गांजीपुरः महात्मा गांधी को अक्सर लोग सिर्फ इतिहास की किताबों या नोटों पर छपी तस्वीर तक सीमित कर देते हैं, लेकिन गांधी के विचार आज भी समाज, राजनीति और व्यक्तिगत जीवन को दिशा दे सकते हैं. ऐसा मानना है गांधी दर्शन पर वर्षों तक शोध करने वाले रिसर्च स्कॉलर शम्मी कुमार सिंह का शोधार्थी शम्मी कुमार सिंह ने अपने वर्षों के शोध और जीवन के अनुभवों के आधार पर दिया है. दर्शनशास्त्र में गांधीवादी विचारों पर गहन शोध कर चुके शम्मी का मानना है कि गांधी केवल एक नाम नहीं, बल्कि मानवता की उच्च कोटि को बरकरार रखने का माध्यम हैं.
गांधी के राजनीतिक विचारधाराओं से प्रेरित होकर शुरू किया रिसर्च
शम्मी कुमार सिंह ने बताया कि उनकी गांधी में रुचि की शुरुआत यूपी कॉलेज में बीएससी के दौरान छात्र राजनीति से हुई, महामंत्री पद का चुनाव लड़ते समय वे गांधी के विचारों से प्रभावित हुए. इसके बाद उन्होंने काशी विद्यापीठ से गांधी दर्शन में स्नातकोत्तर किया और यूजीसी फेलोशिप प्राप्त की, बाद में लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर केसी पांडेय के निर्देशन में गांधी और लोहिया के समाजवादी चिंतन की समकालीन प्रासंगिकता विषय पर शोध किया. लखनऊ यूनिवर्सिटी से प्रोफेसर केसी पाण्डेय के निर्देशन में ‘गांधी-लोहिया के समाजवादी चिंतन’ पर शोध कर चुके शम्मी कहते हैं. गांधी ने कहा था कि पाप से घृणा करो, पापी से नहीं. यदि आज का युवा सिर्फ उनकी किताब माई एक्सपेरिमेंट विद ट्रुथ (सत्य के साथ मेरे प्रयोग) पढ़ ले, तो गांधी को लेकर समाज में फैली अधिकांश गलतफहमियां दूर हो जाएंगी.
उनका कहना है कि गांधी केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक चिंतन के भी महत्वपूर्ण स्तंभ हैं. उन्होंने सत्य, अहिंसा और आत्मानुशासन जैसे सिद्धांतों को जीवन का आधार बनाया. शम्मी कुमार सिंह के अनुसार गांधी ने भगवान बुद्ध के करुणा और अहिंसा के संदेश को आधुनिक समाज के सामने नए रूप में प्रस्तुत किया.
बुद्ध और कबीर के मार्ग का पुनर्जन्म
शम्मी कुमार सिंह के अनुसार, गांधीजी ने बुद्ध के संदेशों और कबीर की सरलता को एक नया आयाम दिया। वे कहते हैं, गांधीजी का एकादश व्रत, आत्म-अनुशासन का आधार है. यदि व्यक्ति इसे अपने जीवन में उतार ले, तो वह केवल एक बेहतर इंसान नहीं, बल्कि ईश्वरीय गुणों के करीब पहुंच सकता है. शम्मी कुमार सिंह बताते हैं कि गांधी का सबसे बड़ा संदेश थासत्य का कोई विकल्प नहीं है, वहीं उनका प्रसिद्ध विचार “पाप से घृणा करो, पापी से नहीं आज भी समाज में सहिष्णुता और मानवीय मूल्यों की सीख देता है.
अहिंसा कायरता का नहीं, वीरता का प्रतीक
गांधीजी की अहिंसा पर शम्मी सिंह की व्याख्या बहुत स्पष्ट है. वे कहते हैं, लोग गांधी की अहिंसा को गलत समझते हैं, गांधी का मानना था कि यदि कायरता और हिंसा में से किसी एक को चुनना हो, तो वे हिंसा को चुनेंगे, क्योंकि कायरता से बढ़कर कोई पाप नहीं है. गांधी की अहिंसा का अर्थ है भ्रष्टाचार मुक्त जीवन, ईमानदारी और निडरता. आज की AI और तकनीक की दुनिया में गांधी की क्या भूमिका है? इस पर शम्मी कहते हैं, टेक्नोलॉजी के इस युग में आत्मानुशासन सबसे बड़ी चुनौती है, गांधी, बुद्ध और कबीर के विचारों को पढ़ना आज के दौर में अनिवार्य है ताकि हम अपनी मानवता को न खोएं.