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गिरिडीह में डेढ़ क्विंटल मछली समेत जलीय जीवों की मौत:जलीय सूर्य मंदिर...




गिरिडीह जिले के जमुआ प्रखंड अंतर्गत जगन्नाथडीह मिर्जागंज स्थित प्रसिद्ध जलीय सूर्य मंदिर परिसर के तालाब में बड़ी संख्या में जलीय जीवों की मौत हो गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, अब तक लगभग डेढ़ से दो क्विंटल मछलियां मृत पाई गई हैं। इसके अतिरिक्त, तालाब में कछुए, मेंढक और सांप भी मरे हुए मिले हैं। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका आरोप है कि तालाब में किसी शरारती तत्व द्वारा जहर या कोई रासायनिक पदार्थ डाला गया है, या फिर अत्यधिक प्रदूषण के कारण पानी जहरीला हो गया है, जिससे जलीय जीवों की लगातार मौत हो रही है। मंदिर समिति के सदस्यों को मौके पर बुलाया
स्थानीय ग्रामीण सुमित रंजन दराद और विक्रम शर्मा ने बताया कि मछलियों और अन्य जीवों के मरने की सूचना मिलते ही उन्होंने मंदिर समिति के सदस्यों को मौके पर बुलाया। ग्रामीणों के अनुसार, मंदिर समिति के अध्यक्ष ने भी घटना पर अनभिज्ञता जताई और कहा कि इतनी बड़ी संख्या में मछलियां क्यों मर रही हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी उन्हें भी नहीं है। हालांकि, उन्होंने मछलियों के साथ-साथ सांप, कछुए और अन्य जलीय जीवों के मरने की बात स्वीकार की। ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर के चारों ओर स्थित तालाब में गंदगी का अंबार लगा हुआ है और पानी भी काफी दूषित हो चुका है। ग्रामीणों का मानना है कि संभवतः किसी ने तालाब में कोई केमिकल या नशीला पदार्थ डाला है। ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि यह एक धार्मिक और आस्था का केंद्र है, इसलिए यहां मछली पालन के लिए टेंडर नहीं दिया जाना चाहिए। कुछ ग्रामीणों ने किसी रंजिश के कारण तालाब में जहर डाले जाने की आशंका भी जताई है। ग्रामीणों ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि तालाब के चारों ओर घाट बने हुए हैं, जहां आसपास के लोग प्रतिदिन स्नान करते हैं। यदि पानी जहरीला हो गया है, तो इससे किसी बड़ी दुर्घटना की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। मामले की निष्पक्ष जांच कर मांग
उन्होंने प्रशासन से तत्काल पानी की जांच कराने, तालाब की सफाई कराने और मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में स्थानीय प्रशासन को भी सूचना दे दी गई है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र
गौरतलब है कि जगन्नाथडीह का जलीय सूर्य मंदिर झारखंड की पहचान और गौरव का प्रतीक माना जाता है। दिल्ली के लोटस टेंपल की तर्ज पर निर्मित यह मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला और प्राकृतिक सुंदरता के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। बावजूद इसके मंदिर परिसर और तालाब के संरक्षण को लेकर लंबे समय से लापरवाही बरते जाने के आरोप लगते रहे हैं। लोगों ने गिरिडीह उपायुक्त, खोरीमहुआ अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) तथा अन्य संबंधित अधिकारियों से अविलंब हस्तक्षेप कर तालाब को बचाने और इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल की गरिमा बनाए रखने की मांग की है।



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