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Jamshedpur Parvati Ghat: जमशेदपुर के पार्वती घाट में देवात्मा उद्यान बनाया गया है जहां खासतौर पर नवजात से पांच वर्ष तक के बच्चों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार किया जा सकेगा. इस जगह को फूलों और हरियाली से कुछ इस तरह सजाया गया है कि ये शमशान घाट न लगकर, कोई बगीचा मालूम देता है.
जमशेदपुर. जमशेदपुर का पार्वती घाट वर्षों से शहरवासियों की अंतिम यात्रा का प्रमुख केंद्र रहा है. यहां वयस्कों के अंतिम संस्कार के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनमें इलेक्ट्रिक शवदाह गृह, गैस आधारित शवदाह गृह और आधुनिक लकड़ी आधारित अंतिम संस्कार व्यवस्था शामिल है. लेकिन लंबे समय तक छोटे बच्चों के अंतिम संस्कार के लिए कोई निर्धारित व्यवस्था नहीं थी.
ऐसे में नवजात शिशुओं से लेकर लगभग पांच वर्ष तक की आयु के बच्चों को विभिन्न स्थानों पर दफनाया जाता था, जिससे परिजनों को मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ता था. इसी आवश्यकता को समझते हुए पार्वती घाट कमेटी ने एक अनोखी पहल की है.
यहां पर खासतौर पर छोटे बच्चों का अंतिम संस्कार होगा
इस पहल के तहत पार्वती घाट परिसर में देवात्मा उद्यान का निर्माण किया गया है. यह उद्यान खास तौर पर छोटे बच्चों के अंतिम संस्कार के लिए विकसित किया गया है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नन्हीं आत्माओं को भी सम्मानजनक और व्यवस्थित विदाई मिल सके. कमेटी के सदस्यों का मानना है कि हर व्यक्ति की तरह बच्चों के अंतिम संस्कार के लिए भी एक निश्चित और पवित्र स्थान होना चाहिए, जहां परिवारजन शांति और श्रद्धा के साथ अपने बच्चे को अंतिम विदाई दे सकें.
गरिमा के साथ पूरी हो अंतिम यात्रा
पार्वती घाट कमेटी के सदस्य भट्ट साहब ने बताया कि देवात्मा उद्यान की परिकल्पना इसी सोच के साथ की गई थी कि छोटे बच्चों के लिए भी एक ऐसा स्थान हो, जहां उनकी अंतिम यात्रा गरिमा और सम्मान के साथ पूरी हो सके. उन्होंने बताया कि उद्यान में कुल छह ब्लॉक विकसित किए गए हैं. प्रत्येक ब्लॉक में लगभग 125 बच्चों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई है. वर्तमान में एक ब्लॉक का उपयोग शुरू हो चुका है, जिसमें लगभग 60 से 70 बच्चों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है.
देखने से नहीं लगता शमशान घाट
देवात्मा उद्यान की सबसे खास बात इसकी प्राकृतिक और शांत वातावरण वाली संरचना है. जिन पांच ब्लॉकों का अभी उपयोग नहीं हुआ है, वहां रंग-बिरंगे फूलों, सजावटी पौधों और आकर्षक उद्यान का निर्माण किया गया है. हरियाली और फूलों से सजा यह परिसर किसी सामान्य श्मशान घाट की तरह नहीं बल्कि एक शांत और सुंदर स्मृति स्थल का एहसास कराता है. कमेटी का मानना है कि ऐसे वातावरण में परिजनों को मानसिक संतोष मिलता है और बच्चों की अंतिम विदाई भी सम्मानजनक तरीके से संपन्न होती है.
जरूरत के हिसाब से होगी व्यवस्था
कमेटी के अनुसार, एक बच्चे के शव को पूरी तरह प्राकृतिक रूप से खत्म होने में लगभग पांच वर्ष का समय लगता है. इसी को ध्यान में रखते हुए ब्लॉकों की संख्या और उनकी क्षमता निर्धारित की गई है. जैसे-जैसे भविष्य में आवश्यकता बढ़ेगी, अन्य ब्लॉकों का भी उपयोग शुरू किया जाएगा. इससे लंबे समय तक व्यवस्थित रूप से अंतिम संस्कार की व्यवस्था बनी रहेगी.
हर आत्मा सम्मान की हकदार
देवात्मा उद्यान केवल एक संरचना नहीं, बल्कि संवेदनाओं और मानवीय सोच का प्रतीक है. यह पहल उन माता-पिता के दर्द को समझने का प्रयास है, जिन्होंने अपने नन्हे बच्चों को खोया है. पार्वती घाट कमेटी की यह अनोखी पहल समाज को यह संदेश देती है कि जीवन चाहे छोटा हो या बड़ा, हर आत्मा सम्मान और गरिमा की हकदार है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें