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आम टूटने के बाद खाली बागान बनेंगे कमाई का जरिया, 44 डिग्री...


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खाली बागान बनेंगे कमाई का जरिया, 44 डिग्री में भी उगता है पैडी स्ट्रॉ मशरूम

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Paddy Straw Mushroom: झारखंड समेत कई राज्यों में रोहिणी नक्षत्र के प्रवेश के साथ ही आम के पेड़ों से आम टूटना शुरू हो चुका है. बागानों में अब धीरे-धीरे पेड़ खाली होने लगे हैं. आम की फसल खत्म होते ही ज्यादातर किसान यह सोचकर परेशान हो जाते हैं कि अब अगले सीजन तक बागान से कोई आमदनी नहीं होगी. लेकिन अब ऐसा नहीं है. किसान चाहें तो आम टूटने के बाद भी उन्हीं पेड़ों से लगातार कमाई कर सकते हैं. खास बात यह है कि इसके लिए ज्यादा खर्च या बड़ी मशीनों की जरूरत नहीं पड़ती. बस थोड़ी सी जानकारी और सही तकनीक अपनाकर किसान अपने खाली पड़े आम के बागानों को कमाई का नया जरिया बना सकते हैं.

मशरूम एक्सपर्ट रंजीत झा ने लोकल 18 के संवाददाता से बातचीत करते हुए कहा कि गर्मी के मौसम में भी एक ऐसी मशरूम की वैरायटी है, जो आसानी से उगाई जा सकती है. इस मशरूम का नाम है पेडी स्ट्रॉ मशरूम. यह मशरूम खासतौर पर गर्म और नमी वाले मौसम के लिए बेहतर माना जाता है.

सबसे बड़ी बात यह है कि इसे तेज धूप में नहीं, बल्कि पेड़ों की छांव में तैयार किया जाता है. आम के पेड़ों के नीचे इसका उत्पादन काफी अच्छा होता है, क्योंकि वहां प्राकृतिक रूप से नमी और ठंडक बनी रहती है. यही वजह है कि आम टूटने के बाद खाली पड़े बागान किसानों के लिए सोने की खान साबित हो सकते हैं.

रंजीत झा बताते हैं कि पेडी स्ट्रॉ मशरूम 40 से 44 डिग्री तक का तापमान आसानी से सहन कर सकता है. जहां दूसरे मशरूम गर्मी में खराब हो जाते हैं, वहीं यह वैरायटी गर्म मौसम में भी तेजी से बढ़ती है. यही कारण है कि मई-जून जैसी भीषण गर्मी में भी इसकी खेती की जा सकती है. इसे तैयार होने में ज्यादा समय भी नहीं लगता. महज 15 से 16 दिनों के अंदर यह तैयार होना शुरू हो जाता है. यानी किसान बहुत कम समय में फसल बाजार में बेच सकते हैं और तुरंत मुनाफा कमा सकते हैं.

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इस मशरूम की खेती के लिए धान का पुआल, थोड़ा पानी और मशरूम बीज यानी स्पॉन की जरूरत पड़ती है. किसान आम के पेड़ों के नीचे पुआल की परत लगाकर उसमें स्पॉन डालते हैं. इसके बाद हल्की नमी बनाए रखनी होती है. कुछ ही दिनों में सफेद रंग के मशरूम निकलने शुरू हो जाते हैं. बाजार में इसकी मांग भी तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि लोग अब पौष्टिक और प्रोटीन से भरपूर चीजों की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं. होटल, रेस्टोरेंट और सब्जी मंडियों में इसकी अच्छी कीमत मिल जाती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि जिन किसानों के पास आम का बागान है, उनके लिए यह खेती बोनस कमाई जैसी है. क्योंकि आम के पेड़ों की छांव पहले से मौजूद रहती है, इसलिए अलग से शेड बनाने का खर्च भी नहीं आता. एक तरफ आम से कमाई होती है और दूसरी तरफ उसी बागान में मशरूम तैयार कर किसान दोहरी आमदनी कर सकते हैं. यही वजह है कि अब कई किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ मशरूम उत्पादन की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं.

अगर किसान सही तरीके से इसकी खेती करें, तो बहुत कम लागत में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. खासकर छोटे और मध्यम किसान, जिनके पास सीमित जमीन है, उनके लिए यह खेती बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है. आम टूटने के बाद खाली पड़े बागानों को यूं ही छोड़ने के बजाय अगर वहां पेडी स्ट्रॉ मशरूम लगाया जाए, तो कुछ ही दिनों में वही बागान फिर से कमाई देने लगेगा. यानी अब आम का मौसम खत्म होने के बाद भी किसानों की कमाई नहीं रुकेगी.



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