सिटी रिपोर्टर | बोकारो चास अर्बन रिवर प्लान (यूआरपी) के तहत गरगा नदी के पुनर्जीवन और शहरी जलस्रोतों के संरक्षण के लिए जिला प्रशासन समग्र कार्ययोजना तैयार कराएगा। वर्ष 2041 को लक्ष्य मानकर नदी के संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण का काम तीन चरणों में किया जाएगा। इसके लिए नमामि गंगे के तहत पांच से छह बड़ी परियोजनाओं को शामिल करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। बुधवार को उपायुक्त अजय नाथ झा की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्देश दिया गया। अगली समीक्षा बैठक 15 दिसंबर के आसपास होगी। बैठक में विशेषज्ञों ने पीपीटी के माध्यम से गरगा नदी के इको रेस्टोरेशन, तालाबों के जीर्णोद्धार, ठोस अपशिष्ट एवं फीकल स्लज प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण से जुड़े प्रस्ताव प्रस्तुत किए। उपायुक्त ने कहा कि नदी का पुनर्जीवन दीर्घकालिक प्रक्रिया है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण और संरक्षण के कार्य समानांतर शुरू किए जाने चाहिए। नदी के अलग-अलग हिस्सों को ब्लॉक में बांटकर काम की नियमित मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया। तालाबों और नालों के प्रदूषण पर नियंत्रण और सरस्वती तालाब के जीर्णोद्धार, सौर ऊर्जा आधारित इरिगेशन सिस्टम लगाने, नालों पर स्क्रीन चैंबर बनाने और नदी में फ्लोटिंग ट्रैस बूम लगाने के सुझाव दिए गए। सेप्टिक टैंकों की नियमित सफाई के लिए प्रतिवर्ष करीब 10 हजार टैंकों की सफाई का लक्ष्य निर्धारित करने पर भी चर्चा हुई।
Source link