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गिरिडीह के बिरनी प्रखंड की दो युवतियों पूनम कुमारी और पुष्पा कुमारी ने अपनी मेहनत, लगन और संघर्ष के दम पर सफलता की नई मिसाल कायम की है। साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाली इन दोनों बेटियों को गुजरात के साणंद में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रही हैं। दोनों भारत की पहली कमर्शियल सेमीकंडक्टर चिप निर्माण कंपनी सीजी सेमीकॉन में नौकरी मिली है। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे गिरिडीह जिले के लिए गर्व का विषय बन गई है। हाल ही में दोनों युवतियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, जहां उनकी सराहना की गई। इस मुलाकात के बाद क्षेत्र में खुशी और उत्साह का माहौल है। संघर्षों भरा रहा है पूनम का सफर बिरनी प्रखंड के बलगो गांव की पूनम कुमारी का जीवन शुरू से ही संघर्षों से भरा रहा है। उनकी मां वैजयंती देवी ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। पूनम ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा यूएमएस दतलगा और उत्क्रमित मध्य विद्यालय खुरजियो से पूरी की। इसके बाद उन्होंने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, बिरनी से आगे की पढ़ाई जारी रखी। आईटीआई की पढ़ाई पूरी की। परिवार के सदस्यों और शिक्षकों ने उनकी इस उपलब्धि पर गर्व जताया है। शिक्षकों का कहना है कि पूनम शुरू से ही अनुशासित और लक्ष्य के प्रति समर्पित छात्रा रही हैं, जिनकी सफलता अन्य छात्राओं के लिए प्रेरणा बनेगी। अभावों से उपलब्धि तक है पुष्पा की कहानी वहीं, बिरनी प्रखंड के चितखारो गांव की पुष्पा कुमारी की कहानी भी संघर्ष और संकल्प की मिसाल है। गांव तक पहुंचने वाली सड़क आज भी बदहाल है। इन्हीं परिस्थितियों में पुष्पा ने अपनी पढ़ाई पूरी की। उनके पिता का पहले ही निधन हो चुका था। जिसके बाद परिवार की जिम्मेदारी उनकी मां सीता देवी पर आ गई। सीता देवी ने मजदूरी कर, ईंट ढोकर बेटी की पढ़ाई जारी रखी। आज उसी मेहनत का परिणाम है कि पुष्पा देश के अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर उद्योग का हिस्सा बन गई हैं। प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान बेटी को सम्मान मिलता देख उनकी मां भावुक हो गईं। इसे वर्षों की मेहनत का फल बताया। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय बिरनी की रही हैं छात्राएं दोनों छात्राओं ने बिरनी स्थित पीएम श्री कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। विद्यालय की वार्डन डॉ. वीणा वर्णवाल और पूर्व वार्डन काजल पांडेय ने बताया कि पूनम और पुष्पा शुरू से ही मेहनती और अनुशासित थीं। विद्यालय परिवार लगातार अभिभावकों को बेटियों की पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित करता रहा। शिक्षकों ने कहा कि दोनों को प्रधानमंत्री के साथ देखना उनके लिए गौरव का क्षण था। पूनम और पुष्पा की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। आज दोनों बेटियां पूरे गिरिडीह जिले की अन्य छात्राओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
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