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Start Flour Mill Business In Low Cost: देवघर के रंजीत कुमार ने कम लागत में आटा चक्की का बिजनेस शुरू कर एक सफल उदाहरण पेश किया है. वे इस कारोबार से हर महीने तीस से चालीस हजार रुपये तक की कमाई कर रहे हैं. गांव में कम पूंजी में स्वरोजगार की इच्छा रखने वाले यह काम कर सकते हैं.
देवघर. गांव में रहकर ही कोई व्यापार शुरू करना चाहते हैं और चाहते हैं कि कम लागत में ऐसा काम शुरू हो, जिसकी जरूरत लोगों को सालों भर बनी रहे, तो आटा चक्की का बिजनेस आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है. दरअसल, गांव-देहात में आज भी ज्यादातर घरों में गेहूं खरीदकर या अपने खेत में उपजाए गए गेहूं को चक्की में पिसवाकर आटा तैयार किया जाता है. ऐसे में लोगों को हर महीने आटा पिसवाने के लिए चक्की की जरूरत पड़ती है. यही वजह है कि गांव में आटा चक्की का कारोबार लंबे समय तक चलने वाला बिजनेस माना जाता है. खास बात यह है कि इसे बहुत बड़े निवेश के साथ शुरू करने की जरूरत नहीं है. सही जगह और अच्छी सुविधा हो तो छोटी पूंजी से भी इसकी शुरुआत की जा सकती है.
20 से 25 साल पहले की थी आटा चक्की बिजनेस की शुरुआत
इसका एक उदाहरण देवघर के रहने वाले आटा चक्की व्यवसायी रंजीत कुमार हैं, जिन्होंने करीब 25 से 30 साल पहले महज 35 हजार रुपये लगाकर इस कारोबार की शुरुआत की थी. उस समय गांव में बिजली की अच्छी व्यवस्था नहीं थी, इसलिए उन्हें डीजल इंजन के सहारे आटा चक्की चलानी पड़ती थी. डीजल पर खर्च ज्यादा होने की वजह से कमाई भी उतनी अच्छी नहीं हो पाती थी. लेकिन उन्होंने कारोबार बंद करने के बजाय समय के साथ इसमें बदलाव किया. जब बिजली की व्यवस्था बेहतर हुई तो उन्होंने अपनी चक्की में 10 एचपी का इलेक्ट्रिक मोटर लगवा लिया. इसके बाद डीजल का खर्च कम हुआ और कारोबार से होने वाले मुनाफे में भी बढ़ोतरी होने लगी.
क्या कहते हैं व्यापारी रंजीत कुमार
रंजीत कुमार बताते हैं कि आज के समय में उनकी आटा चक्की से महीने में कभी 30 हजार रुपये, कभी 35 हजार रुपये तो कभी 40 हजार रुपये तक की कमाई हो जाती है. हालांकि यह कमाई गेहूं की आवक और कामकाज पर निर्भर करती है. गांव में रहने वाले लोगों को रोजाना आटा पिसवाने की जरूरत पड़ती है. ऐसे में अगर चक्की गांव के बीच या ऐसी जगह पर लगाई जाए, जहां आसपास के कई गांवों के लोगों का आना-जाना हो, तो ग्राहक मिलने में परेशानी नहीं होती है. इस कारोबार में सबसे अच्छी बात यह है कि ग्राहक एक बार जुड़ जाएं तो नियमित रूप से आते रहते हैं.
गेहूं आटा चक्की के अलावा दूसरी चीजें भी रख सकते हैं
अगर आप भी इस बिजनेस को शुरू करने की सोच रहे हैं तो सबसे पहले अपने गांव और आसपास के इलाकों में यह जानकारी जुटाएं कि वहां पहले से कितनी आटा चक्कियां हैं और लोगों को पिसाई के लिए कितनी दूर जाना पड़ता है. इसके बाद अपनी पूंजी के हिसाब से मशीन, मोटर और दुकान या जगह की व्यवस्था करें. बिजली कनेक्शन और मशीन की क्षमता का भी खास ध्यान रखना जरूरी है. साथ ही गेहूं की पिसाई के अलावा मसाला पीसने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करा सकते हैं, जिससे आमदनी के दूसरे रास्ते खुल सकते हैं.
कम निवेश में एक अच्छे बिजनेस की कर सकते हैं शुरुआत
कुल मिलाकर देखा जाए तो गांव में आटा चक्की का बिजनेस उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है, जो कम निवेश में अपना स्वरोजगार शुरू करना चाहते हैं. हालांकि कमाई की कोई गारंटी नहीं है, यह ग्राहकों की संख्या, पिसाई की दर, बिजली खर्च और मशीन के रखरखाव पर निर्भर करती है. रंजीत कुमार की शुरुआत महज 35 हजार रुपये से हुई थी और आज इसी कारोबार से हर महीने 30 से 40 हजार रुपये तक की आमदनी हो रही है. ऐसे में उनका यह अनुभव गांव में अपना रोजगार तलाश रहे लोगों के लिए एक अच्छा उदाहरण जरूर है.
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Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…