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राजधानी के विकास में अलकतरा की बढ़ती कीमत और बालू की किल्लत ने ग्रहण लगा दिया है। मानसून शुरू होने से पहले शहर के गली-मुहल्लों की सड़कों और नालियों का निर्माण किया जाना था, लेकिन कई स्थानों पर काम शुरू ही नहीं हुआ। क्योंकि एनजीटी की रोक के बाद रॉयल्टी चालान मिलना बंद हो गया, जिससे बालू नहीं मिल रहा है और काम अधूरे छोड़ दिए गए हैं। खान विभाग ने मानसून से पहले राज्य में 3 करोड़ सीएफटी बालू का स्टॉक रखने का दावा किया था, लेकिन सच्चाई यह है कि बालू नहीं मिलने की वजह से शहर के 53 वार्डों में 60 सड़कों और नालियों का काम ठप पड़ गया है। दूसरी ओर अलकतरा की बढ़ती कीमत ने कांट्रेक्टरों के होश उड़ा दिए हैं। क्योंकि मिडिल ईस्ट के तनाव की वजह से अलकतरा की कीमत में करीब 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई है। पहले 156 किलो के एक ड्रम अलकतरा की कीमत 10,500 रुपए थी, लेकिन अब 17 से 18 हजार रुपए में मिल रहा है। इसके बावजूद कांट्रेक्टर महंगा अलकतरा खरीद कर काम करने को विवश हैं। क्योंकि नगर निगम के इंजीनियर मानसून में काम बंद होने का हवाला देकर कांट्रेक्टरों पर दबाव बना रहे हैं। कांट्रेक्टर इस मामले की जानकारी नगर आयुक्त को देंगे। मुहल्लेवासियों को जर्जर सड़क-बदहाल नालियों से नहीं मिलेगी निजात हिंदपीढ़ी नाला रोड में सड़क के बीच में 2850 फीट लंबी नाली और दो गलियों में 2200-2200 फीट लंबी छोटी नाली का निर्माण चल रहा था। यहां 600 फीट लंबा पीसीसी रोड का भी निर्माण होना है। करीब 5 करोड़ रुपए की यह योजना है। पिछले वर्ष मानसून में बारिश की वजह से काम नहीं हुआ था। इसके बाद से अब तक मात्र 50 प्रतिशत नाली बनी है। अब बालू का रॉयल्टी चालान नहीं होने की वजह से ठेकेदार ने काम बंद कर दिया है। ऐसे में इस बार भी बारिश में नाला रोड के लोगों को भारी जलजमाव का सामना करना पड़ेगा। पीसीसी सड़क का टेंडर हुआ, काम शुरू नहीं वार्ड नंबर 34 में राजू महतो के घर तक पीसीसी सड़क का निर्माण होना है। करीब 11.82 लाख रुपए से सड़क बननी है। इसका टेंडर पिछले माह हो गया, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ। जबकि 90 दिनों के अंदर काम किया जाना है। बालू की किल्लत से काम शुरू नहीं हुआ है। नामकुम के जोरार में इस वर्ष भी नहीं बनी नाली वार्ड नंबर 47 के नामकुम जोरार स्थित सांई नगर में नाली बनाने के लिए 23 मई को ही टेंडर किया गया है। करीब 21.73 लाख रुपए की लागत से आरसीसी ड्रेन और स्लैब बनना है। लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ। इस क्षेत्र के लोग पिछले दो साल से जलजमाव से परेशान हैं। रॉयल्टी चालान अनिवार्य होने से फंसे ठेकेदार : सरकार ने निर्माण कार्यों से जुड़े कांट्रेक्टरों के लिए बालू, मिट्टी और गिट्टी के लिए रॉयल्टी चालान अनिवार्य कर दिया है। पहले चालान नहीं देने पर रॉयल्टी मद का पैसा पेनाल्टी के साथ काटकर ठेकेदारों को भुगतान किया जाता था। लेकिन अब चालान अनिवार्य होने से ठेकेदार फंस गए हैं। क्योंकि एनजीटी की रोक लगने के बाद बालू का चालान लेना मुश्किल हो गया है। गिट्टी का भी क्रशर संचालक चालान देने में दिक्कत करते हैं। बालू नहीं मिल रहा, चालान कहां से देंगे एनजीटी की रोक की वजह से बालू मिलना मुश्किल हो गया है। रॉयल्टी चालान भी नहीं मिल रहा है। ऐसे में निगम में ठेकेदारों का पेमेंट भी फंस रहा है। निर्माण सामग्री और चालान उपलब्ध होगा, तभी काम हो पाएगा। अन्यथा मानसून तक काम बंद करना ही होगा। – रणधीर सिंह, सचिव, नगर निगम संवेदक संघ बारिश से पहले काम में तेजी का निर्देश दिया है बारिश से पहले जो योजना अधूरी है, उसे हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया गया है। ठेकेदारों को अगर परेशानी आ रही है तो अधिकारियों को समन्वय स्थापित करके उनकी समस्याओं का समाधान भी करना चाहिए, ताकि विकास योजनाओं में तेजी आ सके। जल्द ही इसकी समीक्षा करूंगी। – रोशनी खलखो, मेयर
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