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चतरा में सर्पदंश के 126 मामले:अस्पताल में शून्य मौत लेकिन अंधविश्वास से...




मानसून की शुरुआत के साथ ही चतरा जिले में सर्पदंश के मामलों में तेजी आई है। चतरा सदर अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार अब तक कुल 126 मामले सामने आ चुके हैं। अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. पंकज ने बताया कि इनमें से जून महीने में 61 और जुलाई में अब तक 26 मामले दर्ज किए गए हैं। राहत की बात यह है कि समय पर अस्पताल पहुंचने वाले सभी मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौटे हैं। अस्पताल में सर्पदंश से मृत्यु दर शून्य रही है। डॉक्टरों का कहना है कि थोड़ी सी जागरूकता और तत्परता से सर्पदंश जैसी गंभीर स्थिति में भी जान बचाई जा सकती है। अंधविश्वास में दो की मौत, मासूम भी शामिल जहां एक ओर अस्पताल में इलाज से लोगों की जान बच रही है, वहीं दूसरी ओर अंधविश्वास और लापरवाही अब भी जानलेवा साबित हो रही है। जिले में दो लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक 8 वर्षीय बच्चा भी शामिल है। 12 दिन पहले लावालौंग के हाहे गांव में मनीष नामक बच्चे को सांप ने काट लिया, लेकिन परिजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय तांत्रिक के पास ले गए। झाड़-फूंक के चक्कर में बच्चे ने दम तोड़ दिया। वहीं, 17 दिन पहले हंटरगंज की रंजू कुमारी ने सांप के काटने को चींटी का काटना समझ लिया और सो गईं। सुबह तक जहर पूरे शरीर में फैलने से उनकी दर्दनाक मौत हो गई। समय पर इलाज से बची पूजा की जान हाल ही में रामटुंडा की पूजा कुमारी का मामला सामने आया, जिसमें परिजनों की सूझबूझ से उनकी जान बच गई। सुबह किचन में खाना बनाते समय उन्हें सांप ने काट लिया, जिसके बाद परिजनों ने सांप को डिब्बे में बंद कर तुरंत सदर अस्पताल पहुंचाया। समय पर इलाज मिलने से पूजा सुरक्षित हैं। इसके विपरीत, कुछ लोग सोशल मीडिया पर लाइक्स के लिए खतरनाक स्टंट कर रहे हैं। कुंदा का बुधन भारती जिंदा सांप को गले में लपेटकर और दांतों से दबाकर स्टंट करता नजर आया, जिसका वीडियो वायरल हो रहा है। प्रशासन और डॉक्टर लगातार अपील कर रहे हैं कि सर्पदंश होने पर ओझा-गुनी और झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें, बल्कि सीधे अस्पताल जाकर इलाज कराएं।



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