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सीसीएल बीएंडके एरिया के करगली फिल्टर प्लांट की अव्यवस्थाओं का खामियाजा क्षेत्र की करीब 30 हजार आबादी को भुगतना पड़ रहा है। जलापूर्ति व्यवस्था पर हर माह एक करोड़ रुपए से अधिक खर्च होने के बावजूद लोगों को न तो पर्याप्त पानी मिल रहा है और न ही पूरी तरह शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो पा रहा है। फिल्टर प्लांट में जलापूर्ति के लिए एक अधिकारी, पांच फोरमैन और 54 कर्मचारी कार्यरत हैं। विभिन्न क्षेत्रों में पानी पहुंचाने के लिए सात मोटर तथा दामोदर नदी से पानी उठाव के लिए आठ मोटर लगाए गए हैं। इसके बावजूद कहीं 10 से 15 मिनट ही पानी मिल रहा है तो कहीं एक दिन छोड़कर जलापूर्ति की जा रही है। कई इलाकों में स्थिति इससे भी खराब बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, प्लांट में पिछले छह माह से फिटकरी की आपूर्ति नहीं हुई है। इससे पहले से चुना (लाइम) भी उपलब्ध नहीं है। प्लांट में केवल नाममात्र की फिटकरी रखी गई है, जिसे निरीक्षण के दौरान दिखाया जाता है। हालांकि ब्लीचिंग पाउडर उपलब्ध है, लेकिन उसका उपयोग भी सीमित बताया जा रहा है। वर्तमान में दामोदर नदी का पानी अपेक्षाकृत साफ होने के कारण बिना चुना और फिटकरी के भी पानी देखने में साफ नजर आता है। लेकिन बरसात शुरू होने के बाद नदी का पानी गंदला होने पर जल शुद्धिकरण व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने आने की आशंका है। जलापूर्ति तीन साल से अधूरा पड़ा 3 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट करगली फिल्टर प्लांट में वाटर क्लैरिफायर और फिल्टर बेड की मरम्मत का कार्य रांची की एक बड़ी कंपनी को लगभग तीन करोड़ रुपए की लागत से दिया गया था। आरोप है कि तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी काम पूरा नहीं हुआ। वर्तमान में केवल एक वाटर क्लैरिफायर और दो फिल्टर बेड के सहारे पूरे क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति की जा रही है। प्रत्येक दिन 12 घंटा पानी सप्लाई किया जाता है ^” फिल्टर प्लांट से प्रतिदिन औसतन 12 से 13 घंटे पानी की आपूर्ति की जाती है। सभी क्षेत्रों में पर्याप्त पानी पहुंच रहा है या नहीं, यह सिविल विभाग का विषय है। चुना, फिटकरी की उपलब्धता तथा मेकॉन कंपनी द्वारा लंबित कार्य भी सिविल विभाग के अधीन आते हैं।” उत्कर्ष कुमार बक्सी, वाटर सप्लाई इंचार्ज।
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