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भास्कर न्यूज | गढ़वा जिले के सरकारी उच्च विद्यालयों में चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की भारी कमी शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। जिले के 121 उच्च विद्यालयों में महज आठ चपरासी कार्यरत हैं, जबकि 131 पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं। कुल 139 पद सृजित है। पद रिक्त का सीधा असर विद्यालयों की साफ-सफाई, उपस्करों के रख-रखाव, कार्यालयी कार्यों और दैनिक संचालन पर पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि जिन विद्यालयों में चपरासी नहीं हैं, वहां शिक्षकों और विद्यार्थियों को ही कई ऐसे कार्य करने पड़ रहे हैं, जो सामान्यतः चपरासी की जिम्मेदारी होती है। इससे शिक्षण कार्य भी प्रभावित हो रहा है। जानकारी के अनुसार झारखंड राज्य गठन के बाद से उच्च विद्यालयों में चपरासी पद पर नियमित नियुक्ति नहीं की गई है। वर्तमान में कार्यरत अधिकांश चपरासी पुराने समय में नियुक्त हुए थे। समय के साथ बड़ी संख्या में कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि कुछ पदों पर अनुकंपा के आधार पर नियुक्तियां हुई हैं। इसके बावजूद अधिकांश विद्यालय आज भी चपरासी विहीन हैं। विद्यालयों के शिक्षकों का कहना है कि प्रतिदिन स्कूल का मुख्य गेट खोलने-बंद करने, कक्षाओं के ताले खोलने, कार्यालयी फाइलों के आवागमन, पेयजल व्यवस्था, फर्नीचर एवं अन्य उपस्करों की देखरेख जैसे कार्य प्रभावित होते हैं। सबसे अधिक परेशानी विद्यालय परिसर और कक्षाओं की नियमित सफाई को लेकर होती है। चपरासी नहीं होने से सफाई नियमित रूप से नहीं हो पाती, जिससे विद्यालय का वातावरण भी प्रभावित होता है। विद्यार्थियों ने भी बताया कि स्कूलों में छात्रों की संख्या अधिक होने के कारण बेंच-डेस्क पर धूल जमी रहती है और कई कक्षाओं में पर्याप्त साफ-सफाई नहीं हो पाती। ऐसे में पढ़ाई का माहौल प्रभावित होता है। विद्यार्थियों ने कहा कि जब उच्च अधिकारी विद्यालय निरीक्षण के लिए पहुंचते हैं तो गंदगी और अव्यवस्था पर नाराजगी तो जताते हैं, लेकिन रिक्त पदों को भरने की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। शिक्षकों ने कहा कि विद्यालयों में गैर-शैक्षणिक कार्यों का अतिरिक्त बोझ उनके नियमित शिक्षण कार्य को प्रभावित करता है। यदि चपरासी के रिक्त पदों पर नियुक्ति हो जाए तो शिक्षक पूरी तरह पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे और विद्यालयों की व्यवस्था भी बेहतर होगी।
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