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Animal Care Tips: झारखंड के बोकारो जिले में पशुओं में थेलेरियोसिस बीमारी को लेकर पशु चिकित्सकों ने चेतावनी जारी की है. यह एक गंभीर परजीवी बीमारी है, जो आमतौर पर गायों में किलनी और चमकोन जैसे परजीवियों के काटने से फैलती है. विशेषज्ञों के अनुसार, ये परजीवी संक्रमित जानवर के खून से दूसरे स्वस्थ पशुओं में बीमारी फैला देते हैं. साफ-सफाई और सही देखभाल न होने पर यह बीमारी तेजी से पूरे गौशाला में फैल सकती है.
बोकारो के चास स्थित पेट क्लिनिक के पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार ने इस बीमारी के रोकथाम और बचाव को लेकर जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि थेलेरियोसिस गायों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है. अगर एक भी गाय इसकी चपेट में आ जाती है, तो यह धीरे-धीरे पूरी गौशाला के अन्य पशुओं को भी संक्रमित कर सकती है.
यह बीमारी शरीर की रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करती है और परजीवी खून चूसकर संक्रमण को एक जानवर से दूसरे तक पहुंचाते हैं. डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि इस बीमारी के लक्षणों को पहचानना आसान है. संक्रमित गायों में तेज बुखार देखा जाता है, जिसका तापमान 104 से 107 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है.
इसके साथ ही दूध उत्पादन में अचानक गिरावट आ जाती है. आंखों और कानों में सूजन दिखाई देने लगती है. पशु सुस्त और कमजोर हो जाता है और गंभीर स्थिति में खूनी दस्त जैसी समस्या भी हो सकती है.
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उन्होंने आगे बताया कि इस बीमारी से बचाव के लिए गौशाला में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. पशुओं और गौशाला दोनों पर नियमित रूप से किलनी और चमकोन नियंत्रित करने वाली दवाओं का उपयोग करना चाहिए. साथ ही पशुओं को समय-समय पर नहलाना भी जरूरी है.
डॉ. अनिल कुमार ने यह भी सलाह दी कि हर महीने पशुओं की नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए. इसके अलावा समय पर टीकाकरण करवाने से इस बीमारी से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है और पशुओं को सुरक्षित रखा जा सकता है.