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वाराणसी के महापौर अशोक तिवारी ने बताया कि काशी में भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, पद्मविभूषण गिरिजा देवी, सुप्रसिद्ध गायक पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र सहित कई हस्तियां रही है. इन हस्तियों से जुड़ी कई अनमोल चींजे है जो उनके घर में पड़े है. इन सारी चींजों को संरक्षित करके उनके घर के ही एक कमरें में उन्हें सजाया जाएगा.
वाराणसीः देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी में कई भारत रत्न और पद्मविभूषण हस्तियां है. इन हस्तियों के संगीत और नृत्य के साथ अलग अलग विधाओं में अपना नाम देश ही नहीं बल्कि दुनिया में रोशन किया है. इन्ही नामचीन हस्तियों के नाम पर अब काशी में म्यूजियम तैयार किया जाएगा. वाराणसी नगर निगम ने इसका पूरा खाका तैयार किया है.
वाराणसी के महापौर अशोक तिवारी ने बताया कि काशी में भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, पद्मविभूषण गिरिजा देवी, सुप्रसिद्ध गायक पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र सहित कई हस्तियां रही है. इन हस्तियों से जुड़ी कई अनमोल चींजे है जो उनके घर में पड़े है. इन सारी चींजों को संरक्षित करके उनके घर के ही एक कमरें में उन्हें सजाया जाएगा.
30 करोड़ होगा खर्च
उनके घर का वो कमरा उनके नाम म्यूजियम के तौर पर विकसित होगा. इस काम पर 30 करोड़ रुपये खर्च होंगे. अशोक तिवारी ने बताया कि इन हस्तियों के घर जाने वाले मार्ग का भी नगर निगम सुंदरीकरण कराएगा. ताकि संगीत प्रेमी उनके घर तक आसानी से पहुंच सकें. इन रास्तों को नगर निगम कुछ इस कदर सजायेगा की लोग उनके बारे में बेहतर तरीके से जान और समझ सकें. यह गलियां विश्वस्तरीय होगी, यहां खूबसूरत वॉल पेंटिंग्स और लाइट्स भी लगाएं जाएंगे.
परिवार से बातचीत जारी
अशोक तिवारी ने बताया की उन सभी महान हस्तियों के परिवार वालों से अफसर लगातार बातचीत भी कर रहें है और उनसे उनके घर के एक कमरें को म्यूजियम के तौर पर विकसित करने पर लगातार चर्चा जारी है. जैसे-जैसे उनके परिवार वालों से इसपर सहमति मिलेगी वैसे-वैसे इस काम को आगे बढ़ाया जाएगा.
बताते चलें कि वाराणसी में भारत रत्न,पद्मविभूषण पद्मभूषण सम्मान पाने वाले सबसे ज्यादा विभूतियां है. वाराणसी के कबीरचौरा क्षेत्र में बकायदा इसके लिए पद्म गली भी बनाई गई है. जहां बनारस संगीत घराने के कई नामचीन हस्तियां रहती थी. आज भी उन गलियों के कई घरों में संगीत का विश्वविद्यालय चलता है. अलग अलग घरों में अलग अलग विधाएं सिखाई जाती है. गुरु शिष्य परम्परा का अनूठा संगम इन गलियों में देखने को मिलता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें