएप से बाहर भेजा गया।
सीडीआर और बैंक खातों के हवाला ट्रेल ने खोला ‘मेंटर’ का कच्चा चिट्ठा सीडीआर और मोबाइल फॉरेंसिक विश्लेषण के अनुसार, 2019 में कंपनी छोड़ने के बावजूद अरुण कुमार पेपर लीक सिंडिकेट के मुख्य दलालों और जेल जा चुके आरोपियों के संपर्क में था। केस डायरी में परीक्षा की तारीखों के आसपास संदिग्ध बैंकिंग लेन-देन और करोड़ों के हवाला संचलन का ब्योरा दर्ज है। 15-15 लाख में सौदा, परीक्षा से ठीक पहले होटल- कमरों में रटवाए थे उत्तर पुलिस केस डायरी के अनुसार, 3 जुलाई 2022 की झारखंड डिप्लोमा स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा से पहले ही पेपर व्हाट्सएप ग्रुपों में पहुंच गया था। अभिषेक कुमार और पंकज कुमार मंडल के इकबालिया बयान के अनुसार, अरुण गिरोह प्रति अभ्यर्थी 15 लाख या अधिक लेकर हल प्रश्नपत्र देता था। अभ्यर्थियों को गोपनीय ठिकानों पर उत्तर रटवाए जाते थे।



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