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एक से बढ़कर एक रंग बिरंगे फूल प्रकृति का दिया हुआ बेहतरीन उपहार हैं. फूल से आसपास की महक और माहौल सबकुछ बदल जाता है. इन्हीं फूलों से एक से बढ़कर एक सजावट का काम किया जाता है. हालांकि, कई लोग फूल के पौधे तो लगाते हैं लेकिन, उनके पौधों में फूल नहीं निकलते. दूसरी तरफ कुछ पौधे फूलों से लदे होते हैं. आज हम आपको गेंदा के फूल के बारे में बताने जा रहे हैं. आपको अपने पौधे में बस थोड़ा सा ध्यान देना है इसके बाद आपका गेंदा भी फूलों से लद जाएगा.
कोडरमा: यदि आप गेंदा के पौधों से अधिक मात्रा में फूल प्राप्त करना चाहते है तो पिचिंग तकनीक आपके लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है. इस तकनीक को अपनाकर किसान और घरों में बागवानी करने वाले लोग गेंदा के पौधों को अधिक घना बना सकते हैं. इससे पौधे में नई-नई शाखाएं निकलती हैं और फूलों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलती है. कृषि विज्ञान केंद्र कोडरमा के वरीय कृषि वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार राय ने गेंदा के पौधों में बेहतर उत्पादन के लिए पिचिंग तकनीक के महत्व की जानकारी दी.
क्या है पिचिंग तकनीक
कृषि वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार राय के अनुसार गेंदा के पौधे सामान्य रूप से सीधे ऊपर की ओर बढ़ते हैं. जब पौधे की बढ़वार मुख्य रूप से एक ही दिशा में होती है तो उसमें शाखाओं की संख्या अपेक्षाकृत कम रह सकती है. इसका असर फूलों के उत्पादन पर भी पड़ सकता है. ऐसे में पौधे की ऊपरी बढ़ती हुई डाली के शीर्ष भाग को काटने की प्रक्रिया अपनाई जाती है. इसी तकनीक को पिचिंग कहा जाता है. पिचिंग करने का मुख्य उद्देश्य पौधे की ऊंचाई को नियंत्रित करते हुए उसमें अधिक शाखाओं का विकास करना है. जब पौधे का ऊपरी बढ़ता हुआ हिस्सा हटा दिया जाता है, तो उसकी बगल से नई शाखाएं निकलने लगती हैं. इससे पौधा केवल ऊपर की ओर बढ़ने के बजाय चारों तरफ फैलने लगता है.
पिचिंग करने से पौधा बनता है घना
डॉ. अजय कुमार राय ने बताया कि गेंदा के पौधे में जितनी अधिक स्वस्थ शाखाएं विकसित होंगी, उतनी ही अधिक संख्या में फूल आने की संभावना बनेगी. पिचिंग तकनीक अपनाने से पौधा अधिक फैला हुआ और घना बनता है. इससे पौधे की संरचना बेहतर होती है और फूलों के उत्पादन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है. उन्होंने बताया कि गेंदा के पौधों में केवल लंबाई बढ़ने पर ध्यान देने के बजाय शाखाओं के विकास पर भी ध्यान देना जरूरी है. यदि पौधा सीधा ऊपर बढ़ता रहे और उसमें पर्याप्त शाखाएं न निकलें, तो फूलों की संख्या सीमित रह सकती है. इसके विपरीत, उचित तरीके से पिचिंग करने पर पौधे में कई नई शाखाएं विकसित हो सकती हैं, जिन पर आगे चलकर फूल लगते हैं.
कैसे करें गेंदा के पौधों की पिचिंग
गेंदा के पौधों में पिचिंग करते समय सबसे पहले पौधे की बढ़वार और उसकी स्थिति पर ध्यान देना चाहिए. जब पौधा अच्छी तरह स्थापित हो जाए और उसमें पर्याप्त पत्तियां विकसित हो जाएं, तब उसकी मुख्य बढ़ती हुई डाली के ऊपरी हिस्से को सावधानीपूर्वक काटा जाता है. इस प्रक्रिया के लिए साफ और धारदार कैंची का उपयोग करना बेहतर रहता है, ताकि पौधे को अनावश्यक नुकसान न पहुंचे. पिचिंग करते समय पौधे की सभी शाखाओं को काटने के बजाय मुख्य शीर्ष भाग को हटाने पर ध्यान देना चाहिए. इसके बाद पौधे की देखभाल, सिंचाई और पोषण की जरूरतों का ध्यान रखना जरूरी है.
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