भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

ड्रैगन की हर चाल होगी नाकाम, अरुणाचल बॉर्डर पर भारत बनाने जा...


Last Updated:

Arunachal Frontier Highway: केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में चीन बॉर्डर के पास ‘अरुणाचल फ्रंटियर हाईवे’ बनाने के लिए 2,423 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. इसके तहत 278 किलोमीटर लंबी पांच सड़कें बनेंगी. ये सड़कें सरली-हुरी, हुरी-तालीहा और बिले-मिगिंग इलाकों को जोड़ेंगी. इस रणनीतिक हाईवे के बनने से एलएसी पर इंडियन आर्मी की मूवमेंट बहुत आसान हो जाएगी. इससे चीन की किसी भी चाल का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सकेगा.

अरुणाचल बॉर्डर पर भारत बनाने जा रहा 278 KM लंबी 5 सड़कें, 2400 करोड़ हुए मंजूरZoom

नई दिल्ली में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के साथ बैठक के दौरान केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह – 20 अगस्त 2026 (Photo : DefenceMinIndia/X via PTI Photo)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में चीन बॉर्डर के पास सड़कों का जाल बिछाने की तैयारी कर ली है. पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार ने ‘अरुणाचल फ्रंटियर हाईवे’ के लिए 2,400 करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट मंजूर किया है. इस बड़े कदम से ड्रैगन की नींद उड़ना तय है. बॉर्डर पर चीन लगातार अपनी चालें चलता रहता है. अब भारत ने उसे उसी की भाषा में जवाब देने की पूरी तैयारी कर ली है. इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 278 किलोमीटर लंबी पांच सड़कें बनाई जाएंगी. यह नेशनल हाईवे-913 का हिस्सा होगा. इन सड़कों के बनने से बॉर्डर से सटे आखिरी गांवों तक कनेक्टिविटी बहुत अच्छी हो जाएगी. एलएसी पर इंडियन आर्मी के जवानों और हथियारों की मूवमेंट में अब बिल्कुल देरी नहीं होगी. सीगल इंडिया लिमिटेड के जॉइंट वेंचर को इस बड़े प्रोजेक्ट का जिम्मा सौंपा गया है. अगले कुछ सालों में यह हाईवे बनकर तैयार हो जाएगा.

आखिर 2400 करोड़ के इस मेगा प्रोजेक्ट में कौन सी सड़कें बनेंगी?

  • सरकार ने इस बड़े प्रोजेक्ट के तहत पांच सड़कों को मंजूरी दी है. ऊपरी सुबनसिरी और पश्चिम सियांग जिलों में यह निर्माण कार्य होगा. इसमें सरली-हुरी, हुरी-तालीहा और बिले-मिगिंग जैसे अहम हिस्से शामिल हैं.
  • सबसे बड़ा प्रोजेक्ट सरली-हुरी हिस्से का है. यहां 78.38 किलोमीटर लंबी सड़क बनेगी. इस पर करीब 611 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इसे 36 महीने के अंदर पूरा करने का टारगेट रखा गया है.
  • इसके अलावा हुरी-तालीहा हिस्से में भी दो बड़ी सड़कें बनेंगी. एक सड़क 57 किलोमीटर की होगी जिस पर 525 करोड़ खर्च होंगे. दूसरी सड़क 55 किलोमीटर की होगी. इस काम को 48 महीने में पूरा करने का प्लान है.

इस हाईवे के बनने से चीन की बेचैनी क्यों बढ़ जाएगी?

चीन हमेशा अरुणाचल प्रदेश को लेकर विवादित बयान देता रहता है. वह एलएसी के पास अपने इलाके में तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहा है. अब भारत ने भी बॉर्डर पर सड़कों का जाल बिछाना तेज कर दिया है. अरुणाचल फ्रंटियर हाईवे को देश के सबसे अहम रणनीतिक प्रोजेक्ट्स में गिना जाता है. इसके बनने से सेना के ट्रक और भारी तोपें आसानी से बॉर्डर तक पहुंच सकेंगी. मुसीबत के वक्त जवानों को तुरंत बैकअप मिल सकेगा. बिले-मिगिंग जैसे दुर्गम इलाकों में भी 37 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जाएगी. इसके लिए 274 करोड़ रुपये का बजट पास हुआ है.

बॉर्डर के आखिरी गांवों को इस नए हाईवे से क्या बड़ा फायदा होगा?

यह हाईवे सिर्फ सेना के लिए ही नहीं बल्कि आम लोगों के लिए भी लाइफलाइन बनेगा. अरुणाचल के बॉर्डर वाले गांवों में अभी भी पहुंचना बहुत मुश्किल होता है. नेशनल हाईवे-913 के बनने से इन गांवों की कनेक्टिविटी देश के बाकी हिस्सों से जुड़ जाएगी. सड़क परिवहन मंत्रालय ने इन सभी प्रोजेक्ट्स के लिए लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस जारी कर दिए हैं. अच्छी सड़क होने से टूरिज्म और लोकल बिजनेस में भी ग्रोथ देखने को मिलेगी. वहां रहने वाले लोगों का पलायन रुकेगा जो सुरक्षा के नजरिए से बहुत जरूरी है.

About the Author

दीपक वर्माDeputy News Editor

दीपक वर्मा की गिनती डिजिटल मीडिया के सबसे तेज और उभरते हुए चेहरों में होती है. वह न्यूज18 हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज एडिटर के तौर पर जुड़े हैं. दीपक ने अपने करियर में कई बड़े मुकाम हासिल किए हैं…

और पढ़ें





Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top