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गाय-भैंस के दूध से नहीं दालचीनी से बनता है यह खास घी,...


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Ayurvedic Cinnamon Ghee: आपने आज तक कई तरह का घी खाया होगा लेकिन क्या कभी दालचीनी के घी के बारे में सुना भी है? पलामू के आयुर्वेद के जानकार शिव कुमार पांडे यह खास घी बना रहे हैं. घी तैयार होने में 2 महीने का समय लगता है और यह कई बीमारियों में लाभ देता है. कीमत की बात करें तो 60 एमएल घी 800 रुपये का मिलेगा.

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पलामू. आज तक आपने गाय, भैंस या देसी घी के कई प्रकारों के बारे में सुना और इस्तेमाल किया होगा, लेकिन क्या कभी दालचीनी से बने घी के बारे में सुना है? पलामू जिले में एक ऐसा अनोखा और पारंपरिक आयुर्वेदिक घी तैयार किया जा रहा है, जिसे ‘दालचीनी का घी’ कहा जाता है. आयुर्वेद के जानकार शिव कुमार पांडे पिछले कई वर्षों से इस विशेष घी को पारंपरिक और प्राकृतिक विधि से तैयार कर रहे हैं. उनका दावा है कि यह पुराने समय में इस्तेमाल होने वाली बेहद लाभकारी औषधियों में से एक है, जो आज के समय में लगभग खत्म होती जा रही है.

पहले होता था कई समस्याओं में इस्तेमाल
शिव कुमार पांडे ने लोकल 18 को बताया कि आजकल लोग दालचीनी का घी बनाना लगभग भूल चुके हैं, जबकि पुराने समय में इसका उपयोग कई समस्याओं में किया जाता था. यह घी खास प्रक्रिया से तैयार किया जाता है, जिससे दालचीनी के सभी गुण घी में समाहित हो जाते हैं. यही वजह है कि इसे दुनिया का सबसे मीठा और गुणकारी घी कहा जाता है. उन्होंने बताया कि यह घी खासकर जोड़ों के दर्द, गठिया, साइटिका और शरीर के दर्द में काफी फायदेमंद माना जाता है. दर्द वाली जगह पर इसकी मालिश करने से राहत मिलती है.

इन परेशानियों में करता है फायदा
उन्होंने बताया कि दालचीनी का घी केवल शरीर के दर्द तक सीमित नहीं है, बल्कि दांतों के दर्द, पायरिया, मसूड़ों की सूजन और मुंह की दुर्गंध जैसी समस्याओं में भी लाभकारी माना जाता है. इसके अलावा खांसी और दमा से परेशान लोग अगर थोड़ा सा दालचीनी घी मुंह में रख लें, तो इससे आराम महसूस होता है. शिव कुमार पांडे ने बताया कि गुड़ को कूटकर इस घी में मिलाकर प्राकृतिक चॉकलेट भी तैयार की जा सकती है, जो स्वादिष्ट होने के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद होती है.

बहुत मेहनत से होता है तैयार
इस घी को तैयार करने की प्रक्रिया काफी लंबी और मेहनतभरी होती है. इसे ‘शतसिद्ध पद्धति’ से तैयार किया जाता है, जिसमें लगभग दो महीने का समय लगता है. पूरी प्रक्रिया प्राकृतिक तरीके से की जाती है, जिसके कारण इसकी लागत भी अधिक आती है. वर्तमान में 60 एमएल दालचीनी घी की कीमत 800 रुपये रखी गई है. शिव कुमार पांडे का कहना है कि यह केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि प्राचीन आयुर्वेदिक परंपरा को जीवित रखने का प्रयास है. इच्छुक लोग उनसे संपर्क कर इस विशेष दालचीनी घी को खरीद सकते हैं.

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Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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