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खरगोन के खेगांव स्थित धारेश्वर महादेव मंदिर में सावन के महीने में शिवजी के दुर्लभ नटेश्वर यानी अर्धनारीश्वर स्वरूप के दर्शन होते हैं. करीब 5 हजार साल पुराना बताया जाने वाला यह मंदिर शिवभक्तों की गहरी आस्था का केंद्र है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ते हैं.
सावन का पवित्र महीना चल रहा है, जो भोले के भक्तों के लिए बेहद खास होता है. इस दौरान भक्त प्राचीन, दुर्लभ और चमत्कारिक मंदिरों की तलाश में रहते हैं. खरगोन के खेगांव में स्थित धारेश्वर महादेव मंदिर एक ऐसा ही शिवालय है, जहां भगवान के दुर्लभ नटेश्वर यानी अर्धनारीश्वर स्वरूप के दर्शन होते हैं. मान्यता है कि भगवान शिव ने भगवान श्रीकृष्ण के सारथी दारुक को इसी रूप में दर्शन दिए थे, तभी से यह स्थान शिवभक्तों की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है.
जिले में नर्मदा नदी के किनारे स्थित इस मंदिर का इतिहास करीब 5 हजार साल पुराना बताया जाता है. मान्यता है कि भगवान शिव यहां स्वयं अर्धनारीश्वर रूप में साक्षात विराजमान हैं. सावन के पूरे महीने मंदिर में मध्य प्रदेश सहित महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. सुबह से रात तक भक्तों का आना-जाना लगा रहता है, खासकर सोमवार को यहां पूजा-अर्चना के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.
मंदिर से जुड़े पौराणिक कथा
मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के सारथी दारुक को माता पार्वती के श्राप के कारण धरती पर जन्म लेना पड़ा. मृत्युलोक में जन्म लेने के बाद उन्होंने कम उम्र में ही घर छोड़ दिया और नर्मदा परिक्रमा पर निकल पड़े. परिक्रमा पूरी होने के बाद वे खेगांव पहुंचे और भगवान शिव की कठोर तपस्या शुरू कर दी.
इसलिए कहलाए दारुकेश्वर महादेव
दारुक की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव उनके सामने नटेश्वर यानी अर्धनारीश्वर स्वरूप में प्रकट हुए. तब दारुक ने भगवान से प्रार्थना की कि वे इसी स्थान पर हमेशा विराजमान रहें, ताकि आने वाले समय में भी भक्तों को उनके दर्शन मिलते रहें. कहते हैं कि भगवान ने उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली और तभी से यहां इसी स्वरूप में विराजित हैं. इसी कारण इस स्थान को दारुकेश्वर के नाम से भी जाना जाता है.
सावन में होते है विशेष आयोजन
मंदिर के पुजारी कैलाश गिरी बताते हैं कि सावन के हर सोमवार भगवान शिव का विशेष श्रृंगार किया जाता है. फूलों से सजावट होती है और दिनभर पूजा, अभिषेक चलता रहता है. शाम को महाआरती का आयोजन होता है. यात्रियों के लिए भंडारे की व्यवस्था भी की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि धारेश्वर महादेव के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मन्नत जरूर पूरी होती है. इसलिए सावन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु कांवड़ लेकर भी नर्मदा का जल चढ़ाने आते हैं.