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खेत से सीधा बाजार…न बिचौलिए, न इंतजार, ऐसी ताजगी, इतनी कम कीमत,...


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Jamshedpur Thok Sabji Bajar: जमशेदपुर के साकची गोल चक्कर पर सुबह 4 बजे से ताजी सब्जियां थोक में बिकना शुरू हो जाती हैं और 7 बजे तक बाजार सिमट जाती है. यानी जब आधा शहर जागा भी नहीं होता है तब तक यह मार्केट हट चुकी होती है. यहां की ताजी सब्जियां, कम कीमत इसे बड़े खरीदारों के लिए परफेक्ट बनाते हैं.

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जमशेदपुर. सुबह के 4:00 बजे… जब आधा शहर नींद में होता है, तब साकची गोल चक्कर पूरी तरह जाग चुका होता है. यही वह समय है, जब यहां लगती है जमशेदपुर की मशहूर भाजी मार्केट. शहर की तेज रफ्तार जिंदगी के बीच यह बाजार हर दिन ताजगी, मेहनत और गांव की खुशबू लेकर आता है. खास बात यह है कि सुबह 7:00 बजे तक यह पूरा बाजार लगभग खत्म भी हो जाता है और लोग अपना सामान बेचकर वापस लौटने लगते हैं.

खेत से सीधे बाजार तक
इस बाजार की सबसे बड़ी पहचान इसकी शुद्धता और ताजगी है. यहां मिलने वाली हरी साग-सब्जियां सीधे किसानों के खेतों से आती हैं. जमशेदपुर से सटे पटमदा, बोड़ाम, हाता और घाटशिला जैसे इलाकों से किसान खुद अपनी सब्जियां लेकर पहुंचते हैं. यहां किसी थर्ड पार्टी या बड़े सप्लायर का ज्यादा दखल नहीं होता, इसलिए लोगों को अच्छी क्वालिटी की सब्जियां सही कीमत पर मिल जाती हैं.

हर तरह की सब्जी मिलेगी
सुबह के अंधेरे में ही किसानों की साइकिल, बाइक और छोटी गाड़ियां बाजार में पहुंचने लगती हैं. कुछ ही देर में पूरा इलाका ताजी सब्जियों की खुशबू और लोगों की आवाजों से भर जाता है. यहां आपको हर तरह की हरी साग आसानी से मिल जाएगी. पालक, मूली साग, लाल भाजी, चौलाई, मेथी, धनिया और पुदीना जैसी ताजी पत्तेदार सब्जियां लोगों को खूब पसंद आती हैं. इसके अलावा खीरा, ककड़ी, टमाटर, गाजर, भिंडी, लौकी और करेला जैसी रोजमर्रा की सब्जियां भी यहां भरपूर मात्रा में बिकती हैं.

छोटे खरीदार यहां से लेते हैं माल
इस बाजार में सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि छोटे-छोटे सब्जी व्यापारी भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं. जो लोग ठेले, साइकिल या छोटी गाड़ियों में मोहल्लों में सब्जी बेचते हैं, वे यहां से थोक में सामान खरीदकर ले जाते हैं. यही वजह है कि यह बाजार शहर की सब्जी सप्लाई का एक बड़ा केंद्र माना जाता है.

लोग फुटकर सब्जी भी लेते हैं
वहीं, मॉर्निंग वॉक के लिए निकलने वाले लोग भी यहां रुककर खरीदारी करना नहीं भूलते. सुबह की ताजी हवा के बीच खेतों से आई हरी सब्जियां लोगों को अपनी ओर खींच लेती हैं. यही कारण है कि साकची की यह भाजी मार्केट केवल बाजार नहीं, बल्कि गांव और शहर को जोड़ने वाली एक खूबसूरत कड़ी बन चुकी है. यहां हर सुबह मेहनत, ताजगी और भरोसे का अनोखा संगम देखने को मिलता है.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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