कोडरमा: झारखंड के कोडरमा के अशोक पाटनी का सिक्के और नोट का अनोखा संग्रह न केवल उनकी वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है बल्कि यह इस बात का भी उदाहरण है कि बचपन का एक छोटा-सा शौक यदि जुनून बन जाए तो वह व्यक्ति की अलग पहचान बना सकता है. कोडरमा रेलवे स्टेशन के समीप रहने वाले अशोक पाटनी अपने दुर्लभ सिक्कों और विदेशी नोटों के अनोखे संग्रह को लेकर शहर में एक खास पहचान बना चुके हैं. बचपन में शुरू हुआ उनका शौक आज एक बड़े संग्रह में बदल चुका है. उनके पास भारत सहित दुनिया के कई देशों के दुर्लभ सिक्के और नोट सुरक्षित हैं.
विशेष बातचीत के दौरान अशोक पाटनी ने बताया कि जब वे 1983 में शहर के एक निजी विद्यालय में कक्षा चार के छात्र थे तभी उन्हें अपने दोस्तों के साथ पुराने सिक्के इकट्ठा करने का शौक लगा. शुरुआत में यह केवल एक सामान्य रुचि थी. समय के साथ यह उनका जुनून बन गया. जहां उनके अधिकांश साथियों ने स्कूल जीवन समाप्त होने के बाद इस शौक को छोड़ दिया लेकिन उन्होंने इसे लगातार जारी रखा और अलग-अलग स्थानों से पुराने और दुर्लभ सिक्कों का संग्रह करना शुरू कर दिया.
एक आना से 10 हजार दिनार तक के नोट और सिक्कों का संग्रह
उन्होंने बताया कि आज उनके पास भारत के बंद हो चुके कई पुराने सिक्कों के साथ-साथ मुगल शासनकाल, अंग्रेजी शासनकाल और स्वतंत्र भारत के विभिन्न दौर के दुर्लभ सिक्कों का संग्रह मौजूद है. उनके संग्रह का सबसे पुराना सिक्का वर्ष 1818 ईस्वी का चांदी का सिक्का है. जिसे वे अपने संग्रह की सबसे मूल्यवान धरोहर मानते हैं. उनके संग्रह में वर्ष 1942 का एक अन्ना सिक्का, 1963 का नया पैसा, 1989 में जारी जवाहरलाल नेहरू जन्म शताब्दी स्मारक सिक्का, विक्टोरिया एम्प्रेस काल का एक रुपये का सिक्का, चरखा जयंती से जुड़ा दो रुपये का स्मारक सिक्का, 5 पैसा, 10 पैसा, 20 पैसा, 25 पैसा, 50 पैसे के सिक्के, 5,10, 20, 50, 100, 500 और 1000 के पुराने नोट यूनाइटेड अरब अमीरात का 50 का सिक्का तथा 10 हजार दिनार का नोट भी शामिल है.
पर्यटन स्थलों पर विदेशी पर्यटकों से दूसरे देश के नोट जुटाने में होती है आसानी
उन्होंने सिर्फ सिक्के ही नहीं, करीब 70 देशों के 200 विदेशी नोटों का भी संग्रह किया है. उन्होंने बताया कि जब भी उन्हें किसी पर्यटन स्थल पर जाने का अवसर मिलता है जहां बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक आते हैं. वहां से विभिन्न देशों के नोट और सिक्के प्राप्त करने में आसानी होती है. कई विदेशी पर्यटकों और परिचितों ने भी उनके इस शौक को देखते हुए उन्हें अपने देशों की मुद्राएं उपलब्ध कराई हैं. उनके संग्रह में नीदरलैंड, रूस, जर्मनी, कनाडा, बेल्जियम, स्पेन, पोलैंड, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, पाकिस्तान, मालदीव, थाईलैंड, इंडोनेशिया, सिंगापुर, कंबोडिया और अफगानिस्तान सहित दर्जनों देशों के दुर्लभ नोट और सिक्के शामिल हैं. अशोक पाटनी ने बताया कि पुराने सिक्के और नोट केवल मुद्रा नहीं होते, बल्कि वे इतिहास के जीवंत दस्तावेज होते हैं. इन्हें संरक्षित करना हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को सहेजने जैसा है. उनका सपना है कि भविष्य में उनके इस दुर्लभ संग्रह को अधिक से अधिक लोग देख सकें. ताकि युवा पीढ़ी भी इतिहास और विरासत को समझने के लिए प्रेरित हो.