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मध्यप्रदेश के बांधवगढ़-कान्हा या महाराष्ट्र के ताडोबा से लाए जाएंगे बाघ झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थल पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार ने यहां बाघों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब पीटीआर में दो बाघिन और एक बाघ लाए जाएंगे। इसके लिए टाइगर सप्लीमेंटेशन प्रोग्राम शुरू किया गया है। लक्ष्य है कि इस वर्ष दिसंबर तक इन बाघों को पीटीआर में बसा दिया जाए। पलामू टाइगर रिजर्व 1973 में देश के पहले नौ टाइगर रिजर्व में शामिल था। एक समय यहां 50 बाघ थे, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उनकी संख्या घटकर शून्य के करीब पहुंच गई। 2018 में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) की रिपोर्ट में यहां बाघों की संख्या शून्य बताई गई थी। 2023 की रिपोर्ट में तीन बाघ होने की बात कही गई। पिछले तीन वर्षों में रिजर्व के अलग-अलग इलाकों में सात नर बाघों का मूवमेंट रिकॉर्ड हुआ, लेकिन एक भी बाघिन का मूवमेंट नहीं मिला। पीटीआर प्रशासन बांधवगढ़, ताडोबा या कान्हा टाइगर रिजर्व से दो बाघिन और एक बाघ लाने की तैयारी कर रहा है। इन्हें पहले रिजर्व के सॉफ्ट रिलीज सेंटर में रखा जाएगा। इसके बाद नए माहौल में ढलने और निगरानी के बाद इन्हें खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। टाइगर सप्लीमेंटेशन का प्रस्ताव नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा गया था, जिसे मंजूरी मिल गई है। पीटीआर में सरिस्का और पन्ना मॉडल पर होगा काम
पीटीआर अब सरिस्का और पन्ना टाइगर रिजर्व के मॉडल पर काम करेगा। इन दोनों रिजर्व में पहले टाइगर सप्लीमेंटेशन किया गया था और आज वहां बाघों की अच्छी संख्या है। सरिस्का में 56 और पन्ना में 80 से अधिक बाघ हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सप्लीमेंटेशन के बाद पलामू में भी बाघों की संख्या तेजी से बढ़ेगी।पिछले दो-तीन वर्षों से रिजर्व में बाघों के स्थायी आवास की तैयारी की जा रही है। इसके तहत ग्रासलैंड का क्षेत्र बढ़ाया गया है। शिकार के लिए चीतल और सांभर जैसे वन्यजीवों की संख्या बढ़ाने पर काम हुआ है। कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की गई है। राज्य में पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
बेतला नेशनल पार्क क्षेत्र में पिछले एक साल के दौरान दो बार पर्यटकों ने बाघ देखा है। अधिकारियों का मानना है कि बाघों की संख्या बढ़ने से पर्यटन को और बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। सप्लीमेंटेशन से संख्या में होगा इजाफा
पिछले तीन साल में रिजर्व क्षेत्र में सात नर बाघों का मूवमेंट रिकॉर्ड होना अच्छा संकेत है। प्रजनन के लिए मादा बाघिन जरूरी थी। सप्लीमेंटेशन से पहले जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं। इससे और बाघ बढ़ेंगे। – प्रजेशकांत जेना, उपनिदेशक, पीटीआर
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