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कोडरमा में एक बकरा 1.10 लाख रुपए में बिका:बकरीद में तोतापरी बकरों...




ईद उल जुहा (बकरीद) पर्व गुरुवार, 28 मई को मनाई जाएगी। कुर्बानी के इस त्योहार पर अच्छी नस्ल के बकरों की भारी मांग रहती है। कोडरमा के बाजारों में भी महंगे बकरों की मुंहमांगी कीमत पर बिक्री हो रही है। बकरीद पर बकरों (खस्सियों) की विशेष नस्लों की मांग बढ़ जाती है। कुछ खस्सी तो एक लाख रुपए से भी अधिक कीमत पर बिकते हैं। बकरा विक्रेता निसार खान ने बताया कि इस बार उन्होंने एक बकरा 1.10 लाख रुपए में बेचा। उसका वजह 108 किलो था। दो-तीन लाख रुपए का मुनाफा हो जाता है
निसार खान बताते हैं कि वे हर साल बकरीद से करीब एक महीने पहले बकरों का व्यापार शुरू करते हैं। इसमें वो 10 लाख की पूंजी लगाते हैं और करीब दो-तीन लाख रुपए का मुनाफा हो जाता है। वे विभिन्न इलाकों से अलग-अलग नस्ल के बकरे लाकर उन्हें पालते हैं और फिर बेचते हैं। उनके बकरों की बाजार में काफी मांग रहती है। निसार खान के पास 15 हजार से एक लाख रुपए से अधिक कीमत के बकरे उपलब्ध हैं। उनके पास सबसे अधिक मांग तोतापरी नस्ल के बकरों की है, जो मुख्य रूप से राजस्थान में पाई जाती है। उन्होंने बताया कि वे तोतापरी नस्ल के तीन खस्सी राजस्थान से लाए थे। उस समय उनका वजन लगभग 50 किलो था, लेकिन अब उनका वजन एक क्विंटल (100 किलो) से अधिक हो गया है। ये बकरे लगभग ढाई वर्ष के हो चुके हैं। तोतापरी नस्ल के बकरों को अन्य बकरों से अलग अपने घर में रखते हैं। उनके लिए विशेष खानपान की व्यवस्था की जाती है और उनके कमरे में पंखे भी लगे होते हैं। निसार खान के अनुसार, इन खस्सियों का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। अनाज, फल से लेकर काजू किशमिश तक खिलाते हैं
निसार खान ने बताया कि तोतापरी नस्ल के बकरों को बकरीद के लिए तैयार करने के लिए केला, आम, संतरा जैसे फलों के साथ गेंहू, मक्का खिलाते हैं। वहीं, सुबह को ये इन बकरों को काजू, किशमिश और बादाम जैसे ड्राई फ्रूट भी खिलाते हैं। सबसे ज्यादा 2024 में बेचे थे बकरे
निसार मुख्य रूप से एक कपड़ा व्यवसायी हैं। 2020 में इन्होंने बकरीद के समय कुछ बकरों को बेचने से इसकी शुरुआत की थी। अच्छा मुनाफा और ज्यादा मांग होने के कारण अगले साल से इन्होंने अपने इस व्यापार को बढ़ाया और अब ये हर साल 150 से 200 बकरों का व्यापार कर लेते हैं। निसार ने सबसे अधिक 2024 में 190 बकरे बेचे थे। दो से तीन लाख का होता है मुनाफा
इन्होंने बताया कि इस व्यापार के लिए इन्हें 10 लाख रुपए की पूंजी लगानी पड़ती है। जिसके पस्चात इन खस्सियों को खिलाने-पिलाने का खर्च काटकर करीब 2 से 3 लाख रुपए का मुनाफा हो जाया करता है।



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